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Saturday, 15 April 2017

*रजब की बहारे* #16
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_नफ्ली रोज़े के अज़ीमुश्शान फ़ज़ाइल_* #03
     मीठे और प्यारे इस्लामी भाइयो ! पिछली 2 पोस्टो में आपने देखा कि रजबुल मुरज्जब के रोज़े रखने वालो के तो वारे ही न्यारे है. रजबुल मुरज्जब के रोज़े रखने वालो के लिये अल्लाह ने जन्नत में खास महल तैयार फरमाया है, उन खुश नसीबो की अल्लाह 'रजब' नामी नहर से सैराब फरमाएगा, उन के लिए जहन्नम के दरवाज़े बंद और जन्नती दरवाज़े खोल दिये जाएंगे, उन के रोज़े गुनाहो का कफ़्फ़ारा बन जाएंगे और रोज़े महशर की न क़ाबिले बर्दाश्त गर्मी और भूक प्यास में उन के खाने पिने और आराम करने का बंदोबस्त किया जाएगा.

     नफ्ली रोज़ो के इस क़दर ज़बरदस्त व वरकात मुन्ने के बाद तो हम में से हर एक को चाहिये की फ़र्ज़ रोज़ो के साथ साथ नफ्ली रोज़ो का भी ब कसरत एहतिमाम किया करे, माहे रजबुल मुरज्जब के आने से तो वैसे ही रोज़े रखने का गोया मौसम शुरू हो जाता है. पहले रजबुल मुरज्जब के रोज़र फिर इस के बाद माह शाबान के रोज़े. हमारे प्यारे आक़ा शाबान के ब कसरत रोज़े रखा करते थे.
*रजब की बहारे, स. 14*
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मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*वुज़ू के मकरुहात*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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● वुज़ू के लिए नापक जगह बेठना।
● नापाक जगह वुज़ू का पानी गिराना।
● आ'जाए वुज़ू से लौटे वग़ैरा में कतरे टपकना। (मुह धोते वक़्त भरे हुए चुल्लू में उमुमन चेहरे से पानी के कतरे गिरते है इसका ख्याल रखिये)
● किब्ले की तरफ थूक या बलगम डालना या कुल्ली करना।
● बे ज़रूरत दुन्या की बीते करना।
● ज्यादा पानी खर्च करना।
● इतना कम पानी खर्च करना की सुन्नत अदा न हो।
● मुह पर पानी मारना।
● मुह पर पानी डालते वक़्त फुकना।
● एक हाथ से मुह धोना, के रिफ़ाज़ व हुनुद का शीआर है।
● गले का मसह करना।
● उल्टे हाथ से कुल्ली करना या नाक में पानी चढ़ाना।
● सीधे हाथ से नाक साफ करना।
● तिन जदीद पानियों से तिन बार सर का मसह करना।
● धूप के गर्म पानी से वुज़ू करना।
● होठ या आँखे ज़ोर से बंद करना और अगर कुछ सुखा रह गया तो वुज़ू ही न होगा।

★ वुज़ु का हर सुन्नत का तर्क मकरूह है इसी तरह हर मकरूह का तर्क सुन्नत।
*✍🏽बहारे शरीअत, 1/300-301*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 16-17*
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*मुसाफहा और मुआनक़ा की सुन्नते और आदाब* #01
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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     जब दो इस्लामी भाई आपस में मिले तो पहले सलाम करे और फिर दोंनो हाथ मिलाए की ब वक़्ते मुलाक़ात मुसाफहा करना सुन्नते सहाबा बल्कि सुन्नते रसूल है.
*✍🏽मिरआतुल मनाजिह्, 6/355*

     हज़रते अबुल खत्ताब رضي الله تعالي عنه ने फ़रमाया की में ने हज़रते अनस رضي الله تعالي عنه से अर्ज़ किया, की मुसाफहा हुज़ूर ﷺ के सहाबा में मुरव्वज था ? आप ने फ़रमाया हा.
*✍🏽सहीह बुखारी, 4/177, हदिष : 6263*
*✍🏽सुन्नते और आदाब, 22*
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Friday, 14 April 2017

*रजब की बहारे* #15
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_नफ्ली रोज़ो के अज़ीमुश्शान फ़ज़ाइल_* #02
     हुज़ूर ﷺ ने इरशाद फ़रमाया : जिस ने रजब का एक रोज़ रखा तो वो एक साल के रोज़ो की तरह होगा, जिस ने सात रोज़े रखे, उस पर जहन्नम के सातो दरवाज़े बंद कर दिए जाएंगे, जिस ने आठ रोज़े रखे उस के लिए जन्नत के आठो दरवाज़े खोल दिए जाचेंगे, जिसने दस रोज़े रखे, वो अल्लाह से जो कुछ मांगेगा अल्लाह उसे अता फमैग और जिसने 15 रोज़े रखे तो आसमान से एक मुनादी निदा करता है की तेरे पिछले गुनाह बख्श दिए गए, पास तू अज़ सरे नौ अमल शुरू कर की तेरी बुराइया नेकियों से बदल दी गई और जो जाएद करे तो अल्लाह उसे और ज्यादा अज्र देगा.
*✍🏽शोएबुल ईमान, जी.3 स.368 हदिष:3801*

     हज़रते अनस رضي الله تعالي عنه से मरवी है : क़यामत के दिन रोज़े दार क़ब्रो से निकालेंगे तो वो रोज़े की बू से पहचाने जाएंगे, उन के लिए दस्तर ख्वान और पानी के कुंजे रखे जाएंगे, जिन पर मुश्क से मोहर होगी, उन्हें कहा जाएगा की खाओ कल तुम भूके थे, पियो कल तुम प्यासे थे, आराम करो कल तुम थके हुवे थे, पस वो खाएंगे, पियेंगे और आराम करेंगे हालांकि लोग हिसब की मशक़्क़त और प्यास में मुब्तला होंगे.
*✍🏽कन्जुल आमाल, जी.8 स.313 हदिष:23639*
*✍🏽रजब की बहारे, स. 13*
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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*वुज़ू के चार फराइज़*
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★चेहरा धोना
★कहोनियो समेत दोनों हाथ धोना
★चौथाई सर का मसह करना
★तखनो समेत दोनों पाउ धोना
*✍🏽बहारे शरीअत, 1/288*
*✍🏽आ'लमगिरि, 1/3-5*

*_उज़व् धोनी की तारीफ़_*
     किसी उज़्व धोने के ये माना है की उस उज़्व के हर हिस्से पर कम अज़ कम दो कतरे पानी बाह जाए।
     सिर्फ भीग जाने या पानी को तेल की तरह चुपड़ लेने या एक कतरा बह जाने को धोना नहीं कहेंगे, न इस तरह वुज़ू या गुस्ल अदा होगा
*✍🏽फतावा राज़वीय्या मुखर्रजा, 1/218*
*✍🏽बहारे शरीअत, 1/288*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 13*
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*सलाम की सुन्नते और आदाब* #04
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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     घर में दाखिल हो तो घर वालो को सलाम किया करे इस से घर में बरकत होती है, और अगर खेली घर में दाखिल हो तो السلام عليكم ايهاا النبي कहे यानि "ऐ नबी आप पर सलाम हो".
     हज़रते मुल्ला अली क़ारी رحمة الله تعالى عليه फरमाते हे : हर मोमिन के घर में सरकार ﷺ की रूह मुबारक तशरीफ़ फरमा रहती है.
     हज़रते अनस رضي الله تعالي عنه से रिवायत है की रसूलल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : ऐ बेटे ! जब तुम अपने घर में दाखिल हो तो सलाम कहो, ये तुम्हारे लिये और तुम्हारे घर वालो के लिये बरकत का बाइस होगा.
*✍🏽तिर्मिज़ी, 4/320, हदिष : 2707*

     घर में दाखिल हो उस वक़्त भी सलाम करे और जब रुखसत होने लगे, उस वक़्त भी सलाम करे. हज़रते क़तादा رضي الله تعالي عنه से रिवायत है की नबी ﷺ ने फ़रमाया : जिस वक़्त तुम घर में दाखिल हो अपने घर के लोगो को सलाम कहो. जब अपने घर वालो से निकलो तो सलाम के साथ रुखसत हो.

     गैर मुस्लिम को सलाम न करे वो अगर सलाम करे तो उस का जवाब वाजिब नहीं, जवाब में फ़क़त  कह दे.
*✍🏽बहारे शरीअत, 16/90*
*✍🏽सुन्नते और आदाब, 15*
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Thursday, 13 April 2017

*रजब की बहारे* #14
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_नफ्ली रोज़ो के अज़ीमुश्शान फ़ज़ाइल_* #01
     हज़रते अबू क़ीलाबा رضي الله تعالي عنه फरमाते है : रजब के रोज़ादारो के लिए जन्नत में एक महल है.
*✍🏽शोएबुल ईमान, जी.3 स.368 हदिष : 3802*

     हज़रते अनस बिन मिलिक رضي الله تعالي عنه से रिवायत है कि रसूले अकरम ﷺ ने इरशाद फ़रमाया : जन्नत में एक नहर है जिसे "रजब" कहा जाता है जो दूध से ज्यादा सफेद और शहद से ज्यादा मीठी है तो जो कोई रजब का एक रोज़ रखे तो अल्लाह उसे उस नहर से सैराब करेगा.
*✍🏽शोएबुल ईमान, जी.3 स.367 हदिष : 3800*

     फरमाने मुस्तफा ﷺ है : रजब के पहले दिन का रोज़ा तिन साल का कफ़्फ़ारा है और दूसरे  दिन का रोज़ दो सालो का और तीसरे दिन का एक साल का कफ़्फ़ारा है, फिर हर दिन का रोज़ एक माह का कफ़्फ़ारा है.
*✍🏽अलजामी अलसगीर, स. 311 हदिष : 5051*
*✍🏽आक़ा का महीना, स. 13*
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*वुज़ु के बाद 3 बार सूरए क़द्र पढ़ने के फ़ज़ाइल*
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     हदिषे मुबारक में है, जो वुज़ु के बाद एक मर्तबा सूरतुल कद्र पढ़े तो वो सिद्दीकीन में से है, जो दो मर्तबा पढ़े तो शु-हदा में शुमार किया जाए, जो तिन मर्तबा पढ़ेगा तो अल्लाह  मैदाने महशर में उसे अपने अम्बिया के साथ रखेगा।

*_वुज़ु के बाद पढ़ने की दुआ_*
   (अव्वल आखिर दुरुद शरीफ)
तर्जुमा : तू पाक है और तेरे लीये ही तमाम खुबिया है में गवाही देता हु के तेरे सिवा कोई माअबूद नहीं, मैं तुज से बख्शीश चाहता हु और तेरी बारगाह में तौबा करता हु।

     जो वुज़ु करने के बाद ये दुआ पढ़े तो उस पर मोहर लगा कर अर्श के निचे रख दिया जाएगा और कियामत के दिन उस पढ़ने वाले को दे दिया जाएगा।
*✍🏽शोएबुल ईमान, जी. 3, स. 21*

*_वुज़ु के बाद ये दुआ भी पढ़ लीजिये_*
तर्जुमा : ऐ अल्लाह मुझे कसरत से तौबा करने वालो में बना दे और मुझे पाकीज़ा रहने वालो में शामिल कर दे।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, स. 12*
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*सलाम की सुन्नते और आदाब* #03
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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    जब कोई किसी का सलाम लाए तो इस तरह जवाब दे عليك و عليه السلام यानी तुज पर भी और उस पर भी सलाम हो.

*_सलाम में पहल करने वाला अल्लाह का मुक़र्रब है_*
     हज़रते अबू उमामा सदी बिन इजलानुल बाहिलि رضي الله تعالي عنه से मरवी है, हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : लोगो में अल्लाह से ज़्यादा करीब वो शख्स है जो उन्हें पहले सलाम करे.
*✍🏽सुनन इब्ने दाऊद, 4/449, हदिष : 5197*
      हज़रते अबू उमामा رضي الله تعالي عنه से मरवी है, अर्ज़ किया गया, या रसूलल्लाह ﷺ ! दो आदमी आपस में मिले तो कौन पहले सलाम करे ? फ़रमाया : जो उन में अल्लाह के ज़्यादा क़रीब हो.
*✍🏽तिर्मिज़ी, 4/318, हदिष : 2703*

*_पहले सलाम करने वाला तकब्बुर से बरी है_*
     हज़रते अब्दुल्लाह رضي الله تعالي عنه नबी ﷺ से रिवायत करते है, फ़रमाया : पहले सलाम करने वाला तकब्बुर से बरी है.
*✍🏽शोएबुल ईमान, 6/433, हदिष : 8786*
*✍🏽सुन्नते और आदाब, 15*
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Wednesday, 12 April 2017

*रजब की बहारे* #13
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*रजब के ख़ास दिन और राते* #03
     मीठे और प्यारे इस्लामी भइयो ! देखा आपने कि हम जेसे गुनाहगारो के लिए रजबुल मुरज्जब की 27वी तारीख अल्लाह का अता करदा कैसा अज़ीमुश्शान तोहफा है कि जो शख्स इखलास के साथ इस का रोज़ा रखे, उस के दस साल के गुनाह मुआफ़ हो जाते है निज जिस खुश नसीब को इस रात में नवाफ़िल पढने और इबादत करने की सआदत हासिल हो जाए, उसे 100 साल के रोज़ो के बराबर षवाब अता किया जाता है. अगर हम भी 27वी शब् इबादत में गुज़ारे और दिन का रोज़ा रखे तो अल्लाह की रहमत से क़वी उम्मीद है कि ये तमाम फ़ज़ाइल हमे भी हासिल हो सकते है.

