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Saturday, 20 May 2017

*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #21
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*रोज़े में वक़्त पास करने के लिये*
     काफी नादान ऐसे भी देखे जाते है जो अगरचे रोज़ा तो रख लेते है मगर फिर उन बेचारो का वक़्त पास नही होता। लिहाज़ा वो भी ऐहतिरामे रमज़ान को एक तरफ रख कर हराम व ना जाइज़ कामो का सहारा ले कर वक़्त पास करते है और यु रमज़ान में शतरंज, ताश, लुड्डू, गाने बाजे, वगेरा में मश्गुल हो जाते है।
     याद रखिये ! शतरंज और ताश वगैरा पर शर्त न भी लगाई जाए तब भी ये खेल ना जाइज़ है। बल्कि ताश में चुकी जानदारों की तस्वीरें भी होती है इस लिये मेरे आक़ा आला हज़रत رحمة الله عليه ने ताश को मुतलकन हराम लिखा है। चुनांचे फ़रमाते है ताश हरामे मुतलक़ है की इन में इलावा लहवो लइब के तस्वीरों की ताज़ीम है।
*✍🏼फतवा रज़विय्या, 24/141*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
*___________________________________*
मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
*___________________________________*
*​DEEN-E-NABI ﷺ*
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*Aurat ke Masaail* #10
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

🔮 *Halat-E-Haiz Me Shauhar Ke Rahna*

♻ Sawal:- Baz Gharanon me Ye Riwaz Hai Ki Halat E Haizo Nifaas Me Aurat Apne Shahar Ke Sath Na Kha Pi Sakti Hai Aur Na So Sakti Hai Iska Sharai Hukm Kya Hai ?

📝 *Jawab:- Surat Haizo Nifaas Ke Dinon Men Shahar Ke Sath Kha Pi Sakti Hai Balki Dono Ek Palang Par So Bhi Sakte Hain Balke Is Waja Se Sath Na Sona Makrooh Hai.*

*✍🏼Durre Mukhtar ' Rad Al Mukhtar*

↪ *Han Hamrah Sone Men Shehwat Ka Ghalba Ho Aur Apne Ko Qabu Men Na Rakhne Ka Ehtamal Ho To Sath Na Soe Aur Uska Ghalib Guman Ho To Sath Sona Gunah Hai.*

*✍🏼Bahare Shariat Hissa-02, Page No.43*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
*___________________________________*
मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Friday, 19 May 2017

*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #20
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*रमज़ान में गुनाह करने वाला*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : मेरी उम्मत ज़लील व रुस्वा न होगी जब तक वो रमज़ान का हक़ अदा करती रहेगी। अर्ज़ किया या रसूलल्लाह ! रमज़ान के हक़ को ज़ाए करने में उन का ज़लील व रुस्वा होना क्या है ? फ़रमाया : इस माह में उन का हराम कामो का करना।
     जिस ने इस माह में ज़ीना किया या शराब पी तो अगले रमज़ान तक अल्लाह और जितने आसमानी फ़रिश्ते है सब उस पत लानत करते है। पस अगर ये शख्स अगले रमज़ान को पाने से पहले ही मर गया तो उस के पास कोई ऐसी नेकी न होगी जो उसे जहन्नम की आग से बचा सके। पस तुम रमज़ान के मुआमले में डरो क्यू की जिस तरह इस माह में और महीनो के मुकाबले में नेकियां बढ़ा दी जाती है इसी तरह गुनाहो का भी मुआमला है।
*✍🏼अल मुजमुस्सगिर लीत्तबरानी, 9/60, हदिष:1488*
*✍🏼फ़ज़ाइले रमज़ान, 75*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
*___________________________________*
मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #20
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*रमज़ान में गुनाह करने वाला*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : मेरी उम्मत ज़लील व रुस्वा न होगी जब तक वो रमज़ान का हक़ अदा करती रहेगी। अर्ज़ किया या रसूलल्लाह ! रमज़ान के हक़ को ज़ाए करने में उन का ज़लील व रुस्वा होना क्या है ? फ़रमाया : इस माह में उन का हराम कामो का करना।
     जिस ने इस माह में ज़ीना किया या शराब पी तो अगले रमज़ान तक अल्लाह और जितने आसमानी फ़रिश्ते है सब उस पत लानत करते है। पस अगर ये शख्स अगले रमज़ान को पाने से पहले ही मर गया तो उस के पास कोई ऐसी नेकी न होगी जो उसे जहन्नम की आग से बचा सके। पस तुम रमज़ान के मुआमले में डरो क्यू की जिस तरह इस माह में और महीनो के मुकाबले में नेकियां बढ़ा दी जाती है इसी तरह गुनाहो का भी मुआमला है।
*✍🏼अल मुजमुस्सगिर लीत्तबरानी, 9/60, हदिष:1488*
*✍🏼फ़ज़ाइले रमज़ान, 75*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #19
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*साल भर की नेकियां बर्बाद*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم "बेशक जन्नत रमज़ान के लिये एक साल से दूसरे साल तक सजाई जाती है, पस जब रमज़ान आता है तो जन्नत कहती है, ऐ अल्लाह ! मुझे इस महीने में अपने बन्दों में से मेरे अन्दर रहने वाले अता फरमा दे। और हूरे कहती है, ऐ अल्लाह ! इस महीने में हमे अपने बन्दों में से शौहर अता फरमा।
     फिर आक़ा صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया जिस ने इस माह में अपने नफ़्स की हिफाज़त की और न तो कोई नशा आवर शय पी और न ही किसी मोमिन पर बोहतान लगाया और न ही इस माह में कोई गुनाह किया तो अल्लाह हर रात के बदले इस का 100 हूरे से निकाह फ़रमाएगा और उस के लिये जन्नत में सोने, चांदी और याकूत का ऐसा महल बनाएगा की अगर सारी दुन्या जमा हो जाए और इस महल में आ जाए तो इस महल की उतनी ही जगह घेरेगी जितना बकरियो का एक बाडा दुन्या की जगह घेरता है।
     और जिसने इस माह में कोई नशा आवर शय पी या किसी मोमिन पर बोहतान बांधा या इस माह में कोई गुनाह किया तो अल्लाह उस के एक साल के आमाल बर्बाद फरमा देगा।
     पस तुम माहे रमज़ान के हक़ में कोताही करने से डरो क्यू की ये अल्लाह का महीना है। अल्लाह ने तुम्हारे लिये 11 महीने कर दिये की इन में नेअमतों से लुत्फ़ अन्दोज़ हो और लज़्ज़त हासिल करो और अपने लिये एक महीना खास कर लिया है। पस तुम रमज़ान के मुआमले में डरो।
*✍🏽अल मुजमुल अवसत, 2/141, हदिष:3688*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 73*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*Aurat ke Masaail* #09
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*Paak Ho e Ke Din Baqiya Din Guzarna*

♻ Sawal:- Abida Haiz Se Paak Ho Gayi Aur Din Ka Kuch Hissa Baqui Rah Gaya To Kiya Woh Use Roze Ki Misl Gujaregi ? Aur Kya Us Roze Ki Qaza Us Par Wajib Hai Ya Nahi ?

📝 *Jawab:- Haiz-O-Nifaas Wali Paak Huwi Aur Kuch Din Baqui Rah Gaya To Use Roze Ki Misl Guzare Aur Us Roze Ki Qaza Wajib Hai*

*✍🏽Durre Mukhtar*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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Thursday, 18 May 2017

*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #18
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*शयातीन जंजीरो में जकड़ दिये जाते है*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जब रमज़ान आता है तो आसमान के दरवाज़े खोल दिये जाते है।
*✍🏽सहीहुल बुखारी, 1/626, हदिष:1899*
     और एक रीवायत में है की जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते है और दोज़ख के दरवाज़े बन्द कर दिये जाते है शयातीन जंजीरो में जकड़ दिये जाते है। रहमत के दरवाज़े खोले जाते है।
*✍🏽सहीह मुस्लिम, 543, हदिष:1079*

*शैतान क़ैद में होने के बा वुजूद गुनाह क्यू होते है ?*
     हक़ ये है की माहे रमज़ान में आसमानों के दरवाज़े भी खुलते है जिन से अल्लाह की खास रहमते ज़मीन पर उतरती है और जन्नतो के दरवाज़े भी जिस की वजह से जन्नत वाले हूरो गिलमान को खबर हो जाती है की दुन्या में रमज़ान आ गया और वो रोज़ादारो के लिये दुआओ में मश्गुल हो जाते है। रमज़ान में वाक़ई दोज़ख के दरवाज़े ही बन्द हो जाते है जिस की वजह से इस महीने में गुनाहगारो बल्कि काफिरो की क़ब्रो पर भी दोज़ख की गर्मी नही पहुचती। वो जो मुसलमानो में मश्हूर है की रमज़ान में अज़ाबे क़ब्र नही होता इस का यही मतलब है और हक़ीक़त में इब्लीस को क़ैद कर दिया जाता है। _इस महीने में जो कोई भी गुनाह करता है वो अपने अफ़्से अम्मारा की शरारत से करता है न शैतान के बहकाने से।
*✍🏽मीरआतुल मनाजिह्, 3/133*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 63*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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*मस्तुरात (औरत) के लिये गुस्ल की एहतियाते*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

◆ ढलकी हुई पिस्तान को उठा कर पानी बहाए। पिस्तान और पेट के जोड़ की लकीर धोए।
◆ फ़र्ज़े कारिज (यानि औरत की शर्मगाह के बहार के हिस्से) का हर गोशा हर टुकड़ा ऊपर निचे खूब एहतियात से धोए।
◆ फ़र्ज़े दाखिल (यानि शर्मगाह के अंदरुनी हिस्से) में ऊँगली दाल कर धोना फ़र्ज़ नहीं मुस्तहब है।
◆ अगर हैज़ या निफ़ास से फ़ारिग़ हो गुस्ल करे तो किसी पुराने कपड़े से फ़र्ज़े दाखिल के अंदर से खून का असर साफ़ कर लेना मुस्तहब है।
*✍🏽बहारे शरीअत, जी.1, स.318*

◆ अगर नेल पोलिश नाखुनो पर लगी हुई है तो उसका भी छुड़ाना फ़र्ज़ है वरना गुस्ल नहीं होगा, हा मेहदी के रंग में हरज नहीं।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा  88*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #17
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*माहे रमज़ान में मरने की फ़ज़ीलत*
     जो खुश नसीब मुसलमान रमज़ान में इन्तिक़ाल करता है उस को सुवालाते क़ब्र से अमान मिल जाता है, अज़ाबे क़ब्र से बच जाता और जन्नत का हक़दार क़रार पाता है। चुनान्चे हज़राते मुहद्दिसिने किराम का क़ौल है "जो मोमिन इस महीने में मरता है वो सीधा जन्नत में जाता है, गोया उस के लिये दोज़ख का दरवाज़ा बन्द है।"
*✍🏽अनिसुल वाइज़िन, 25*

*तीन अफ़राद के लिये जन्नत की बशारत*
     हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास رضي الله عنه से रिवायत है, हुज़ूर صلى الله عليه وسلم का फरमान है : जिसको रमज़ान के इख्तिताम के वक़्त मौत आई वो जन्नत में दाखिल होगा और जिस की मौत अरफा के दिन (यानि 9 जुल हिज्जतुल हराम)  के खत्म होते वक़्त मौत आई वो भी जन्नत में दाखिल होगा और जिस की मौत सदक़ा देने की हालत में आई वो भी दाखिले जन्नत होगा।
*✍🏽हिल्यतुल औलिया, 5/26, हदिष:6187*

*क़यामत तक रोज़ो का षवाब*
     आइशा सिद्दिक़ा رضي الله عنها से रिवायत है, हुज़ूर صلى الله عليه وسلم का इर्शाद है : जिसका रोज़े की हालत में इन्तिक़ाल हुवा, अल्लाह उस को क़यामत तक रोज़ो का षवाब अता फ़रमाता है।

      फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : ये रमज़ान तुम्हारे पास आ गया है, इस में जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते है और जहन्नम के दरवाज़े बंद कर दिये जाते है और शयातीन को क़ैद कर दिया जाता है, महरूम है वो शख्स जिस ने रमज़ान को पाया और उस की मगफिरत न हुई की जब इस की जब इसकी रमज़ान में मगफिरत न हुई तो फिर कब होगी ?
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 61*

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*Aurat ke Masaail* #08
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

🔮 *Halat E Haiz Men Jima'a (Sex,* *Hambistari) Ko Jayez Janna*

♻ Sawal:- Munawwar Jahan Sawal Karti Hai Ki Haiz-O-Nifaas Ki Halat Men Jima'a (Sex, Hambistari) Ka Sharai Hukm Kya Hai ?

