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Thursday, 24 August 2017

*83 आसान नेकियां* #37
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_मुसलमान के दिल में ख़ुशी दाखिल करना_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जो शख्स किसी मोमिन के दिल में ख़ुशी दाखिल करता है अल्लाह उस ख़ुशी से एक फ़रिश्ता पैदा फ़रमाता है जो अल्लाह की इबादत और ज़िक्र में मसरूफ़ रहता है। जब वो बन्दा अपनी क़ब्र में चला जाता है तो वो फ़रिश्ता उस के पास आ कर पूछता है : "क्या तू मुझे नहीं पहचानता ?" वो कहता है : तू कौन है ? फ़रिश्ता जवाब देता है : में वो ख़ुशी हूँ जिसे तूने फूलां के दिल में दाखिल किया था, आज में तेरी वहशत में तुझे उन्स पहुंचाउंगा और सुवालात के जवाबात में षाबित क़दम रखूंगा और तुझे रोज़े क़यामत के मनाज़िर दिखाऊंगा और तेरे लिये तेरे रब की बारगाह में सिफारिश करूँगा और तुझे जन्नत में तेरा ठिकाना दिखाऊंगा।
*✍🏼الترغيب والترهيب*

     ये फ़ज़ीलत उसी वक़्त हासिल हो सकेगी जब वो ख़ुशी एन शरीअत के मुताबिक़ हो, चुनान्चे अगर औरत ने शौहर को खुश करने के लिये बे पर्दगी की या बेटे ने बाप को खुश करने के लिये दाढ़ी मुन्डा दी या एक मुठ्ठी से घटा दी तो वो इस फ़ज़ीलत का हरगिज़ हक़दार नहीं होगा बल्कि मुब्तलाए अज़ाबे नार होगा। हम अल्लाह के गज़ब से पनाह मांगते है और उस से रहमत का सुवाल करते है।

*_किसी के दिल में ख़ुशी दाखिल करने वाले चन्द काम_*
     किसी प्यासे को पानी पिला देना, किसी भूके को खाना खिला देना, कोई दुआ के लिये कहे तो हाथों हाथ उस के लिये दुआ कर देना, किसी की बात तवज्जोह से सुन लेना, किसी का मशवरा मान लेना, किसी की जानिब से की गई इस्लाह को क़बूल कर लेना, ज़रूरत मन्द की मदद करना, हाजत मन्द को क़र्ज़ दे देना, पसन्दीदा चीज़ खिलाना, अहम मवाकेअ पर तोहफा देना, मज़लूम की मदद करना, दौराने सफर बैठने के लिये जगह दे देना।

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼आसान नेकियां, 108*

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*इमामत का बयान* #01
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     मर्द गैर माज़ूर के इमाम के लिये 6 शर्ते है :-
★ सहीहुल अक़ीदा मुसलमान होना
★ बालिग़ होना
★ आकिल होना
★ मर्द होना
★ किराअत सहीह होना
★ माज़ूर न होना
*✍🏼दुर्रेमुखतार मअ रद्दलमोहतार, 2/284*
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.201*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*जमाअत की फ़ज़ीलत*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : बा जमाअत नमाज़ अदा करना, तन्हा नमाज़ पढ़ने से 27 दर्जे ज़्यादा फ़ज़ीलत रखती है।
*✍🏼صحيح البخاري*

     आम रिवायत में येही है की नमाज़े बा जमाअत ब निस्बत तन्हा के 25 दर्जे ज़ाइद है। मगर बाज़ रिवायतों में 27 दर्जे भी आया है। बल्कि एक रिवायत में 36 दर्जे भी वारिद है। बाज़ में 50 भी।
     उलमा ने इस की मुख़्तलिफ़ तौजिहात की हैं। सब में उम्दा तौजीह ये है की ये नमाज़ी और वक़्त और हालात के ऐतिबार से मुख़्तलिफ़ है।
*✍🏼नुज़हतुल क़ारी शर्हे सहीहुल बुखारी, 2/178*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 63*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*कबीरा गुनाह किसे कहते हैं ?*
    بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     राजेह और मुदल्लाल क़ौल ये है की जो शख्स गुनाहों में से किसी ऐसे गुनाह का इर्तिकाब करे जिस का बदला दुन्या में हद है मसलन क़त्ल, ज़िना या चोरी करे या ऐसा गुनाह करे जिस के मुतअल्लिक़ आख़िरत में अज़ाब या ग़ज़बे इलाही की वईद हो या उस गुनाह के मूर्तक़िब पर हमारे नबी صلى الله عليه وسلم की ज़बान से लानत की गई हो तो वो कबीरा गुनाह है।
     इस बात को तस्लीम करने के बा वुजूद ये ज़रूर है की बाज़ कबीरा गुनाह दूसरे बाज़ कबीरा गुनाहों के मुक़ाबले में ज़्यादा बड़े है। क्या आप ने मुलाहज़ा नहीं फ़रमाया की नबीये करीम صلى الله عليه وسلم ने अल्लाह के साथ शिर्क करने को गुनाहे कबीरा में से शुमार फ़रमाया है हालाकिं इस का मूर्तक़िब हमेशा जहन्नम में रहेगा और उस की कभी बख़्शिश न होगी।

     अल्लाह इर्शाद फ़रमाता है : _बेशक अल्लाह उसे नहीं बख्शता की कुफ़्र से निचे जो कुछ है जिसे चाहे मुआफ़ फरमा देता है।_
*✍🏼النساء ٤٨*

     और फ़रमाता है : _बेशक जो अल्लाह का शरीक ठहराए तो अल्लाह ने उस पर जन्नत हराम कर दी।_
*✍🏼الماىٔدة ٧٢*

     जब मुआमला ऐसा है तो इन मुख़्तलिफ़ अहादिष में ततबिक़ देना ज़रूरी है।
     हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने इर्शाद फ़रमाया : क्या में तुम्हें सब से बड़े गुनाहों के बारे में खबर न दूँ ? ये बात आप ने 3 बार इर्शाद फ़रमाई। सहाबए किराम ने अर्ज़ किया क्यू नहीं ! इर्शाद फ़रमाया : अल्लाह के साथ शरीक ठहराना और वालिदैन की ना फ़रमानी करना। आप صلى الله عليه وسلم टेक लगा कर तशरीफ़ फरमा थे फिर सीधे हो कर बैठ गए और इर्शाद फ़रमाया : सुनो ! झूटी बात कहना (भी बड़ा गुनाह है)। आप इस कलिमे की तकरार फ़रमाते रहे हत्ता की हम ने (शफ़क़त के बाइस दिल में) कहा : काश ! आप सुकूत फरमाए।
*ये हदिष बुखारी व मुस्लिम दोनों में है*
     रसूले पाक ने झूटी बात और वालिदैन की ना फ़रमानी का सब से बड़े गुनाहों में से होना बयान फ़रमाया लेकिन सात हलाकत करने वाले गुनाहों में इन का ज़िक्र नहीं है (तो मालुम हुवा की गुज़श्ता हदिष में लफ्ज़ सात का ज़िक्र हस्र व हदबन्दी के लिये नहीं है)।
*76 कबीरा गुनाह, 18*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Wednesday, 23 August 2017

*83 आसान नेकियां* #36
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_खामोश रहना_*
     ज़बान अल्लाह की अता करदा ऐसी अज़ीम नेअमत है जिस की हक़ीक़ी क़द्र वही शख्स जान सकता है जो कुव्वते गोयाई से महरूम हो। ज़बान के ज़रीए अपनी आख़िरत संवारने के लिये नेकियों का खजाना भी इकठ्ठा किया जा सकता है और इस के गलत इस्तिमाल की वजह से दुन्या व आख़िरत बर्बाद भी हो सकती है।
     खामोश रहना भी एक तरह की इबादत है और बाइषे षवाब है, अहादिष में ज़बान पर क़ाबू पाने के लिये खामोशी की बहुत सी फ़ज़ीलते बयान हुई है।
     4 फरमाने मुस्तफा : (1) ख़ामोशी आला दर्जे की इबादत है।
(2) जो अल्लाह और क़यामत पर ईमान रखता है उसे चाहिये की भलाई की बात करे या खामोश रहे।
(3) ख़ामोशी अख़्लाक़ की सरदार है।
(4) आदमी का ख़ामोशी पर क़ाइम रहना 60 साल की इबादत से बेहतर है।

*_मिज़ाने अमल पर बहुत भारी है_*
     हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने हज़रते अबू ज़र गिफ़ारी رضي الله عنه से फ़रमाया क्या में तुम्हें ऐसे दो अमल न बताउं जो करने में बहुत हल्के लेकिन मिज़ाने अमल में बहुत भारी है ? अर्ज़ की ज़रूर बताइये। इर्शाद फ़रमाया : कषरत से खामोश रहना और खुश अख़लाक़ी, फिर फ़रमाया : उस ज़ात की क़सम ! जिस के क़ब्ज़ाए कुदरत में मेरी जान है ! मख्लूक़ का कोई अमल इन दोनों जैसा नहीं है।
*✍🏼شعب الإيمان*

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*✍🏼आसान नेकियां, 105*
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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*ज़ोहर के आखिरी दो नफ्ल के भी क्या कहने*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

★ ज़ोहर के बाद चार रकअत पढ़ना मुस्तहब है कि हदीसे पाक में फ़रमाया जिसने ज़ोहर से पहले चार और बाद में चार पर मु हाफ़ज़त की अल्लाह तआला उस पर आग हराम फ़रमा देगा।

★ अल्लामा सय्यिद तहतावी अलैरहमा फरमाते है कि सिरे से आग में दाखिल ही न होगा और उसके गुनाह मिटा दिये जाएंगे और उस पर (बन्दों की हक़ तलफियो के) जो मुतालबात है अल्लाह तआला उसके फरीक को राज़ी कर देगा या ये मतलब है कि ऐसे कामो की तौफ़ीक़ देगा जिन पर सज़ा न हो।

★ अल्लामा शामी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते है कि उसके लिये बिशारत ये है कि सआदत पर उस का खातिमा होगा और दोज़ख में न जाएगा।
*✍🏼शामी 2/542*
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.200*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
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*मिस्वाक की फ़ज़ीलत*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : मिस्वाक में मुंह की पाकीज़गी और अल्लाह की ख़ुशनूदी का सबब है।
*✍🏼سنن النسائي*

     शरीअत में मिस्वाक से मुराद वो लकड़ी है जिस से दांत साफ किये जाएं। सुन्नत ये है की ये किसी फूल या फलदार दरख्त की न हो कड़वे दरख्त की हो। मोटाई छोटी ऊँगली के बराबर हो, लंबाई बालिश्त से ज़्यादा न हो। दांतो की चौड़ाई में की जाए न की लंबाई में। बे दांत वाले मसूढ़ों पर ऊँगली फेर लिया करे।
     मिस्वाक इतने मक़ाम पर सुन्नत है : वुज़ू में, क़ुरआन पढ़ते वक़्त, दांत पिले होने पर, भूक या देर तक ख़ामोशी या बे ख्वाबी की वजह से मुंह से बदबू आने पर।
*✍🏼मीरआतुल मनाजिह्, 1/275*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 62*
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*कबीरा गुनाह किसे कहते हैं ?*
    بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
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     राजेह और मुदल्लाल क़ौल ये है की जो शख्स गुनाहों में से किसी ऐसे गुनाह का इर्तिकाब करे जिस का बदला दुन्या में हद है मसलन क़त्ल, ज़िना या चोरी करे या ऐसा गुनाह करे जिस के मुतअल्लिक़ आख़िरत में अज़ाब या ग़ज़बे इलाही की वईद हो या उस गुनाह के मूर्तक़िब पर हमारे नबी صلى الله عليه وسلم की ज़बान से लानत की गई हो तो वो कबीरा गुनाह है।
     इस बात को तस्लीम करने के बा वुजूद ये ज़रूर है की बाज़ कबीरा गुनाह दूसरे बाज़ कबीरा गुनाहों के मुक़ाबले में ज़्यादा बड़े है। क्या आप ने मुलाहज़ा नहीं फ़रमाया की नबीये करीम صلى الله عليه وسلم ने अल्लाह के साथ शिर्क करने को गुनाहे कबीरा में से शुमार फ़रमाया है हालाकिं इस का मूर्तक़िब हमेशा जहन्नम में रहेगा और उस की कभी बख़्शिश न होगी।