     मीठे और प्यारे इस्लामी भाइयो ! सांसो का कोई भरोसा नही, न जाने कब ये सांसे रुक जाए और इस के साथ साथ हमारे आमाल का सिलसिला मौक़ूफ़ हो जाए. लिहाज़ा नेकियों का कोई मौक़ा हाथ से न जाने दे, अगर अल्लाह के फ़ज़लो करम से ज़िन्दगी में एक बार फिर रजब का मुबारक महीना नसीब हुवा तो हमे चाहिये कि इसे अपनी खुश किस्मती समझते हुवे सिर्फ पहली और सत्ताइसवी का रोज़ा रखने के बजाए जितना बन पड़े, इस माह के अक्सर अय्याम रोज़े के साथ गुज़ार दे, क्या खबर यही हमारी ज़िन्दगी का आखिरी रजब हो.
*✍🏽रजब की बहारे, स. 12-13*
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*जन्नत के आठो दरवाज़े खुल जाते है*
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     हदीषे पाक में है, जिसने अच्छी तरह वुज़ु किया और फिर आस्मान की तरफ निगाह उठाई और कलीमऐ शहादत पढ़ा उसके लिए जन्नत के आठो दरवाजे खोल दिए जाते है जिस से चाहे अंदर दाखिल हो।

*_नज़र कमज़ोर न होगी_*
     जो वुज़ु के बाद अस्मान् की तरफ देख कर सूरए इन्ना-अन्ज़लना पढ़ लीया करे उसकी नज़र कभी कमज़ोर न होगी।
*✍🏽मसाइलुल कुरआन, स. 291*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, स. 11*
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*सलाम की सुन्नते और आदाब* #02
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*_सलाम करना हज़रते आदम علىه السلام की भी सुन्नत_*
     हज़रते अबू हुरैरा رضي الله تعالي عنه से मरवी है की हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : जब अल्लाह ने हज़रते आदम علىه السلام को पैदा फ़रमाया तो उन्हें हुक्म दिया की जाओ और फरिश्तों की उस बेठी हुई जमाअत को सलाम करो। और गौर से सुनो ! की वो तुम्हे क्या जवाब देते है। क्यू की वो तुम्हारा और तुम्हारी औलाद का सलाम है। हज़रत आदम عليه السلام ने फरिश्तों से कहा السلام عليكم तो उन्होंने जवाब में दिया السلام عليكم و رحمه الله और उन्होंने و رحمه الله के अल्फ़ाज़ ज़ाइद कहे।
*✍🏽सहीह बुखारी, 4/164, हदिष : 6227*

*_सलाम करने से आपस में महब्बत पैदा होती है_*
     हज़रते अबू हुरैरा رضي الله تعالي عنه से मरवी है, की हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : तुम खाना खिलाओ मिस्कीनों को और सलाम कहो हर शख्स को ख्वाह तुम उस को जानते हो या नही.
*सहीह बुखारी, 4/167, हदिष : 2634*

     मीठे और प्यारे इस्लामी भाइयो ! जब तुम बहार निकलो, बाज़ार में जाओ, जहा जहा मुस्लमान इकठ्ठे हो, सलाम कर दिया करो. ये दो अल्फ़ाज़ ज़बान पर बहुत ही हल्के है मगर इन के फवाईदो समरात बहुत ही ज़्यादा है.

     बात चित शुरू करने से पहले ही सलाम करने की आदत बनानी चाहिये. नबीए करीम ﷺ ने फ़रमाया : सलाम बात चीत से पहले है.
*✍🏽सुन्नते और आदाब, 13*
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Tuesday, 11 April 2017

*रजब की बहारे* #12
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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*_रजब के ख़ास दिन और राते_* #02
     जिस तरह रजब की पहली शब निहायत अहम है, इसी तरह इस की 27वी तारीख भी बहुत फ़ज़ीलत वाली है, क्योंकि ये वो अज़ीम रात है, जिस में प्यारे आक़ा ﷺ की तरफ पहली वही भेजी गई और इसी रात में सरकार दो आलम ﷺ मेराज के लिए तशरीफ़ ले गए. यहि वजह है की 27वी शब् में इबादत करने और इस के दिन में रोज़ रखने वाले खुश नसीबो को ढेरो अज्रो षवाब अता किया जाता है.

    आइये इस जिम्न में 3 फरमाने मुस्तफा देखते है :
★27 रजब को मुझे नबुव्वत अता हुई जो इस दिन का रोज़ रखे और इफ्तार के वक़्त दुआ करे, 10 बरस के गुनाहो का कफ़्फ़ारा हो.
*✍🏽फतावा रजविय्या, जी. 10 स.648*

★27 रजबुल मुरज्जब में नेक अमल करने वाले को 100 बरस का षवाब मिलता है.
*✍🏽शोएबुल ईमान, जी. 3 स. 374 हदिष : 3812*

★रजब में एक दिन और एक रात है, जो उस दिन का रोज़ रखे और वो रात नवाफ़िल में गुज़ारे, ये 100 बरस के रोज़ो के बराबर हो. और वो 27वी रजब है. इसी तारीख को अल्लाह ने मुहम्मद ﷺ को मबऊस फरमाया.
*✍🏽शोएबुल ईमान, जी. 3 स. 373 हदिष : 3811*
*✍🏽रजब की बहरे, स. 12*
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गर होजाए यक़ीन के.....
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*वुज़ू का तरीका* #04
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*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     अब पहले सीधा फिर उल्टा पाउ हर बार उंगलियो से शुरू करके तखनो के ऊपर तक, बल्कि मुस्तहब है की आधी पिंडली तक 3 3 बार धो लीजिये।

     दोनों पाउ की उंगलियो का ख़िलाल करना सुन्नत है। इसका मुस्तहब तरीका ये है की उलटे हाथ की छोटी ऊँगली से सीधे पाउ की छोटी ऊँगली का ख़िलाल शुरू कर के अंगूठे पर खत्म कीजिये, और उलटे ही हाथ की ऊँगली से उलटे पाउ के अंगूठे से शुरू करके छोटी ऊँगली पर खत्म कर लीजिये।

     हज़रते इमाम मुहम्मद बिन मुहम्मद ग़ज़ालि अलैरहमा फरमाते है : हर उज़्व के गुनाह निकल रहे है !
*✍🏽अहयाउल उलूम 1/183*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 10*
*___________________________________*
मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*सलाम करने की सुन्नते और आदाब* #01
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     सलाम करना हमारे प्यारे आक़ा ﷺ की बहुत ही प्यारी सुन्नत है। बाद किस्मती से आज कल ये सुन्नत भी खत्म होती नज़र आ रही है। इस्लामी भाई जब आपस में मिलते है तो السلام عليكم से इब्तिदा करने के बजाए "आदाब अर्ज़" "क्या हाल है ?" वगैरा वगैरा अजीबो गरीब कलीमात से इब्तिदा करते है, ये खिलाफ सुन्नत है। रुखसत होते वक़्त भी "खुदा हाफ़िज़" "गुड़ बाय" "टाटा" वगैरा कहने के बजाए सलाम करना चाहिये। हा रुखसत होते हुए السلام عليكم  के बाद अगर खुदा हाफ़िज़ कह दे तो हरज नही। सलाम की चंद सुन्नते और आदाब मुलाहजा हो :

     ★ सलाम के बेहतरीन अलफ़ाज़ ये है *السلام عليكم و رحمه الله و بركاته*  यानी तुम पर सलामती हो और अल्लाह की तरफ से रहमते और बरकतें नाज़िल हो।
*✍🏽फतावा रज़विय्या, 2/409*

     ★ सलाम करने वाले को उस से बेहतर जवाब देना चाहिये। अल्लाह इरशाद फ़रमाता है : और जब तुम्हे कोई किसी लफ्ज़ से सलाम करे तो तुम उस से बेहतर लफ्ज़ जवाब में कहो या वही कह दो। (पा. 5)

     ★ सलाम के जवाब के बेहतरीन अलफ़ाज़ ये है : *وعليكم السلام والرحمة الله و بركاته* यानी और तुम पर भी सलामती हो और अल्लाह की तरफ से रहमते और बरकतें नाज़िल हो।
*✍🏽फतावा रज़विय्या, 2/409*
*✍🏽सुन्नते और आदाब, 10*
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मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
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Monday, 10 April 2017

*रजब की बहारे* #11
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_रजब के ख़ास दिन और राते_* #01
     अमीरुल मुआमिनीन हज़रते अलिय्युल मुर्तज़ा करम-अल्लाहु-तआला-वजहुल-करीम इस माह की पहली शब् को ख़ास एहतिमाम के साथ इबादत किया करते थे। मनकुल है की आप का दस्तूर था कि आप साल की 4 राते हर काम से खली करके इबादत के लिये मख़्सूस फरमाया करते थे।
माहे रजब की पहली रात, ईदुल फ़ित्र की रात, ईदुल अज़हा की रात और शाबान की 15वी रात।

     हज़रते खालिद बिन मादान रहमतुल्लाह अलैह फरमाते है : साल में 5 राते ऐसी है जो इन की तस्दीक़ करते हुवे ब निय्यते षवाब इन को इबादत में गुज़ारेगा तो अल्लाह उसे दाखिले जन्नत फरमाएगा इनमे एक रात रजब की पहली रात भी है।
*✍🏽गुन्यातूल तालिबिन स.236*
*✍🏽रजब की बहारे, स.11-12*
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*वुज़ू का तरीका* #03
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     फिर पहले सीधा हाथ उंगलियो के सिरे से धोना शुरू करके कहोनियो समेत 3 बार धोइये। इसी तरह उल्टा हाथ भी धो लीजिये। दोनों हाथ आधे बाज़ू तक धोना मुस्तहब है।

     अब चुल्लू भर कर कोहली तक पानी बहाने की हाजत नहीं, बल्कि बगैर इजाज़ते सहीहा ऐसा करना ये पानी का इसराफ है।

     अब नल बंद करके सर का मसह इस तरह कीजिये की, दोनों अंगूठो और कलिमे की उंगलियो को छोड़ कर दोनों हाथ की 3-3 उंगलियो के सिरे एक दूसरे से मिला लीजिये, और पेशानी के बाल या खाल पर रख कर खीचते हुए गुद्दी तक इस तरह ले जाइये की हथेलिया सर से जुदा रहे, फिर गुद्दी से हथेलिया खीचते हुए पेशानी तक ले आइये, कलिमे की उंगलिया और अंगूठे इस दौरान सर पर बिलकुल मस् नहीं होने चाहिए,

     फिर कलिमे की उंगलियो से कानो की अंदरूनी सतह का मसह कीजिये और छुगलिया कानो के सूराखो में दाखिल कीजिये

     और उंगलियो की पुश्त से गर्दन के पिछले हिस्से का मसह कीजिये।
     बाज़ लोग गले का और धुले हुए हाथो का मसह करते है ये सुन्नत नहीं है।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 10*
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*फैज़ाने इसाले षवाब* #10
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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*_ईसाले षवाब के मदनी फूल_* #04
★ दास्ताने अजीब, शहज़ादे का सर, 10 बीवियों की कहानी और जनाबे स्य्यिदह की खानी वगैरा सब मनगड़त किस्से है, इन्हें हरगिज़ न पढ़ा करे। इसी तरह एक पेम्फ्लेट बनाम "वसिय्यत नामा" लोग तकसीम करते है जिस में किसी "शैख़ अहमद" का ख्वाब दर्ज है ये भी जाली है इस के निचे मख़्सूस तादाद में छपवा कर बाटने की फ़ज़ीलत और तक़सीम न करने के नुकसान वगैरा लिखे है इन का भी ऐतिबार न करे।

★ जितनो को भी ईसाले षवाब करे अल्लाह की रहमत से उम्मीद है की सब को पूरा मिलेगा। ये नही की षवाब तक़सीम हो कर टुकड़े टुकड़े मिले।

★ ईसाले षवाब करने वाले के षवाब में कोई कमी नही होती बल्कि ये उम्मीद है की इसने जितनो को इसाले षवाब किया उन सब के मजमुआ के बराबर इस को षवाब मिले। मसलन : कोई नेक काम किया जिस पर इस को 10 नेकी मिली अब इस ने 10 मुर्दो को ईसाले षवाब किया तो हर एक को 10-10 नेकीया पहोची जब की ईसाले षवाब करने वाले को 110 और अगर 1000 को ईसाले षवाब किया तो इस को दस हज़ार दस नेकिया मिली।

★ ईसाले षवाब सिर्फ मुसलमान को कर सकते है। काफ़िर या मुर्तद को ईसाले षवाब करना या इस को मर्हुम कहना कुफ़्र है।
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 406*
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Sunday, 9 April 2017

*रजब की बहारे* #10
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_आओ गुनाहगारो ! मगफिरत मांग लो_*
     हज़रते अबू सईद رضي الله تعالي عنه बयान करते है कि रसूलल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया : शैतान ने अल्लाह की बारगाह में कहा : ऐ मेरे रब ! मुझे तेरी इज्ज़तों जलाल की क़सम !  जब तक बन्दों के जिस्मो में रूह बाक़ी है, में उन्हें बहकाता तहुंग.
     अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमाया : मुझे अपनी इज्ज़तों जलाल की क़सम ! जब तक वो मुझसे मगफिरत मांगते रहेंगे में उन को मगफिरत करता रहूंगा.