📝 *Jawab:- Haiz-O-Nifaas Ki Halat Men Jima'a Hambistari Haraam Hai Aysi Halat Men Jima'a* *Hambistari Jayez Janna Kufr Hai Aur Haram Samajh Kar kiya To Sakht Gunahgar Hua Us Par Taubah Farz Hai Aur Aamad Ke Zamane Me Kya To Ek Dinar Aur Qarib Khatam Ke Kiya To Nisf (Adha) Dinar Khairat Karna Mustahab Hai.*

*✍🏽Auraton Ke Masail Page No. 102*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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*आज का चाँद :* 21
*माह 8 :* माहे शअबान
*हिजरी :* 1438

*विसाल :*
सैय्यिद फैज़ुर्रसूल बापू (बोरसद)
खलिफए शैखुल इस्लाम मौलाना इक़बाल (पूना)
*उर्स :*
हज़रत अब्दुल्लाह सईद, हज़रत अब्दुलक़ादिर (टिनतुवे, मोडासा)
अहमदशाह, शरफी मिया पीर (पोरबन्दर)
हाजी अलिपिर बाबा (अलियाबड़ा, जामनगर)
*संदल :*
हजरत बुलंद शहीद व हज़रत मोहसिन दादा (बड़ौदा)
सैय्यिद अहमद उर्फ़ क़ाज़ी बड़ा व सैय्यिद फजलुल्लाह (अहमदाबाद)
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Wednesday, 17 May 2017

*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #16
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*तिन के अंदर तिन पोशीदा*
     मीठे और प्यारे इस्लामी भाइयो ! कोई नेकी छोड़नी नही चाहिए न जाने अल्लाह को कौन सी नेकी पसन्द आ जाए और कोई छोटे से छोटा गुनाह भी नही करना चाहिए नजाने किस गुनाह पर अल्लाह नाराज़ हो जाए और उस का दर्दनाक अज़ाब आ कर घेर ले। खलीफए आला हज़रत, अबू युसूफ मुहम्मद शरीफ मुहद्दिस कोटल्वी عليه رحما नकल फ़रमाते है : अल्लाह ने तीन चीज़ों को तीन चीज़ों में पोशीदा रखा है (1) अपनी रिज़ा को अपनी इताअत में (2) अपनी नाराज़गी को अपनी फ़रमानी में और (3) अपने औलिया को अपने बन्दों में। ये क़ौल नकल करने के बाद फ़रमाते है : लिहाज़ा हर ताअत और हर नेकी को अमल में लाना चाहिये की मालुम नहीं किस नेकी पर वो राज़ी हो जाए और हर बदी से बचना चहिए क्यू की मालुम नही किस बदी पर वो नाराज़ हो जाए। ख्वाह वो केसी ही छोटी हो। मसलन बिला इजाज़त किसी के तिनके का खिलाल करना बी ज़ाहिर एक ममुलिसि बात है। मगर मुमकिन है की इस बुराई में ही हक़ तआला की नाराज़गी छुपी हुई हो। तो ऐसी छोटी छोटी बातो से भी बचना चाहिए।
*✍🏽अख्लाकुस्सालिहीन, 56*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 42*

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*मर्द व औरत के लिये गुस्ल की एहतियाते*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

★ अगर मर्द के सर के बाल गुंधे हुए हो तो उन्हें खोल कर जड़ से नोक तक पानी बहाना फ़र्ज़ है।
★ औरत पर सिर्फ जड़ तर कर लेना ज़रूरी है खोलना ज़रूरी नहीं। हा अगर चोटी इतनी सख्त गुंधी हुई हो के बे खोले जड़े तर न होंगी तो खोलना ज़रूरी है। अगर कानो में बाली या नाक में नथ का छेद हो और वो बंद न हो तो उसमे पानी बहाना फ़र्ज़ है।
★ वुज़ू में सिर्फ नाक के नथ के छेद में और गुस्ल में अगर कान और नाक दोनों में छेद हो तो दोनों में पानी बहाए।
★ भवो, मुछो और दाढ़ी के हर बाल का जड़ से नोक तक और इनके निचे की खाल का धोना ज़रूरी है।
★ कान का हर पुर्ज़ा और इसके सुराख का मुह धोए। कानो के पीछे के बाल हटा कर पानी बहाए।
★ ठोड़ी और गले का जोड़, के मुह उठाए बिगैर न धुलेगा।
★ हाथो को अच्छी तरह उठा कर बगले धोए। बाज़ू का हर पहलू धोए। पीठ का हर ज़र्रा धोए। पेट की बल्टे उठा कर धोए।
★ नाफ में भी पानी डाले अगर पानी बहने में शक हो तो नाफ में ऊँगली डाल कर धोए।
★ जिस्म का हर रोंगटा जड़ से नोक तक धोए।
★ रान और पेड़ू (नाफ से निचे के हिस्से) का जोड़ धोए।
★ जब बैठ कर नहाए तो रान और पिंडली के जोड़ पर भी पानी बहाना याद रखे।
★ दोनों सुरीन के मिलने की जगह का ख्याल रखे, खुसुसन जब के खड़े हो कर नहाए।
★ रानो की गोलाई और पिंडलियों की करवटों पर पानी बहाए।
★ ज़कर व उन्स-यैन (यानि फ़ोतों) की निचली सतह जोड़ तक और उन्स-यैन के निचे की जगह जड़ तक धोए।
★ जिसका खतना न हुवा वो अगर खाल चढ़ सकती हो तो चढ़ा कर धोए और खाल के अंदर पानी चढ़ाए।
*✍🏽मुलख्खस अज़ बहारे शरीअत, जी.1, स. 317-318*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 86-87*

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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #15
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*हज़ार गुना षवाब*
     रमज़ान में नेकियों का अज्र बहुत बढ़ जाता है लिहाज़ा कोशिश करके ज़्यादा से ज़्यादा नेकियां इस माह में जमा करलेनि चाहिये। चुनान्चे हज़रत इब्राहिम नखई رحمة الله عليه फ़रमाते है : रमज़ान में एक दिन का रोज़ा रखना एक हज़ार दिन के रोज़े से अफज़ल है और रमज़ान में एक तस्बीह यानि سبحان الله कहना इस माह के इलावा हज़ार मर्तबा कहने से अफ़्ज़ल है और रमज़ान में एक रकअत पढ़ना गैर माह की एक हज़ार रकअतो से अफ़्ज़ल है।
*✍🏽अद्दुररुल मन्सूर, 1/454*

*रमज़ान में ज़िक्र की फ़ज़ीलत*
     हज़रत उमर फारुके आज़म رضي الله عنه से रिवायत है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया : रमज़ान में ज़िकरुल्लाह करने वाले को बख्श दिया जाता है और इस महीने में अल्लाह से मांगने वाला महरूम नही रहता।
*✍🏽शोएबुल ईमान, 3/311, हदिष:3627*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 35*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
*___________________________________*
मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
*___________________________________*
*​DEEN-E-NABI ﷺ*
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*Aurat ke Masaail* #07
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*Khoon Haiz Ke Rung*

♻ Sawal:- Meri Dost Sabina Ko Sabz Rung (Hara Rung) Ka Haiz Ke Dinon Me Khoon Aaya Kiya Uska Shumar Haiz Me Hoga?

📝 Jawab:- Aap Ki Dost Sabina Ko Jo Sabz (Hara Rung) Rung Ka Khoon Aaya Hai Uska Shumar Haiz Me Hi Hoga.
↪ Kiyon Ki Haiz Ke 6 Rung Hai...
👉 Siyah (Black)
👉 Shurkh (Red)
👉 Sabz (Green)
👉 Zard (Yellow)
👉 Gudla (Jama Huwa Khoon Ka Rung)
👉Mityala (Mitti Colour)

Agar In Rungon Me Se Bari Ke Din (Yani Period Ke Dauran) Me Khoon Aaye To Wo Haiz (Period) Hai.
*✍🏽Bahare Shariat Hissa-02, Page No.-43*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
*___________________________________*
मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Tuesday, 16 May 2017

*गुस्ल के फराइज़* 02
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*नाक में पानी चढ़ाना*
     जल्दी जल्दी नाक की नोक पर पानी लगा लेने से काम नहीं चलेगा बल्कि जहा तक नर्म जगह है यानि सख्त हड्डी के शुरू तक धुलना लाज़िम है। और ये यु हो सकेगा की पानी को सूंघ कर ऊपर खिंचीये। ये ख़याल रखिये की बाल बराबर भी जगह धुलने से न रह जाए वरना गुस्ल न होगा। नाक के अंदर अगर रीठ सुख गई है तो उसका छुड़ाना फ़र्ज़ है, नीज़ नाक के बालो का धोना भी फ़र्ज़ है।
*✍🏽बहारे शरीअत, जी.1, स.316*
*✍🏽फतावा रज़विय्या मुखर्रजा, जी.1, स. 439-440*

*तमाम ज़ाहिरी बदन पर पानी बहाना*
     सर के बालो से ले कर पाउ के तल्वो तक जिस्म के हर पुर्ज़े और हर हर रोंगटे पर पानी बह जाना ज़रूरी है, जिस्म की बाज़ जगहे ऐसी है की अगर एहतियात न की तो वो सुखी रह जाएगी और गुस्ल न होगा।
*✍🏽बहारे शरीअत, जी.1, स 317*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 85-86*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* 13
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*दो अँधेरे दूर*
     मन्कुल है की अल्लाह ने हज़रते मूसा कलीमुल्लाह से फ़रमाया की में ने उम्मते मुहम्मदिय्या को दो नूर अता किये है ताकि वो दो अंधेरो के नुक़्सान से महफूज़ रहे। मूसा कलीमुल्लाह ने अर्ज़ की या अल्लाह ! वो दो नूर कौन से है ? इर्शाद हुवा "नुरे रमज़ान" और "नुरे क़ुरआन"। मूसा कलीमुल्लाह ने अर्ज़ की : दो अँधेरे कौन से है ? फ़रमाया : "एक क़ब्र" और "दूसरा क़यामत" का।
*✍🏽दुर्रतुन्नासीहीन, 9*

*बख्शीश का बहाना*
     हज़रते अलियुल मुर्तज़ा كرم الله وجهه الكريم फ़रमाते है : अगर अल्लाह को उम्मते मुहम्मदी पर अज़ाब करना मक़सूद  होता तो उन को रमज़ान और सूरए कुल्हु वल्लाह शरीफ हरगिज़ इनायत न फ़रमाता।
*✍🏽नुज़हतुल मजालिस, 1/216*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 28*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*Aurat ke Masaail* #06
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*Haiz Ya Istihaza*

♻ Sawal:- Uzma Ka 7 Din Haiz Aaya Uske Baad Uzma Ko 10 Din Baad Dobarah Khoon Aaya- To Kiya Ye Khoon Haiz Ka Hai Ya Istihaza Ka Hai?