     अल्लाह इर्शाद फ़रमाता है : _बेशक अल्लाह उसे नहीं बख्शता की कुफ़्र से निचे जो कुछ है जिसे चाहे मुआफ़ फरमा देता है।_
*✍🏼النساء ٤٨*

     और फ़रमाता है : _बेशक जो अल्लाह का शरीक ठहराए तो अल्लाह ने उस पर जहन्नम हराम कर दी।_
*✍🏼الماىٔدة ٧٢*

     जब मुआमला ऐसा है तो इन मुख़्तलिफ़ अहादिष में ततबिक़ देना ज़रूरी है।
     हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने इर्शाद फ़रमाया : क्या में तुम्हें सब से बड़े गुनाहों के बारे में खबर न दूँ ? ये बात आप ने 3 बार इर्शाद फ़रमाई। सहाबए किराम ने अर्ज़ किया क्यू नहीं ! इर्शाद फ़रमाया : अल्लाह के साथ शरीक ठहराना और वालिदैन की ना फ़रमानी करना। आप صلى الله عليه وسلم टेक लगा कर तशरीफ़ फरमा थे फिर सीधे हो कर बैठ गए और इर्शाद फ़रमाया : सुनो ! झूटी बात कहना (भी बड़ा गुनाह है)। आप इस कलिमे की तकरार फ़रमाते रहे हत्ता की हम ने (शफ़क़त के बाइस दिल में) कहा : काश ! आप सुकूत फरमाए।
*ये हदिष बुखारी व मुस्लिम दोनों में है*
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Tuesday, 22 August 2017

*83 आसान नेकियां* #
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_इषरा करना_*
     इषरा का माना है : दूसरों की ख्वाहिश और हाजत को अपनी ख्वाहिश व हाजत पर तरजीह देना। इस का भी बड़ा षवाब है, नफ़्स को दबा लिया जाए तो ज़्यादा मुश्किल भी नहीं।

     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जो शख्स किसी चीज़ की ख्वाहिश रखता हो, फिर उस ख्वाहिश को रोक कर अपने ऊपर (दूसरे को) तरजीह दे तो अल्लाह उसे बख्श देता है।

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*✍🏼आसान नेकियां, 101*
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➖〰 *मसाइले क़ुरबानी* 〰➖

1.जिन लोगों पर क़ुरबानी वाजिब नहीं वो अगर ज़िल्हज्ज के 10 दिनों तक बाल नाख़ून न काटें,तो क़ुरबानी का सवाब पाएंगे
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 131_*

2. साहिबे निसाब यानि जिसके पास 7.5 तोला सोना या 52.5 तोला चांदी या इसके बराबर की रक़म जो कि तक़रीबन 23000 बन रही है अगर क़ुर्बानी के दिनों में मौजूद है तो उसपर क़ुर्बानी वाजिब है,क़ुर्बानी वाजिब होने के लिये माल पर साल गुज़रना ज़रूरी नहीं
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 132_*

3. साहिबे निसाब औरत पर खुद उसके नाम से क़ुरबानी वाजिब है,मुसाफिर और नाबालिग पर क़ुर्बानी वाजिब नहीं
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 132_*

4. रहने का घर,पहनने के कपड़े,किताबें,सफर के लिए सवारियां,घरेलु सामान हाजते असलिया में दाखिल हैं
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 133_*
*_📕 फ़तावा आलमगीरी,जिल्द 1,सफह 160_*

5. हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि जो इसतेताअत रखने के बावजूद क़ुरबानी न करे तो वो हमारी ईदगाह के क़रीब न आये
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 129_*

6. 10,11,12 ज़िल्हज्ज को अल्लाह को क़ुरबानी से ज़्यादा कोई अमल प्यारा नहीं,जानवर का खून ज़मीन पर गिरने से पहले क़ुबुल हो जाता है,और क़ुरबानी करने वाले को जानवर के हर बाल के बदले 1 नेकी मिलती है
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह _*

7. जिसपर हर साल क़ुरबानी वाजिब है उसे हर साल अपने नाम से क़ुरबानी करनी होगी,कुछ लोग 1 साल अपने नाम से क़ुरबानी करते हैं दूसरे साल अपने बीवी बच्चों के नाम से क़ुरबानी करते हैं,ये नाजायज़ है
*_📕 अनवारुल हदीस,सफ़ह 363_*

8. क़ुरबानी का वक़्त 10 ज़िल्हज्ज के सुबह सादिक़ से लेकर 12 के ग़ुरुबे आफताब तक है,मगर जानवर रात में ज़बह करना मकरूह है
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 136_*

9. जानवरों की उम्र ये होनी चाहिए ऊँट 5 साल,गाए-भैंस 2 साल,बकरा-बकरी 1 साल,भेड़ का 6 महीने का बच्चा अगर साल भर के बराबर दिखता है तो क़ुरबानी हो जाएगी
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 139_*

10.काना,लंगड़ा,लागर,बीमार,जिसकी नाक या थन कटा हो,जिसका कान या दुम तिहाई से ज्यादा कटा हो,बकरी का 1 या भैंस का 2 थन खुश्क हो,इन जानवरों की क़ुरबानी नहीं हो सकती
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 139_*

11. मय्यत की तरफ से क़ुरबानी की तो गोश्त का जो चाहे करे,लेकिन किसी ने अपनी तरफ से क़ुरबानी करने को कहा और मर गया तो उसकी तरफ से की गयी क़ुरबानी का पूरा गोश्त सदक़ा करें
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 144_*

12. क़ुरबानी अगर मन्नत की है तो उसका गोश्त न खुद खा सकता है न ग़नी को दे सकता है,बल्कि पूरा गोश्त सदक़ा करे
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 144_*

13. नबी करीम सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने 2 मेढ़ों की क़ुरबानी की,जो कि खस्सी थे
*_📕 मुसनद अहमद,अबू दाऊद,इब्ने माजा,दारमी बहवाला बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 130_*

14. क़ुरबानी का गोश्त काफिर को हरगिज़ न दे और बदमज़हब मुनाफ़िक़ तो काफ़िर से बदतर है लिहाज़ा उसको भी हरगिज़ न दें
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 144_*

15. जो जानवर को ज़बह करे बिस्मिल्लाह शरीफ वोह पढ़े किसी दुसरे के पढ़ने से जानवर हलाल न होगा
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 121_*

16. ज़बह के वक़्त जानबूझकर बिस्मिल्लाह शरीफ न पढ़ी तो जानवर हराम है,और अगर पढ़ना भूल गया तो हलाल है
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 119_*
*_📕 ज़बीहे इसालो सवाब,सफ़ह 15_*

17. ज़बह करते वक़्त जानवर की गर्दन अलग हो गई या जानबूझकर भी अलग कर दी,ऐसा करना मकरूह है मगर जानवर हलाल है
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15, सफ़ह 118_*

18. अरफा यानि 9 ज़िल्हज्ज का रोज़ा अगले व पिछले 1 साल के गुनाहों का कफ्फारा है
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 5,सफ़ह 137_*

19. बेहतर है कि गोश्त के 3 हिस्से किये जायें,1 अपने लिये 1 रिश्तेदारों के लिये और 1 अपने पड़ोसियों के लिये,लेकिन अगर परिवार बड़ा है तो पूरा का पूरा भी रख सकते हैं,मगर जितना भी हो अपने गरीब पड़ोसियों का ख्याल ज़रूर रखें
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 5,सफ़ह 144_*

20. बड़े जानवर के 7 हिस्सों मे अगर 1 वहाबी की शिरकत हुई तो किसी की क़ुरबानी नही होगी,इसका खास ख्याल रखें
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 5,सफ़ह 142_*

21. गांव मे चुंकि ईद की नमाज़ नहीं है लिहाज़ा वहां सूरज निकलने के साथ ही क़ुर्बानी हो सकती है मगर शहर मे नमाज़े ईद से पहले हर्गिज़ नहीं हो सकती
*_📕 बहारे शरियत,हिस्सा 5,सफ़ह 137_*
*मस्जिद में हंसने का नुक़्सान*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : मस्जिद में हंसना क़ब्र में अँधेरा लाता है।
*✍🏼الفردوس*

    ख्याल रहे की मुस्कुराना अच्छी चीज़ है और क़हक़हा बुरी चीज़। तबस्सुम रहमते आलम صلى الله عليه وسلم की आदते करीमा थी।
*✍🏼मीरआतुल मनाजिह्, 7/14*

*_क़हक़हा की मज़म्मत_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : क़हक़हा शैतान की तरफ से है और मुस्कुराना अल्लाह की तरफ से है।
*✍🏼المعجم الصغير*

     क़हक़हा से मुराद आवाज़ के साथ हंसना है। शैतान इसे पसन्द करता है और उस पर सुवार हो जाता है। जब की तबस्सुम से मुराद बगैर आवाज़ के थोड़ी मिक़दार में हंसना है।
*✍🏼فيض القرير*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 62*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*गुनाहे कबीरा की तादाद*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     हम पर कबीरा गुनाहों से मुतअल्लिक़ मालूमात हासिल करना लाज़िम है की कबीरा गुनाह कौन कौन से हैं ? ताकि ब हैसिय्यत मुसलमान उन गुनाहों से बचा जा सके।
     गुनाहें कबीरा की तादाद के बारे में उलमाए किराम का इख़्तिलाफ़ है। बाज़ का क़ौल है की 7 हैं। इन हज़रात ने रसूले पाक صلى الله عليه وسلم के इस फरमान से दलील ली है की "सात हलाक करने वाले गुनाहों से बचो।" फिर आप صلى الله عليه وسلم ने उन सात गुनाहों का ज़िक्र फ़रमाया :
(1) शिर्क करना
(2) जादू करना
(3) (नाहक़) किसी जान को क़त्ल करना
(4) यतीम का माल (ज़ुल्मन) खाना
(5) सूद खाना
(6) जंग के दौरान मैदान से भाग जाना
(7) पाक दामन औरत को ज़ीना की तोहमत लगाना।
     ये हदिष बुखारी व मुस्लिम दोनों में है।

     हज़रते इब्ने अब्बास رضي الله عنه से मन्कुल है : सात के मुक़ाबले में ये गुनाह 70 के ज़्यादा क़रीब है।
*✍🏼تفسير عبد الرزاق*

     अल्लाह की क़सम ! हज़रते इब्ने अब्बास رضي الله عنه ने सच फ़रमाया क्यू की मज़कूरा हदिष में गुनाहे कबीरा की तादाद के बारे में कोई हस्र (यानी हदबन्दी) नहीं है।
*✍🏼76 कबीरा गुनाह, 17*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Monday, 21 August 2017

*83 आसान नेकियां* #34
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_शआईरे इस्लाम की ताज़ीम करना_*
     शआइरे इस्लाम मषलन क़ुरआन शरीफ, खानाए काबा, सफा मरवा, मदिनए मुनव्वरा, बैतूल मुक़द्दस, तुरे सीना और मुख़्तलिफ़ मक़ामाते मुक़द्दसा नीज़ अम्बियाए किराम عليهم السلام व औलियाए उज़्ज़ाम के मज़ारात और आबे ज़मज़म वगैरा की ताज़ीम करना भी बहुत बड़ी नेकी है, सूरए हज की आयत 32 में इर्शाद होता है :
_और जो अल्लाह के निशानों की ताज़ीम करे तो ये दिलों की परहेज़गारी से है।_

*_क़ुरआने पाक को चूमा करते_*
     अमीरुल मुअमिनिन हज़रते उमर फारुके आज़म رضي الله عنه रोज़ाना सुबह क़ुरआने मजीद को चूम कर फ़रमाते : ये मेरे रब का अहद और उस की किताब है।
*✍🏼در مختار*

*_हाथ चेहरे पर फेर लिया करते_*
     हुज़ूरे अकरम صلى الله عليه وسلم मिम्बर शरीफ पर जिस जगह बैठते थे हज़रते अब्दुल्लाह बिन उमर رضي الله عنه खास उस जगह पर अपना हाथ फिरा कर अपने चेहरे पर फेर लिया करते थे।
*✍🏼الشفا*

अल्लाह की इन पर रहमत हो और इन के सदके हमारी बे हिसाब मगफिरत हो।
أمين لجان النبي الامين

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼आसान नेकियां, 101*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*हाफ आस्तीन में नमाज़ पढ़ना कैसा*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

★ आधी आस्तीन वाला कुरता या क़मीज़ पहन कर नमाज़ पढ़ना मकरुहे तन्ज़ीहि है जब कि उसके पास दूसरे कपड़े मौजूद हो।