     याद रखिये ! इस्तिग़फ़ार जहा गुनाहो से आलूदा दिल का मेल साफ़ करने का सबब है, वही एक बेहतरीन दुआ भी है और आसानी से नेकिया कमाने का ज़रीआ भी.
हदीश पाक में है की जो शख्स मुसलमान मर्दों और औरतो के लिए इस्तिग़फ़ार (मगफिरत की दुआ) करता है अल्लाह उसे हर मोमिन मर्द व औरत के बदले में एक नेकी अता फरमाता है. लिहाज़ा हमे चाहिये कि जब भी अपने लिये मगफिरत कि दुआ करे तो अपने इस्लामी भाइयो और इस्लामी बहनो को भी इस में ज़रूर शामिल करे.

     हज़रते अब्दुल्लाह बिन अब्बास رضي الله تعالي عنه से रिवायत है की हुज़ूर ﷺ का फरमान है : जिसने इस्तिग़फ़ार को अपने ऊपर लाज़िम कर लिया अल्लाह उस की हर परेशानी दूर फरमाएगा और हर तंगी से उसे राहत अता फरमाएगा और उसे ऐसी जगह से रिज़्क़ अता फरमाएगा जहा से उसे गुमान भी न होगा.
*✍🏽रजब की बहरे, स. 10-11*
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*वुज़ू का तरीका* #02
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     अब सीधे हाथ के 3 चुल्लू पानी से इस तरह 3 कुल्लिया कीजिये की हर बार मुह के हर पुर्ज़े पर (हल्क के कनारे तक) पानी बह जाए, अगर रोज़ा न हो तो गर-गरा भी कर लीजिये।

     फिर सीधे ही हाथ के 3 चुल्लू से 3 बार नाक में नर्म गोश्त तक पानी चढ़ाइये और अगर रोज़ा न हो तो नाक की जड़ तक पानी पहोचाइये,

     अब उल्टे हाथ से नाक साफ़ कर लीजिये और छोटी ऊँगली नाक के सुरखो में डालिये।

     अब 3 बार सारा चेहरा इस तरह धोइये के जहा से आदतन सर के बाल उगना शुरुअ होते है वहा से ले कर ठोड़ी के निचे तक और एक कान की लौ से दूसरे कान की लौ तक हर जगह पानी बाह जाए।

     अगर दाढ़ी है तो इस तरह ख़िलाल कीजिये के उंगलियो को गले की तरफ से दाखिल करके सामने की तरफ निकालिये।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 8*
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*1 चुप 100 सुख*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

_*खामोशी में नजात है*_
     हज़रते अब्दुल्लाह बिन अम्र رضي الله تعالي عنه बयान करते है की हुज़ूर ﷺ ने इरशाद फ़रमाया : _"जो चुप रहा उस ने नजात पाई"_
*तिर्मिज़ी, 4/225, हदिष:2509*

_*सलामती चाहने वाला खामोश रहे*_
     हज़रते अनस बिन मालिक رضي الله تعالي عنه बयान करते है की हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : _"जो सलामत रहना चाहता है उस पर ख़ामोशी लाज़िम है"_
*✍🏽एक चुप 100 सुख, 1*
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Saturday, 8 April 2017

*रजब की बहारे* #09
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_तौबा की राह में रुकावट_*
     कल की पोस्ट में शैतान के चेलो का ये कहना इंतिहाई क़ाबिले तशविश् है कि हम उन पर ख्वाहिशात के दरवाज़े खोल देंगे कि वो तौबा व इस्तग़फ़ार न कर पाएंगे और वो इसी ख़याल में होंगे कि वो हक़ पर है।

     गोया शयातीन की ये बात हमारे लिये एक चेलेंज की हेसिय्यत रखती है, लिहाज़ा हमें चेलेंज को क़ुबूल करते हुवे मैदाने अमल में उतर जाना चाहिये और खुद से ये अहद करना चाहिए कि हम हर बुरे काम से न सिर्फ खुद बचते रहेंगे बल्कि दुसरो को भी नेकी का हुक्म देते और बुराई से मना करते रहेंगे नीज़ अगर ब तक़ाज़ाए बशरिययत हम से कोई गुनाह सरज़द हो जाए तो इज़्ज़ो नदामत (आजिज़ी व शर्मिंदगी) के साथ फौरन अपने रब से मुआफ़ी मागेंगे।
*✍🏽रजब की बहारे, सफा 10*
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*वुज़ू का तरीका* #01
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

★ काबतुल्लाह शरीफ की तरफ मुह करके उची जगह बैठना मुस्तहब है।

★ वुज़ू के लिये निय्यत करना सुन्नत है, निय्यत न हो तब भी वुज़ू हो जाएगा मगर षवाब न मिलेगा।

★ निय्यत दिल के इरादे को कहते है। दिल में निय्यत होते हुए ज़बान से भी कहलेना अफ़्ज़ल है लिहाज़ा ज़बान से इस तरह निय्यत कीजिये की
● में हुक्मे इलाही बजा लाने और पाकी हासिल करने के लिये वुज़ू कर रहा/रही हु।

★ बिस्मिल्लाह कह लीजिये की ये भी सुन्नत है।
√ बल्कि बिस्मिल्लाहि-वलहम्दु-लिल्लाह" कह लीजिये की जब तक बा वुज़ू रहेंगे फ़रिश्ते नेकियां लिखते रहेंगे।

★ अब दोनों हाथ 3-3 बार पहोचो तक धोइये,
★ दोनों हाथो की उंगलियो का ख़िलाल भी कीजये।
★ कम अज़ कम 3 बार मिस्वाक कीजिये और हर बार मिस्वाक को धो लीजिये।

     हज़रत मुहम्मद ग़ज़ालि अलैरहमा फरमाते है : मिस्वाक करते वक़्त नमाज़ में क़ुरआने मजीद की किरआत और ज़िकृल्लाह के लिये मुह पाक करने की निय्यत करनी चाहिये।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 8*
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Friday, 7 April 2017

*रजब की बहारे* #08
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     नबिय्ये करीम ﷺ ने फ़रमाया : ऐ लोगो ! अल्लाह से तौबा करो और उस से बख्शीश चाहो बेशक में रोज़ाना 100 मर्तबा अल्लाह के हुज़ूर तौबा करता हु।

     हज़रत मुफ़्ती अहमद यार खान अलैरहमा फरमाते है : तौबा व इस्तिग़फ़ार भी नमाज़, रोज़े की तरह इबादत है. इस लिये हुज़ूरे अन्वर ﷺ ब कसरत तौबा व इसतिगफार किया करते थे. वरना हुज़ूरे अनवर ﷺ मासूम है, गुनाह आप के क़रीब भी नही आता,
     सूफिया फरमाते है की हम लोग गुनाह करके तौबा करते है और वो हज़रात इबादत करके तौबा करते है.

     इस्तिग़फ़ार करने के बे शुमार फ़ज़ाएलो वरकात है. याद् रखिये ! इस्तिग़फ़ार का मतलब है  "मगफिरत तलब करना, गुनाहो की मुआफ़ी मांगना, बख्शीश चाहना" अल्लाह कुरआन में इस्तिग़फ़ार के बारे में इरशाद फ़रमाता है : और वो की जब कोई बे हयाई या अपनी जीनो पर ज़ुल्म करे अल्लाह को याद कर के अपने गुनाहो की मुआफ़ी चाहे और गुनाह कौन बख्शे सिवा अल्लाह के.
📗पारह 4

     तफ़सीरे दुर्रे मन्सूर में है कि जब ये आयते मुबारक नाज़िल हुई तो इब्लीस ने चीख चीख कर अपने लश्कर को पुकारा, अपने सर पर खाक डाली और खूब आहो ज़ारी की, हत्ता कि तमाम कायनात से उस के चेले जमा हो गए और बोले : ऐ हमारे सरदार तुजे क्या हो गया ?
     इब्लीस ने उन्हें इस आयत की खबर दी तो उस के चलो ने कहा : हम उन पर ख्वाहिशात के दरवाज़े खोल देंगे कि वो तौबा व इस्तिग़फ़ार न कर पाएगे और वो इसी ख़याल में होंगे कि हम हक़ पर है ये सुन कर शैतान खुश हो गया.
*✍🏽रजब की बहरे, सफा 9,10*
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*दुगना षवाब*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     यकीनन सर्दी, थकान या नज़ला, ज़ुकाम, दर्दे सर और बिमारी में वुज़ु करना दुष्वार होता है।
     मगर फिर भी कोई ऐसे वक़्त वुज़ु करे जब के वुज़ु करना दुष्वार हो तो उसको बी हुक्मे हदिष दुगना षवाब मिलेगा।

*_सर्दी में वुज़ु करने की हिकायत_*
     हज़रते उष्माने गनी رضي الله تعالي عنه ने अपने गुलाम हुमरान् से वुज़ु के लिए पानी मांगा और सरदी की रात में बहार जाना चाहते थे।
     हुमरान् कहते है : में पानी लाया, उन्होंने मुह हाथ धोये तो मेने कहा अल्लाह पाक आप को किफायत करे रात तो बहुत ठंडी है।
     इस पर आप ने फ़रमाया मेने रसूलुल्लाह ﷺ से सुना है की "जो बंदा वुजुए कामिल करता है अल्लाह उसके अगले पिछले गुनाह बख्श देता है"
*✍🏽बहारे शरीअत, जी. 1, स. 285*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, स. 7*
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*फैज़ाने इसाले षवाब* #08
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*_ईसाले षवाब के मदनी फूल_* #02
★ एक दिन के बच्चे को भी ईसाले षवाब कर सकते है, उस का तीजा, वगैरा भी करने में हरज नही।

★ जो ज़िन्दा है उन को भी बल्कि जो मुसलमान अभी पैदा नही हुए उन को भी पेशगी (एडवान्स में) ईसाले षवाब किया जा सकता है।

★ मुसलमान जिन्नात को भी ईसाले षवाब कर सकते है।

★ 11वी, रजब (22 रजबुल मुरज्जब को इमाम जाफर सादिक़ के कुंडे करना) वगैरा जाइज़ है। कुंडे ही में खीर खिलाना ज़रूरी नही दूसरे बर्तन में भी खिला सकते है। इस को घर से बाहर भी ले जा सकते है।

★ बुज़ुर्गो की फातिहा के खाने को ताज़िमन "नज़रो नियाज़" कहते है और ये नियाज़ तबर्रुक है इसे अमीर व गरीब सब खा सकते है।

★ ईसाले षवाब के खाने में मेहमान की शिरकत शर्त नही घर के अफ़राद अगर खुद ही खा ले जब भी कोई हरज नही।
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 404*
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Thursday, 6 April 2017

*रजब की बहारे* #07
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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*_अहादिसे मुबारका और रजब के फ़ज़ाइल_*
     मीठे और प्यारे इस्लिमी भाइयो ! प्यारे आक़ा ﷺ ने एक बार साहबए किराम से इरशाद फ़रमाया : तुम पर लाज़िम है कि माहे रजब की राते क़याम में गुज़रो और इस के दिन रोज़े की हालत में गुज़रो। और जो शख्स इस महीने के किसी दिन में 50 रकअत नमाज़ पढ़े, इस तर कि हर रकअत में ब क़दर इस्तिताअत क़ुरआने पाक की तिलावत करे, तो अल्लाह عزوجل उस शख्स को उस के बालो और रुओ की तादाद के बराबर नेकिया आता फरमाएगा।
     एक बार प्यारे आक़ा ﷺ ने रजब के महीने में जुमुआ का ख़ुत्बा देते हुवे इरशाद फ़रमाया : ऐ लोगो ! बेशक तुम पर एक अज़ीम महीना साया फ़िगन है, इस महीने में नेकियों का अज्र दुगना दिया जाता है, इस में दुआए क़बूल होती है, इस में मुश्किलात हल होती है, और इस महीने में मोमिन की दुआ रद्द नही होती, पस जो शख्स इस महीने में कोई भलाई का काम करे तो उस को कई गुना अज्र दिया जाता है।
*✍🏽रजब की बहरे, सफा 8*
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मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*हर वक़्त बा वुज़ु रहने के 7 फ़ज़ाइल*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     अहमद राजा खान फरमाते है : बाज़ आरिफिन ने फ़रमाया : जो हमेशा बा वुज़ु रहे अल्लाह उसे को 7 फ़ज़ीलत से मुशर्रफ फरमाएगा