📑 Jawab:-2 Haizon Ke Darmiyan Kam Az Kam Pure 15 Din Ka Fasla Zaruri Hai Magar Pure 15 Din Na Huwe Ke Khoon Aaya Woh Istihaza Hai.
*✍🏽Bahare Shariat Hissa-02, Page No-43*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Monday, 15 May 2017

*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* 12
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*जुमुआ की हर घड़ी में दस लाख की मगफिरत*
     हज़रते अब्दुलाह इब्ने अब्बास رضي الله عنه से रिवायत है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم का फरमान है "अल्लाह माहे रमज़ान में रोज़ाना इफ्तार के वक़्त दस लाख ऐसे गुनाहगारो को जहन्नम से आज़ाद फ़रमाता है जिन पर गुनाहो की वजह से जहन्नम वाजिब हो चुकी थी, नीज़ शबे जुमुआ और रोज़े जुमुआ की हर हर घड़ी में ऐसे दस लाख गुनाहगारो को जहन्नम से आज़ाद किया जाता है जो अज़ाब के हक़दार क़रार दिये चुके होते है।
*✍🏽कन्जुल उम्माल, 8/223, हदिष:23716*

*भलाई ही भलाई*
     हज़रते उमर फारुके आज़म رضي الله عنه फ़रमाते है : उस महीने को खुश आमदीद है जो हमें पाक करने वाला है। पूरा रमज़ान खैर ही खैर है दिन का रोज़ा हो या रात का क़याम। इस महीने में खर्च करना जिहाद में खर्च करने का दर्जा रखता है।
*✍🏽तम्बीहुल गाफिलिन, 176*

*खर्च में कुशादगी करो*
     हज़रते ज़ुमुरह رضي الله عنه से मरवी हे की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم फ़रमाते है : माहे रमज़ान में घर वालो के खर्च में कुशादगी करो क्यू की माहे रमज़ान में खर्च करना अल्लाह की राह में खर्च करने की तरह है।
*✍🏽अल जामिउस्सागिर, 162, हदिष:2716*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 27*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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*गुस्ल के फराइज़* #01
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*गुस्ल के 3 फराइज़*
1. कुल्ली करना।
2. नाक में पानी चढ़ाना।
3. तमाम ज़ाहिर बदन पर पानी बहाना।
*✍🏽फतावा आलमगिरी, जी.1, स.13*

*कुल्ली करना*
     मुह में थोडा सा पानी ले कर पच करके डाल देने का नाम कुल्ली नहीं, बल्कि मुह के हर पुर्ज़े, गोशे, होटो से हल्क की जड़ तक हर जगह पानी बह जाए। इसी तरह दाढ़ों के पीछे गालो की तह में, दातो की खिड़कियों और जडो और ज़बान की हर करवट पर बल्कि हल्क के कनारे तक पानी बहे।
    रोज़ा न हो तो गरगरा भी कर लीजिये की सुन्नत है।
     दातो में छलिया के दाने या बोटी के रेशे वग़ैरा हो तो उन को छुड़ाना ज़रूरी है। हा अगर छुड़ाने में ज़रर (यानि नुक्सान) का अंदेशा हो तो मुआफ़ है,
     गुस्ल से क़ब्ल दातो में रेशे वग़ैरा महसूस न हुए और रह गए, नमाज़ भी पढ़ ली बाद को मालुम होने पर छुड़ा कर पानी बहाना फ़र्ज़ है, पहले जो नमाज़ पढ़ी थी वो हो गई।
     जो हिलता दांत मसाले से जमाया गया या तार से बांधा गया और तार या मसाले के निचे पानी न पहोचता हो तो मुआफ़ है।
*✍🏽बहारे शरीअत, जी.1, स.316*
*✍🏽फतावा रज़विय्या मुखर्रजा, जी.1, स.439-440*

     जिस तरह की एक कुल्ली गुस्ल के लिये फ़र्ज़ है इसी तरह की 3 कुल्लिया वुज़ू के लिये सुन्नत है।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 85*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* 11
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*हर शब 60,000 की बख्शिश*
     हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने मसऊद رضي الله عنه से रिवायत है कि हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया : रमज़ान की हर शब आसमानों में सुब्हे सादिक़ तक एक मुनादी ये निदा करता है : ऐ अच्छाई मांगने वाले ! मुकम्मल कर (यानी अल्लाह की इताअत की तरफ आगे बढ़) और खुश हो जा। और ऐ शरीर ! शर से बाज़ आ जा और इब्रत हासिल कर। है कोई मग्फिरत का तालीब ! कि उसकी तलब पूरी की जाए। है कोई तौबा करने वाला ! कि उस की तौबा क़बूल की जाए। है कोई तौबा करने वाला ! कि उसकी तौबा क़बूल की जाए। है कोई दुआ मांगने वाला ! कि उसकी दुआ क़बूल की जाए। है कोई साइल ! कि उसका सुवाल पूरा किया जाए।
     अल्लाह रमज़ानुल मुबारक की हर शब में इफ्तार के वक़्त 60,000 गुनाहगारो को दोज़ख से आज़ाद फ़रमा देता है। और ईद के दिन सारे महीने के बराबर गुनाहगारो की बख्शिश की जाती है।
*✍🏽अद्दुररुल मन्सूर,1/146*
     मीठे और प्यारे इस्लामी भाइयो ! माहे रमज़ान की साअते कितनी बा बरकत है कि हर लम्हा बन्दों में रहमत व मग्फिरते इलाही तक़्सीम हो रही है। ये वो माह है जिस के दिन रोज़ो में और राते तिलावते कलाम पाक में सर्फ होती है और येही दोनों चीज़े  रोज़े महशर मुसलमान के लिये शफ़ाअत का सामान भी फ़राहम करेंगे।

*रोज़ाना दस लाख गुनाहगारो की दोज़ख से रिहाई*
     अल्लाह की इनायतो, रहमतो और बख्शिशो का तज़किरा करते हुए एक मौके पर हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने इर्शाद फ़रमाया : जब रमज़ान की पहली रात होती है तो अल्लाह अपनी मख्लूक़ की तरफ नज़र फ़रमाता है और जब अल्लाह किसी बन्दे की तरफ नज़र फ़रमाता है और जब अल्लाह किसी बन्दे की तरफ नज़र फरमाए तो उसे कभी अज़ाब न देगा।
     और हर रोज़ दस लाख गुनाहगारो को जहन्नम से आज़ाद फ़रमाता है और जब 29वी रात होती है तो महीने भर में जितने आज़ाद किये उन गिनती के बराबर उस एक रात में आज़ाद फ़रमाता है।
     फिर जब ईदुल फ़ित्र की रात आती है। मलाइका ख़ुशी करते है और अल्लाह अपने नूर की ख़ास तजल्ली फ़रमाता है और फ़रिश्तो से फ़रमाता है "ऐ गुरोहे मलाइका ! उस मज़दूर का क्या बदला है जिस ने काम पूरा कर लिया ? फ़रिश्ते अर्ज़ करते है उस को पूरा पूरा अज्र दिया जाए अल्लाह फ़रमाता है : में तुम्हे गवाह करता हु की में ने उन सब को बख्श दिया।
*✍🏽कन्जुल उम्माल, 8/219, हदिष:23702*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 25*

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*Aurat ke Masaail* #05
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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  *Haiz Ki Muddat*

♻ Sawal:- Firdous Ko Pahle Do Din Haiz Aa Kar Ruk Gaya Phir Uske Baad Khoon Aaya Hi Nahi To Kya Woh Khoon. Haiz Me Shumar Ho Ga Ya Nahi?

📝 Jawab:- Firdous Ko Do Din Haiz Aa Kar Ruk Gaya Phir Uske Baad Khoon Aaya Hi Nahi To Ye Khoon Haiz Me Shumar Nahi Hoga Kiyon Ki Haiz Ki Kam Se Kam Muddat 3 Din Aur 3 Raten Aur Ziyadah Se Ziyadah 10 Din Aur 10 Raten Hain Ek Mint Bhi Kam Hai To Haiz Nahi .
*✍🏽Bahare Shariat Hissa-2, Safa No.-42*

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Sunday, 14 May 2017

*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* 10
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*जन्नत सजाई जाती है*
     रमज़ान के इस्तिक़बाल के लिये सारा साल जन्नत को सजाया जाता है। चुनान्चे हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने उमर رضي الله عنه से रिवायत है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم का फरमान है : बेशक जन्नत इब्तिदाई साल से आइन्दा साल तक रमज़ान के लिये सजाई जाती है और फ़रमाया रमज़ान के पहले दिन जन्नत के दरख्तो के निचे से बड़ी आँखों वाली हूरो पर हवा चलती है और वो अर्ज़ करती है, ऐ पवरदगार ! अपने बन्दों में से ऐसे बन्दों को हमारा शौहर बना जिन को देख कर हमारी आँखे ठंडी हो और जब वो हमे देखे तो उन की आँखे भी ठंडी हो।
*✍🏽शुअबुल ईमान, 3/312, हदिष:3633*

     जन्नत की अज़मत की तो क्या ही बात है ! काश ! हमे बे हिसाब बख्श दिया जाए और जन्नतुल फ़िरदौस में मदीने वाले आक़ा صلى الله عليه وسلم का पड़ोस नसीब हो जाए।
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ, 20*

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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* 10
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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*जन्नत सजाई जाती है*
     रमज़ान के इस्तिक़बाल के लिये सारा साल जन्नत को सजाया जाता है। चुनान्चे हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने उमर رضي الله عنه से रिवायत है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم का फरमान है : बेशक जन्नत इब्तिदाई साल से आइन्दा साल तक रमज़ान के लिये सजाई जाती है और फ़रमाया रमज़ान के पहले दिन जन्नत के दरख्तो के निचे से बड़ी आँखों वाली हूरो पर हवा चलती है और वो अर्ज़ करती है, ऐ पवरदगार ! अपने बन्दों में से ऐसे बन्दों को हमारा शौहर बना जिन को देख कर हमारी आँखे ठंडी हो और जब वो हमे देखे तो उन की आँखे भी ठंडी हो।
*✍🏽शुअबुल ईमान, 3/312, हदिष:3633*

     जन्नत की अज़मत की तो क्या ही बात है ! काश ! हमे बे हिसाब बख्श दिया जाए और जन्नतुल फ़िरदौस में मदीने वाले आक़ा صلى الله عليه وسلم का पड़ोस नसीब हो जाए।
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ, 20*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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*15 लाइन अरबी क़ुरआन* इस लिन्क पे जाके लोड कीजिये।

https://drive.google.com/file/d/0BxNzOp0x1IN_eHFvcmFXT29yc1U/view?usp=drivesdk

दुआए खैर तालिब
جزاك الله خيرا

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*गुस्ल का तरीका*
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     बिगैर ज़बान हिलाए दिल में इस तरह निय्यत कीजिये की में पाकी हासिल करने के लिये गुस्ल करता हु।
◆ पहले दोनों हाथ पहुचो तक 3-3 बार धोइए
◆ फिर इस्तिन्जे की जगह धोइए ख़्वाह नजासत हो या न हो
◆ फिर जिस्म पर अगर कही नजासत हो तो उसको दूर कीजिये
◆ फिर नमाज़ का सा वुज़ू कीजिये मगर पाउ न धोइये, हा अगर चौकी वग़ैरा पर गुस्ल कर रहे है तो पाउ धो लीजिये
◆ फिर बदन पर तेल की तरह पानी चुपड़ लीजिये, खुसुसन सर्दियो में (इस दौरान साबू भी लगा सकते है)
◆ फिर 3 बार सीधे कंधे पर पानी बहाइये, फिर 3 बार उलटे कंधे पर
फिर सर पर और तमाम बदन पर 3 बार
◆ फिर गुस्ल की जगह से अलग हो जाइये
◆ अगर वुज़ू करने में पाउ नहीं धोए थे तो अब धो लीजिये
● नहाने में क़िबला रुख न हो, तमाम बदन पर हाथ फेर कर मल कर नहाइए।

◆ दौराने गुस्ल किसी किस्म की गुफ्तगू मत कीजिये, कोई दुआ भी न पढ़िये, नहाने के बाद तोलिये वग़ैरा से बदन पोछने में हरज नहीं। नहाने के बाद फौरन कपड़े पहन लीजिये।
अगर मकरूह वक़्त न हो तो दो रकअत नफ़्ल अदा करना मुस्तहब है।
*✍🏽बहारे शरीअत, जी.1, स.310*
*✍🏽आलमगिरी, जी.1, स. 14*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा  84*

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जो हज़रात अरबी पढ़ना नहीं जानते और वो *गुजरती क़ुरआन शरीफ* हासिल करना चाहते है वो हज़रात निचे दी हुई लिन्क पे जाके लोड करले।

https://www.dropbox.com/sh/ynscyzzeh9l5anq/AACt3sJJWj2_sFiwtwv36o4ya?dl=0

दुआए खैर का तालिब
جزاك الله خيرا

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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #09
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*माहे रमज़ान में मदनी फूल* #04
क़ुरआन में सिर्फ रमज़ान ही का नाम लिया गया और इसी के फ़ज़ाइल बयान हुए। किसी दूसरे महीने का न सराहतन नाम है न ऐसे फ़ज़ाइल। औरतो में सिर्फ बीबी मरयम رضي الله عنها का नाम क़ुरआन में आया। सहाबा में सिर्फ हज़रते ज़ैद इब्ने हारिसा رضي الله عنه का नाम क़ुरआन में लिया गया जिस से इन तीनो की अज़मत मालुम हुई।

     रमज़ान में इफ्तार और सहरी के वक़्त दुआ क़बूल होती है। यानि इफ्तार करते वक़्त और सहरी खा कर। ये मर्तबा किसी और महीने को हासिल नहीं।

     रमज़ान में 5 हरुफ़ है رمضان.  इन में ر से मुराद "रहमते इलाही" م से मुराद "महब्बते इलाही" ض से मुराद "ज़माने इलाही" ا से मुराद "अमाने इलाही" ن से मुराद "नुरे इलाही"।
     और रमज़ान में 5 इबादत खुसूसी होती है। रोज़ा, तरावीह, तिलावते क़ुरआन, एतिकाफ, शबे क़द्र में इबादत। तो जो कोई सिद्के दिल से ये 5 इबादत करे वो उन 5 इनामो का मुस्तहक़ है।
*✍🏽तफ़सीरे नईमी, 2/208*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 19*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
*___________________________________*
मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*Aurat ke Masaail* #04
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

  *Haiz Ki Hikmat*

♻ Allah Ta'ala Ne Haiz Me Kiya Hikmat Poshidah Rakhi Hai?