★ मुफ़्ती अमजद अली आज़मी अलैरहमा फरमाते है : जिसमे पास कपड़े मौजूद हो और सिर्फ आधी आस्तीन या बनियान पहन कर नमाज़ पढ़ता है तो कराहते तन्ज़ीहि है और कपड़े मौजूद नहीं तो कराहत भी नहीं।
*✍🏼फतवा रज़विय्या, 1/193*
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.200*

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*तकब्बुर का इलाज*
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     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : सलाम में पहल करने वाला तकब्बुर से दूर हो जाता है।
*✍🏼شعب الإيمان*

     जो शख्स मुसलमानों को सलाम कर लिया करे वो أن شاء الله मुतकब्बिर न होगा उस के दिल में ईज्ज़ो नियाज़ होगा ये अमल मुजर्र्ब है।
*✍🏼मीरआतुल मनाजिह्, 6/346*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 60*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*कबीरा गुनाहों से बचने की बरकत*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     अल्लाह इर्शाद फ़रमाता है : _अगर बचते रहो कबीरा गुनाहों से जिन की तुम्हें मुमानअत है तो तुम्हारे और गुनाह हम बख्श देंगे और तुम्हें इज़्ज़त की जगह दाखिल करेंगे।_
*✍🏼النساء ٣١*

    इस आयत में अल्लाह ने कबीरा गुनाहों से बचने वाले शख्स को जन्नत में दाखिल फरमाने का ज़िम्मा लिया है।

     और फ़रमाता है : _और वो जो बड़े बड़े गुनाहों और बे हयाईयों से बचते है और जब गुस्सा आए मुआफ़ कर देते है।_
*✍🏼الشورى ٣٧*

     इसी तरह फ़रमाता है : _वो जो बड़े गुनाहो और बे हयाईयों से बचते हैं मगर इतना की गुनाह के पास गए और रुक गए। बेशक तुम्हारे रब की मगफिरत वसीअ है।_
*✍🏼النجم ٣٢*

*_गुनाहों का कफ़्फ़ारा_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : पाचों नमाज़ें और एक जुमुआ दूसरे जुमुआ तक दरमियान में होने वाले गुनाहों का कफ़्फ़ारा हैं जब तक गुनाहे कबीरा का इर्तिकाब न किया जाए।
*✍🏼مسلم*
*✍🏼76 कबीरा गुनाह, 16*
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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Sunday, 20 August 2017

*83 आसान नेकियां* #33
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_सालिहीन का ज़िक्रे खैर करना_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : अच्छी बात कहना ख़ामोशी से बेहतर है और ख़ामोश रहना बुरी बात कहने से बेहतर है।
*✍🏼شعب الإيمان*

     कितने खुश नसीब है वो इस्लामी भाई और इस्लामी बहनें जो सिर्फ अच्छी बात कहने के लिये ज़बान को हरकत में लाते है, नेक लोगों का तज़किरा भी अच्छी गुफ्तगू में शामिल है और बाइषे रहमत भी।
     चुनान्चे हज़रते सुफ़यान बिन उयैना رحمة الله عليه का फरमान है : नेक लोगों के ज़िक्र के वक़्त रहमत नाज़िल होती है।
     जामेए सगीर में है : अम्बियाए किराम عليهم السلام का ज़िक्र करना इबादत है और सालिहीन का ज़िक्र (गुनाहो का) कफ़्फ़ारा है।
*✍🏼جامع صغير*

*_हमें बुजुर्गो की बातें सुनाइये_*
     मोहद्दिषे आज़म पाकिस्तान हज़रते मौलाना सरदार अहमद क़ादरी عليه رحما को बचपन ही से अपने बुज़ुर्गों से वालीहाना अक़ीदत थी, चुनान्चे, आप स्कुल की तालीम के दौरान अपने उस्ताज़ से अर्ज़ किया करते : मास्टर जी ! हमें बुज़ुर्गों की बातें सुनाइये और हुज़ूर सरवरे कायनात صلى الله عليه وسلم की हयाते तय्यिबा पर ज़रूर रौशनी डाला कीजिये।
*✍🏼हयाते मोहद्दिषे आज़म, 32*

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼आसान नेकियां, 100*
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*नमाज़ के मकरुहाते तन्ज़िहा* #06
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★ सहरा में बिला सुतरा के जब कि आगे से लोगो के गुज़रने का इम्कान हो इन जगहों पर नमाज़ पढ़ना।
*✍🏼गुन्यातुल मुस्तमली 339*

★ बिगैर उज़्र हाथ से माखी मच्छर उड़ाना (नमाज़ में जू या मच्छर इज़ा देते हो तो पकड़ कर मार डालने में कोई हरज नही जब की अमले कसीर से न हो)
*✍🏼बहारे शरीअत*

★ हर वो अमले कलिल जो नमाज़ी के लिये मुफीद हो, जाइज़ है और जो मुफीद न हो वो मकरूह
*✍🏼आलमगिरी, 1/109*

★ उल्टा कपड़ा पहनना या ओढ़ना।
*✍🏼फतावा रज़विय्या, 7/358*
*✍🏼फतावा अहले सुन्नत गैर मतबुआ*
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.199*
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*सलाम की अहमिय्यत*
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     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : सलाम गुफ्तगू से पहले है।
*✍🏼جامع الترمذي*

     सलाम तीन किस्म के है "सलामे इज़्न" ये घर में दाखिल होने से पहले इजाज़ते दाखिला हासिल करने के लिये है। "सलामे तहिय्यत" ये घर में दाखिल होने और कलाम करने से पहले है। " सलामे वदाअ" ये घर से रुख्सत होते वक़्त है। इस हदिष में सलामे तहिय्यत मुराद है, ये कलाम से पहले करनी चाहिये ताकि तहिय्यत बाक़ी रहे जेसे तहिय्यातुल मस्जिद के नफ्ल की वो बैठने से पहले पढ़े जाएं।
*✍🏼मीरआतुल मनाजिह्, 6/331*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 59*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Saturday, 19 August 2017

*83 आसान नेकियां* #32
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
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*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #30

*_जुमुआ के दिन नाख़ून काटना_*
     जुमुआ के दिन नाख़ून काटना मुस्तहब है। हाँ अगर ज़्यादा बढ़ गए हो तो जुमुआ का इन्तिज़ार न कीजिये। मौलाना अमजद अली आज़मी عليه رحما फ़रमाते है : मन्कुल है : जो जुमुआ के रोज़ नाख़ून काटे अल्लाह उस को दूसरे जुमुआ तक बालाओं से महफूज़ रखेगा और तीन दिन ज़ाइद यानी दस दिन तक। एक रिवायत में ये भी है की जो जुमुआ के दिन नाख़ून काटे तो रहमत आएगी और गुनाह जाएंगे।

*_नाख़ून काटने का तरीक़ा_*
     हाथों के नाख़ून काटने के मन्कुल तऱीके का खुलासा वेश खिदमत है : पहले सीधे हाथ की शहादत की ऊँगली से शुरू कर  के तरतीब वार छोटी ऊँगली समेत नाख़ून काटे जाएं मगर अंगूठा छोड़ दीजिये। अब उलटे हाथ की छोटी ऊँगली से शुरू कर के तरतीब वार अंगूठे समेत नाख़ून काट लीजिये। अब आखिर में सीधे हाथ के अंगूठे का नाख़ून काटा जाए।
     पाऊं के नाख़ून काटने की कोई तरतीब मन्कुल नही, बेहतर ये है की सीधे पाऊं की छोटी ऊँगली से शुरू कर के तरतीब वार अंगूठे समेत नाख़ून काट लीजिये फिर उलटे पाऊं के अंगूठे से शुरू कर के छोटी ऊँगली समेत नाख़ून काट लीजिये।

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*आसान नेकियां, 98*
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*नमाज़ के मकरुहाते तन्ज़िहा* #05
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★ जलती आग के सामने नमाज़ पढ़ना, शमा या चराग सामने हो तो हर्ज़ नहीं।
*✍🏼आलमगिरी, 1/108*

★ ऐसी चीज़ के सामने नमाज़ पढ़ना जिससे ध्यान बटे मसलन ज़ीनत और लहवो लअब वग़ैरा।
*✍🏼रद्दलमोहतर, 1/439*

★ नमाज़ के लिए दौड़ना।
★ कूड़ा डालने की जगह।
★ मज़्बह यानी जहा जानवर जबह किये जाते हो वहा।
★ इस्तबल यानी घोड़े बंधने की जगह।
★ गुस्ल खाना, मवेशी खाना खुसुसन जहां ऊंट बांधे जाते हो।
★ इस्तिन्जा खाने की छत।
इन जगह पर नमाज़ पढ़ना मकरुहे  तन्ज़िहा है

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*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.199*
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कई बन्दे ऐसे है जिन्हें नमाज़ में पढ़े जाने वाले कलामे पाक नहीं आते।

ये किताब हमने नमाज़ के तअल्लुक़ से बनाई है। इस में आप को 20 सूरह, षना, अत्तहिय्यत, दुरुदे इब्राहिम, दुआएं मसुरा व दुआए क़ुनूत हासिल होंगी। इसे आप ज़बानी याद कर के नमाज़ मुकम्मल की जा सकती है।

किताब 👇🏽 इस लिंक से डाऊनलोड करे।
https://drive.google.com/file/d/0BxNzOp0x1IN_cmtWN1pzOE5nNE0/view?usp=drivesdk

दुआए खैर का तालिब....
جزاك الله خيرا
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
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*खुश खबरी सुनाओ*
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     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : खुश खबरी सुनाओ और लोगों को नफरत न दिलाओ।
*✍🏼صحيح البخاري*

     यानी लोगों को गुज़श्ता गुनाहों से तौबा करने और नेक आमाल करने पर हक़ तआला की बख़्शिश व रहमत की खुश खबरियां दो। उन गुनाहों की पकड़ पर इस तरह न डराओ की उन्हें अल्लाह की रहमत से मायूसी हो कर इस्लाम से नफरत हो जाए। बहर हाल इन्ज़ार और डराना कुछ और है और मायूस कर के बद दिल कर देना कुछ और, लिहाज़ा ये हदिष उन आयात व अहादिश के खिलाफ नहीं जिन में अल्लाह की पकड़ से डराने का हुक्म है।
*✍🏼मीरआतुल मनाजिह्, 5/371*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 57*
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Thursday, 17 August 2017

*83 आसान नेकियां* #30
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
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*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #28

*_तमाम अमल करने वालों का षवाब मिलेगा_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जो हिदायत की तरफ बुलाए उस को तमाम अमल करने वालों की तरह षवाब मिलेगा और इस से अमल करने वालों के अपने षवाब से कुछ कम न होगा। और जो गुमराही की तरफ बुलाए तो उस पर तमाम पैरवी करने वाले गुमराहों के बराबर गुनाह होगा और ये उन के गुनाहों से कुछ कम न करेगा।
*✍🏼مسلم*

     हज़रते मुफ़्ती अहमद यार खान عليه رحما फ़रमाते है : ये हुक्म (आम है यानी) नबी صلى الله عليه وسلم के सदके से तमाम सहाबा, आइम्मए मुजतहिदीन, उलमए मुतक़द्दमीन व मुतअख्खिरिन सब को शामिल है मषलन अगर किसी की तबलीग से एक लाख नमाज़ी बनें तो उस मुबल्लिग को हर वक़्त एक लाख नमाज़ों का षवाब होगा और उन नमाज़ियों को अपनी नमाज़ों का षवाब, इस से मालुम हुवा की हुज़ूर का षवाब मख्लूक़ के अन्दाज़े से वरा है।
     रब फ़रमाता है : _और ज़रूर तुम्हारे लिये बे इन्तिहा षवाब है_
ऐसे ही वो मुसन्निफिन जिन की किताबो से लोग हिदायत पा रहे है क़यामत तक लाखों का षवाब उन्हें पहुचता रहेगा, ये हदिष इस आयत के खिलाफ नही :
_आदमी न आएगा मगर अपनी कोशिश_
क्यू की ये षवाबो की ज़्यादती उस के अमले तबलीग का नतीजा है।
     मज़ीद फ़रमाते है : इस में गुमराहों के मुजिदिन मुबल्लीगिन (यानि गुमराही ईजाद करने और गुमराही दूसरों को ओहुचने वाले) सब शामिल है ता क़यामत उन को हर वक़्त लाखो गुनाह पहुचते रहेंगे।
*✍🏼मीरआतुल मनाजिह्, 1/160*

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*✍🏼आसान नेकियां, 92*
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*नमाज़ के मकरुहाते तन्ज़िहा* #04
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