① मलाइका उसकी सोहबत में रगबत करे

② कलम उस की निकिया लिखता रहे

③ उस के आज़ा तस्बीह करे

④ उस से तकबिरे उला फौत न हो

⑤ जब सोये अल्लाह कुछ फ़रिश्ते भेज के जिन्नों ईन्स के शर से उसकी हिफाज़त करे

⑥ सकराते मौत उस पर आसान हो

⑦ जब तक वुज़ु हो अमाने इलाही में रहे
*✍🏽फतावा रज़विय्या मुखर्रज, जी. 1, स. 702*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, स. 6-7*
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मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
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*फैज़ाने इसाले षवाब* #07
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*ईसाले षवाब के मदनी फूल* #01
★ फ़र्ज़, वाजिब, सुन्नत, नफ्ल, नमाज़, रोज़ा, ज़कात, हज, बयान, दर्स, मदनी काफिले में सफर, नेकी की दावत, दिनी किताब का मुतालआ, मदनी कामो के लिये इन्फिरादि कोशिश वगैरा हर नेक काम का ईसाले षवाब कर सकते है।

★ मय्यत का तीजा, दसवा, चालीसवाँ, और बरसी करना अच्छा है की ये ईसाले षवाब के ही ज़राए है। शरीअत में तीजे वगैरा के नाजाइज़ होने की दलील न होना खुद दलीले जवाज़ है और मय्यत के लिये जिन्दो का दुआ करना क़ुरआन से साबित है जो की ईसाले षवाब की अस्ल है। चुनाचे...
    और वो जो उन के बाद आए अर्ज़ करते है, ऐ हमार रब हमे बख्श दे और हमारे भाइयो को जो हम से पहले ईमान लाए। (पा, 28, हस्र 10)

★ तीजे वगैरा का खाना सिर्फ उसी सूरत में मय्यत के छोड़े हुए माल से कर सकते है जब की सारे वुरसा बालिग़ हो और सब के सब इजाज़त भी दे अगर एक भी वारिस ना बालिग़ है तो सख्त हराम है। हा बालिग़ अपने हिस्से से कर सकता है।

★ मय्यत के घर वाले अगर तीजे का खाना पकाए तो (मालदार न खाए) सिर्फ फुकराअ को खिलाए।
*✍🏽बहारे शरीअत, जी.1, ही.4, स. 822*
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 403*
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मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Wednesday, 5 April 2017

*रजब की बहारे* #06
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_रजब अल्लाह का महीना है_*
     हज़रते अनस رضي الله تعالي عنه से मरवी है की हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : अल्लाह के पसंदीदा महीनो में रजब का महीना है, ये अल्लाह का महीना है। जिसने अल्लाह के महीने रजबुल मुरज्जब की ताज़ीम की , उसने अल्लाह के हुक्म की ताज़ीम की।
     और जिसने खुदा के हुक्म की ताज़ीम की अल्लाह उस को नेमतों वाले बागात में दाखिल करेगा और उस के लिये अपनी बड़ी रिज़ा वाजिब करेगा।
*✍🏽शोएबुल ईमान, 3/374 हदिष:3813*

     मीठे और प्यारे इस्लामी भाइयो ! यक़ीनन इस हदीशे पाक से माहे रजबुल मुरज्जब को जबरदस्त शानो अज़मत का पता चलता है और इस तरह कि यू तो तमाम ही महीने अल्लाह عزوجل के है और सब को उसी ने पैदा फरमाया है, लेकिन खुसुसिय्यत के साथ रजब के बारे में फ़रमाया गया कि रजबुल मुरज्जब अल्लाह عزوجل का महीना है।
     नीज़ हदीशे पाक में ये भी बयान किया गया है कि जिस ने इस महीने की ताज़ीम की, अल्लाह عزوجل उसे नेमतों वाले बागात अता फ़रमाएगा और उस से राज़ी हो जाएगा।
     यक़ीनन हम में से हर एक की ख्वाहिश है कि अल्लाह عزوجل हम से राज़ी रहे और हर कोई ये चाहता है कि वो अज़ाबे जहन्नम से नजात पा कर जन्नत में चला जाए।
तो इस ख्वाहिश की तकमील के अस्बाब में से एक सबब माहे रजब की ताज़ीम करना भी है। हमे चाहिये कि इस महीने की ताज़ीम करे, इस तरह कि इसे इबादत व रियाज़त में गुज़ारे और इस में अपने आप को गुनाहो से बचाए और नेकियों की खूब कसरत कर के इस महीने में इबादत के बिज बोन की कोशिश करे।
     मगर अफ़सोस ! लोगो की एक क़ासिर तादाद ईएसआई भी है जिसे इस माहे मुक़द्दस की अज़मत की कोई परवा नहीं होती। इस मुबारक महीने में इबादत व रियाज़त करना तो दर किनार, उन्हें तो ये भी मालुम नहीं होता कि ये माहे मुबारक कब आया और कब गया, उन्हें अंदाजा ही नहीं कि ये भी कोई क़ाबिले एहतिराम महीना है, यही वजह है की वो लोग अपनी ज़िन्दगी के दीगर अय्याम की तरह इस मुबारक महीने को भी गफलत और सुस्ती में गुज़ार देते है और शायद इस की एक अहम वजह ये भी है कि उमुमन लोगो का ऐसा अच्छा माहोल मयस्सर ही नहीं होता कि जहा गुनाहो से बचने के साथ नेकिया करने और इन मुबारक महीनो के इस्तिक़बाल और इन की ताज़ीम करने का जेहन दिया जाता है।
*✍🏽रजब की बहारे, सफा 6-7*
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*बा वुज़ु सोने की फ़ज़ीलत*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     हदिषे पाक में है : बा वुज़ु सोने वाला रोज़ा रख कर इबादत करने वाले की तरह है।

*_बा वुज़ु मरने वाला शहीद है_*
     मदीने के ताजदार ﷺ ने हज़रत अनस رضي الله تعالي عنه से फ़रमाया : बेटा ! अगर तुम हमेशा बा वुज़ु रहने की इस्तिताअत रखते हो तो ऐसा ही करो, क्यू की मलकुल मौत जिस बन्दे की रूह हालते वुज़ु में कब्ज़ करता है उसे के लिए शहादत लिख दी जाती है।
*✍🏽शोएबुल ईमान, 3/29, हदिष 2783*

     मेरे आक़ा आ'ला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खा अलैरहमा फरमाते है : हमेशा बा वुज़ू रहना मुस्तहब है।

*_मुसीबतो से हिफाज़त का नुस्खा_*
     अल्लाह ने हज़रते मूसा कलीमुल्लाह से फ़रमाया : ऐ मूसा ! अगर बे वुज़ु होने की सूरत में कोई मुसीबत पहोंचे तो खुद अपने आप को मलामत करना।
*✍🏽शोएबुल ईमान, 3/29*

★ हमेशा वुज़ु रहना इस्लाम की सुन्नत है।
*✍🏽फताव रज़विय्या मुखर्रज, 1/702*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 6*
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*फैज़ाने इसाले षवाब* #06
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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*_मुर्दे की तादाद के बराबर अज्र_*
     जो कब्रस्तान में 11 बार सूरए इखलास पढ़ कर मुर्दो को उस का ईसाले षवाब करे तो मुर्दो की तादाद के बराबर ईसाले षवाब करने वाले को इस का अज्र मिलेगा।
*✍🏽كٙشفُ الْجِفٙاء، ج٢ ص٢٥٢، حديث ٢٦٢٩*

*_अहले कूबर सिफारिश करेंगे_*
     शफीए उमम ﷺ का फरमाने शफ़ाअत निशान है, जो क़ब्रस्तान से गुज़रा और उस ने सूरए फातिहा, सूरतुल इखलास और सुरतुत्तकासुर पढ़ी।फिर ये दुआ मांगी, या अल्लाह ! में ने जो कुछ क़ुरआन पढ़ा उस का षवाब मोमिन मर्द व औरत दोनों को पहुचा। तो वो क़ब्र वाले क़यामत के रोज़ इस (ईसाले षवाब करने वाले) के सिफारिशी होंगे।
*✍🏽शरहु स्सुदुर, 311*

*_सूरए इख्लास का षवाब_*
     हज़रते हम्माद मक्की रहमतुल्लाह अलैह फरमाते है, में एक रात मक्का के क़ब्रस्तान में सो गया। क्या देखता हु की क़ब्र वाले हल्क़ा दर हल्क़ा खड़े है मेने उनसे इस्तिफसार किया, क्या क़यामत क़ायम हो गई ? उन्हों ने कहा, नही बात दर अस्ल ये है कि एक मुसलमान भाई ने सूरतुल इख्लास पढ़ कर हम को ईसाले षवाब किया तो वो षवाब हम एक साल से तक़सीम कर रहे है।
*✍🏽शरहु स्सुदुर, 312*
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 401*
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Tuesday, 4 April 2017

*वुज़ू का षवाब नहीं मिलेगा*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     आ'माल का दारो मदार निय्यत पर है, अगर किसी अ'मल में अच्छी निय्यत न हो तो उसका षवाब नहीं मिलता। यही हाल वुज़ू का भी है, वुज़ू पर षवाब पाने की लिये हुक्मे इलाही बजा लाने की निय्यत से वुज़ू करना ज़रूरी है वरना वुज़ू हो जाएगा षवाब न पाएगा।
*✍🏽बहारे शरीअत, 1/292*

     आ'ला हज़रत रहमतुल्लाह अलैह फरमाते है : वुज़ू में निय्यत न करने की आदत से गुनाहगार होगा, इसमें निय्यत सुन्नते मुअक्कदा है।
*✍🏽फतावा राज़वीय्या, 4/616*

*_सारा बदन पाक हो गया_*
     दो हदिशो का खुलासा है : जिसने बिस्मिल्लाह कह कर वुज़ू किया उसका सर से पाउ तक सारा जिस्म पाक हो गया
और जिसने बिगैर बिस्मिल्लाह कहे वुज़ु किया उसका उतनाही बदन पाक होगा जितने पर पानी गुज़रा।

     हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : जब तुम वुज़ु करो तो "बीसमील्लाही वल-हमदुलिल्लाह" कह लिया करो के जब तक तुम्हारा वुज़ु रहेगा उस वक्त तक तुम्हारे फ़रिश्ते (किरामन् कातिबिंन) तुम्हारे लिए नेकिया लिखते रहेंगे।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 5*
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*फैज़ाने इसाले षवाब*#05
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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*_नूरानी लिबास_*
     एक बुज़ुर्ग ने अपने मरहूम भाई को ख्वाब में देख कर पूछा, "क्या ज़िन्दा लोगो की दुआ तुम लोगो को पहुचती है ?" तो उन्हों ने जवाब दिया, "हा अल्लाह की क़सम वो नूरानी लिबास की सीरत में आती है उसे हम पहन लेते है।
*✍🏽शरहु स्सुदुर, 305*

*_नूरानी तबाक़_*
     जब कोई शख्स मैय्यत को इसाले षवाब करता है तो जिब्रईल अलैहिस्सलाम उसे नूरानी तबाक़ में रख क़ब्र के कनारे खड़े हो जाते है और कहते है "ऐ क़ब्र वाले !" ये हदिया तेरे घर वालो ने भेजा है क़बूल कर। ये सुन कर वो खुश होता है और उस के पड़ोसी अपनी महरूमी पर गमगीन होते है।
*✍🏽शरहु स्सुदुर, 308*
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 400*
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*हर तरहकी ख्वाहिशात फना होनेका मकाम*  #3
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

      जब रसूले खुदा अलैहिल तहइयतह वल सना से ख्वाहिश और इरादा खत्म कर दिया गया तो हुज़ूर को उन मकामात की तरफ मुतवज्ज़ा कर दिया गया।
      और आप अल्लाहतआला के मेहबूब और मुराद थे। आपको एक हाल और एक वादे पर नहीं छोड़ा गया बल्के खुदा तआला आपको तकदीर की तरफ ले गया और उसकी बाग़ (लगाम) आपकी तरफ छोड़ दी और आपको उसमें फिराया- पलटाया और आपसे कहा "क्या आप नही जानते के अल्लाह हर शैअ पर क़ादिर है।  
       यअनी आप तकदीरे खुदावन्दी के दरिया में है और उसकी मौजें आपको इधर से उधर की सैर कराती हैं। बस नबी के कामकी इब्तेदा वली के कामकी इन्तेहा है और वली और अब्दाल के आखरी मकामात वो है के उनके बाद नबूवत के अलावा कोई मकाम नहीं।