📝 Aurat Baligha Ke Badan Se Fitratan Jarurat Se Kuch Ziyada Khoon Paidah Ho Jata Hai Ki Hamal (Pregnent) Ki Halat Me Wo Khoon Bachche Ki Giza Ke Kaam Aaye Aur Bachche Ke Dudh Pine Ke Zamane Men Wohi Khoon Dudh Ho Jaye Aur Aysa Na Hoto Hamal Aur Dudh Pilane Ke Zamane Me Uski Jaan Par Ban Jaye Yahi Wajah Hai Ki Hamal Aur Ibtidaae Shirkhawargi (Bachche Ko Dudh Pilane Ke Shuruwati Waqt) Men Khoon Nahi Aata Aur Jis Zamane Me Na Hamal Na Dudh Pilana Woh Khoon Aa kar Badan Se Na Nikle To Qism Qism Ki Bimariyan Ho Jayen.
*✍🏽Bahar-E-Shariat Hissa-2, Safa No.-42*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
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Saturday, 13 May 2017

*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #08
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*माहे रमज़ान में मदनी फूल* #03
     रमज़ान में इब्लीस क़ैद कर लिया जाता है और दोज़ख के दरवाज़े बन्द हो जाते है जन्नत आरास्ता की जाती है इस के दरवाज़े खोल दिये जाते है। इस लिये इन दिनों में नेकियों की ज़ियादती और गुनाहो की कमी होती है, जो लोग गुनाह करते भी है वो नफ्से अम्मारा या अपने साथी शैतान (क़रीन) के बहकावे से करते है।

     रमज़ान के खाने पिने का हिसाब नही।

     क़यामत में रमज़ान व क़ुरआन रोज़ादार की शफ़ाअत करेंगे की रमज़ान तो कहेगा, मौला ! में ने इसे दिन में खाने पीने से रोका था और क़ुरआन अर्ज़ करेगा की या रब ! में ने इसे रात में तिलावत व तरावीह के ज़रिए सोने से रोका।

    हुज़ूर صلى الله عليه وسلم रमज़ानुल मुबारक में हर कैदी को छोड़ देते थे और हर साइल को अता फ़रमाते थे। रब भी रमज़ान में जहन्नमियो को छोड़ता है। लिहाज़ा चाहिये की रमज़ान में नेक काम किया जाए और गुनाहो से बचा जाए।
*✍🏽तफ़सीरे नईमी, 2/208*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 18*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*मौजिज़ए शककुल कमर*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     बुखारी शरीफ में है : क़ुफ़्फ़ारे मक्का ने सरकारे मदीना ﷺ की खिदमते बा बरकत में मोजिज़ा दिखने का मुतालबा किया तो आप ने उन्हें चाँद के दो टुकड़े कर के दिखा दिये।
*✍🏽बुखारी, जी.2, स.579, हदिष:3868*

    अल्लाह तआला पारह 27 सूरतुल कमर की पहली दो आयत में इर्शाद फ़रमाता है :
पास आई क़ियामत और शक हो गया चाँद और अगर देखे कोई निशानी तो मुह फ़ेरते और कहते है ये तो जादू है चला आता।

     हज़रते मुफ़्ती अहमद यार खा अलैरहमा इस हिस्सए आयत "और शक हो गया चाँद" के तहत फ़रमाते है : इस आयत में हुज़ूर ﷺ के एक बड़े मौजिज़ए शक्कूल कमर यानि चाँद के दो टुकड़े हो जाने का ज़िक्र है।
हवाला
*✍🏽नूरुल इरफ़ान, सफा 843*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 77*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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गर होजाए यक़ीन के.....
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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #07
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*माहे रमज़ान में मदनी फूल* #02
रमज़ान में नफ्ल का षवाब फ़र्ज़ के बराबर और फ़र्ज़ का षवाब 70 गुना मिलता है।

     बाज़ उलमा फ़रमाते है की जो रमज़ान में मर जाए उस से सुवालाते क़ब्र भी नही होते।

     इस महीने में शबे क़द्र है। गुज़श्ता आयत से मालुम हुवा की क़ुरआन रमज़ान में आया और दूसरी जगह फ़रमाया : बेशक़ हम ने शबे क़द्र में उतारा। (पारह 30, अल क़द्र:1)
     दोनों आयतो के मिलाने से मालुम हुवा की शबे क़द्र रमज़ान में ही है और वो गालिबन 27वी शब् है। क्यू की लैलतुल क़द्र में 9 हरुफ़ है और ये लफ्ज़ सूरए क़द्र में 3 बार आया। जिस से 27 हासिल हुए मालुम हुवा की वो 27वी शब् है।
*✍🏽तफ़सीरे नईमी, 2/208*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 17*

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Friday, 12 May 2017

*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #06
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*माहे रमज़ान में मदनी फूल* #01
     काबाए मुअज़्ज़मा मुसलमानो को बुलाकर देता है और रमज़ान आ कर रहमते बाटता है। गोया काबा कुवा है और रमज़ान दरया, या काबा दरया है और रमज़ान बारिश।

     हर महीने में ख़ास तारीखे और तारीखों में भी ख़ास वक़्त में इबादत होती है। मसलन बकरी ईद की चन्द मख़्सूस तारीखे में हज, मुहर्रम की 10वी तारीख अफज़ल, मगर माहे रमज़ान में हर दिन और हर वक़्त इबादत होती है।
     रोज़ा इबादत, इफ्तार इबादत, इफ्तार के बाद तरावीह का इन्तिज़ार करना इबादत, तरावीह पढ़ कर सहरी के इंतज़ार में सोना इबादत, फिर सहरी खाना भी इबादत अल गरज हर आन में खुदा की शान नज़र आती है।

    रमज़ान एक भट्टी है जेसे की भट्टी गन्दे लोहे को साफ़ और साफ़ लोहे को मशीन का पुर्ज़ा बना कर क़ीमती कर देती है और सोने को ज़ेवर बना कर इस्तेमाल के लायक कर देती है। ऐसे ही माहे रमज़ान गुनाहगारो को पाक करता और नेक लोगो के दर्जे बढ़ाता है।
*✍🏽तफ़सीरे नईमी, 2/208*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 17*

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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #06
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*माहे रमज़ान में मदनी फूल* #01
     काबाए मुअज़्ज़मा मुसलमानो को बुलाकर देता है और रमज़ान आ कर रहमते बाटता है। गोया काबा कुवा है और रमज़ान दरया, या काबा दरया है और रमज़ान बारिश।

     हर महीने में ख़ास तारीखे और तारीखों में भी ख़ास वक़्त में इबादत होती है। मसलन बकरी ईद की चन्द मख़्सूस तारीखे में हज, मुहर्रम की 10वी तारीख अफज़ल, मगर माहे रमज़ान में हर दिन और हर वक़्त इबादत होती है।
     रोज़ा इबादत, इफ्तार इबादत, इफ्तार के बाद तरावीह का इन्तिज़ार करना इबादत, तरावीह पढ़ कर सहरी के इंतज़ार में सोना इबादत, फिर सहरी खाना भी इबादत अल गरज हर आन में खुदा की शान नज़र आती है।

    रमज़ान एक भट्टी है जेसे की भट्टी गन्दे लोहे को साफ़ और साफ़ लोहे को मशीन का पुर्ज़ा बना कर क़ीमती कर देती है और सोने को ज़ेवर बना कर इस्तेमाल के लायक कर देती है। ऐसे ही माहे रमज़ान गुनाहगारो को पाक करता और नेक लोगो के दर्जे बढ़ाता है।
*✍🏽तफ़सीरे नईमी, 2/208*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 17*

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*नूर का खिलौना*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     जिस चाँद पर साइन्स दान अब पहोचने का दावा कर रहा है वो चाँद तो मेरे प्यारे आक़ा ﷺ के ताबे फरमान है।
     चुनान्चे "दलाइलुननुबूव्व्ह" में है : सुल्ताने दो जहां صلى الله عليه وسلم के चचाजान हज़रते अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब رضي الله تعالي عنه फ़रमाते है : मेने बारगाहे रिसालत में अर्ज़ की : या रसूलुल्लाह ﷺ ! मेने आप के बचपन में ऐसी बात देखि जो आप की नबुव्वत पर दलालत करती थी और मेरे ईमान लाने के अस्बाब में से ये भी एक सबब था। चुनान्चे मेने देखा की आप गहवारे (यानि पिंघोड़े) में लेटे हुए चाँद से बाते कर रहे थे और जिस तरफ आप ऊँगली से इशारा फ़रमाते चाँद उसी तरफ हो जाता था।
     सरकारे नामदार ﷺ ने फ़रमाया : में उस से बाते करता था और वो मुझसे बाते करता था और मुझे रोने से बहलाता था और में उस के गिरने की आवाज़ सुनता था जब की वो अर्शे इलाही के निचे सज्दे में गिरता था।
*✍🏽दलाइलुननुबूव्वत जी.2, स. 41*

आला हज़रत रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते है :
     चाँद झुक जाता जिधर ऊँगली उढ़ाते महद में
          क्या ही चलता था इशारो पर खिलौना नूर का

एक महब्बत वाले ने कहा है :
     खेलते थे चाँद से बचपन में आक़ा इस लिये
          ये सरापा नूर थे वो था खिलौना नूर का....
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 66-67*

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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #05
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*आक़ा का बयाने जन्नत निशान*
     हज़रते सलमान फ़ारसी رضي الله عنه फ़रमाते है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने माहे शाबान के आखरी दिन बयान फ़रमाया : ऐ लोगो ! तुम्हारे पास अज़मत वाला बरकत वाला महीना आया, वो महीना जिस में एक रात ऐसी भी है जो हज़ार महीनो से बेहतर है, इस के रोज़े अल्लाह ने फ़र्ज़ किये और इसकी रात में क़याम सुन्नत है, जो इसमें नेकी का काम करे तो ऐसा है जेसे और किसी महीने में फ़र्ज़ अदा किया और इसमें और इसमें जिसने फ़र्ज़ अदा किया तो ऐसा है जेसे और दिनों में 70 फ़र्ज़ अदा किये।
     ये महीना सब्र का है और *सब्र का षवाब जन्नत है* और ये महीना गम ख्वारी और भलाई का है और इस महीने में मोमिन का रिज़्क़ बढ़ाया जाता है। जो इसमें रोज़ादार को *इफ्तार कराए* उसके गुनाहो के लये मगफिरत है और उसकी गर्दन *आग से आज़ाद* कर दी जाएगी। और इस इफ्तार करने वाले को ऐसा ही षवाब मिलेगा जैसा रोज़ा रखने वाले को मिलेगा। बगैर उसके अज्र में कुछ कमी हो।
     हमने अर्ज़ की या रसूलल्लाह صلى الله عليه وسلم ! हम में से हर शख्स वो चीज़ नही पाता जिस से रोज़ा इफ्तार करवाए। आप ने इर्शाद फ़रमाया : अल्लाह ये षवाब उस शख्स को देगा जो एक घूंट दूध या एक खजूर या एक घूंट पानी से रोज़ा इफ्तार करवाए और जिस ने रोज़ादार को पेट भर कर खिलाया, उस को अल्लाह मेरे हौज़ से पिलाएगा की कभी प्यासा न होगा। यहां तक की *जन्नत में दाखिल हो जाए।*
     ये वो महीना है की इसका *अव्वल आसरा रहमत* है, इसका *दूसरा असरा मगफिरत* है और *तीसरा असरा जहन्नम से आज़ादी* है।
     इस महीने में 4 बातो की कसरत करो। इनमे से 2 बाते ऐसी है जिन के ज़रिए तुम अपने रब को राज़ी करोगे (1) لا اله الا الله की गवाही देना (2) इस्तिग़फ़ार करना। और दूसरी 2 बातो जिन से अपने रब से बे नियाज़ी नही (1) अल्लाह से जन्नत तलब करना (2) जहन्नम से अल्लाह की पनाह तलब करना।
*✍🏽सहीह इब्ने खुज़ैम, 3/1887*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 14*

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🔮 *Haizo Nifaas Ki Halat Men Ruza Wa Namaz Ka Hukm.*

♻ Sawal:-Hazrat Mera Naam Usman Hai Ek Suwal Meri Phupi Haizo Nifaas Ke Dinon Me Farz Namazo Aur Farz Rozo Ke Bare Men Puchhti Hain Ki Kya Unki Qaza Hai ?