★ नमाज़ में सना, तअव्वुज़, तस्मिया और आमीन ज़ोर से कहना।
*✍🏼आलमगिरी, 1/107*

★ बिगैर उज़्र दिवार वगैरा पर टेक लगाना

★ रूकू में गुटनो पर और सजदों में ज़मीन पर हाथ न रखना, दाए बाए झूमना। और कभी दाए पाउ पर और कभी बाए पाउ पर ज़ोर देना के सुन्नत है।
*✍🏼बहारे शरीअत, 3/202*

★ और सज्दे के लिए जाते हुए सीधी तरफ ज़ोर देना और उठते वक़्त उलटी तरफ ज़ोर देना मुस्तहब है
*✍🏼बहारे शरीअत, 3/101*

★ नमाज़ में आँखे बंद रखना। हा अगर खुशुअ आता हो तो आँखे बंद रखना अफज़ल है।
*✍🏼दुर्रेमुखतार, रद्दलमोहतार, 2/499*

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.199*
*___________________________________*
मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
*___________________________________*
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*कैदखाना*
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     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : दुन्या मोमिन के लिये कैदखाना है और काफ़िर के लिये जन्नत।
*✍🏼صحيح مسلم*

     यानी मोमिन दुन्या में कितना ही आराम में हो, मगर उस के लिये आख़िरत की नेअमतों के मुक़ाबले में दुन्या जेलखाना है, जिस में वो दिल नहीं लगता। जेल अगरचे A क्लास हो, फिर भी जेल है। और काफ़िर ख्वाह कितनी ही तकलीफ में हो, मगर आख़िरत के अज़ाब के मुक़ाबिल उस के लिये दुन्या बाग़ और जन्नत है। वो यहाँ दिल लगा कर रहता है। लिहाज़ा हदिष पर ये ऐतराज़ नहीं की बाज़ मोमिन दुन्या में आराम से रहते है, और बाज़ काफ़िर तकलीफ में।
*✍🏼मीरअतुल मनाजिह्, 7/4*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 50*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Wednesday, 16 August 2017

*83 आसान नेकियां* #29
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #27

*_नेकी की दावत देना_*
     किसी को नेकी की दावत देना और बुराई से रोकना अहम तरीन नेकियों में से एक है और इस के बेशुमार फ़ज़ाइल है।
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : अगर अल्लाह तुम्हारे ज़रीए किसी एक शख्स को हिदायत अता फरमाए तो ये तुम्हारे लिये इस से अच्छा है की तुम्हारे पास सुर्ख ऊंट हो।
*✍🏼مسلم*

     हज़रते अल्लामा यहया बिन शरफ नववी عليه رحمه इस हदिष की शर्ह में लिखते है : सुर्ख ऊंट अहले अरब का बेश क़ीमत माल समझा जाता था, इस लिये कहावत के तौर पर सुर्ख ऊँटो का ज़िक्र किया गया। उखरवि उमूर को दुनयावी चीज़ों से मिषाल देना सिर्फ समझाने के लिये है वरना हक़ीक़त येही है की हमेशा बाक़ी रहने वाली आख़िरत का एक ज़र्रा भी दुन्या और इस जैसी जितनी दुन्याए तसव्वुर की जा सकें, उन सब से बेहतर है।
*✍🏼شرح مسلم للنووى*

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*✍🏼आसान नेकियां, 92*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*नमाज़ के मकरुहाते तन्ज़िहा* #03
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
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★ नमाज़ में बिला उज़्र चार जानू यानी चोकड़ी मार कर बैठना।
*✍🏼गुन्यातुल मुस्तमलि, 339*

★ अंगड़ाई लेना और इरादतन खाँसना, खनकारना।
*✍🏼गुन्यातुल मुस्तमलि, 340"*
● अगर तबीअत चाहती हो तो हरज नही

★ सज्दे में जाते हुए घुटने से पहले बिला उज़्र हाथ से क़ब्ल घुटने ज़मीन से उठना।
★ रूकू में सर को पीठ से उचा निचा करना।
*✍🏼गुन्यातुल मुस्तमलि, 335,338*

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*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.198*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
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*अज़ाबे क़ब्र*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
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     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : क़ब्र का अज़ाब हक़ है।
*✍🏼صحيح البخاري*

     अज़ाबे क़ब्र में मुतअल्लिक़ चन्द मसाइल याद रखने चाहिएं
(1) यहाँ क़ब्र से मुराद आलमे बरज़ख है। जिस की इब्तिदा हर शख्स की मौत से है इन्तिहा क़यामत पर, उर्फी क़ब्र मुराद नहीं लिहाज़ा जो मुर्दा दफ़्न न हुवा बल्कि जला दिया गया या डुबो दिया गया या उसे शेर खा गया उसे भी क़ब्र का हिसाब व अज़ाब है।
(2) हिसाबे क़ब्र और है अज़ाबे क़ब्र कुछ और बाज़ लोग हिसाबे क़ब्र में कामयाब होंगे मगर बाज़ गुनाहों की वजह से अज़ाब में मुब्तला, जैसे चुगल खोर और पेशाब के छीटों से न बचने वाला।
(3) काफ़िर को अज़ाबे क़ब्र दाइमी होगा गुनाहगार मोमिन को आरिज़ि।
(4) अज़ाबे क़ब्र रूह को है जिस्म इस के ताबे मगर हशर के बाद वाला अज़ाब व षवाब रूह व जिस्म दोनों को होगा।
*✍🏼मीरआतुल मनाजिह्, 1/125*
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Tuesday, 15 August 2017

*83 आसान नेकियां* #28
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*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #26

*_क़ब्रस्तान वालों के लिये दुआ करना_*
     जो क़ब्रस्तान में दाखिल हो कर ये कहे :
اٙللّٰهُمّٙ رٙبّٙ الْاٙجْسٙادِ الْبٙالِيٙةِ وٙالْعِظٙامِ النّٙخِرٙةِ الّٙتِىْ خٙرٙجٙتْ مِنٙ الدُّنْيٙا وٙهِىٙ بِكٙ مُؤْمِنٙةٌ اٙدْخِلْ عٙلٙيْهٙا رٙوْحًا مِّنْ عِنْدِكٙ وٙسٙلٙامًا
तर्जमा : ऐ अल्लाह ! ऐ गल जाने वाले जिस्मों और बोसीदा हड्डियों के रब ! जो दुन्या से ईमान की हालत में रुख्सत हुवे तू उन पर अपनी रहमत और मेरा सलाम पहुंचा दे।
     तो हज़रते आदम عليه السلام से ले कर इस वक़्त तक जितने मोमिन फौत हुवे सब उस (दुआ पढ़ने वाले) के लिये दुआए मगफिरत करेंगे।

*_आयत या सुन्नत सिखाना_*
     हज़रते अनस رضي الله عنه से रिवायत है की जिस शख्स ने क़ुरआन की एक आयत या दीन की कोई सुन्नत सिखाई क़यामत के दिन अल्लाह उस के लिये ऐसा षवाब तैयार फ़रमाएगा की उस से बेहतर षवाब किसी के लिये भी नही होगा। जब की हज़रते उष्मान इब्ने अफ्फान رضي الله عنه से रिवायत है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने इर्शाद फ़रमाया : जिस ने क़ुरआन की एक आयत सिखाई उस के लिये सिखने वाले से दुगना षवाब है।
*✍🏼جمع الجوامع*

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*✍🏼आसान नेकियां, 90*
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*नमाज़ के मकरुहाते तन्ज़िहा* #02
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     रूकू या सज्दे में बिला ज़रूरत 3 बार से कम तस्बीह कहना (अगर वक़्त तांग हो या ट्रेन चल पड़ने के खौफ से हो तो हरज नहीं। अगर मुक्तदि 3 तस्बीह न कहने पाया था कि इमाम ने सर उठा लिया तो इमाम का साथ दे)

     नमाज़ में पेशानी से ख़ाक या घास छुड़ाना। हा अगर इन की वजह से नमाज़ में ध्यान बटता हो तो छुड़ाने में हरज नही।
*✍🏼आलमगिरी, 1/106*

     सज्दे वग़ैरा में उंगलिया किब्ले से फेर देना।
*✍🏼आलमगिरी, 1/119*

     मर्द का सज्दे में रान को पेट से चिपका देना।
*✍🏼आलमगिरी, 1/109*

     नमाज़ में हाथ या सर के इशारे से सलाम का जवाब देना।

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*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.198*
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*रौज़ए अक़दस की हाज़री*
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     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जिस ने मेरी क़ब्र की ज़ियारत की, उस के लिये मेरी शफ़ाअत लाज़िम हो गई।
*✍🏼شعب الايمان*

     क़ुरआने पाक में अल्लाह इर्शाद फ़रमाता है :
_और अगर जब वो अपनी जानों पर ज़ुल्म करें तो ऐ महबूब तुम्हारे हुज़ूर हाज़िर हों और फिर अल्लाह से मुआफ़ी चाहें और रसूल उन की शफ़ाअत फरमाए तो ज़रूर अल्लाह को बहुत तौबा क़बूल करने वाला मेहरबान पाएं।_

     हज़रत नईमुद्दीन मुरादआबादी عليه رحما इस आयत के तहत लिखते है : इस से मालुम हुवा की बारगाहे इलाही में रसूलुल्लाह صلى الله عليه وسلم का वसीला और आप की शफ़ाअत कार-बरआरी (काम बन जाने) का ज़रीआ है सैय्यिदे आलम صلى الله عليه وسلم की वफ़ात शरीफ के बाद एक देहाती शख्स रैज़ाए अक़दस पर हाज़िर हुवा और रौज़ए शरीफा की खाके पाक कपने सर पर डाली और अर्ज़ करने लगा : या रसूलुल्लाह जो आप ने फ़रमाया हम ने सुना और जो आप पर नाज़िल हुवा उस में ये आयत भी है وٙلٙوْ اٙنّٙهُمْ اِذْ ظّٙلٙمُوْا में ने बेशक अपनी जान पर ज़ुल्म किया और में आप के हुज़ूर में अल्लाह से अपने गुनाह की बख्शिश चाहने हाज़िर हुवा तो मेरे रब से मेरे गुनाह की बख्शीश कराइये। इस पर क़ब्र शरीफ से निदा आई की तेरी बख्शीश की गई।
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 46*
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Monday, 14 August 2017

*83 आसान नेकियां* #27
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
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*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #25

*_दुआ करना_*
     दुन्या के बड़े से बड़े अमीर शख्स से जब बार बार कुछ माँगा जाता है तो वो उकता कर नाराज़ हो जाता है लेकिन इस दुन्या का खालीक़ो मालिक अल्लाह ऐसा जव्वाद और करीम है की उसे अपने बन्दों का मांगना बहुत पसन्द है, इन में से जो जितना ज़्यादा दुआ मांगेगा अल्लाह उस से उतना ही खुश होगा।।
     हमारे आक़ा صلى الله عليه وسلم कषरत से दुआ माँगा करते थे हत्ता की सोने जागने, खाने पिने, कपड़े पहनने उतारने, बैतूल खला जाने आने के वक़्त और वुज़ू करने के दौरान भी दुआ माँगा करते थे।
     दुकान किसी भी वक़्त किसी भी जाइज़ व मुमकिन चीज़ के लिये मांगी जा सकती है अलबत्ता दुआ के आदाब का ख़याल रखना ज़रूरी है। बहर हाल दुआ दुन्यवी मक़ासिद के लिये मांगी जाए या उखरवी, इबादत में शुमार होती है।
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم दुआ इबादत का मग्ज़ है।
*✍🏼خامه ترمزى*

*_दुआ मोमिन का हथियार_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : दुआ मोमिन का हथियार, दीन का सुतून और ज़मीनो आसमान का नूर है।

*_दुआ के फायदे_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जो मुसलमान कोई ऐसी दुआ मांगता है जिस में कोई गुनाह या कतए रहमी न हो तो अल्लाह उसे तिन में से एक खसलते अता फ़रमाता है।
(1) या तो उस की दुआ जल्द क़बूल कर ली जाती है।
(2) या उसे आख़िरत के लिये ज़खीरा कर दिया जाता है।
(3) या फिर उस से इसी की मिष्ल कोई बुराई दूर कर दी जाती है।
सहाबए किराम ने अर्ज़ की फिर तो हम बहुत ज़्यादा दुआए माँगा करेंगे। फ़रमाया अल्लाह ज़्यादा दुआए क़बूल फरमाने वाला है।