*✍🏽फुतूहल ग़ैब*  पेज 126,127
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Monday, 3 April 2017

*रजब की बहरे* #05
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*गुनाहो पर गुनाह...आखिर क्यू ?*
     जरा सोचिये ! ऐसा क्यू है ? हम गुनाहो के दल दल में ग़र्क़ होते चले जा रहे है, लेकिन हमारे कान पे जूं तक नहीं रेंगती ? हम दिन रात गुनाहो में धुत रहते है, लेकिन हमे घबराहट तक नहीं होती।
     आखिर ऐसा क्यू है ? कही ऐसा तो नहीं है कि गुनाह करते करते हम गुनाहो के इतने आदि हो गए है कि हमें गुनाह करने का एहसास तक नहीं रहा। याद रखिये ! बाज़ सालिहिन ने फ़रमाया है : बेशक गुनाह करने से दिल सियाह हो जाता है और दिल की सियाही की अलामत ये होती है कि गुनाहो से घबराहट नहीं होती, इबादत के लिये मौक़ा नहीं मिलता, नसीहत से कोई फायदा नहीं होता (यानि नसीहत व बयान सुन कर दिल पर असर नहीं होता)

     रसूले अकरम ﷺ का फरमान है : जब कोई बन्दा गुनाह कर लेता है, तो उस के क़ल्ब पर एक सियाह नुक़्ता लग जाता है, लेकिन जब वो अल्लाह तआला से मग्फिरत तलब करता है और तौबा कर लेता है तो उस का क़ल्ब साफ़ कर दिया जाता है और अगर वो तौबा के बजाए दो बारां गुनाह कर ले तो ये सियाही मजीद बढ़ जाती है, यहाँ तक कि उस का दिल सियाह हो जाता है।
*✍🏽रजब की बहारे, सफा 6*
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*गुनाह जड़ने की हिकायत*
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*_अल्हम्दु लिल्लाह वुज़ु करने से गुनाह जड़ते है_*
     एक मर्तबा सय्यिदुना इमामे आ'ज़म अबू हनीफा رضي الله تعالي عنه जामेअ मस्जिद कूफ़ा के वुज़ुखाने में तशरीफ़ ले गए तो एक नौजवान को वुज़ु बनाते हुए देखा, उस से वुज़ु के कतरे टपक रहे थे। आप ने इर्शाद फरमाया : ऐ बेटे ! माँ बाप की न फ़रमानी से तौबा करले, उसने फ़ौरन अर्ज़ की : मेने तौबा की।

    एक और शख्स के वुजू के कतरे टपकते देख आप ने उस शख्स से इर्शाद फरमाया : ऐ मेरे भाई ! तू ज़िना से तौबा करले। उसने अर्ज़ की : मेने तौबा की।

     एक और शख्स के वुज़ू के ख़तरात टपकते देखे तो उसे फ़रमाया : शराब नोशी और गाने बजे सुनने से तौबा करले। उसने अर्ज़ की : मेने तौबा की।

     इमामे आ'ज़म अबू हनीफा رضي الله تعالي عنه पर कश्फ़ के बाइस चूके लोगो के उयुब ज़ाहिर हो जाते थे लिहाज़ा आप ने बारगाहे खुदावन्दि में इस कश्फ़ के खत्म हो जाने की दुआ मांगी, अल्लाह عزوجل ने दुआ क़ुबूल फार्म ली जिस से आप को वुज़ू करने वालो के गुनाह जड़ते नज़र आना बंद हो गए।
*✍🏽अल-मिज़ानुल-कुब्रिया, 1/13*
*✍🏽मोमिन की नमाज़, सफा 4*
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*फैज़ाने इसाले षवाब* #04
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*अरबो नेकिया कमाने का आसान नुस्खा*
     झूम जाइए ! अरबो, खरबो नेकियां कमाने का आसान नुस्खा हाथ आ गया ! ज़ाहिर है इस वक़्त रुए ज़मीन पर करोड़ो मुसलमान मौजूद है और करोड़ो बल्कि अरबो दुन्या से चले बसे है। अगर हम सारी उम्मत की मग्फिरत के लिये दुआ करेंगे तो ان شاء الله हमे अरबो, खरबो नेकियां का खज़ाना मिल जाएगा।
     में अपने लिये और तमाम मुअमिनीन व मुअमिनात के लिये दुआ तहरीर कर देता हु। (अव्वल आखिर दुरुद शरीफ पढ़ ले) ان شاء الله ढेरो नेकियां हाथ आएंगी।
     *ऐ अल्लाह ! मेरी और हर मोमिन व मोमिना को मग्फिरत फरमा।*
امين بجاه النبى الامين
     आप भी ऊपर दी हुई दुआ को अभी और हो सके तो रोज़ाना पाचो नमाज़ों के बाद भो पढ़ने की आदत बना लीजिये।
          *बे सबब बख्श दे, न पूछ अमल*
                    *नाम गफ्फार है तेरा या रब !*
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 399*
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Sunday, 2 April 2017

*रजब की बहारे* #03
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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*_हुरमत वाले 4 महीने_* #01
     रजबुल मुरज्जब भी उन चार महीनो में से एक है, जिन की हुरमत व अज़मत का जिक्र क़ुरआने पाक में किया गया है। जैसा की सुरतुतौबा की आयत 36 में इन महीनो की हुरमत के मुतअल्लिक़ इरशाद होता है :
     बेशक महीनो की गिनती अल्लाह के नज़्दीक बारह महीने है अल्लाह की किताब में जब से उस ने आसमान व ज़मीन बनाए, उन में से चार हुरमत वाले है ये सीधा दीन है।
     मुफ़्ती अहमद यार खान अलैरहमा इस आयते करीमा के तहत इरशाद फरमाते है :(हुरमत वाले महीने चार है) तिन तो मिले हुवे यानि ज़ुल क़ादा, ज़ुल हिज्जा, मुहर्रम और एक अलाहिदा यानी रजब। ये चारो महीने इस्लाम से पहले ही मोहतरम माने जाते थे, इन का एहतिराम अब भी बाक़ी है कि इनमे इबादत की जावे, गुनाहो से बचा जावे।

     इससे मालुम हुआ की जब तमाम महीने, तमाम दिन, तमाम जमाअते, दर्जे में बराबर नहीं तो इंसान आपस में बराबर कैसे हो सकते है ?
*✍🏽नुरुल इरफ़ान, पारह 10*
*✍🏽रजब की बहारे, सफा 4*
*___________________________________*
मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*फैज़ाने इसाले षवाब* #03
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_दुआओ की बरकत_*
     मदीने के ताजदार का फरमान है : मेरी उम्मत गुनाहो समेत क़ब्र में दाखिल होगी और जब निकलेगी तो बे गुनाह होगी क्यू की वो मुअमिनीन की दुआओ से बख्श दी जाती है।
*✍🏽अल-मुअजमुल वुसअत, 1/509, हदिष:1879*

*_इसाले षवाब का इन्तिज़ार !_*
     सरकारे नामदार का इरशाद है : मुर्दे का हाल क़ब्र में डूबते हुए इन्सान की मानिन्द है की वो शिद्दत से इन्तिज़ार करता है की माँ बाप, भाई या किसी दोस्त की दुआ उस को पहुचे और जब किसी की दुआ उसे पहुचती है तो उस के नज़्दीक वो दुन्या और दुन्या में जो कुछ है उस से बेहतर होती है। अल्लाह क़ब्र वालो को उन के ज़िन्दा मुतअल्लिक़न की तरफ से हदीया किया हुवा षवाब पहाड़ो की मानिन्द अता फ़रमाता है, ज़िन्दों का हदीया (तोहफा) मुर्दो के लिये "दुआए मगफिरत करना है।"
*✍🏽शोएबुल ईमान, 6/203, हदिष:7905*

*_दुसरो के लिये दुआए मग्फिरत करने की फ़ज़ीलत_*
    जो कोई तमाम मोमिन मर्दों और औरतो के लिये दुआए मग्फिरत करता है, अल्लाह उस के लिये हर मोमिन मर्द व औरत के एवज़ एक नेकी लिख देता है।
*✍🏽मजमउ ज़वाइद, 10/352, हदिष:17598*
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 398*
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मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*उष्माने गनी का इश्के रसूल*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     हज़रते सय्यिदुना उष्माने गनी رضي الله تعالي عنه ने एक बार पानी मंगवाया और वुज़ु किया फिर मुस्कुराये और रुफका से फरमाने लगे : जानते हो में क्यू मुस्कुराया ? फिर खुद ही जवाब देते हुए फ़रमाया : मेने देखा के सरकार ﷺ ने वुज़ु फ़रमाया था और बादे फरागत मुस्कुराये थे और सहबाए किराम से फ़रमाया था : जानते हो में क्यू मुस्कुराया ? फिर आप ﷺ ने खुद ही फ़रमाया : जब आदमी वुज़ु करता है तो चेहरा धोने से चेहरे के और हाथ धोने से हाथ के और सर का मसह करने से सर के और पाउ धोने से पाउ के गुनाह ज़ड जाते है।

     मीठे मीठे इस्लामी भाइयो ! देखा आप ने ? सहबाए किराम सरकार की हर हर अदा और हर सुन्नत को दीवाना वार अपनाते थे।

★नीज़ इस रिवायत से गुनाह धोने का नुस्खा भी मालुम हो गया। अल्हम्दुलिल्लाह
★वुज़ु में कुल्ली करने से मुह के,
★नाक में पानी डाल कर साफ़ करने से नाक के,
★चेहरा धोने से पलकों समेत सारे चेहरे के,
★हाथ धोने से हाथ के साथ साथ नाखुनो के निचे के,
★सर और कान का मसह करने से सर और कानो के
★और पाउ धोने से पाउ के साथ साथ पाउ के नाखुनो के निचे के गुनाह भी ज़ड जाते है।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, स. 2-3*
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मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Saturday, 1 April 2017

*रजब की बहारे* #02
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     मकाशफतुल कुलूब में है कि रजब दर असल तरजिब से मुश्तक़ (यानि निकला) है, इसके माना है : ताज़ीम करना।
     इसको अल असब (यानि सब से तेज़ बहाव) भी कहते है, इस लिये इस माहे मुबारक में तौबा करने वालो पर रहमत वालो पर रहमत का बहाव तेज़ हो जाता है और इबादत करने वालो पर क़बूलिय्यत के अन्वार का फैजान होता है।
     इस अल असम्म (यानि खूब बहरा) भी कहते है क्यू की इसमें जंगो बदल की आवाज़ बिलकुल सुनाई नहीं देती और इसे रजब भी कहा जाता है कि जन्नत की एक नहर का नाम "रजब" है जिस का पानी दूध से ज्यादा सफेद, शहद से ज्यादा मीठा और बर्फ से ज्यादा ठंडा है, इस नहर से वोही शख्स पानी पियेगा जो रजब के महीने में रोज़े रखेगा।

     गुन्यतूत्तालिबिन में है कि इस माह को "शहरे रजम" भी कहते है क्यू की इस में शैतानो को रजम यानी संग सार किया जाता है ताकि वो मुसलमानो को इज़ा न दे।
     इस माह को असम्मा (खूब बहरा) भी कहते है क्यू की इस माह में किसी क़ौम पर अल्लाह तआला के अज़ाब के नाज़िल होने के बारे में नहीं सुना गया,
     अल्लाह عزوجل ने गुज़श्ता उम्मतों को हर महीने में अज़ाब दिया और इस माह में किसी क़ौम को अज़ाब न दिया।
*✍🏽रजब की बहारे, सफा 3*
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*फैज़ाने इसाले षवाब* #02
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_वालिदैन की तरफ से खैरात_*
     जब तुम में से कोई कुछ नफ्ल खैरात करे तो चाहिये की उसे अपने माँ बाप की तरफ से करे की इस का षवाब उन्हें मिलेगा और इस के (यानि खैरात करने वाले के) षवाब में कोई कमी नही आएगी।
*✍🏽शोएबुल ईमान, 6/205, हदिष:7911*

*_रोज़ी में बे बरकती की वजह_*
     बन्दा जब माँ बाप के लिये दुआ तर्क कर देता है उस का रिज़्क़ कत्अ हो जाता है।
*✍🏽कुंजुल उम्माल, 16/201, हदिष:45548*

*_जुमुआ को ज़ियारते क़ब्र की फ़ज़ीलत_*
     जो शख्स जुमुआ के रोज़ अपने वालिदैन या उन में से किसी रक की क़ब्र की ज़ियारत करे और उस के पास सूरए यासीन पढ़े, बख्श दिया जाए।
*✍🏽اُبن عدّى فِى الْكٙامِل، ج٦ ص٢٦٠*