📝  *Jawab:- Haizo Nifaas Ki Halat Main Roza Rakhna Haram Hai Balki Namazen Muaf Hain Unki Qaza Bhi Nahi Han Rozo Ki Qaza Aur Dino Men Rakhna Farz Hai.*
*✍🏽 Durre Mukhtar ' Alamgiri*

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Thursday, 11 May 2017

*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #04
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*सगीरा गुनाहो का कफ़्फ़ारा*
     हज़रते अबू हुरैरा رضي الله عنه से मरवी है, हुज़ूर صلى الله عليه وسلم का फरमाने पुर सुरूर है : पंचो नमाज़े, जुमुआ अगले जुमुआ तक और रमज़ान अगले रमज़ान तक गुनाहो का कफ़्फ़ारा है जब तक की कबीरा गुनाहो से बचा जाए।
*✍🏽सहीह मुस्लिम, 144, हदिष:233*

*तौबा का तरीक़ा*
     रमज़ानुल मुबारक में रहमतो की छमाछम बारिशें और गुनाहे सगीरा के कफ्फारे का सामान हो जाता है। गुनाहे कबीरा तौबा से मुआफ़ होते है।
     तौबा का तरीक़ा ये है की जो गुनाह हुवा ख़ास उस गुनाह का ज़िक्र कर के दिल की बेज़ारी और आइन्दा उस से बचने का अहद कर के तौबा करे। मसलन झूट बोला, तो बारगाहे खुदावन्दी में अर्ज़ करे, या अल्लाह ! मेने जो ये झूट बोला इससे तौबा करता हु और आइन्दा नही बोलूंगा।
     तौबा के दौरान दिल में झूट से नफरत हो और "आइन्दा नही बोलूंगा" कहते वक़्त दिल में ये इरादा भी हो की जो कुछ कह रहा हु ऐसा ही करूँगा जभी तौबा है। अगर बन्दे की हक़ तलफी की है तो तौबा के साथ साथ उस बन्दे से मुआफ़ करवाना भी ज़रूरी है।
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 12*

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🔮 *Hamal Shaqit Hone Ke Baad Khoon Mustaqil Jari Rahna* #01
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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♻ Sawal:- Raziya Ko Hamal Saqit Huwa Aur Use Ye Maloom Nahi Ki Koi Uzu Bana Tha Ya Ya Nahi Na Ye Yad Hai Ke Hamal Kitne Din Ka Tha Ki Usi Se Uzu Ka Banna Ya Na Banna Maloom Ho Jata Aur Hamal Saqit Hone Ke Bad Khoon Hamesha Jari Rahe Ho Us Khoon Ka Kiya Hukm Hai ?

📝 *Jawab:- Hamal Saqit Huwa Aur Ye Maloom Nahi Ki Koi Uzu Bana Tha Ya Nahi Na Ye Yad Ki Hamal Kitne Din Ka Tha (Ke Usi Se Uzu Ka Banna Na Banna Maloom Ho Jata Yani 120 Din Ho Gaye Hain To Uzu Banna Qarar De Diya Jayega ) Aur Bad Isqaat Ke Khoon Hamesha Ko Jari Ho Gaya To Use Haiz Ke Hukm Me Samjhe Ke Haiz Ki Jo Adat Thi Uske Gujarne Ke Bad Naha Kar Namaz Shuru Kar De Aur Aadat Na Thi To 10 Din Ke Baad.*
{📚 Rad Al Mukhtar}


♻ Sawal:- Fatima Ko 40 Din Se Ziyada Khoon Aaya Aur Use  Ye Yad Nahi Ke Is Se Pahle Bache Ke Paidah Hone Me Din Khoon Aaya Tha Is Bare Main Bataiye Ki Ye Khoon Nifas Ka Has Ya Istihaza Ka ?

📝 *Jawab:- Kisi Ko 40 Din Se Jiyada Khoon Aaya To Agar Uske Pahli Bar Bacha Paida Huwa Hai Ya Ye Yad Nahi Ke Is Se Pahle Bachcha Paidah Hone Men Kitne Din Tak Nifaas Hai Aur Jitna Jyada Hai Woh Istihaza Hai Jaise Adat 30 Din Ki Thi Aur Is Bar 45 Din Aaya To 30 Din Nifaas Ke Hai Aur 15 Din Istihaza Ke.*
{📚Durre Mukhtar' Rad Al Mukhtar}

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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #03
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*पांच खुसूसी करम*
     हज़रत ज़ाबिर बिन अब्दुल्लाह رضي الله عنه से रिवायत है कि हुज़ूर صلى الله عليه وسلم फरमाते है : मेरी उम्मत को माहे रमज़ान में 5 चीज़े ऐसी अता की गई जो मुझ से पहले किसी नबी को न मिली :
1. जब रमज़ान की पहली रात होती है तो अल्लाह उनकी तरफ रहमत की नज़र फ़रमाता है और जिस की तरफ अल्लाह नज़रे रहमत फरमाए उसे कभी भी अज़ाब न देगा।
2. शाम के वक़्त ऊन में मुह की बू (जो भूक की वजह से होती है) अल्लाह के नज़दीक मुश्क की खुशबु से भी बेहतर है।
3. फ़रिश्ते हर रात और दिन उन के लिये मगफिरत की दुआए करते रहते है।
4. अल्लाह जन्नत को हुक्म फ़रमाता है, मेरे नेक बन्दों के लिये आरास्ता हो जा अन क़रीब वो दुन्या की मशक़्क़त से मेरे घर और करम में राहत पाएंगे।
5. जब माहे रमज़ान की आखरी रात आती है तो अल्लाह सब की मगफिरत फरमा देता है।
     क़ौम में से एक शख्स ने खड़े हो कर अर्ज़ की, या रसुल्लाह صلى الله عليه وسلم क्या ये लैलतुल क़दर है ? इर्शाद फ़रमाया नही, क्या तुम नही देखते की मज़दूर जब अपने कामो से फारिग हो जाते है तो उन्हें उजरत दी जाती है।
*✍🏽अत्तरगिब् वत्तरहिब, 2/56, हदिष:7*
*✍🏽फैजाने रमज़ान शरीफ, 11*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Wednesday, 10 May 2017

*वुज़ू और साइन्स* #14
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*कोहनिया धोने की हिकम्ते*
     कोहनी पर 3 बड़ी रगे है जिस का तअल्लुक़ दिल, जिगर और दिमाग से है और जिस्म का ये हिस्सा उमुमन ढका रहता है, अगर इसको पानी और हवा न लगे तो मुतअद्दिद दिमाग और आसाबि अमराज़ पौदा हो सकते है।

     वुज़ू में कोहनियो समेत हाथ धोने से दिल, जिगर और दिमाग को तक्वीयत पहोचति है और इस तरह इन्शा अल्लाह वो इनके अमराज़ से पहफ़ुज़ रहेगे। मजीद ये की कोहनियो समेत हाथ धोने से सीने के अन्दर ज़खीरा शुदा रोशनियां से बराहे रास्त इंसान का तअलुक काइम हो जाता है और रोशनियो का हुजूम एक बहाव की शक्ल इख्तियार कर लेता है, इस अम्ल से हाथो के अज़लात यानि कलपुर्जे मजीद ताकत वर हो जाते है।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 71*

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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #01
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     खुदा का करोड़ हा एहसान कि उसने हमे माहे रमज़ान जेसी अज़ीमुश्शान नेअमत से सरफ़राज़ फ़रमाया। माहे रमज़ान के फैजान के क्या कहने ! इस की हर घड़ी रहमत भरी है। इस महीने में अज़्रो षवाब बहुत ही बढ़ जाता है। नफ्ल का षवाब फ़र्ज़ के बराबर और फ़र्ज़ का षवाब 70 गुना कर दिया जाता है। बल्कि इस माह में तो रोज़ादार का सोना भी इबादत में शुमार किया जाता है। अर्श उठाने वाले फ़रिश्ते रोज़ादरो की दुआ पर आमीन कहते है और एक हदिष के मुताबिक़ "रमज़ान के रोज़ादार के लिये दरया की मछलिया इफ्तार तक दुआए मगफिरत करती रहती है।
*✍🏽अत्तरगिब् वत्तरहिब, 2/55, हदिष:6*

*इबादत का दरवाज़ा*
     रोज़ा बातिनी इबादत है, क्यू की हमारे बताए बगैर किसी को ये इल्म नही हो सकता है की हमारा रोज़ा है और अल्लाह बातिनी इबादत को ज़्यादा पसन्द फ़रमाता है। एक हदिष के मुताबिक़ "रोज़ा इबादत का दरवाज़ा है।"
*✍🏽अल जमीउस्सागिर, 146, हदिष:2415*

*नुज़ूले क़ुरआन*
     इस माह की एक खुसुसिय्यत ये भी है की अल्लाह ने इस में क़ुरआन नाज़िल फ़रमाया है। चुनान्चे मुक़द्दस क़ुरआन में अल्लाह का नुज़ूले क़ुरआन और माहे रमज़ान के बारे में फरमान है :
रमज़ान का महीना, जिस में क़ुरआन उतरा, लोगो के लिये हिदायत और रहनुमाई और फैसले की रोशन बाते, तो तुम में जो कोई ये महीना पाए ज़रूर इसके रोज़े रखे और जो बीमार या सफर में हो, तो उतने रोज़े और दिनों में। अल्लाह तुम पर आसानी चाहता है और तुम पर दुश्वारी नही चाहता और इसलिये की तुम गिनती पूरी करो और अल्लाह की बड़ाई बोलो इस पर की उस ने तुम्हे हिदायत की और कही तुम हक़ गुज़ार हो।
*परह 2, अल बक़रह:185*
*✍🏽फैजाने रमज़ान शरीफ, 3*

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Tuesday, 9 May 2017

*आक़ा का महीना* #17
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*कब्रस्तान की हाजरी के मदनी फूल* #03
     जो कब्रस्तान में दाखिल हो कर ये कहे : अय अल्लाह ! अय गल जाने वाले जिस्मो और बोसीदा हड्डियों के रब ! जो दुन्या से ईमान की हालत में रुखसत हुए तू उन पर अपनी रहमत और मेरा सलाम पहोचा दे। तो हज़रत आदम अलैहिस्सलाम से ले कर इस वक़्त तक जितने मोमिन फौत हुए सब उस दुआ पढ़ने वाले के लिये दुआए मग्फिरत करेंगे।

     हुज़ूर ﷺ का फरमाने शफ़ाअत निशान है : जो शख्स कब्रस्तान में दाखिल हुवा फिर उस ने सूरतुल फातिहा, सूरतुल इखलास और सुरतुत्तकासुर पढ़ी फिर ये दुआ मांगी : या अल्लाह ! मेने जो कुछ कुरआन पढ़ा उसका षवाब इस कब्रस्तान के मोमिन मर्दों और मोमिन औरतो को पहोचा। तो वो तमाम मोमिन क़यामत के रोज़ उस इसाले षवाब करने वाले के सिफारिशी होंगे।
*✍🏽शरहु स्सुदुर् स.311*

     हदीशे पाक में है : जो 11 बार सूरतुल इखलास पढ़ कर इसका षवाब मुर्दो को पहोचाए, तो मुर्दो की गिनती के बराबर उस इसाले षवाब करने वाले को षवाब मिलेगा।
*✍🏽दुर्रे मुख्तार, जी.3 स.183*

     क़ब्र के ऊपर अगरबत्ती न जलाई जाए इस में बे अदबी और बद फाली है (और इस से मैयत को तकलीफ होती है), हा अगर हाज़रिन को खुशबु पोहचाने के लिये लगाना चाहे तो क़ब्र के पास खाली जगह हो वहा लगाए के खुशबु पहोचाना महबूब है।
*✍🏽मूलख्खसन फतावा रज़विय्या मुखर्रजा, जी.9 स.482,525*

     आला हज़रत अलैरहमा एक और जगह फरमाते है : सहीह मुस्लिम शरीफ में हज़रते अम्र बिन आस से मरवी, उन्हों ने दमे मर्ग (यानि वक़्ते वफ़ात) अपने फ़रज़न्द से फ़रमाया : जब में मर जाउ तो मेरे साथ न कोई नौहा करने वाली जाए न आग जाए।
*✍🏽सहीह मुस्लिम, स.70 हदिष:192*

     क़ब्र पर चराग या मोमबत्ती वग़ैरा न रखे के ये आग है, और क़ब्र पर आग रखने से मैय्यत को तकलीफ होती है,
*✍🏽आक़ा का महीना, स.29*