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*✍🏼आसान नेकियां, 89*
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*नमाज़ के मकरुहाते तन्ज़ीहा* #01
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     दूसरे कपड़े मुयस्सर होने के बा वुजूद कामकाज के लिबास में नमाज़ पढ़ना।
*✍🏼गुण्यतुल मुस्तमलि, 337*

     मुह में कोई चीज़ लिये हुए होना। अगर इस की वजह से किराअत ही न हो सके या ऐसे अलफ़ाज़ निकले कि जो क़ुरआन के न हो तो नमाज़ ही फासिद हो जाएगी।
*✍🏼दुर्रेमुख्तार, रद्दलमोहतार*

     सुस्ती से नंगे सर नमाज़ पढ़ना।
*✍🏼आलमगिरी, 1/106*

     नमाज़ में टोपी या इमाम शरीफ गिर पड़े तो उठा लेना अफज़ल है जब कि अमले कसीर की हाजत न पड़े वरना नमाज़ फासिद् हो जाएगी। और बार बार उठाना पड़े तो छोड़ दे और उठाने से खुशुओ ख़ुज़ूअ मक़सूद हो तो उठाना अफज़ल है।
*✍🏼दुर्रेमुखतार, रद्दलमोहतार 2/194*

     अगर कोई नंगे सर नमाज़ पढ़ रहा हो या उसकी टोपी गिर पड़ी हो तो उसको दूसरा शख्स टोपी न पहनाए।

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*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.197*
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*नमाज़ की अहमिय्यत*
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     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : नमाज़ दीन का सुतून है।
*✍🏼شعب الايمان*

     नमाज़ दीन की अस्ल और बुन्याद है, इसे उम्मुल इबादत, मेराजुल मुअमिनिन भी कहा जाता है।
*✍🏼فيض القدير*

*_मछली अपनी जगह पर थी_*
     शैख़ अबू अब्दुल्लाह जिला رضي الله عنه की वालिदा ने एक रोज़ अपने शौहर से मछली लाने की फरमाइश की। शैख़ के वालिद बाज़ार गए और अपने फ़रज़न्द को भी हमराह ले गए। बाज़ार से मछली खरीदी, और एक मज़दूर तलाश करने लगे ताकि वो मछली घर तक पहुचा दे। एक लड़का मिला और उस ने मछली सर पर उठा ली और साथ चला, रास्ते में मुअज्ज़िन की अज़ान सुनाई दी। उस मज़दूर लड़के ने कहा : नमाज़ के लिये मुझे तहारत की हाजत है और अज़ान हो रही है, अगर आप राज़ी हो तो मेरा इन्तिज़ार कर लें, वरना अपनी मछली ले कर जाएं। इतना कह कर उस ने मछली वहीं छोड़ी और मस्जिद चला गया। शैख़ के वालिद ने कहा : इस लड़के का अल्लाह पर तवक़्क़ुल है, हमें ब दर्जए औला तवक़्क़ुल करना चाहिये। चुनान्चे मछली छोड़ कर हम लोग नमाज़ पढ़ने चके गए। हम लोग नमाज़ पढ़ कर निकले तो मछली अपनी जगह थी, लड़के ने उठा ली और हम लोग घर पहुचे।
*✍🏼روض الرياحين*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 44*
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Sunday, 13 August 2017

*83 आसान नेकियां* #26
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*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #24

*_खन्दा पेशानी से सलाम करना_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم तुम्हारा लोगो को खन्दा परशानी से सलाम करना भी सदक़ा है।
*✍🏼شعب الايمان*

*_मुसाफहा करना_*
     दो मुसलमानो का ब वक़्ते मुलाक़ात सलाम कर के दोनों हाथो से मुसाफहा करना यानी दोनों हाथ मिलाना सुन्नत है।
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم जब दो मुसलमान मुलाक़ात करते हुवे मुसाफहा करते है और एक दूसरे से खैरिय्यत दरयाफ़्त करते है तो अल्लाह उन के दरमियान सो रहमते नाज़िल फ़रमाता है जिन में से 99 रहमतें ज़्यादा पुर तपाक तरीके से मिलने वाले और अच्छे तरीके से अपने भाई से खैरिय्यत दरयाफ़्त करने वाले के लिये होती है।

*_गुनाह झड़ते है_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم जब कोई मुसलमान कपने भाई से मुलाक़ात करते हुवे उस हाथ पकड़ता है तो उस के गुनाह ऐसे झड़ते है जेसे तेज़ आंधी में खुश्क दरख्त के पत्ते झड़ते है और इन दोनों की मगफिरत कर दी जाती है अगर्चे इन के गुनाह समन्दर की झाग के बराबर हों।

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*आसान नेकियां, 85*
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*नमाज़ के मकरुहाते तहरीमि* #13
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*_नमाज़ और तस्वीर_*
     जानदार की तस्वीर वाला लिबास पहन कर नमाज़ पढ़ना मकरुहे तहरीमि है, नमाज़ के इलावा भी ऐसा कपड़ा पहनना जाइज़ नहीं।
*✍🏼दुर्रेमुखतार 2/502*

     नमाज़ी के सर पर यानी छत पर या सज्दे की जगह पर या आगे या दाए या बाए जानदार की तस्वीर आवेज़ा होना मकरुहे तहरीमि है और पीछे होना भी मकरूह है, मगर गुज़श्ता सूरतो से कम। अगर तस्वीर फर्श पर है और उस और सज्दा नहीं होता तो कराहत नहीं। अगर तस्वीर गैर जानदार की है जेसे दरिया पहाड़ वगैरा तो इस में कोई मुज़ायक़ा नहीं। इतनी छोटी तस्वीर हो जिसे ज़मीन पर रख कर खड़े हो कर देखे तो आज़ा की तफ़सील न दिखाई दे (जैसा के उमुमन तवाफ़े काबा के मंज़र की तस्वीरें बहुत छोटी होती है ये तसावीर) नमाज़ के लिये बाइसे कराहत नहीं है।
*✍🏼गुण्यतुल मुस्तमलि, 347*
*✍🏼दुर्रेमुखतर, 2/503*

     तवाफ़ की भीड़ में एक भी चेहरा वाज़ेह हो गया तो मुमानअत बाक़ी रहेगी। चेहरे के इलावा मसलन हाथ, पाउ, पीठ, चेहरे का पिछला हिस्सा या ऐसा चेहरा जिस की आँखे, नाक, होठ वग़ैरा सब आज़ाए मिटे हुए हो ऐसी तसावीर में कोई हर्ज़ नही।
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.196*
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गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Saturday, 12 August 2017

*83 आसान नेकियां* #25
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #23

*_सलाम के अल्फ़ाज़ बढ़ाना_*
     अगर्चे सलाम की सुन्नत सिर्फ السلام عليكم कहने से अदा तो हो जाएगी लेकिन अगर इस के साथ ورحمة الله وبركاته बढ़ा लिया जाए तो ज़्यादा षवाब है, चुनान्चे السلام عليكم कहने से 10 नेकियां मिलती है। साथ में ورحمة الله भी कहेंगे तो 20 नेकियां हो जाएंगी और وبركاته शामिल करेंगे तो 30 नेकियां हो जाएंगी। इसी तरह जवाब में وعليكم السلام والرحمة و بركاته कह कर 30 नेकियां हासिल की जा सकती है।
     एक शख्स ने हुज़ूर صلى الله عليه وسلم की बारगाह में हाज़िर हो कर अर्ज़ की السلام عليكم आप ने सलाम का जवाब इर्शाद फ़रमाया। फिर वो शख्स बैठ गया तो नबी صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया : 10 नेकियां है। फिर एक दूसरा शख्स हाज़िर हुवा और अर्ज़ की السلام عليكم و رحمه الله आप ने उसे भी जवाब दिया। फिर वो बैठ गया तो नबी صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया 20 नेकियां है। फिर एक और शख्स ने हाज़िर हो कर अर्ज़ किया السلام عليكم و رحمه الله و بركاته फिर वो बैठ गया तो रसूलुल्लाह صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया 30 नेकियां है।
*✍🏼سنن ابن داود*

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*✍🏼आसान नेकियां, 84*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
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*नमाज़ के मकरुहाते तहरीमि* #12
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     दूसरा कपड़ा होने के बा वुजूद सिर्फ पाजामा या तहबन्द में नमाज़  पढ़ना।

     किसी आने वाले शनासा की खातिर इमाम का नमाज़ को तूल देना (आलमगिरी, 1/107) अगर उस की नमाज़ पर इआनत (मदद) के लिये एक दो तस्बीह की क़दर तूल दिया तो हरज नहीं।

     ऐसी ज़मीन जिस पर ना जाइज़ क़ब्ज़ा किया हो या पराया खेत जिस में ज़राअत मौजूद है या जूते हुए खेत में या क़ब्र के सामने जब कि क़ब्र और नमाज़ी के बिच में कोई चीज़ हाइल न हो नमाज़ पढ़ना।
*✍🏼आलमगिरी, 1/107*

     कुफ़्फ़ार के इबादत खाने में नमाज़ पढ़ना बल्कि इन में जाना भी मम्नुअ है।
*✍🏼रद्दलमोहतार, 2/53*

     कुरते वग़ैरा के बटन खुले होना जिस से सीना खुला रहे मकरुहे तहरीमि है, हा अगर निचे कोई और कपड़ा है जिस से सीना नहीं खुला तो मकरुहे तन्ज़ीहि है।

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*✍🏼नमाज़ के अहकाम, 196*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
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Friday, 11 August 2017

*83 आसान नेकियां* #24
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #22

*_सलाम में पहल करना_*
     एक दूसरे को सलाम करने से षवाब प भी मिलता है और आपस में महब्बत बढ़ती है लेकिन सलाम में पहल करने वाला ज़्यादा फायदा पाता है। सलाम में पहल करने वाला अल्लाह का मुक़र्रब है, सलाम में पहल करने वाले पर 90 रहमतें और जवाब देने वाले पर 10 रहमतें नाज़िल होती है।
*✍🏼الخامه الصغير*

*_सिर्फ सलाम करने के लिये बाज़ार जाया करते_*
     हज़रते तुफैल बिन उबय्य बिन काब رضي الله عنه से रिवायत है की में सुबह के वक़्त हज़रते अब्दुल्लाह बिन उमर رضي الله عنه के पास जाता तो वो मुझे अपने साथ बाज़ार ले जाते जहाँ वो मामूली चीजें बेचने वाले, दुकानदार और मिसकीन या किसी और के सामने से गुज़रते तो सब को सलाम करते।
     एक दिन जब उन्हों ने मुझे बाज़ार चलने को कहा तो में ने पूछा : आप बाज़ार जा कर क्या करेंगे ! आप वहां खड़े होते है न सौदे के मुतअल्लिक़ कुछ दरयाफ़्त करते है, किसी चीज़ का नर्ख चुकाते है न बाज़ार की मजलिसों में बैठते है। आप यहीं बैठे बैठे हमें हदिशे सुना दिया करें। उन्हों ने फ़रमाया : हम सलाम करने के लिये ही बाज़ार जाते है कि जो मिलेगा, उसे सलाम करेंगे।

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*✍🏼आसान नेकियां, 82*
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*नमाज़ के मकरुहाते तहरीमि* #11
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_गधे जैसा मुंह_*
     हज़रते इमाम न-ववी अलैरहमा हदिष लेने के लिये एक बड़े मशहूर शख्स के पास दिमश्क़ गए। वो पर्दा डाल कर पढ़ाते थे, मुद्दतो तक उन के पास बहुत कुछ पढ़ा मगर उन का मुंह न देखा, जब ज़मानए दराज़ गुज़रा और उन मुहद्दिस साहिब ने देखा कि इन को इल्मे हदिष की बहुत ख्वाहिश है तो एक रोज़ पर्दा हटा दिया !