          लाज रखले गुनाहगारो की
               नाम रहमान है तेरा या रब !
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 396*
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Friday, 31 March 2017

*रजब की बहारे* #01
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_रजब का एहतिराम और इसका इनआम_*
     हज़रते ईसा रूहल्लाह अलैहिस्सलाम के दौर का वाक़ीआ है कि एक शख्स मुद्दत से किसी औरत पर आशिक़ था। एक बार उस ने अपनी माशुका पर क़ाबू पा लिया।
     लोगो की हल चल से उस ने अंदाज़ा लगाया की लोग चाँद देख रहे है, उसने उस औरत से पूछा : लोग किस माह का चाँद देख रहे है ?
     उस ने कहा : रजब का। वो शख्स हालांकि गैर मुस्लिम था मगर रजब शरीफ का नाम सुनते ही ताज़िमन फौरन अलग हो गया और गुनाह के काम से बाज़ रहा।
     हज़रते ईसा रूहल्लाह अलैहिस्सलाम को हुक्म हुवा की हमारे फुला बन्दे की मुलाक़ात को जाओ। आप तशरीफ़ ले गए और अल्लाह का हुक्म और अपनी तशरीफ़ आवरी का सबब इरशाद फरमाया। ये सुनते ही उसका दिल नूरे इस्लाम से जग मगा उठा और उसने फौरन इस्लाम क़बूल कर लिया।

     मीठे और प्यारे इस्लामी भाइयो देखा आपने रजब की बहारे ! रजबुल मुरज्जब की ताज़ीम करके जब एक गैर मुस्लिम को ईमान की दौलत नसीब हो गई तो ज़रा सोचिये की जो मुसलमान हो कर इस माह की ताज़ीम करते हुवे इस में गुनाह न करे, झूट, गीबत, चुगली, फरेब, वादा खिलाफी वग़ैरा गुनाहो से हत्तल इमकान बचने की कोशिश करे। नीज़ पूरा महीना इबादत व रियाज़त में गुज़ारे, नमाज़ों की पाबंदी करे, इशराक़ व चाश्त के नवाफ़िल पढ़े, नमाज़े तहज्जुद अदा करे, इस माह के नफ्लि रोज़े भी रखे, शब् में क़याम व तिलावते कुरआन भी करे तो ऐसा शख्स अल्लाह की तरफ से कैसे कैसे इनआम व इकरामात का मुस्तहिक़ होगा ?
     बहार हाल ! हमें चाहिये की जब भी ये बा बरकत महीना तशरीफ़ लाए तो इस में खूब खूब इबादत व रियाज़त करे, ताकि अल्लाह की रहमतो और बरकतों से माला माल हो।
*✍🏽रजब की बहारे, सफा 2-3*
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*वुज़ू का तरीका* 4/4
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     ★अब नल बंद करके सर का मसह इस तरह कीजिये की दोनों अंगूठो और कलिमे की उंगलियो को छोड़ कर दोनों हाथ की 3-3 उंगलियो के सिरे एक दूसरे से मिला लीजिये और पेशानी के बाल या खाल पर रख कर खीचते हुए गुद्दी तक इस तरह ले जाइये की हथेलिया सर से जुदा रहे,
     ★फिर गुद्दी से हथेलिया खीचते हुए पेशानी तक ले आइये,
     ×कलिमे की उंगलिया और अंगूठे इस दौरान सर पर बिलकुल मस् नहीं होने चाहिए,
     ★फिर कलिमे की उंगलियो से कानो की अंदरूनी सतह का मसह कीजिये और छुगलिया कानो के सूराखो में दाखिल कीजिये और उंगलियो की पुश्त से गर्दन के पिछले हिस्से का मसह कीजिये।
     ×बाज़ लोग गले का और धुले हुए हाथो का मसह करते है ये सुन्नत नहीं है।
     ★अब पहले सीधा फिर उल्टा पाउ हर बार उंगलियो से शुरू करके तखनो के ऊपर तक बल्कि मुस्तहब है की आधी पिंडली तक 3 3 बार धो लीजिये।
     ★दोनों पाउ की उंगलियो का ख़िलाल करना सुन्नत है।  इसका मुस्तहब तरीका ये है की उलटे हाथ की छोटी ऊँगली से सीधे पाउ की छोटी ऊँगली का ख़िलाल शुरू कर के अंगूठे पर खत्म कीजिये और उलटे ही हाथ की ऊँगली से उलटे पाउ के अंगूठे से शुरू करके छोटी ऊँगली पर खत्म कर लीजिये।
     हज़रते इमाम मुहम्मद बिन मुहम्मद ग़ज़ालि अलैरहमा फरमाते है : हर उज़्व के गुनाह निकल रहे है !
*✍🏽अहयाउल उलूम, 1/183*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, 10*
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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*दुरुद शरीफ की फ़ज़ीलत*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     हज़रते अबू हुरैरा رضي الله تعالي عنه मरवी है की रसूले अकरम ﷺ का फरमाने मुश्क़बार है : जिसने मुझ पर एक बार दुरुदे पाक पढ़ा, अल्लाह उस पर *10 रहमते* भेजता है और उस के *10 गुनाह मुआफ़* किये जाएंगे और उस के *10 दर्जे बुलन्द* किये जाएंगे।

*✍🏽मकशकातुल मसाबिह, 1/189, हदिष:922*
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Thursday, 30 March 2017

*क़ुरआन शरीफ के कुछ गलत तरजमे*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*وٙلٙمّٙا. يٙعْلٙمِ اٙللّٰهُ. الّٙذِيْنٙ  جٰهٙدُوْا مِنْكُمْ وٙيٙعْلٙمٙ اصّٰبِرِيْنٙ*
पारह 4, सूरए आले इमरान, आयत 142

*तरजमा*
● _शाह अब्दुल क़ादिर_ : और अभी मालुम नही किये अल्लाह ने जो लड़ने वाले है तुम में।
● _फ़त्ह मुहम्मद जालन्धरी देवबन्दी_ : हालांकि अभी खुदा ने तुम में से जिहाद करने वालो को तो अच्छी तरह मालुम किया ही नही।
● _दीप्ती नज़ीर अहमद देवबन्दी_ : और अभी तक अल्लाह ने न तो उन लोगो जांचा जो तुम में से जिहाद करने वाले है।
● _अब्दुल माजिद दरियाबादी देवबन्दी_ : हालाकि अभी तक अल्लाह ने उन लोगो को तुम में से जाना ही नही जिन्होंने जिहाद किया।
● _अशरफ अली थानवी देवबन्दी_ : हालांकि हनोज अल्लाह तआला ने उन लोगो को तो देखा ही नही जिन्होंने तुम में से जिहाद किया हो।
● _देवबन्दी महमूदुल हसन_ : और अभी तक मालुम नही किया अल्लाह ने जो लड़ने वाले है तुम में।

*_सही तरजमा_*
★ *इमाम अहमद रज़ा* : और अभी अल्लाह तआला ने तुम्हारे गाज़ियो का इम्तिहान न लिया।

     देखा आप ने ! *आला हज़रत को छोड़कर* दूसरे अनुवादक क़ुरआन की व्यख्या करते वक़्त कितने गैर हाज़िर थे की तफ़सीर के अध्ययन का कष्ट न उठाया और किस सादगी से क़लम चला दिया। एक तरफ तो अल्लाह के सर्वज्ञाता, सर्वव्यप्ता, सर्व शक्तिमान होने में ईमान, और दुआरी तरफ उसको ऐसा बेखबर बताना की मुअमिनो में से कौन लोग जिहाद की भावना से ओत प्रोत है, इसकी जानकारी अल्लाह को नही, या अभी जाना ही नहीं।
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*वुज़ू का तरीका* 3/4
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     ★अब 3 बार सारा चेहरा इस तरह धोइये, के जहा से आदतन सर के बाल उगना शुरुअ होते है वहा से ले कर ठोड़ी के निचे तक,
     ●और एक कान की लौ से दूसरे कान की लौ तक हर जगह पानी बह जाए।
     ●अगर दाढ़ी है तो इस तरह ख़िलाल कीजिये, के उंगलियो को गले की तरफ से दाखिल करके सामने की तरफ निकालिये।
     ★फिर पहले सीधा हाथ उंगलियो के सिरे से धोना शुरू करके कहोनियो समेत 3 बार धोइये।
     ★इसी तरह उल्टा हाथ भी धो लीजिये।
     ●दोनों हाथ आधे बाज़ू तक धोना मुस्तहब है।
     अब चुल्लू भर कर कोहली तक पानी बहाने की हाजत नहीं
     बल्कि बगैर इजाज़ते सहीहा ऐसा करना ये पानी का इसराफ है~
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 9*
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*फैजाने इसाले षवाब* #01
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     जिनके वालिदैन या उन मेसे कोई एक फौत हो गया हो तो उन को चाहिये की उन की तरफ से गफलत न करे, उन की कब्रो पर भी हाज़री देता रहे और इसाले षवाब भी करता रहे। इस ज़िम्न में सुल्ताने मदीना ﷺ के फरमाने रहमत निशान मुलाहजा फरमाए :

*_मक़बूल हज का षवाब_*
     जो ब निय्यते षवाब अपने वालिदैन दोनों या एक की क़ब्र की ज़ियारत करे, हज्जे मक़बूल के बराबर षवाब पाए और जो बी कसरत इन की क़ब्र की ज़ियारत करता हो, फ़रिश्ते उस की क़ब्र की (यानि जब ये फौत होगा) ज़ियारत को आए।
*✍🏽कन्ज़ुल उम्माल, 16/200, हदिष:45536*

*_10 हज का षवाब_*
     जो अपनी माँ या बाप की तरफ से हज करे उन की (यानि माँ बाप की) तरफ से हज अदा हो जाए उसे (यानि हज करने वाले को) मज़ीद 10 हज का षवाब मिले।
     سبحان الله
जब कभी नफ्ली हज की सआदत हासिल हो तो फौत शुदा माँ या बाप की निय्यत कर ले ता की उन को भी हज का षवाब मिले, आप का भी हज हो जाए बल्कि मज़ीद 10 हज का षवाब हाथ आए। अगर माँ या वालिद में से कोई इस हाल में फौत हो गया की उन पर हज फ़र्ज़ हो चूकने के बा वुजूद न कर पाए थे तो अब औलाद को हज्जे बदल का शरफ हासिल करना चाहिये।
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 395*
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Wednesday, 29 March 2017

*तर्जमए कन्ज़ुल ईमान व तफ़सीरे खज़ाइनुल इरफ़ान* #179
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_सूरतुल बक़रह, आयत ②③⑦_*
     और अगर तुमने औरतों को बे छुए तलाक़ दे दी और उनके लिये कुछ मेहर निश्चित कर चुके थे तो जितना ठहरा था उसका आधा अनिवार्य है मगर यह कि औरतें कुछ छोड़ दें (5) या वह ज़्यादा दे(6) जिसके हाथ में निकाह की गिरह है (7) और ऐ मर्दों, तुम्हारा ज़्यादा देना परहेज़गारी से नज़्दीकतर है और आपस में एक दूसरे पर एहसान को भुला न दो बेशक अल्लाह तुम्हारे काम देख रहा है (8)

*तफ़सीर*
(5) अपने इस आधे में से.
(6) आधे से जो इस सूरत में वाजिब है.
(7) यानी शौहर.
(8) इसमें सदव्यवहार और महब्बत और नर्मी से पेश आने की तरग़ीब है.
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*वुज़ू का तरीका* 2/4
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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     अब सीधे हाथ के 3 चुल्लू पानी से इस तरह 3 कुल्लिया कीजिये की हर बार मुह के हर पुर्ज़े पर (हल्क के कनारे तक) पानी बह जाए,

     अगर रोज़ा न हो तो गर-गरा भी कर लीजिये।

     फिर सीधे ही हाथ के 3 चुल्लू से 3 बार नाक में नर्म गोश्त तक पानी चढ़ाइये

     और अगर रोज़ा न हो तो नाक की जड़ तक पानी पहोचाइये,

     अब उल्टे हाथ से नाक साफ़ कर लीजिये और छोटी ऊँगली नाक के सुरखो में डालिये।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 8*
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*30 गलतिया* #02
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