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*वुज़ू और साइन्स* #13
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*अन्धा पन से तहफ़्फ़ुज़*
     आँखों की एक बीमारी है जिसमे इस की रतूबते अस्लिय्या यानि असली तरी कम या ख़तम हो जाती और मरीज़ आहिस्ता आहिस्ता अन्धा हो जाता है।
     तिब्बी उसूल के मुताबिक़ अगर भवो को वक़्तन फ वक़्तन तर किया जाता रहे तो इस खौफ़नाक मरज़ से तहफ़्फ़ुज़ हासिल हो सकता है।

     अलहम्दु लिल्लाह ! वुज़ू करने वाला मुह धोता है और इस तरह उसकी भवे तर होती रहती है।
आशिकाने रसूल की दाढ़ी भी वुज़ू में धुलती है और इसमें भी खूब हिकम्ते है.
     डॉ प्रोफेसर ज्योर्ज एल कहता है : मुह धोने से दाढ़ी में उलझे हुए जरासिम बह जाते है, जड़ तक पानी पहोचने से बालो की जड़े मज़्बूत होती है, दाढ़ी के ख़िलाल से जुओं का खतरा दूर होता है, दाढ़ी में पानी की तरी के ठहराव से गर्दन के पठ्ठो, थाइराइड ग्लैंड और गले के अमराज़ से हिफाज़त होती है।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 70-71*

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*आक़ा ﷺ का महीना* #16
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*कब्रस्तान की हाज़री के मदनी फूल* #02
     कई मज़ाराते औलिया पर देखा गया है के ज़ाऐरीन की सहूलत की खातिर मुसलमानो की क़ब्रे तोड़ फोड़ कर के फर्श बना दिया जाता है, ऐसे फर्श पर लेटना, चलना, खड़ा होना, तिलावत और ज़िकरो अज़कार के लिये बैठना वग़ैरा हराम है, दूर ही से फातिहा पढ़ लीजिये।
     ज़ियारते क़ब्र मय्यित के चेहरे के सामने खड़े हो कर, क़ब्र वाले की क़दमो की तरफ से जाए के उस की निगाह के सामने सिरहाने से न आए के उसे सर उठा कर देखना पड़े।
*✍🏽फतावा रज़विय्या मुखर्रजा, जी.9 स.532*

     कब्रस्तान में इस तरह खड़े हो के किब्ले की तरफ पीठ और क़ब्र वालो के चेहरों की तरफ मुह हो इस के बाद कहिये...
     ऐ क़ब्र वालो ! तुम पर सलाम हो, अल्लाह हमारी और तुम्हारी मग्फिरत फरमाए, तुम हम से पहले आ गए और हम तुम्हारे बाद आने वाले है।
*✍🏽फतावा आलमगिरी, जी.5 स.350*
*✍🏽आक़ा का महीना, स.28*

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Monday, 8 May 2017

*आक़ा ﷺ का महीना* #15
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

_*कब्रस्तान की हाज़री के मदनी फूल_* #01
     नबीये करीम صلى الله عليه وسلم का फरमाने अज़ीम है : मेने तुम को ज़ियारते कूबर से मना किया था, अब तुम क़ब्रो की ज़ियारत करो के वो दुन्या में बे रगबति का सबब है और आख़िरत की याद दिलाती है।
*✍🏽सुनन इब्ने माजाह, जी.2 स.252 हदिष: 1571*

     वलियुल्लाह के मज़ार शरीफ या किसी भी मुसलमान की क़ब्र की ज़ियारत को जाना चाहे तो मुस्तहब ये है के पहले अपने मकान पर गैर मकरूह वक़्त में 2 रकअत नफ्ल पढ़े, हर रकअत में सूरतुल फातिहा के बाद एक बार आयतुल कुरसी और 3 बार सूरए इखलास पढ़े और इस नमाज़ का षवाब साहिबे क़ब्र को पहोचाए, अल्लाह तआला उस फौत सुदा बन्दे की क़ब्र में नूर पैदा करेगा और इस षवाब पोहचाने वाले शख्स को बहुत ज़्यादा षवाब अता फरमाएगा।
*✍🏽फतवा आलमगिरी, जी.5 स.350*

     मज़ार शरीफ या क़ब्र की ज़्यारत के लिये जाते हुए रस्ते में फ़ुज़ूल बातो में मशगूल न हो। कब्रस्तान में आप उस रस्ते से जाए, जहां माज़ी में कभी भी मुसलमानो की क़ब्रे न थी, जो रास्ता नया बना हुवा हो उस पर न चले, रद्दुल मुहतार में है कब्रस्तान में क़ब्रे पाट कर जो नया रास्ता निकाला गया हो उस पर चलना हराम है। बल्कि नऐ रस्ते का सिर्फ गुमान ग़ालिब हो तब भी उस पर चलना ना जाइज़ व गुनाह है।
*✍🏽दुर्रे मुख्तार, जी.3 स.183*
*✍🏽आक़ा  का महीना, स.27*

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*वुज़ू और साइन्स* #12
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*_चेहरा धोने की हिकमते_*
     आज कल फ़ज़ाओं में धुंए वग़ैरा की आलूदगिया बढ़ती जा रही है, मुख्तलिफ किमियावि माद्दे सीसा वग़ैरा मेल कुचेल की शक्ल में आखो और चेहरे वग़ैरा पर जमता रहता है, अगर चेहरा न धोया जाए तो चेहरे और आँखे कई अमराज़ से दो चार हो जाए।
     एक यूरोपियन डॉ ने एक मकाला लिखा जिस का नाम आँख, पानी, सिह्ह्त (eye, water, health) इस में उसने इस बात पर ज़ोर दिया की " अपनी आँखों को दिन में कई बार धोते रहो वरना तुम्हे खतरनाक बीमारियो का सामना करना पड़ेगा।"
     चेहरा धोने से मुह पर खिल नहीं निकलते या कम निकलते है। माहीरिने हुस्न व सिह्ह्त इस बात पर मुत्तफ़िक है की हर तरह के cream और lotion वग़ैरा चेहरे पर दाग छोड़ते है, चेहरे को खूब सूरत बनाने के लिये चेहरे को कई बार धोना लाज़िमी है।
     अमेरिकन काउन्सिल फॉर ब्यूटी की सरकर्दा मेम्बर "बेचर" ने क्या खूब इन्किशाफ़् किया है, कहती है : मुसलमानो को किसी किस्म के किमियावि लोशन की हाजत नहीं, वुज़ू से इन का चेहरा धूल कर कई बीमारियो से महफूज़ हो जाता है।
     महकमऐ माहोलियत के माहिरीन का कहना है : चेहरे की एलर्जी से बचने के लिये इस को बार बार धोना चाहिये।

     अलहम्दु लिल्लाह ! एसा सिर्फ वुज़ू के ज़रिए ही मुम्किन है। वुज़ू में चेहरा धोने से एलर्जी से चेहरे की हिफाज़त होती है, इसका मसाज हो जाता, खून का दौरान चेहरे की तरफ रवा हो जाता, मेल कुचेल भी उतर जाता और चेहरे का हुस्न दो बाला हो जाता है।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 69-70*

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*आक़ा ﷺ का महीना* #14
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*_शबे बराअत और क़ब्रो की ज़ियारत_*
     उम्मुल मुअमिनीन हज़रते आइशा सिद्दीक़ा रदियल्लाहु अन्हा फरमाती है : मेने एक रात सरवरे काएनात صلى الله عليه وسلم को न देखा तो बकीए पाक में मुझे मिल गए, आप ने मुझसे फरमाया : क्या तुम्हे इस बात का डर था के अल्लाह और उसका रसूल तुम्हारी हक़ तलफि करेंगे ? मेने अर्ज़ की : या रसूलल्लाह ﷺ ! मेने ख़याल किया था के शायद आप अज़्वाजे मुतह्हरात में से किसी के पास तशरीफ ले गए होंगे।
     तो फ़रमाया : बेशक अल्लाह तआला शाबान की 15वी रात आसमाने दुन्या पर तजल्ली फरमाता है, पस क़बिलए बनी क़ल्ब की बकरियो के बालो से भी ज्यादा गुनाहगारो को बख्श देता है।
*✍🏽सुनन तिरमिजी, जी.2 स.183 हदिष : 739*
*✍🏽आक़ा का महीना, स. 20-21*

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Sunday, 7 May 2017

*आक़ा ﷺ का महीना* #13
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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*_मगरिब के बाद 6 नवाफ़िल_*
     मामुलाते औलियाए किराम से है के मगरिब के फ़र्ज़ व सुन्नत वग़ैरा के बाद 6 रकअत नफ्ल 2-2 रकअत कर के अदा किये जाए।
     पहली 2 रकअत इस की निय्यत से पढ़े *"या अल्लाह इन 2 रकअतो की बरकत से मुझे दराज़िये उम्र बिलखैर अता फ़रमा"*
     दूसरी 2 रकअत *"या अल्लाह इन 2 रकअतो की बरकत से बालाओं से मेरी हिफाज़त फ़रमा"*
     तीसरी 2 रकअतो *"या अल्लाह इन 2 रकअत की बरकत से मुझे अपने सिवा किसी का मोहताज न कर"*

     इन 6 रकअतो में सूरतुल फातिहा के बाद जो चाहे वो सूरत पढ़ सकते है, बेहतर ये है के हर रकअत में सूरतुल फातिहा के बाद 3 बार सूरतुल इखलास पढ़ लीजिये।
     हर दो रकअत के बाद 1 बार यासीन शरीफ पढ़िये या 21 बार सूरतुल इखलास पढ़ लीजिये बल्कि हो सके तो दोनों ही पढ़ लीजिये।
     हर बार यासीन शरीफ के बाद "दुआए निस्फ़े शाबान" भी पढ़िये।
*✍🏽आक़ा  का महीना, स.16*

दुआ के लिये इस👇🏽लिन्क पे क्लिक करे।
https://drive.google.com/file/d/0BxNzOp0x1IN_RkdKTVRGZy1BbFE/view?usp=drivesdk
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*_नाक में पानी डालने की हिकमते_*
     फेफड़ो को ऐसी हवा दरकार होती है जो जरासिम, धुंए और गर्दो गुबार से पाक हो और उसमे 80 फीसद रतूबत हो ऐसी हवा फ़राहम करने के लिये अल्लाह ने हमें नाक की ने'मत से नवाज़ा है।
     हवा को मरतूब यानि नम बनाने के लिये नाक रोज़ाना तकरीबन चौथाई गेलन नमी पैदा करती है।
◆ सफाई और दीगर सख्त काम नथनों के बाल सर अन्जाम देते है।
◆ नाक के अन्दर एक खुर्द बिनी (Microscopic) जाड़ू है। इस जाड़ू में नज़र न आने वाले रुए होते है जो हवा के ज़रिए दाखिल होने वाले जरासिम को हलक कर देते है।
◆ नीज़ इन नज़र न आने वाले जरासिम के ज़िम्मे एक और डिफाइ निज़ाम भी है जिसे इंग्रजी में (Lysozyme) कहते है, नाक इस के ज़रिए से आँखों को जरासिम से महफूज़ रखती है।

     अल्हम्दु लिल्लाह वुज़ू करने वाला नाक में पानी चढ़ाता है जिस से जिस्म के इस अहम तरीन आले नाक की सफाई हो जाती है और पानी के अंदर काम करने वाकई बर्क़ी रौ से नाक के अंदरुनी गैर मर्इ रुओ की कारकर्दगी को तक्वीयत मिलती है और मुसलमान वुज़ू की बरकत से नाक के बे शुमार पेचीदा अमराज़ से महफूज़ हो जाता है।
     दाइमी नज़ला और नाक के ज़ख्म के मरीज़ों के लिये नाक का गुस्ल (यानि वुज़ू की तरह नाक में पानी चढ़ाना) बेहद मुफीद है।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 68-69*

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*_सब्ज़ परचा_*
    अमीरूल मुअमिनीन हज़रते उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ رضي الله تعالي عنه एक मर्तबा शाबानुल मुअज़्ज़्म की 15वी रात यानि शबे बराअत में इबादत में मसरूफ़ थे। सर उठाया तो एक "सब्ज़ परचा" मिला जिस का नूर आसमान तक फेला हुवा था, उस पर लिखा था "खुदाए मालिक व ग़ालिब की तरफ से ये जहन्नम की आग से आज़ादी का परवाना" है जो उस के बन्दे उमर को अता हुवा है।
*✍🏽तफ़सीरे रुहुल बयान, 8/402*

     इस हिकायत में जहा उमर رضي الله عنه की अज़मत व फ़ज़ीलत का इज़हार है वही शबे बराअत की रिफअत व शराफत का भी ज़ुहुर है।
     अल्हम्दुलिल्लाह ये मुबारक शब् जहन्नम की भड़कती आग से बरात यानी छुटकारा पाने की रात है इसी लिये इस रात को शबे बराअत कहा जाता है।
*✍🏽आक़ा का महीना, स.15*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
*___________________________________*
मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Saturday, 6 May 2017