     देखते क्या है कि उनका गधे जैसा मुंह है !! उन्होंने फ़रमाया, साहिब ज़ादे ! दौराने जमाअत इमाम पर सबक़त करने से डरो कि ये हदिष जब मुझ को पहुची मेने इसे मुस्तबअद जाना और मेने इमाम पर क़सदन सबक़त की तो मेरा मुह ऐसा हो गया जैसा तुम देख रहे हो।
*✍🏼बहारे शरीअत, जी.3 स.95*

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*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.195*
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Thursday, 10 August 2017

*83 आसान नेकियां* #23
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #21

*_रोज़ा इफ्तार करवाना_*
     किसी का रोज़ा इफ्तार करवाना भी बहुत बड़ी मगर आसान नेकी है, इस के लिये समोसों, पकड़ो, फलो और तरह तरह की डिशो का होना ज़रूरी नही बल्कि सिर्फ पानी से रोज़ा इफ्तार करवा के भी षवाब कमाया जा सकता है।

     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जो हलाल कमाई से किसी रोज़ेदार को इफ्तार करवाए तो फ़रिश्ते पूरा रमज़ान उस के लिये दुआए मगफिरत करते रहते है और शबे क़द्र में हज़रते जिब्राइल उस से मुसाफहा फरमाएंगे और जिस शख्स से हज़रते जिब्राइल मुसाफहा फ़रमाते है उस का दिल नर्म और आसूं कषिर हो जाते है। एक शख्स ने अर्ज़ की या रसूलुल्लाह صلى الله عليه وسلم अगर किसी के पास इतना न हो तो ? इर्शाद फ़रमाया : चाहे पानी मिला हुवा थोडा सा दूध ही हो। एक और शख्स ने अर्ज़ की अगर इतना भी न हो तो ? फ़रमाया : पानी के एक घूंट से ही इफ्तार करवा दे।
*✍🏼तिबरानी*

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*✍🏼आसान नेकियां, 81*
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*नमाज़ के मकरुहाते तहरीमि* #10
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

★ किराअत रूकू में पहुच कर खत्म करना।

★ इमाम से पहले मुक्तदि ला रूकू व सुजूद वग़ैरा में चला जाना या इससे पहले सर उठाना।
*✍🏼रद्दलमोहतार, जी.2 स.513*

★ हज़रते इमाम मालिक, हज़रते अबू हुरैरा رضي الله عنه से रिवायत करते है कि नबी صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया : जो इमाम से पहले सर उठाता और झुकाता है उस की पेशानी के बाल शैतान के हाथ में है।

★ हज़रते अबू हुरैरा رضي الله عنه से रिवायत है, नबी صلى الله عليه وسلم फरमाते है : क्या जो शख्स इमाम से पहले सर उठाता है इस से डरता नहीं की अल्लाह उसका सर गधे का सर कर दे।
*✍🏼सहीह मुस्लिम, 1/181*

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*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.194-195*
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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*तौबा की बुन्याद* #02
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     (2) गुनाहों के अन्जाम के तौर पर जहन्नम में दिये जाने वाले अज़ाबे इलाही की शिद्दत को पेशे नज़र रखे, हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया :
     ◆ दोज़ख़ियों में सब से हल्का अज़ाब जिस को होगा उसे आग के जूते पहनाए जाएंगे जिन से उस का दिमाग खौलने लगेगा।
*✍🏼सहीह मुस्लिम*
     ◆ अगर उस ज़र्द पानी का एक डोल जो दोज़ख़ियों के ज़ख्मों से जारी होगा वो दुन्या में डाल दिया जाए तो दुन्या वाले बदबूदार हो जाएं।
*✍🏼तिर्मिज़ी*
     ◆ दोज़ख में बख्ती (बड़े ऊंट के बराबर सांप) ये सांप एक मर्तबा किसी को काटे तो उस का दर्द और ज़हर चालीस बारस तक रहेगा। और दोज़ख में पालान बंधे हुए खच्चरों के मिस्ल बिच्छु है जिन के एक मर्तबा काटने का दर्द चालीस साल तक रहेगा।
*✍🏼المسند للإمام احمد*
     ◆ तुम्हारी ये आग जिसे इब्ने आदम रोशन करता है, जहन्नम की आग से 70 दर्जे कम है। ये सुन कर सहाबए किराम ने अर्ज़ की या रसूलुल्लाह صلى الله عليه وسلم! वो इस से 69 दर्जे ज़्यादा है, हर दर्जे में यहाँ की आग के बराबर गर्मी है।
*✍🏼صحيح مسلم*
     ★ फिर अपने आप से यूँ मुखातिब हों। अगर मुझे जहन्नम में डाल दिया गया तो मेरा ये नरम व नाजुक बदन उस के हौलनाक अज़ाबात को किस तरह बर्दाश्त कर पाएगा ? जब की जहन्नम में पहुचने वाली तकालिफ् की शिद्दत के सबब इन्सान पर न तो बेहोशी तारी होगी और न ही उसे मौत आएगी। आह ! वो वक़्त कितनी बे बसी का होगा जिस के तसव्वुर से ही दिल कांप उठता है। क्या ये रोने का मक़ाम नही ? क्या अब भी गुनाहों से वहशत महसूस नहीं होगी और दिल में नेकियों की महब्बत नहीं बढ़ेगी ? क्या अब भी बारगाहे खुदा में सच्ची तौबा पर दिल माइल नहीं होगा ?
     उम्मीद है की बार बार इस अन्दाज़ से फ़िक्रे मदीना करने की बरकत से दिल में नदामत पैदा हो जाएगी और सच्ची तौबा की तौफ़ीक़ मिल जाएगी। أن شاء الله
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 38*
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Wednesday, 9 August 2017

*83 आसान नेकियां* #22
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
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*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #20

*_नमाज़ के इंतज़ार में बैठना_*
     नमाज़ ऐसी इबादत है जिस का इन्तज़ार करने वाला भी षवाब का हक़दार हो जाता है, फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : नमाज़ के इन्तज़ार में बैठने वाला क़याम करने वाले की तरह है और अपने घर से निकलने के वक़्त से लौटने तक नमाज़ियों में लिखा जाता है।

*_गुनाहों को मिटाने वाला अमल_*
     आप صلى الله عليه وسلم ने एक जगह वुज़ू फ़रमाया फिर अपने सहाबए किराम की तरफ रुख कर के फ़रमाया : क्या में तुम्हें गुनाहों को मिटाने वाले अमल के बारे में न बताऊँ ? सहाबा ने अर्ज़ की : ज़रूर बताइये। इर्शाद फ़रमाया : मशक़्क़त के वक़्त कामिल वुज़ू करना और मस्जिद की तरफ कषरत से आमदो रफ्त रखना और एक नमाज़ के बाद दूसरी नमाज़ का इन्तज़ार करना।

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*✍🏼आसान नेकियां, 80*
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*नमाज़ के मकरुहाते तहरीमि* #09
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★ उल्टा कुरआन पढ़ना (मसलन पहली रकअत में "तब्बतयदा" पढ़ी और दूसरी में "इजाजा")

★ किसी वाजिब को तर्क करना। मसलन क़ौमा और जल्सा में पीठ सीधी होने से पहले ही रूकू या दूसरे सज्दे में चला जाना।
◆ इस गुनाह में मुसलमानो की अच्छी खासी तादाद मुलव्व्स नज़र आती है, यद् रखिये ! जितनी भी नमाज़े इस तरह पढ़ी होगी सब का लौटाना वाजिब है।

★ क़याम के इलावा किसी और मौके पर कुरआन पढ़ना।

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*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.194*
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*तौबा की बुन्याद* #01
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     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : शर्मिन्दगी तौबा है।
*✍🏼سنن ابن ماجه*

     चुकी गुज़श्ता गुनाहो पर नदामत (शर्मिन्दगी) तौबा का रुकने आला है की इस पर बाक़ी सारे अरकान मबनी है, इस लिये सिर्फ नदामत का ज़िक्र फ़रमाया। जो किसी का हक़ मारने पर नादिम होगा तो हक़ अदा भी कर देगा, जो बे नमाज़ी होने पर शरमिन्दा होगा वो गुज़श्ता छूटी नमाज़े क़ज़ा भी कर लेगा أن شاء الله.
*✍🏼मीरआतुल मनाजिह्, 3/379*

     हमे चाहिये की नदामते क़ल्बी को पाने के लिये इन मदनी फूलों पर अमल करे :
     (1) अल्लाह की नेअमतो पर इस तरह गौरो फ़िक्र करें कि "उस ने मुझे करोडहा नेअमतों से नवाज़ा मसलन मुझे पैदा किया..मुझे ज़िन्दगी बाक़ी रखने के लिये सांसे अता फ़रमाई..चलने के लिये पाऊं दिये.. छूने के लिये हाथ दिये.. देखने के लिये आँखें अता फ़रमाई.. सुनने के लिये कान दिये.. सूंघने के लिये नाक दी.. बोलने के लिये ज़बान अता की और करोडहा ऐसी नेअमते अता फ़रमाई जिन पर आज तक में ने कभी गौर नहीं किया।" फिर अपने आप से यूँ सुवाल करे : क्या इतने एहसानात करने वाले रब की ना फ़रमानी करना मुझे ज़ैब देता है ?

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*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 37*
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Tuesday, 8 August 2017

*83 आसान नेकियां* #21
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*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #19

*_सफ में दाहिनी तरफ खड़े होना_*
     अगर कोशिश कर के इमाम साहिब के सीधे हाथ की तरफ खड़े हो जाएं तो हम एक और फ़ज़ीलत को पाने में कामयाब हो जाएंगे।
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : बेशक अल्लाह और उस के फ़रिश्ते सफों की दाहिनी जानिब नमाज़ पढ़ने वालों पर रहमत भेजते है।
*سنن ابي داود*

     मुक्ति (इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ने वाला) के लिये अरज़ल जगह ये है की इमाम से क़रीब हो और दोनों तरफ बराबर हो, तो दाहिनी तरफ अफ़्ज़ल है।
*बहारे शरीअत*

*_सफ में खली जगह पुर करना_*
     जमाअत के दौरान सफ में खाली जगह पुर करना भी बेहद आसान नेकी है और इस की भी बड़ी फ़ज़ीलत है।
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم जो सफ के खला को पुर करेगा अल्लाह उस का एक दर्जा बुलन्द फ़रमाएगा और उस के लिये जन्नत में एक घर बनाएगा।
*✍🏼طبرانى*

*_मगफिरत कर दी जाएगी_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم जो सफ के खला को पुर करेगा उस की मगफिरत कर दी जाएगी।
*✍🏼مجمع الزوائر*
     पहली सफ में जगह हो और पिछली सफ भर गई हो तो उस को चिर कर जाए ओर उस खाली जगह में खड़े हो, और ये वहां है जहां फितना व फसाद का ऐहतिमाल न हो।
*✍🏼बहारे शरीअत*

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*✍🏼आसान नेकियां, 79*
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*नमाज़ के मकरुहाते तहरीमि* #08
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*_नमाज़ी की तरफ देखना_* #01
★ किसी शख्स के मुह के सामने नमाज़ पढ़ना।
★ दूसरे शख्स को भी नमाज़ी की तरफ मुह करना ना जाइज़ व गुनाह है, कोई पहले से चेहरा किये हुए हो और अब कोई उस के चेहरे की तरफ रुख कर के नमाज़ शुरू करे तो नमाज़ शुरू करने वाला गुनाहगार हुवा और इन नमाज़ी पर कराहत आई वरना चेहरा करने वाले पर गुनाह व कहारत है।
*✍🏼दुर्रे मुख्तार, जी.2 स.496*

★ जो लोग जमाअत का सलाम फिर जाने के बाद अपने ऐन पीछे नमाज़ पढ़ने वाले की तरफ चेहरा कर के उस को देखते है या पीछे जाने के लिये उस की तरफ मुह कर के खड़े हो जाते है कि ये सलाम फेरे तो निकलू, या नमाज़ी के ठीक सामने खड़े हो कर एलान करते, दर्स देते, बयान करते है ये सब तौबा करे।

★ नमाज़ में नाक और मुह छुपाना
*✍🏼आलमगीरी, जी.1 स.106*

★ बिला ज़रूरत खनकार (यानी बलगम वग़ैरा) निकालना।

★क़सदन जमाहि लेना। (अगर खुद बी खुद आए तो हरज नहीं मगर रोकना मुस्तहब है)
     हुज़ूर ﷺ फरमाते है : जब नमाज़ में किसी को जमाही आए तो जहा तक हो सके रोके कि शैतान मुह में दाखिल हो जाता है।
*✍🏼सहीह मुस्लिम, स.413*

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*धोका देने का नुक़्सान*
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     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जो धोका देही करे वो हम में से नहीं है।
*✍🏼جامع الترمذي*