★ गुमराहों की सोहबत में उठना बैठना।
★ कोई अमले सालेह की तलक़ीन करे तो उस पर ध्यान न देना।
★ खुद हराम व हलाल का ख्याल न करता और दुसरो को भी इस राह पर लगाना।
★ झूटी क़सम खा कर झूट बोल कर धोका दे कर अपनी तिजारत को फरोग देना।
★ इल्मे दिन और दीनदारी को इज़्ज़त न समझना।
★ खुद को दुसरो से बेहतर समझना।
★ फ़क़ीरों और साइलो को अपने दरवाज़े से धक्का दे कर भगा देना।
★ ज़रूरत से ज़्यादा बात चीत करना।
★ अपने पड़ोसियों से बिगाड़ रखना।
★ बादशाहो और अमीरो की दोस्ती पर ऐतिबार करना।
★ ख्वाह म ख्वाह किसी के घरेलू मुआमलात में दखल देना।
★ बगैर सोचे समझे बात करना।
★ तिन दिन से ज़्यादा किसी का मेहमान बनना।
★ अपने घर का भेद दुसरो पर ज़ाहिर करना।
★ हर शख्स के सामने अपने दुख दर्द बयान करना।
*✍🏽जन्नती ज़ेवर, 557*
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 363*
*___________________________________*
मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
*___________________________________*
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Tuesday, 28 March 2017

*तर्जमए कन्ज़ुल ईमान व तफ़सीरे खज़ाइनुल इरफ़ान* #178
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_सूरतुल बक़रह, आयत ②③⑥_*
     तुम पर कुछ मुतालिबा नहीं (1)  तुम औरतों को तलाक़ दो जब तक तुम ने उनको हाथ न लगाया हो या कोई मेहर (रक़म,दैन) निश्चित कर लिया हो, (2) और उनको कुछ बरतने को दो. (3) हैसियत वाले पर उसके लायक़ और तंगदस्त पर उसके लायक़, दस्तूर के अनुसार कुछ बरतने की चीज़, ये वाजिब है भलाई वालों पर (4)

*तफ़सीर*
     (1) मेहर का.
     (2) यह आयत एक अन्सारी के बारे में नाज़िल हुई जिन्हों ने बनी हनीफ़ा क़बीले की एक औरत से निकाह किया और कोई मेहर निश्चित न किया. फिर हाथ लगाने से पहले तलाक़ दे दी. इससे मालूम हुआ कि जिस औरत का मेहर निश्चित न किया हो, अगर उसको छूने से पहले तलाक़ दे दी तो मेहर की अदायगी लाज़िम नहीं. हाथ लगाने या छूने से हम बिस्तरी मुराद है, और ख़िलवते सहीहा यानी भरपूर तनहाई उसके हुक्म में है. यह भी मालूम हुआ कि मेहर का ज़िक्र किये बिना भी निकाह दुरूस्त है, मगर उस सूरत में निकाह के बाद मेहर निश्चित करना होगा. अगर न किया तो हमबिस्तरी के बाद मेहरे मिस्ल लाज़िम हो जाएगा, यानी वो मेहर जो उसके ख़ानदान में दूसरों का बंधता चला आया है.
     (3) तीन कपड़ों का एक जोड़ा.
     (4) जिस औरत का मेहर मुक़र्रर न किया हो, उसको दुख़ूल यानी संभोग से पहले तलाक़ दी हो उसको तो जोड़ा देना वाजिब है. और इसके सिवा हर तलाक़ वाली औरत के लिये मुस्तहब है. (मदारिक)
*___________________________________*
मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*वुज़ू का तरीका* 1/4
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     काबतुल्लाह शरीफ की तरफ मुह करके उची जगह बैठना मुस्तहब है।
     वुज़ू के लिये निय्यत करना सुन्नत है, निय्यत न हो तब भी वुज़ू हो जाएगा मगर षवाब न मिलेगा।
     निय्यत दिल के इरादे को कहते है। दिल में निय्यत होते हुए ज़बान से भी कहलेना अफ़्ज़ल है
     लिहाज़ा ज़बान से इस तरह निय्यत कीजिये की
     में हुक्मे इलाही बजा लेन और पाकी हासिल करने के लिये वुज़ू कर रहा हु।
     बिस्मिल्लाह कह लीजिये की ये भी सुन्नत है।
     बल्कि *बिस्मिल्लाहि-वलहम्दु-लिल्लाह* कह लीजिये की जब तक बा वुज़ू रहेंगे फ़रिश्ते नेकियां लिखते रहेंगे।
     अब दोनों हाथ 3-3 बार पहोचो तक धोइये,
     दोनों हाथो की उंगलियो का ख़िलाल भी कीजये।
     कम अज़ कम 3 बार मिस्वाक कीजिये और हर बार मिस्वाक को धो लीजिये।

     हज़रत मुहम्मद ग़ज़ालि अलैरहमा फरमाते है : मिस्वाक करते वक़्त नमाज़ में क़ुरआने मजीद की किराअत और ज़िकृल्लाह के लिये मुह पाक करने की निय्यत करनी चाहिये।

बाक़ी अगली पोस्ट में...ان شاء الله
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 8*
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मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
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*30 गलतिया* #01
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

★ इस ख़याल में हमेशा मगन रहना की जवानी और तंदुरस्ती हमेशा रहेगी।
★ मुसीबतो में बे सब्र बन कर चीख व पुकार करना।
★ अपनों अक्ल को सब से बढ़ कर समझना।
★ दुश्मन को हक़ीर (कमज़ोर) समझना।
★बिमारी को मामूली समझ कर शुरू में इलाज न करना।
★ अपनी राय पर अमल करना और दुसरो के मशवरों को ठुकरा देना।
★ किसी बदकार को बार बार आज़मा कर भी उस की चापलूसी में आ जाना।
★ बेकारी में खुश रहना और रोज़ी की तलाश न करना।
★ अपना राज़ किसी दूसरे को बता कर उसे पोशीदा रखने की ताकीद करना।
★ आमदनी से ज़्यादा खर्च करना।
★ लोगो की तकलीफ में शरीक न होना और उन से इमदाद की उम्मीद रखना।
★ एक दो ही मुलाक़ात में किसी शख्स की निस्बत कोई अच्छी या बुरी राय क़ाइम कर लेना।
★ वालिदैन की खिदमत न करना ओर औलाद से खिदमत की उम्मीद रखना।
★ किसी काम को इस ख्याल से अधूरा छोड़ देना की फिर किसी वक़्त मुकम्मल कर लिया जाएगा।
★ हर शख्स से बदी करना और लोगो से अपने लिये नेकी की तवक़्क़ोअ रखना।

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 360*
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Monday, 27 March 2017

*अल हदिष*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

क़यामत के दिन बन्दे से एक सुवाल ये भी होगा....
*जवानी किन कामो में गुज़ारी ?*

*✍🏽जामेअ तिर्मिज़ी, 1894, हदिष:2417*

*नोट :* उस दिन सवाल पूछने पर सर्मिन्दा न होना पड़े इस वजह से आज इस पे ज़रा गौर कीजिये।
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मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*जमाअत छोड़ने की सजा* #08/08
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_नमाज़ सल्तनत से बेहतर_*
     हज़रते मैमून बिन मेहरानرضي الله تعالي عنه मस्जिद में आए, उनसे कहा गया जमाअत खत्म हो गई और लोग जा चुके है ये सुन कर उन की ज़ुबांन पर बे साख्ता जारी हुवा إ نَّا لِلّهِ وَإِنَّـا إِلَيْهِ رَاجِعونَ फिर फ़रमाया : मेरे नज़दीक बा जमाअत नमाज़ की फ़ज़ीलत इराक की हुक्मरानी से ज्यादा है।
*✍🏽मुकाशफतुल कुलूब, स. 268*

*_बाग़ मसाकिन पर सदका कर दिया_*
     हज़रते अब्दुल्लाह बिन उमरرضي الله تعالي عنه फरमाते है : हज़रते उमर फारूकرضي الله تعالي عنه अपने एक बाग़ की तरफ तशरीफ़ ले गए, जब वापस हुवे तो लोग नमाज़े असर अदा कर चुके थे, ये देख कर आप ने पढ़ा إ نَّا لِلّهِ وَإِنَّـا إِلَيْهِ رَاجِعونَ और इर्शाद फ़रमाया : मेरी असर की जमाअत फौत हो गई है, लिहाजा में तुम्हे गवाह बनाता हु की मेरा बाग़ मसाकिन पर सदका है ताकि ये इस काम का कफ़्फ़ारा हो जाए।

     अल्लाहु अकबर ! मीठे मीठे इस्लामी भाइयो ! देखा आपने हमारे बुज़ुर्गो के नज़दीक जमाअत की किस कदर अहमिय्यत थी, उनके नज़दीक माल व औलाद का तलफ़ (ज़ाएअ) हो जाने से बड़ी मुसीबत नमाज़े बा जमाअत छूट जाना था।
     अल्लाह عزوجل हमारे दिलो में भी ऐसा ज़ौक़ ओ शोक अता करे।
आमीन........
*✍🏽तर्के जमाअत की वईद, स. 19*
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*मदनी फूल​*
*​بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ​*
*​اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ​*

*​​खजूर के मदनी फूल*​​ #03
     खजूर और खीरा या ककड़ी, नीज़ खजूर और तरबूज़ एक साथ खाना सुन्नत है। इसमें भी हिकमतो के मदनी फूल है। हमारे अमल के लिये तो इस का सुन्नत होना ही काफी है। अतिब्बा का कहना है की इससे जिन्सी व जिस्मानी कमज़ोरी और दुबला पन दुर होता है।
     हदिष में है की हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया, मख्खन को खजूर के सथमिल कर खाओ और पुरानी के साथ नई खजुरे मिला कर खाओ क्यू की शैतान किसी को ऐसा करता देखता है तो अफ़सोस करता है और कहता है की पुरानी के साथ नई खजूर खा कर आदमी मज़बूत हो गया।
*✍🏽सुनन इब्ने माजह, 4/39, हदिष:333*

     खजूर खाने से पुरानी क़ब्ज़ दूर होती है।
 
     दमा, दिल, गुर्दा, मसाना, पित्ता और आंतो के अमराज़ में खजूर मुफीद है। ये बलगम खारिज करती, मुह की खुश्की को दूर करती, क़ुव्वते बाह बढ़ाती और पेशाब आवर है।
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 357*
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Sunday, 26 March 2017

*तर्जमए कन्ज़ुल ईमान व तफ़सीरे खज़ाइनुल इरफ़ान* #179
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_सूरतुल बक़रह, आयत ②③⑤_*
     और तुम पर गुनाह नहीं इस बात में जो पर्दा रखकर तुम औरतों के निकाह का पयाम दो या अपने दिल में छुपा रखो.  (12) अल्लाह जानता है कि अब तुम उनकी याद करोगे  (13) हाँ उनसे छुपवां वादा न कर रखो मगर यह कि उतनी बात कहो जो शरीअत में चलती है और निकाह की गांठ पक्की न करो जब तक लिखा हुक्म अपने समय को न पहुंच ले (14) और जान लो कि अल्लाह तुम्हारे दिल की जानता है तो उससे डरो और जान लो कि अल्लाह बख़्शने वाला, हिल्म  (सहिष्णुता) वाला है.

*तफ़सीर*
     (12) यानी इद्दत में निकाह और निकाह का खुला हुआ प्रस्ताव तो मना है लेकिन पर्दे के साथ निकाह की इच्छा प्रकट करना गुनाह नहीं. जैसे यह कहे कि तुम बहुत नेक औरत हो या अपना इरादा दिल में ही रखे और ज़बान से किसी तरह न कहे.
     (13) और तुम्हारे दिलों में इच्छा होगी इसी लिये तुम्हारे लिये तारीज़ जायज़ कर दी गई.
     (14) यानी इद्दत गुज़र चुके.
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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*जमाअत छोड़ने की सजा* #07/08
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     हुज़ूर ﷺ ने बाज़ नमाज़ों में कुछ लोगो को गैर हाज़िर पाया तो इर्शाद फ़रमाया : में चाहता हु की किसी शख्स को हुक्म दू की वो नमाज़ पढ़ाए, फिर में उन लोगो की तरफ जाऊ जो नमाज़े बा जमाअत से पीछे रह जाते है और उन पर उनके घर जला दू।
*✍🏽शाहीह मुस्लिम*

     मीठे मीठे इस्लामी भाइयो ! गौर कीजिये हमारे आक़ा ﷺ जो अपनी उम्मत से बेहद महब्बत फरमाते और सारी सारी रात उम्मत की बख्शीश व मगफिरत के लीये आंसू बहाते रहे, ऐसे शफ़ीक़ व करीम आक़ा ने शाने जलाल में फ़रमाया :
*जो लोग जमाअत से नमाज़ नहीं पढ़ते, मेरा जी चाहता है की उनके घरो को आग लगा दू।*

*✍🏽तर्के जमाअत की वईदे, स. 16*

अल्लाह عزوجل अपने हबीब ﷺ के सदके के हम सभी को बा जमाअत नमाज़ अदा करने का शोख ओ जौक अता करे।
आमीन.....
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*मदनी फूल*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*
*_खजूर के मदनी फूल_* #02
     हज़रते मुहम्मद अहमद ज़हबी अलैरहमा फरमाते है, हामिला को खजुरे खिलाने से ان شاء الله लड़का पैदा होगा जो की खूब सूरत बुर्द बार और नर्म मिज़ाज होगा।