*​तर्जमए कन्ज़ुल ईमान व तफ़सीरे खज़ाइनुल इरफ़ान​* #200
*​بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ​*
*​اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ​*

*_​​सूरतुल बक़रह, रुकूअ-35, आयत ②⑥⑤_*
     और उनकी कहावत, जो अपने माल अल्लाह की रज़ा चाहने में ख़र्च करते हैं और अपने दिल जमाने को (10) उस बाग़ की सी है जो भोड़  (रेतीली ज़मीन) पर हो उस पर ज़ोर का पानी पड़ा तो दो ने मेवा लाया फिर अगर ज़ोर का मेंह उसे न पहुंचे तो ओस काफ़ी है  (11) और अल्लाह तुम्हारे काम देख रहा है (12)

*तफ़सीर*
     (10) ख़ुदा की राह में ख़र्च करने पर.
     (11) यह ख़ूलूस वाले मूमिन के कर्मों की एक मिसाल है कि जिस तरह ऊंचे इलाक़े की बेहतर ज़मीन का बाग़ हर हाल में ख़ूब फलता है, चाहे बारिश कम हो या ज़्यादा, ऐसे ही इख़लास वाले मूमिन का दान और सदक़ा ख़ैरात चाहे कम हो या ज़्यादा, अल्लाह तआला उसको बढ़ाता है.
     (12) और तुम्हारी नियत और इख़लास को जानता है.
*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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*आक़ा ﷺ का महीना* #11
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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*_फायदे की बात_*
     शबे बरात में आमाल नामे तब्दील होते है लिहाज़ा मुम्किन हो तो 14 शाबानुल मुअज़्ज़्म को भी रोज़ा रख लिया जाए ताके आमाल नाम के आखिरी दिन में भी रोज़ा हो।
     14 शाबान को असर की नमाज़ बा जमाअत पढ़ कर वही नफ्लि एतिकाफ कर लिया जाए और नमाज़े मगरिब के इन्तिज़ार की निय्यत से मस्जिद ही में ठहरा जाए ताके आमाल नामा तब्दील होने के आखिरी लम्हात में मस्जिद की हाज़िरी, एतिकाफ और इन्तिज़ारे नमाज़ वग़ैरा का षवाब लिखा जाए। बल्कि जहे नसीब ! सारी ही रात इबादत में गुज़ारी जाए।

*_15 शाबान का रोज़ा_*
     हज़रते अलिय्युल मुर्तज़ा शेरे खुदा से मरवी है के नबिय्ये करीम ﷺ का फरमाने अज़ीम है : जब 15 शाबान की रात आए तो उसमे क़याम (इबादत) करो और दिन में रोज़ा रखो। बेशक अल्लाह तआला गुरुबे आफताब से आसमान दुन्या पर ख़ास तजल्ली फ़रमाता और कहता है : है कोई मुझसे मग्फिरत तलब करने वाला के उसे बख्श दू ! है कोई रोज़ी तलब करने वाला के उसे रोज़ी दू ! है कोई मुसीबत ज़दा के उसे आफिय्यत अता करू ! है कोई ऐसा ! है कोई ऐसा !
     और ये उस वक़्त तक फ़रमाता है के फ़ज्र तुलुअ हो जाए।
*✍🏽सुनन इब्ने माजा, जी.2 स.160 हदिष : 1388*
*✍🏽आक़ा का महीना, स.14*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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Friday, 5 May 2017

*​तर्जमए कन्ज़ुल ईमान व तफ़सीरे खज़ाइनुल इरफ़ान​* #199
*​بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ​*
*​اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ​*

*_​​सूरतुल बक़रह, रुकूअ-35, आयत ②⑥④_*
     ऐ ईमान वालो अपने सदक़े  (दान) बातिल न करदो एहसान रखकर और ईजा (दुख:) देकर (8) उसकी तरह जो अपना माल लोगों के दिखावे के लिए ख़र्च करे और अल्लाह क़यामत पर ईमान न लाए तो उसकी कहावत ऐसी है जैसे एक चट्टान कि उसपर मिट्टी है अब उसपर ज़ोर का पानी पड़ा जिसने उसे निरा पत्थर कर छोड़ा (9) अपनी कमाई से किसी चीज़ पर क़ाबू न पाएंगे और अल्लाह काफ़िरों को राह नहीं देता.

*तफ़सीर*
     (8) यानी जिस तरह मुनाफ़िक़ को अल्लाह की रज़ा नहीं चाहिये, वह अपना माल रियाकारी यानी दिखावे के लिये ख़र्च करके बर्बाद कर देता है, इसी तरह तुम एहसान जताकर और तकलीफ़ देकर अपने सदक़ात और दान का पुण्य तबाह न करो.
     (9) ये मुनाफ़िक़ रियाकर के काम की मिसाल है कि जिस तरह पत्थर पर मिट्टी नज़र आती है लेकिन बारिश से वह सब दूर हो जाती है, ख़ाली पत्थर रह जाता है, यही हाल मुनाफ़िक़ के कर्म का है और क़यामत के दिन वह तमाम कर्म झूटे ठहरेंगे, क्योंकि अल्लाह की रज़ा और ख़ुशी के लिये न थे.
*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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*आक़ा ﷺ का महीना* #10
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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*_महरूम लोग_*
     मीठे और प्यारे इस्लामी भाइयो ! शबे बरात बेहद अहम रात है, किसी सूरत से भी इसे गफलत में न गुज़ारा जाए, इस रात खुसुसिय्यत के साथ रहमतो की छमाछम बरसात होती है। इस मुबारक शब में अल्लाह "बनी क़ल्ब" की बकरियो के बालो से भी ज्यादा लोगो को जहन्नम से आज़ाद फ़रमाता है।
     किताबो में लिखा है : क़बिलए बनी क़ल्ब क़बाइले अरब में सब से ज्यादा बकरिया पालता था।

     आह ! कुछ बद नसीब ऐसे भी है जिन पर इस शबे बरात यानि छुटकारा पाने की रात भी न बख्शे जाने की वईद है। हज़रते इमाम बेहकी शाफ़ेई अलैरहमा "फ़ज़ाइलुल अवक़ात" में नकल करते है : रसूले अकरम ﷺ का फरमाने इबरत निशान है : 6 आदमियो की इस रात भी बख्शीश नहीं होगी।
1 शराब का आदि
2 माँ बाप का ना फरमान
3 ज़ीना का आदि
4 कते तअल्लुक़ करने वाला
5 तस्वीर बनाने वाला
6 चुगल खोर इसी तरह काहिन, जादूगर, तकब्बुर के साथ पाजामा या तहबन्द टखनों के निचे लटकाने वाले और किसी मुसलमान से बुग्ज़ो किना रखने वाले पर भी इस रात मग्फिरत की सआदत से महरूमी की वईद है,

     चुनान्चे तमाम मुसलमानो को चाहिये के इन गुनाहो में से अगर मआज़अल्लाह किसी गुनाह में मुलव्वत हो तो वो बिल खुसुस उन गुनाहो से और बिल उमुम हर गुनाह से शबे बरात के आने से पहले बल्कि आज और अभी सच्ची तौबा कर ले, और अगर बन्दों की हक़ तलफिया की है तो तौबा के साथ उन की मुआफ़ी तलाफि की तरकीब फ़रमा ले।
*✍🏽आक़ा का महीना, 11,12*
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Thursday, 4 May 2017

*​तर्जमए कन्ज़ुल ईमान व तफ़सीरे खज़ाइनुल इरफ़ान​* #198
*​بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ​*
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*_​​सूरतुल बक़रह, रुकूअ-35, आयत ②⑥③_*
     अच्छी बात कहना और दरगुज़र  (क्षमा) करना (6) उस ख़ैरात से बेहतर है जिसके बाद सताना हो  (7) और अल्लाह बे-परवाह हिल्म  (सहिष्णुता) वाला है.

*तफ़सीर*
     (6) यानी अगर सवाल करने वाले को कुछ न दिया जाए तो उससे अच्छी बात कहना और सदव्यवहार के साथ जवाब देना, जो उसको नाग़वार न गुज़रे और अगर वह सवाल किये ही जाए या ज़बान चलाए, बुरा भला कहने लगे, तो उससे मुंह फेर लेना.
     (7) शर्म दिला कर या एहसान जताकर या और कोई तकलीफ़ पहुंचा कर.
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*वुज़ु और साइन्स* #08
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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*_मिस्वाक के मदनी फूल_* #4
     जब भी मिस्वाक करनी हो कम अज़ कम 3 बार कीजिये, हर बार धो लीजिये

★ मिस्वाक सीधे हाथ में इस तरह लीजिये की छोटी ऊँगली इस के निचे और बिच की 3 उंगलिया ऊपर और अंगूठा उसके निचे हो

★ पहले सीधी तरफ के ऊपर के दातो पर फिर उलटी तरफ के ऊपर के दातो पर
★ फिर सीधी तरफ निचे फिर उलटी तरफ निचे मिस्वाक कीजिये

★ मुठ्ठी बाँध कर मिस्वाक करने से बवासीर हो जाने का अन्देशा है

★ मिस्वाक वुज़ु की सुन्नते किबलिया है , अलबत्ता सुन्नते मोअक्कदा उसी वक़्त है जब के मुह में बदबू हो।

★ मिस्वाक जब ना काबिले इस्तिमाल हो जाए तो फेके मत की ये आलए अदाए सुन्नत है, किसी जगह एहतियात से रख दे या दफन करदिजिये या पथ्थर वगैरा वजन बांध कर समंदर में डूबो दीजिये।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 66-67*
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*आक़ा ﷺ का महीना* #09
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

_*हज़रते दावूद अलैहिस्सलाम की दुआ*_
     अमीरुल मुअमिनीन हज़रते मौला मुश्किल कुशा,अलिय्युल मुर्तज़ा शेरे खुदा करम अल्लाहु तआला शाबानुल मुअज़्ज़म की 15वी रात यानि शबे बारात में अक्सर बाहर तशरीफ़ लाते.
     एक बार इसी तरह शबे बरात में बाहर तशरीफ़ लाए और आसमान की तरफ नज़र उठा कर फ़रमाया : एक मर्तबा अल्लाह के नबी हज़रते सय्यिदुना दावूद अलैहिस्सलाम ने शाबान की 15वी रात आसमान की तरफ निगाह उठाई और फ़रमाया : ये वो वक़्त है के इस वक़्त में जिस शख्स ने कोई भी दुआ अल्लाह से मांगी उस की दुआ अल्लाह ने कबूल फ़रमाई और जिस ने मग्फिरत तलब की अल्लाह ने उस की मग्फिरत फ़रमा दी बशर्ते के दुआ करने वाला उश्शार (ज़ुल्मन टेक्स लेने वाला), जादूगर, काहिन और बाजा बजाने वाला न हो,

     फिर ये दुआ की : ऐ अल्लाह ! ऐ दाऊद के परवर दिगार ! जो इस रात में तुज से दुआ करे या मग्फिरत तलब करे तू उस को बख्श दे.
*✍🏽आक़ा का महीना, स. 10-11*
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Wednesday, 3 May 2017

*वुज़ु और साइन्स* #07
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*मिस्वाक के मदनी फूल_* #3
     मुफ़्ती मुहम्मद अमजद अली आज़मी रहमतुल्लाह अलैह लिखते है : मशाईखे किराम फरमाते है : जो शख्स मिस्वाक का आदि हो मरते वक़्त उसे कलमा पढ़ना नसीब होगा और जो अफ्यून खाता हो मरते वक़्त उसे कालिमा नसीब न होगा।

★ मिस्वाक पीलू या ज़ैतून या निम् वगैरा कड़वी लकड़ी की हो
★ मिस्वाक की मोटाई छुंगलिया यानि छोटी ऊँगली के बराबर हो
★ मिस्वाक एक बालिश्त से ज्यादा लम्बी न हो वरना उस पर शैतान बैठता है
★ इसके रेशे नरम हो के सख्त रेशे दातो और मशुढो के दरमियान खला (गेप) का बाइस बनते है
★ मिस्वाक ताज़ा हो तो खूब वरना इसका एक सिरा कुछ देर पानी के ग्लास में भिगो कर नरम कर लीजिये
★ मुनासिब है की इस के रेशे रोज़ाना काटते रहिये के रेशे उस वक़्त तक कारआमद रहते है जब तक उन्मे तल्खी बाकी रहे
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 65-66*
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*आक़ा ﷺ का महीना* #08
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_ढेरो गुनाहगारो की मग्फिरत होती है मगर...❓_*
     हज़रते आइशा सिद्दीका रदियल्लाहु अन्हा से रिवायत है, हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : मेरे पास जिब्रईल अलैहिस्सलाम आए और कहा ये शाबान की 15वी रात है इस में अल्लाह तआला जहन्नम से इतनो को आज़ाद फरमाता है जितने बनी क्लब की बकरियो के बाल है, मगर काफ़िर और "अदावत वाले" और रिश्ता काटने वाले और कपड़ा लटकाने वाले और वालिदैन की ना फ़रमानी करने वाले और शराब के आदि की तरफ नज़रे रहमत नहीं फरमाता.
*✍🏽शोएबुल ईमान, जी.3 स. 384 हदिष : 3837*

     हदिशे पाक में कपड़ा लटकने वाले का जो बयान है, इस से मुराद वो लोग है जो तकब्बुर के साथ टखनों के निचे तहबंद या पाजामा वगैरा लटकाते है.
     करोड़ो हम्बलियो के अज़ीम पेशवा हज़रते इमाम अहमद बिन हम्बल رضي الله تعالي عنه ने हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने अम्र رضي الله تعالي عنه से जो रिवायत नकल की उस में कातिल का भी ज़िक्र है.
*✍🏽आक़ा का महीना, स. 9-10*
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Tuesday, 2 May 2017

*​तर्जमए कन्ज़ुल ईमान व तफ़सीरे खज़ाइनुल इरफ़ान​* #196
*​بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ​*
*​اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ​*

*_​​सूरतुल बक़रह, रुकूअ-36, आयत ②⑥①_*
     उनकी कहावत जो अपने माल अल्लाह की राह मे ख़र्च करते हैं(1) उस दिन की तरह जिसने उगाई सात बालें (2) हर बाल में सौ दाने (3) और अल्लाह इस से भी ज़्यादा बढ़ाए जिस के लिये चाहे और अल्लाह वुसअत (विस्तार) वाला इल्म वाला है.