     इस हदिष से मालुम हुआ की तिजारती चीज़ में ऐब पैदा करना भी ज़ुर्म है, और कुदरती पैदा शुदा ऐब को छुपाना भी ज़ुर्म।देखो हमारे आक़ा صلى الله عليه وسلم ने बारिश से भीगे गल्ले को छुपाना मिलावट ही में दाखिल फ़रमाया।
     हज़रते अबू हुरैरा رضي الله عنه से रिवायत है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم गल्ले के एक ढेर पर गुज़रे तो अपना हाथ शरीफ उस में डाल दिया। आप की उंगलियों ने उस में तरी पाई तो फ़रमाया : ऐ गल्ले वाले ये क्या ? अर्ज़ की या रसूलुल्लाह صلى الله عليه وسلم ! इस पर बारिश पड़ गई। फ़रमाया : तो गीले गल्ले को तूने ढेर के ऊपर क्यू न डाला ताकि इसे लोग देख लेते, जो धोका दे वो हम में से नही।
*✍🏼صحيح مسلم*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 36*
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गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Monday, 7 August 2017

*83 आसान नेकियां* #20
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #18

*_नमाज़ से पहले मिस्वाक करना_*
     मिस्वाक करना बड़ी पाकीज़ा सुन्नते मुबारका है, लेकिन अगर नमाज़ से पहले मिस्वाक कर ली जाए तो नमाज़ का षवाब मज़ीद बढ़ जाता है। दो रकअत मिस्वाक कर के पढ़ना बगैर मिस्वाक की 70 रकअतो से अफ़्ज़ल है।
*✍🏼अत्तरगिब् वत्तरहिब*

*_पहली सफ में नमाज़ पढ़ना_*
     जमाअत से नमाज़ पढ़ने का षवाब अकेले नमाज़ पढ़ने के मुक़ाबले में 27 गुना ज़्यादा है लेकिन जमाअत की पहली सफ में नमाज़ पढ़ने की मज़ीद फ़ज़ीलत है।
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : पहली सफ मलाइका की सफ की मिष्ल है, और अगर तुम पहली सफ की फ़ज़ीलत जान लेते तो इसे हासिल करने के लिये जल्दी जल्दी आगे बढ़ते।
*✍🏼مسند احمد*
     मर्दों की पहली सफ की इमाम से क़रीब है, दूसरी से अफ़्ज़ल है और दूसरी तीसरी से وعلٰى هذا القياس
*✍🏼बहारे शरीअत*
     लिहाज़ा हमे हर नमाज़ पहली सफ में अदा करने की कोशिश करनी चाहिये लेकिन पहली सफ में इस तरह न घुसा जाए की दूसरों को तकलीफ हो, फंस कर खड़े होने से भी बचिये की सफ टेढ़ी होने का खदशा होता है।

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼आसान नेकियां, 78*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*नमाज़ के मकरुहाते तहरीमि* #07
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_आस्मान की तरफ देखना_*
     निगाह आसमान की तरफ उठाना, हुज़ूर ﷺ फरमाते है : क्या हाल है उन लोगो का जो नमाज़ में आसमान की तरफ आँखे उठाते है इससे बाज़ रहे या उनकी आँखे उचक ली जाएगी।
*✍🏼सहीह बुखारी, जी.2 स.103*

     इधर उधर मुह फेर कर देखना, चाहे पूरा मुह फेर या थोडा। मुह फेरे बिगैर सिर्फ आँखे फिरा कर इधर उधर बे ज़रूरत देखना मकरुहे तन्ज़ीहि है और नादिरन किसी गरजे सहीह के तहत हो तो हरज नहीं।
*✍🏼बहारे शरीअत, जी.3 स.194*

     सरकारे मदीना ﷺ फरमाते है : जो बन्दा नमाज़ में है अल्लाह की रहमते खास्सा उस की तरफ मुतवज्जेह रहती है जब तक इधर उधर न देखे, जब उसने अपना मुह फेरा उस की रहमत भी फिर जाती है।
*✍🏼अबू दाऊद, जी.1 स.334 हदिष:909*

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*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.193*
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गर होजाए यक़ीन के.....
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*दुआ बला को टाल देती है*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : दुआ बला को टाल देती है।
*✍🏼الجامع الصغير*

     दुआ के दो फायदे है एक ये की इस की बरकत से आई बला टल जाती है दूसरे ये की आने वाली बला रुक जाती है। लिहाज़ा फ़क़त बला आने पर ही दुआ न की जाए बल्कि हर वक़्त दुआ मांगनी चाहिये, शायद कोई बला आने वाली हो जो इस दुआ से रुक जाए।
*✍🏼मीरआतुल मनाजिह्, 3/295*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 34*
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Sunday, 6 August 2017

*83 आसान नेकियां* #19
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #17

*_मस्जिद से महब्बत करना_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जो मस्जिद से महब्बत करता है अल्लाह उसे अपना महबूब बना लेता है।
*✍🏼مجمع الزوار*

*_क्या मस्जिद से बेहतर भी कोई जगह है ?_*
     हमारे बुज़ुर्गाने दीन को मस्जिद से कितनी महब्बत होती थी और वो मस्जिद को आबाद रखने की कैसी कोशिशें फ़रमाया करते थे इस की एक झलक मुलाहजा कीजिये चुनान्चे, हज़रते मुहम्मद बिन मुन्कदिर عليه رحما फ़रमाते है की मेने हज़रते ज़ियाद बिन अबू ज़ियाद عليه رحما को देखा की वो मस्जिद में बैठे इस तरह अपने नफ़्स का मुहासबा फरमा रहे थे की बैठ जा ! तू कहां जाना चाहता है, क्यू जाना चाहता है ? क्या मस्जिद से भी बेहतर कोई जगह है जहाँ तू जाना चाहता है ? देख तो सही !यहाँ रहमतों की केसी बरसात है ? जब की तू चाहता है की बाहर जा कर कभी किसी के घर को देखे, कभी किसी के घर को।
*✍🏼زم الهواى*

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*✍🏼आसान नेकियां, 75*
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*दुआ की अहमिय्यात*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
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     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : दुआ इबादत का मग्ज़ है।
*✍🏼तिर्मिज़ी*

     दुआ इबादत का रुकने आला है। दुआ इबादत का मग्ज़ इस ऐतिबार से है की दुआ मांगने वाला हर एक से कनारा कर के अपने रब की बारगाह में मुनाजात करता है।

*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 32*
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Saturday, 5 August 2017

*83 आसान नेकियां* #18
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
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*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #16

*_मस्जिदे आबाद करना_*
     मस्जिद में नमाज़ पढ़ना, तिलावत करना, अपनी आख़िरत के बारे में गौरो फ़िक़्र करना, इल्मे दीन और मुस्तफा करीम صلى الله عليه وسلم की सुन्नते सीखना सिखाना, ये सब मस्जिद को आबाद करने वाले काम है, बड़े खुश नसीब है वो इस्लामी भाई जो मस्जिदों को आबाद रखते है और इस बशारते नबवी के हक़दार बनते है की मस्जिद हर परहेज़गार का घर है और जिस का घर मस्जिद हो अल्लाह उसे अपनी रहमत, रिज़ा और पुल सिरात से बा हिफाज़त गुज़ार कर अपनी रिज़ा वाले घर जन्नत की ज़मानत देता है।

     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم जब कोई बन्दा ज़िक्र व नमाज़ के लिये मस्जिद को ठिकाना बना लेता है तो अल्लाह उस से ऐसे खुश होता है जैसे लोग अपने गुमशुदा शख्स की अपने हा आमद पर खुश होते है।
*✍🏼सुनन इब्ने माजह*

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*✍🏼आसान नेकियां, 74*
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Friday, 4 August 2017

*83 आसान नेकियां* #17
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #15

*_बा वुज़ू रहना_*
     हर वक़्त बा वुज़ू रहना बड़ी सआदत की बात है और ये ज़्यादा मुश्किल भी नही, सिर्फ ये करना होगा की जब भी वुज़ू टूट जाए दोबारा कर लिया जाए, रफ्ता रफ्ता आदत बन ही जाएगी लेकिन हर बार निय्यत करना न भूलियेगा। हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने हज़रते अनस رضي الله عنه से फ़रमाया बेटा ! अगर तुम हमेशा बा वुज़ू रहने की इस्तिताअत रखो तो ऐसा ही करो क्यू की मलकुल मौत जिस बन्दे की रूह हालते वुज़ू में क़ब्ज़ करता है उस के लिये शहादत लिख दी जाती है।
*✍🏼शोएबुल ईमान*

*_हर वक़्त बा वुज़ू रहने के फ़ज़ाइल_*
     बाज़ आरिफिन ने फ़रमाया जो हमेशा बा वुज़ू रहे अल्लाह उस को 7 फ़ज़िलतो से मुशर्रफ फरमाए (1) मलाइका उस की सोहबत में रगबत करें (2) क़लम उसकी नेकियां लिखता रहे (3) उस के आज़ा तस्बीह करें (4) उस से तकबीरे उला फौत न हो (5) जब सोए अल्लाह कुछ फ़रिश्ते भेजे की जिन्न व इन्स के शर से उस की हिफाज़त करें (6) सकराते मौत उस पर आसान हो (7) जब तक बा वुज़ू हो अमाने इलाही में रहे।

*_बा वुज़ू सोना_*
     अगर सोने से पहले वुज़ू कर लिया जाए तो रात भर एक फ़रिश्ता हमारे लिये दुआए मगफिरत करता रहेगा और हमें रोज़ेदार की सी इबादत का षवाब भी मिलेगा।
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : अपने अजसाम को खूब पाक रखा करो अल्लाह तुम्हे पाक फरमा देगा क्यू की जो शख्स पाक रहते हुवे रात गुज़ारता है तो उस के पहलु में एक फ़रिश्ता भी रात गुज़ारता है और रात की कोई घड़ी ऐसी नही गुज़रती जिस में वो ये दुआ न करता हो : _या अल्लाह अपने बन्दे की मगफिरत फरमा दे क्यू की ये बा वुज़ू सो रहा है।
*✍🏼तिबरानी*
     एक और हदिष में है : बा वुज़ू सोने वाला रोज़ा रख कर इबादत करने वाले की तरह है।
*✍🏼कन्जुल उम्माल*

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*✍🏼आसान नेकियां, 72*
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*नमाज़ के मकरुहाते तहरीमि* #05
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*_उंगलिया चटखाना_*
★ हज़रते अल्लामा इब्ने आबिदीन शामी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते है : इब्ने माजह की रिवायत है कि हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया : नमाज़ में अपनी उंगलिया न चतखाया करो।
*✍🏼सुनन इब्ने माजह, जी.1 स.514 हदिष: 965*

★ मजीद एक रिवायत में है " नमाज़ के लिये जाते हुए उंगलिया चटखाने से मना फरमाया। इन अहादीस मुबारका से ये 3 अहकाम साबित हुए।
1⃣नमाज़ के दौरान और नमाज़ के लिये जाते हुए, नमाज़ का इंतज़ार करते हुए उंगलिया चटखाना मकरुहे तहरीमि है।
2⃣ख़ारिजे नमाज़ में बिगैर हाजत के उंगलिया चटखाना मकरुहे तन्ज़िहि है।
3⃣ख़ारिजे नमाज़ में किसी हाजत के सबब मसलन उंगलियो को आराम देने के लिये उनगलिया चटखाना मुबाह (बिला कराहत जाइज़) है
*✍🏼दुर्रे मुख्तार, रद्दल मोहतार, जी.1 स.409*

*_तशबिक यानि एक हाथ की उंगलिया दूसरे हाथ की उंगलियो में डालना_*
     हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया, जो मस्जिद के इरादे से निकले तो तशबिक यानी एक हाथ की उंगलिया दूसरे हाथ की उंगलियो में न डाले बेशक वो नमाज़ के हुक्म में है।
*✍🏼मस्नद इमाम अहमद बिन हम्बल, जी.6 स.320*

■ नमाज़ के लिये जाते वक़्त और नमाज़ के इंतज़ार में भी ये दोनों चीज़े मकरुहे तहरीमि है।

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*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स. 191*
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*रहनुमाई की फ़ज़ीलत*
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     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जो शख्स किसी को नेकी का रास्ता बताएगा, तो उसे भी उतना ही षवाब मिलेगा, जितना की उस नेकी पर अमल करने वाले को।
*✍🏼सहीह मुस्लिम*

     नेकी करने वाला, कराने वाला, बताने वाला, मशवरा देने वाला सब षवाब के मुस्तहिक़ है।
*✍🏼मीरआतुल मनाजिह्, 1/194*

     सरकारे दो आलम صلى الله عليه وسلم ने इर्शाद फ़रमाया : अल्लाह की क़सम ! अगर अल्लाह तुम्हारे ज़रीए किसी एक को भी हिदायत दे दे तो ये तुम्हारे लिये सुर्ख ऊंटो से बेहतर है।
*✍🏼सुनन इब्ने दाऊद*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 30*
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Thursday, 3 August 2017