     जो फाके की वजह से कमज़ोर हो गया हो उस के लिये खजूर बहुत मुफीद है क्यू की ये ग़िज़ाइय्यत से बीरपुर है। इस के खाने से जल्द तवानाई बहाल हो जाती है। लिहाज़ा खजूर से इफ्तार करने ये हिकमत भी है।

     रोज़े में फौरन बर्फ का ठंडा पानी पि लेने से गैस, तबख़िरे मेदा और जिगर के वरम का सख्त खतरा है। खजूर खा कर ठंडा पानी पिने से नुकसान का खतरा टल जाता है, मगर सख्त ठंडा पानी पीना हर वक़्त नुकसान देह है।

*✍🏽मदनी पंजसुरह, 356*
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Saturday, 25 March 2017

*जमाअत छोड़ने की सजा* #06/08
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_अकल्मन्द कौन ?_*
     मीठे मीठे इस्लामी भाइयो ! सब इबादतों में अहम इबादत नमाज़ है और येही जरीअए नजात और जन्नत की कुन्जी है। इस लीये नमाज़ की भरपूर हिफाज़त करनी चाहिये और इसे वक़्त पर जमाअत के साथ अदा करना चाहिये।
     उमुमन देखा जाता है की लोग घर में ही नमाज़ पढ़ लेते है और मस्जिद की हाज़िरी से कतराते और महज़ सुस्ती की वज्ह से षवाबे अज़ीम से महरूम हो जाते है। याद रखिये ! हर आकिल, बालिग़, आज़ाद, क़ादिर पर जमाअत वाजिब है, बिला उज़्र एक बार भी जमाअत छोड़ने वाला गुनाहगार और मुस्तहिके सजा है और कई बार तर्क करे तो फ़ासिक़ मर्दुदश्शहादा (यानी उस की गवाही मक़्बूल नहीं) और उस को सख्त सज़ा दी जाएगी। अगर पड़ोसियों ने सुकूत किया (खामोश रहे) तो वो भी गुनेहगार हुवे।
*✍🏽बहारे शरीअत, 1/582*

     अबू ज़ुबैर फरमाते है : मेने हज़रत जाबिरرضي الله تعالي عنه से सुना, हमारे घर मस्जिद से दूर थे तो हमने अपने घरो को फरोख्त करने का इरादा किया ताकि हम मस्जिद के करीब हो जाए, तो रसूले अकरमﷺ ने हमें मना फरमा दीया और इर्शाद फ़रमाया : तुम्हे हर कदम के बदले षवाब मिलता है।
*✍🏽शाहीह मुस्लिम, 335*

     सहाबाए किराम में बा जमाअत नमाज़ अदा करने का कितना ज़बरदस्त जज़्बा था, वाकई पाचो वक्त एक एक मिल का सफ़र कर के आना आसान काम नहीं।
     इसके बर अक्स हमारा हाल ये है की हमारे घरो के करीब मसाजिद मौजूद है, मस्जिद दूर हो और पैदल जाने में सुस्ती हो तो गाडी, मोटर साइकल के ज़रिए जाने की तरकीब बन सकती है। मस्जिदों में भी ज़रूरी सहुलियात मुयस्सर है मगर बद किस्मती से फिर भी जमाअत के साथ नमाज़ नहीं पढ़ते।
*✍🏽तर्के जमाअत की वईद, स. 14*
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*_खजूर के मदनी फूल_* #01
     तबीबो के तबीब ﷺ का फरमाने सिहहत निशान है, "आलिया" (मदीना में मस्जिदे क़ुबा की जानिब एक जगह का नाम) की अज्वा (मदीना की सबसे अज़ीम खजूर का नाम) में हर बिमारी से शिफ़ा है।
     अल्लामा बदरुद्दीन ऐनी हनफ़ी रहमतुल्लाह अलैह की रिवायत के मुताबिक़ 7 रोज़ तक सात अदद अज्वा खजूर खाना जुज़ाम (कोढ़) को रोकता है।
*✍🏽उमदतुल कारी, 14/446*

     अबू हुरैरा رضي الله تعالي عنه से रिवायत है, खजूर खाने से कुलन्ज (बड़ी अंतड़ी का दर्द) नही होता।
*✍🏽कन्जुल उम्माल, 10/12, हदिष : 28191*

     हुज़ूर ﷺ का फरमान है की, नहार मुह खजूर खाओ कस से पेट के कीड़े मर जाते है।
*✍🏽अलजामिउ सगीर, 398, हदोष:6394*

     हज़रते रबीआ बिन खसिम رضي الله تعالي عنه फरमाते है : मेरे नज़्दीक हामिला के लिये खजूर से और मरीज़ के लिये शहद से बेहतर किसी चीज़ में शिफ़ा नही।
*✍🏽दुर्रे मन्सूर, 5/505*
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 356*
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Friday, 24 March 2017

*जमाअत छोड़ने की सजा* #05/08
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     मीठे मीठे इस्लामी भाइयो ! जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ने से जहा मुसलमानो की आपस में मुहब्बत व मुवानसत में इज़ाफ़ा होता है वही नमाज़ का षवाब भी कइ गुना बढ़ जाता है। अहादिसे मुबारका में कई मकामात पर जमाअत से नमाज़ पढ़ने वाले के लीये कसीर षवाब और कई इनामात की बिशारते वारिद हुई है।

*_4 फरमाने मुस्तफा ﷺ_*
     जिसने कामिल वुज़ु किया, फिर फ़र्ज़ नमाज़ के लीये चला और इमाम की इक्तिदा में फ़र्ज़ नामाज़ पढ़ी, उसके गुनाह बख्श दिये जाएंगे।
     अल्लाह बा जमाअत नमाज़ पढ़ने वालो को महबूब रखता है।
     बा जमाअत नमाज़ तन्हा नमाज़ से 27 दरजे अफ़्ज़ल है।
     जब बन्दा बा जमाअत नमाज़ पढ़े, फिर अल्लाह से अपनी हाजत का सुवाल करे तो अल्लाह इस बात से हया फरमाता है की बन्दा हाजत पूरी होने से पहले वापस लौट जाए।

     मुस्तफा ﷺ ने फ़रमाया : जो अल्लाह के लीये 40 दिन बा जमाअत नमाज़ पढ़े और तकबिरे उला पाए, उसके लिये दो आज़ादियाँ लिख दी जाएगी,
नार यानी दोज़ख से
निफाक से।

     इमाम शरफुद्दीन हुसैन बिन मुहम्मद तीबी फरमाते है : निफाक से बराअत का मतलब ये है की वो दुन्या में मुनाफिक जैसे आमाल से महफूज़ रहेगा और उसे मुखलिसिन जैसे आमाल करने की तौफ़ीक़ मिलेगी। नीज़ आख़िरत में नारे जहन्नम से अम्न में रहेगा।

     नमाज़े बा जमाअत की इस कदर बरकतों और फाज़िलातो के बा वुज़ूद सुस्ती करना और जमाअत से नमाज़ न पढ़ना किस कदर ताज्जूब ख़ेज़ है ?
     मगर अफ़सोस ! साद करोड़ अफ़सोस ! जमाअत की परवा नहीं की जाती, बल्कि नमाज़ भी अगर कज़ा हो जाए तो कोई रन्ज नहीं।

     हमें अपने अन्दर नमाज़े बा जमाअत की अहमियत और इस की महब्बत पैदा करनी चाहिए और अपने बच्चों को भी शुरुअ से ही जमाअत से नमाज़ पढ़ने की आदत डलवाए।
*✍🏽तर्के जमाअत की वईदे, स. 9*
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मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*मुबारक महीने* #17
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*जुल हिज्जा* #01
*_इब्तिदाई 10 दिन की फ़ज़ीलत_*
     बाज़ अहादीस के मुताबिक़ जुल हिज्जा का पहला अशरा (यानि इस माह के शुरू के 10 दिन) रमज़ानुल मुबारक के बाद सब दिनों से अफज़ल है।

*_नेकिया करने के पसन्दीदा तरीन अय्याम_*
     हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : इन 10 दिनों से ज़्यादा किसी दिन का नेक अमल अल्लाह को महबूब नही। सहाबए किराम ने अर्ज़ की, या रसूलल्लाह ﷺ ! और न राहे खुदा में जिहाद ? फ़रमाया, और न राहे खुदा में जिहाद, मगर वो की अपने जानो माल ले कर निकले फिर उन में से कुछ वापस न लाए (यानी सिर्फ वो मुजाहिद अफज़ल होगा जो जानो माल क़ुर्बान करने में कामयाब हो गया)
*✍🏽सहीह बुखारी, 1/333, हदिष:969*

*_शबे क़द्र के बराबर फ़ज़ीलत_*
     हदिष में है, अल्लाह को अशर ऐ जुल हिज्जा से ज़्यादा किसी दिन में अपनी इबादत किया जाना पसन्दीदा नही इस के हर दिन का रोज़ा एक साल के रोज़ो और हर शब् का क़याम शबे क़द्र के बराबर है।
*✍🏽तिर्मिज़ी, 2/192, हदिष:758*

*_अरफ़ा का रोज़ा_*
     हुज़ूर ﷺ का फरमान है, मुझे अल्लाह पर गुमान है को अरफ़ा (9 जुल हिज्जा) का रोज़ा एक साल क़ब्ल और एक साल बाद के गुनाह मिटा देता है।
*✍🏽सहीह मिस्लिम, 590, हदिष :196*

*_एक रोज़ा हज़ार रोज़ो के बराबर_*
    हज़रते आइशा رضي الله تعالي عنها से रिवायत है, हुज़ूर ﷺ ने इरशाद फ़रमाया अरफ़ा का रोज़ा हज़ार रोज़ो के बराबर है। मगर हज करने वाले पर जो अरफात में है उसे अरफ़ा के दिन रोज़ा रखना मकरूह है की, हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : अरफ़ा के दिन अरफात में रोज़ा रखने से मना फ़रमाया।
*✍🏽मदनी पंजसुरह, 352*
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Thursday, 23 March 2017

*तर्जमए कन्ज़ुल ईमान व तफ़सीरे खज़ाइनुल इरफ़ान* #178
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_सूरतुल बक़रह, आयत ②③④_*
     और  तुम में जो मरें और बीबियां छोड़ें वो चार महीने दस दिन अपने आप को रोके रहें तो जब उनकी मुद्दत (अवधि) पूरी हो जाए तो ऐ वालियों  तुम पर मुआख़ज़ा(पकड़) नहीं उस काम में जो औरत अपने मामले में शरीअत के अनुसार करें और अल्लाह को तुम्हारे कामों की ख़बर है.

*तफ़सीर*
     गर्भवती की इद्दत तो गर्भ के अन्त तक यानी बच्चा पैदा हो जाने तक है, जैसा कि सूरए तलाक़ में ज़िक्र है. यहाँ बिना गर्भ वाली औरत का बयान है जिसका शौहर मर जाए, उसकी इद्दत चार माह दस रोज़ है. इस मुद्दत में न वह निकाह करे न अपना घर छोडे़, न बिना ज़रूरत तेल लगाए, न ख़ुश्बू लगाए, न मेहंदी लगाए, न सिंगार करे, न रंगीन और रेशमी कपड़े पहने, न नए निकाह की बात चीत खुलकर करे. और जो तलाक़े बयान की इद्दत में हो, उसका भी यही हुक्म है. अल्बत्ता जो औरत तलाक़े रजई की इद्दत में हो, उसको सजना सँवरना और सिंगार करना मुस्तहब है.
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*जमाअत छोड़ने की सजा* #04/08
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     हुज़ूर ﷺ फरमाते है : अगर नमाज़े बा जमाअत से पीछे रह जाने वाला ये जानता की इस रह जाने वाले के लीये क्या है ? तो घिसटते हुवे हाज़िर होता।

     हुज़ूर ﷺ फरमाते है : किसी गाऊं, शहर या जंगल में 3 शख्स हो और बा जमाअत नमाज़ काइम न की गई मगर उन पर शैतान मुसल्लत हो गया। तो जमाअत को लाज़िम जानो की भेड़िया उस बकरी को खाता है जो रेवड़ से दूर हो।
     शारेहे बुखारी हज़रते अल्लामा बदरुद्दीन एनी हनफ़ी फरमाते है : इस हदिष की मुराद ये है की तारीके जमाअत पर शैतान ग़ालिब आ जाता है और उस पर अपना कब्ज़ा जमा लेता है, जैसे भेड़िया रेवड़ से अलग होने वाली बकरी पर काबिज़ हो जाता है।  और हदिष में 3 का ज़िक्र इस लिए है की जमआत कम से कम 3 पर बोली जाती है और 3 शख्सों के ज़रिए ही जुमुआ काइम हो सकता है, नीज़ इस हदिष से ये बात समझ आती है की अगर दो शख्स किसी जगह में हो और वो जुदा जुदा नमाज़ पढ़े तो गुनाहगार नहीं होंगे।
*✍🏽तर्के जमाअत की वईद, स. 7*
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