*तफ़सीर*
     (1) चाहे ख़र्च करना वाजिब हो या नफ़्ल, भलाई के कामों से जुड़ा होना आम है. चाहे किसी विद्यार्थी को किताब ख़रीद कर दी जाए या कोई शिफ़ाख़ाना बना दिया जाए या मरने वालों के ईसाले सवाब के लिये सोयम, दसवें, बीसवें, चालीसवें के तरीक़े पर मिस्कीनों को खाना खिलाया जाए.
     (2) उगाने वाला हक़ीक़त में अल्लाह ही है. दाने की तरफ़ उसकी निस्बत मजाज़ी है. इससे मालूम हुआ कि मजाज़ी सनद जायज़ है जबकि सनद करने वाला ग़ैर ख़ुदा के तसर्रूफ़ में मुस्तक़िल एतिक़ाद न करना हो. इसी लिये यह कहना भी जायज़ है कि ये दवा फ़ायदा पहुंचाने वाली है, यह नुक़सान देने वाली है, यह दर्द मिटाने वाली है, माँ बाप ने पाला, आलिम ने गुमराही से बचाया, बुज़ुर्गों ने हाजत पूरी की, वग़ैरह. सबमें मजाज़ी सनदें हैं और मुसलमान के अक़ीदे में करने वाला हक़ीक़त में अल्लाह ही है. बाक़ी सब साधन है.
     (3) तो एक दाने के सात सौ दाने हो गए, इसी तरह ख़ुदा की राह में ख़र्च करने से सात सौ गुना अज्र हो जाता है.
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*वुज़ु और साइन्स* #06
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*_मिस्वाक के मदनी फूल_* #2
     हज़रते सय्यिदुना अब्दुल वह्हाब शारानी रहमतुल्लाह अलैह नकल करते है : एक बार अबू बक्र् शिब्ली बगदादी रहमतुल्लाह अलैह को वुज़ु के वक़्त मिस्वाक की ज़रूरत हुई, तलाश की मगर न मिली लिहाज़ा एक दिनार में मिस्वाक खरीद कर इस्तेमाल फ़रमाई।

     बाज़ लोगो ने कहा ये तो आपने बहुत ज्यादा खर्च कर डाला ! कही इतनी महगी भी मिस्वाक ली जाती है ? आप ने फ़रमाया बेशक ये दुन्या और इसकी तमाम चीज़े अल्लाह عزوجل के नज़्दीक मच्छर के पर बराबर भी हैसिय्य्त नहीं रखती, अगर बरोज़े कियामत अल्लाह عزوجل ने मुझसे ये पूछ लिया तो क्या जवाब दूंगा के तूने मेरे प्यारे हबीब ﷺ की सुन्नत (मिस्वाक) क्यू तर्क की ? मेने तुजे जो मालो दौलत दिया था उसकी हक़ीक़त तो मेरे नजदीक मच्छर के पर बराबर भी नहीं थी, तो आखिर ऐसी हकीर दौलत इतनी अज़ीम सुन्नत हासिल करने पर क्यू खर्च नहीं की ?
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 65*
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Monday, 1 May 2017

*​तर्जमए कन्ज़ुल ईमान व तफ़सीरे खज़ाइनुल इरफ़ान​* #195
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*_​​सूरतुल बक़रह, रुकूअ-35, आयत ②⑥ⓞ_*
     और जब अर्ज़ की इब्राहीम ने (8) ऐ रब मेरे मुझे दिखादे तू किस तरह मुर्दें जिलाएगा, फ़रमाया क्या तुझे यक़ीन नहीं(9) अर्ज़ की यक़ीन क्यों नहीं मगर यह चाहता हूँ कि मेरे दिल को क़रार आजाए (10) फ़रमाया तो अच्छा चार परिन्दे लेकर अपने साथ हिला ले (11) फिर उनका एक एक टुकड़ा हर पहाड़ पर रख दे फिर उन्हें बुला वो तेरे पास चले आएंगे पाँव से दौड़ते (12) जान रख कि अल्लाह ग़ालिब हिकमत वाला है।

*तफ़सीर*
     (8) मुफ़स्सिरों ने लिखा है कि समन्दर के किनारे एक आदमी मरा पड़ा था. ज्वार भाटे में समन्दर का पानी चढ़ता उतरता रहता है. जब पानी चढ़ता तो मछलियाँ उसकी लाश को खातीं, जब उतर जाता तो जंगल के दरिन्दे खाते, जब दरिन्दे जाते तो परिन्दे खाते. हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने यह देखा तो आपको शौक़ हुआ कि आप देखें कि मुर्दे किस तरह ज़िन्दा किये जाएंगे. आपने अल्लाह तआला की बारगाह में अर्ज़ किया, या रब मुझे यक़ीन है कि तू मुर्दों को ज़िन्दा फ़रमाएगा और उनके अंग दरियाई जानवरों और दरिन्दों के पेट और परिन्दों के पेटों से जमा फ़रमाएगा. लेकिन मैं यह अजीब दृश्य देखने की इच्छा रखता हुँ. मुफ़स्सिरीन का एक क़ौल यह भी है कि जब अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को अपना ख़लील यानी दोस्त किया, मौत के फ़रिश्ते इज़्राईल अलैहिस्सलाम अल्लाह तआला से इजाज़त लेकर आपको यह ख़ुशख़बरी देने आए. आपने बशारत सुनकर अल्लाह की तारीफ़ की और फ़रिश्ते से फ़रमाया कि इस ख़ुल्लत यानी ख़लील बनाए जाने की निशानी क्या है ? उन्होंने अर्ज़ किया, यह कि अल्लाह तआला आपकी दुआ क़ुबूल फ़रमाए और आपके सवाल पर मुर्दे ज़िन्दा कर दे. तब आपने यह दुआ की. (ख़ाज़िन)
     (9) अल्लाह तआला हर ज़ाहिर छुपी चीज़ का जानने वाला है, उसको हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के ईमान और यक़ीन के कमाल यानी सम्पूर्णता का इल्म है. इसके बावजूद यह सवाल फ़रमाना कि क्या तुझे यक़ीन नहीं, इसलिये है कि सुनने वालों को सवाल का मक़सद मालूम हो जाए और वो जान लें कि यह सवाल किसी शक व शुबह की बुनियाद पर न था. (बैज़ावी व जुमल वग़ैरह)
     (10) और इन्तिज़ार की बेचैनी दूर हो. हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा ने फ़रमाया, मानी ये हैं कि इस निशानी से मेरे दिल को तसल्ली हो जाए कि तूने मुझे अपना ख़लील यानी दोस्त बनाया.
     (11) ताकि अच्छी तरह पहचान हो जाए.
     (12) हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने चार चिड़ियाँ लीं, मोर, मुर्ग़, कबूतर और कौवा. उन्हें अल्लाह के हुक्म से ज़िब्ह किया, उनके पर उख़ाड़े और क़ीमा करके उनके अंग आपस में मिला दिये और इस मजमूए के कई हिस्से किये. एक एक हिस्से को एक एक पहाड़ पर रखा और सबके सर अपने पास मेहफ़ूज रखे. फिर फ़रमाया, चले आओ अल्लाह के हुक्म से. यह फ़रमाना था, वो टुकडे दौड़े और हर हर जानवर के अंग अलग अलग होकर अपनी तरतीब से जमा हुए और चिड़ियाँ की शक्लें बनकर अपने पाँव से दौड़ते हुए हाज़िर हुए और अपने अपने सरों से मिलकर जैसे पहले थे वैसे ही सम्पूर्ण बनकर उड़ गए. सुब्हानल्लाह !
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मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*सुरमा लगाने की सुन्नते और आदाब* #03
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_सुरमा लगाने का तरीक़ा_*
     हदिशे बाला में है कि हमारे प्यारे आक़ा صلى الله عليه وسلم दोनों मुक़द्दस आँखों में सुरमे की तिन तिन सलाइया इस्तिमाल फरमाते थे और अक्सर इसी पर अमल था। बाज़ रिवायत में सीधी आँख में तिन सलाइया और बाई में दो का भी ज़िक्र आया है और "शमाइले रसूल صلى الله عليه وسلم" में इसी तरह बयान किया गया है की आप صلى الله عليه وسلم हर आँख मुबारक में दो दो सलाइया सुरमे की डालते और एक सिलाई को दोनों मुबारक आँखों में डालते।
     लिहाज़ा हमे मुख़्तलिफ़ अवक़ात में मुख़्तलिफ़ तरीके पर सुरमा इस्तिमाल करना चाहये। यानि कभी दोनों आँखों में 3 बार कभी दाई आँख में 3 और बाई में दो बार, तो कभी दोनों आँखों में 2-2 बार और फिर आखरी में एक सलाई को सुरमे वाली करके बारी बारी दोनो आंखो में लगाए। इस तरह करने से तीनो सुन्नते अदा हो जाएगी।
     ये बात याद रखिये की तकरिम के जितने भी काम होते सब हमारे आक़ा صلى الله عليه وسلم सीधी जानिब से शुरू किया करते, लिहाज़ा पहले सीधी आँख में सुरमा लगाए फिर बाई आँख में।
*✍🏽सुन्नते और आदाब, 58*
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*आक़ा ﷺ का महीना* #06
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

_*आक़ा ﷺ शाबान के अक्सर रोज़े रखते थे*_
    बुखारी शरीफ में है हज़रते आइशा सिद्दीका रदियल्लाहु अन्हा फरमाती है के रसूलल्लाह ﷺ शाबान से ज्यादा किसी महीने में रोज़े न रखा करते बल्कि पुरे शाबान ही को रोजा रख लिया करते थे और फ़रमाया करते : अपनी इस्तिताअत के मुताबिक़ अमल करो के अल्लाह عزوجل उस वक़्त तक अपना फ़ज़ल नही रोकता जब तक तुम उकता न जाओ.
*✍🏽सहीह बुखारी, जी.1 स. 648 हदिष : 1970*

*_भलाइयों वाली राते_*
👉🏽उम्मुल मुअमिनीन हज़रते आइशा सिद्दीका रदियल्लाहु अन्हा फरमाती है, में ने नबिय्ये करीम ﷺ को फरमाते हुए सुना : अल्लाह عزوجل (खास तौर पर) 4 रातो में भलाइयो के दरवाज़े खोल देता है :
★ बकर ईद की रात
★ ईदुल फ़ित्र की रात
★ शाबान की 15वी रात के इस रात में मरने वालो के नाम और लोगो का रिज़्क़ और (इस साल) हज करने वालो के नाम लिखे जाते है.
★ अरफा की (यानि 8 और 9 जुल हिज्जा की दरमियानी) रात अज़ाने फज्र तक.
*✍🏽तफ़सीरे दुर्रे-मन्सूर, जी. 7 स. 402*
*✍🏽आक़ा का महीना, स. 8*
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