*83 आसान नेकियां* #16
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
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*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #14

*_वुज़ू के शुरू में بِسْمِ اللّٰهِ وٙالْحٙمْدُ لِلّٰه पढ़ना_*
     अगर हम वुज़ू के शुरू में بِسْمِ اللّٰهِ وٙالْحٙمْدُ لِلّٰه पढ़ लें तो इस काम में चन्द सेकन्डज़ लगेंगे लेकिन जब तक हमारा वुज़ू रहेगा हमारे नामए आमाल में नेकियां लिखी जाती रहेंगी।
     अबू हुरैरा से रिवायत है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم  ने इर्शाद फ़रमाया : ऐ अबू हुरैरा जब तुम वुज़ू करो तो بِسْمِ اللّٰهِ وٙالْحٙمْدُ لِلّٰه कह लिया करो जब तक वुज़ू बाक़ी रहेगा उस वक़्त तक तुम्हारे फिरिश्ते (किरामन कातिबिन) तुम्हारे लिये नेकियां लिखते रहेंगे।

*_वुज़ू के बाद कलिमाए शहादत पढ़ना_*
     वुज़ू के बाद अगर हम आसमान की तरफ निगाह उठा कर कलिमाए शहादत पढ़ लें तो हमारे लिये जन्नत के आठो दरवाज़े खुल जाएंगे, हदिष में है : जिसने अच्छी तरह वुज़ू किया और फिर आसमान की तरफ निगाह उठाई और कलिमाए शहादत पढ़ा उस के लिये जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिये जाते है जिस से चाहे अन्दर दाखिल हो।
*✍🏼سنن دارمى*

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*_नमाज़ में कंकरिया हटाना_*
★ दौराने नमाज़ कंकरिया हटाना मकरुहे तहरीमि है।

★ हज़रते जाबिर फरमाते है, मेने दौराने नमाज़ कंकरी छूने से मुतअल्लिक़ बारगाहे रिसालत में सुवाल किया, इरशाद हुवा : एक बार। और अगर तू इस से बचे तो सियाह आँख वाली 100 ऊंटनीयो से बेहतर है।

★ हा अगर सुन्नत के मुताबिक़ सज्दा अदा न हो सकता हो तो एक बार हटाने की इजाज़त है और अगर बिगैर हटाए वाजिब अदा न होता हो तो हटाना वाजिब है चाहे एक बार से ज़्यादा की हाजत पड़े।

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*नजात का ज़रीआ*
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     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जो खामोश रहा नजात पा गया।
*✍🏼خامع التر مذي*

     इस फरमान का एक मतलब ये भी हो सकता है की जिस ने खामोशी इख़्तियार की वो दोनों जहां की बालाओं से महफूज़ रहा। इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली عليه رحما फ़रमाते है : कलाम चार किस्म के है, (1) खालिस नुक़्सान देह, (2) खालिस मुफीद, (3) नुक़्सान देह भी और मुफीद भी, (4) न नुक़्सान देह और न मुफीद।
     खालिस नुक़्सान देह से हमेशा परहेज़ ज़रूरी है। खालिस मुफीद कलाम ज़रूर करे। जो कलाम नुक़्सान देह भी हो और मुफीद भी उस के बोलने में एहतियात करे, बेहतर है कि न बोले और चौथी किस्म के कलाम में वक़्त ज़ाएअ करना है। इन कलामों में इम्तियाज़ करना मुश्किल है लिहाज़ा खामोशी बेहतर है।
*✍🏼मीरआतुल मनाजिह्, 6/464*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 28*
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Wednesday, 2 August 2017

*83 आसान नेकियां* #15
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*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #13

*_अज़ान का जवाब देना_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : ऐ औरतो ! जब तुम बिलाल को अज़ान व इक़ामत कहते सुनो तो जिस तरह वो कहता है तुम भी कहो की अल्लाह तुम्हारे लिये हर कलिमे के बदले एक लाख नेकियां लिखेगा और एक हज़ार दरजात बुलन्द फ़रमाएगा और एक हज़ार गुनाह मिटाएगा। ख्वातीन ने ये सुन कर अर्ज़ की : ये तो औरतो के लिए है, मर्दों के लिये क्या है ? फ़रमाया : मर्दों के लिये दुगना।

*_3 करोड़ 24 लाख नेकियां कमाइये_*
     अल्लाह की रहमत पर क़ुर्बान ! उस ने हमारे लिये नेकियां कमाना, अपने दरजात बढ़वाना और गुनाह बख्शवाना किस क़दर आसान फरमा दिया है। मगर अफ़सोस ! इतनी आसानियो के बा वुजूद भी हम गफलत का शिकार रहते है। पेश करदा हदिष में जवाबे अज़ान की जो फ़ज़ीलत बयान हुई है उस की तफ़सील मुलाहजा फरमाइये :
     जेसे الله اكبر الله اكبر ये दो कलीमात है इस तरह पूरी अज़ान में 15 लिमात है। अगर कोई इस्लामी बहन एक अज़ान का जवाब दे यानी मुअज्ज़िन जो कहता जाए इस्लामी बहन भी दोहराती जाए तो उस को 15 लाख नेकियां मिलेगी, 15 हज़ार दरजात बुलन्द होंगे और 15 हज़ार गुनाह मुआफ़ होंगे और इस्लामी भाइयो के लिये सब दुगना।
     फज्र की अज़ान में दो मर्तबा اصلوة خير من النوم है तो फज्र की अज़ान में 17 कलीमात हुवे और यूं फज्र की अज़ान के जवाब में 17 लाख नेकियां, 17 हज़ार दरजात की बुलन्दी और 17 हज़ार गुनाहो की मुआफ़ी मिली और इस्लामी भाइयो के लिये दुगना।
     इक़ामत में दो मर्तबा قدقامت الصلوت भी है यूं इक़ामत में भी 17 कलीमात हुवे तो इक़ामत के जवाब का षवाब भी फज्र की अज़ान के जवाब जितना हुवा।

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*✍🏼आसान नेकियां, 66*
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*तर्जमाए कन्जुल ईमान व तफ़सीर खजाईनुल इरफ़ान, हिन्दी*

पारह 1 से 3 का PDF link 👇🏽
https://www.dropbox.com/sh/4l66frtuixnfct5/AACEYJ56KZsVOBSmeWOElVS1a?dl=0

आप इस तफ़सीर को आसानी से समजना चाहते है तो पहले एक रूकू इस ऑडिओ का सुने फिर एक रूकू पढ़े, ان شاء الله समझने में आसानी होगी।

ऑडियो इस 👇🏽लिंक से डाऊनलोड करे
https://www.dropbox.com/sh/4jv6o6l4173pcm3/AAAO5UrQIjCQ401IsWMz5RyAa?dl=0

दुआए खैर का तालिब
جزاك الله خيرا

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
*___________________________________*
मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
*___________________________________*
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*दीन की समझ*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : अल्लाह जिस के साथ भलाई का इरादा फ़रमाता है, उस को दीन की समझ अता फ़रमाता है।
*✍🏼सहीह बुखारी*

     फिक़्ह के शरई माना ये है की अहकामे शरईय्या फरइय्या को उन के तफसीली दलाइल से जानना। इस हदिष के माना ये हुए की अल्लाह जिसे तमाम दुन्या की भलाई अता फरमाना चाहता है उसे फ़क़ीह बनाता है।
*✍🏼सहीहुल बुखारी, 1/424*

     यानी इसे इल्म, दीनी समझ और दानाई बख्शता है। ख्याल रहे की फ़िक़्हे ज़ाहिरी, शरीअत है और फ़िक़्हे बातिनी, तरीकत और हक़ीक़त ये हदिष दोनों को शामिल है। इस हदिष से दो मसअले साबित हुए एक ये की क़ुरआनो हदिष के तरजमे और अलफ़ाज़ रट लेना इल्मे दीन नही बल्कि इन का समझना इल्मे दीन है। यही मुश्किल है। इसी के लिये फ़ुक़हा की तक़लीद की जाती है। इसी वजह से तमाम मुफ़स्सिरीन व मुहद्दिसिन आइम्मए मुतजहिदीन के मुक़ल्लिद हुए अपनी हदिष दानी पर नाज़ा न हुए। दूसरे ये की हदिष व क़ुरआन का इल्म कमाल नही, बल्कि इन का समझना कमाल है। आलिमे दीन वो है जिस की ज़बान पर अल्लाह और रसूल का फरमान हो और दिल में इन का फैजान।
*✍🏼मीरआतुल मनाजिह्, 1/187*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 25*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
*___________________________________*
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Tuesday, 1 August 2017

*83 आसान नेकियां* #14
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_3-ज़िकरुल्लाह करना_* #12

*_अज़ान देना_*
     अज़ान शआइरे इस्लाम में से है और अज़ान देने की बड़ी फ़ज़ीलत है। फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : मुअज़्ज़िन की आवाज़ की इन्तिहाई तक उस की मगफिरत कर दी जाती है, उस की आवाज़ जो खुशको तर चीज़ सुनती है उस की तस्दीक़ करती है और उसे अपने साथ नमाज़ पढ़ने वालो की मिष्ल षवाब मिलता है।

*_मोती के गुम्बद_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : में जन्नत में गया, उस में मोती के गुम्बद देखे उस की खाक मुश्क की है। पूछा ऐ जिब्राइल ! ये किस के वासिते है ? अर्ज़ की आप की उम्मत के मुअज़्ज़िनो और इमामो के लिये।
*✍🏼الخامع الصغير*
     आज कल अकषर मसाजिद में मुअज्ज़िन मुक़र्रर होते है वहा पर मुअज्ज़िन से अज़ान देने की इजाज़त मांग कर उसे आज़माइश में न डाला जाए अगर वो खुद पेशकश करे तो जुदा बात है, बहर हाल जो अज़ान दे सकता हो उसे चाहिये की जब जब मौक़ा मिले इस फ़ज़ीलत के हुसूल में कोताही न करे मषलन अगर कोई शख्स शहर के अन्दर घर में नमाज़ पढ़े तो वहा की मस्जिद की अज़ान उस के लिये काफी है मगर अज़ान कह लेना मुस्तहब है।
*✍🏼رد المحتار*
     इसी तरह अगर कोई शख्स शहर के बाहर या गाउ, बाग़ या खेत वगैरा में है और वो मस्जिद क़रीब न हो (यानि वहा अज़ान की आवाज़ न पहुचती हो) तो अज़ान पढ़नी है।

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼आसान नेकियां, 63*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
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*नमाज़ के मकरुहाते तहरिमा* #02
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_कंधो पर चादर लटकाना_*
★ कपड़ा लटकाना मसलन सर या कंधे पर इस तरह से चादर या रुमाल वग़ैरा डालना कि दोनों कनारे लटकते हो,
★ हा अगर एक कनारा दूसरे कंधे पर डाल दिया और दूसरा लटक रहा है तो हरज नहीं।
*✍🏼दुर्रे मुख्तार, जी.2 स.488*

★ आज कल बाज़ लोग एक कंधे पर इस तरह रुमाल रखते है की इस का एक सिरा पेट पर लटक रहा होता है और दूसरा पीठ पर। इस तरह नमाज़ पढ़ना मकरुहे तहरीमि है।
*✍🏼बहारे शरीअत, जी.3 स.165*

★ दोनों आस्तीनों में से अगर एक आस्तीन भी आधी कलाई से ज़्यादा चढ़ी हुई हो तो नमाज़ मकरुहे तहरीमि होगी।
*✍🏼दुर्रे मुख्तार, जी.2 स.490*

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.190*
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*गुनाहो का कफ़्फ़ारा*
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     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जो शख्स इल्म तलब करता है, तो ये उस के गुज़श्ता गुनाहो का कफ़्फ़ारा है।
*✍🏼خامه الترمذي*

     तालिबे इल्म से सगीरा गुनाह (उसी तरह) मुआफ़ हो जाते है जेसे वुज़ू नमाज़ वगैरा इबादत से, लिहाज़ा इस का मतलब ये नही है की तालिबे इल्म जो गुनाह चाहे करे। या (इस हदिष का) मतलब ये है की अल्लाह निय्यते खैर से इल्म तलब करने वालो को गुनाहो से बचने और गुज़श्ता गुनाहो का कफ़्फ़ारा अदा करने की तौफ़ीक़ देता है।
*✍🏼मीरआतुल मनाजिह्, 1/203*
*✍🏼40 फरमाने मुस्तफा, 25*
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