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Sunday, 4 March 2018

*आज का चाँद* -​ 14
*​माह 6* -​ जमादीउल आखिर
*​हिजरी* -​ 1439

*विसाल*
हुज्जतुल इस्लाम हज़रत इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली (हिरात, इराक़)

*संदल*
हज़रत डोसामियां अब्बासी क़ादरी (कोटड़ा, सांगानी, राजकोट)

*उर्स*
शहीद मौलाना अब्दुलहई "हय्यलशा" (कड़ी)

*नॉट :*
3 बार कुल्हुवल्लाह, एक बार सूरए फातिहा आगे पीछे दुरुद शरीफ पढ़ के हुज़ूर ﷺ की व इन बुज़ुर्गाने दिन की बारगाह में और हज़रत आदम ता क़यामत तक के तमाम मोमिनो की रूह को नज़र करदीजिये।
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*तज़किरतुल अम्बिया* #69
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*नूह عليه السلام ने क़ौम को क्या तबलीग की?*
     हज़रत नूह عليه السلام ने 950 साल अपनी क़ौम को अल्लाह की वहदानियत, गुनाहों से बाज़ रहने की तबलीग फ़रमाई और साथ साथ अल्लाह के अज़ाब से डराते रहे।
     आपने फ़रमाया: ऐ मेरी क़ौम! में तुम्हारे लिये ज़ाहिर तौर पर डर सुनाने वाला हूँ कि अल्लाह की बन्दगी करो और उससे डरो और मेरा हुक्म मानो वह तुम्हारे कुछ गुनाह बख्श देगा और एक मुक़र्रर मियाद तक तुम्हें मोहलत देगा, बेशक अल्लाह का वादा जब आता है हटाया नहीं जाता, काश तुम जानते।
     आप ने अपनी क़ौम को और यह फ़रमाया: अगर तुमने अल्लाह के बगैर किसी और की इबादत की तो में क़यामत के दिन के बहुत बड़े अज़ाब का तुम्हें खौफ दिलाता हूँ।
     और में इस पर तुमसे कुछ उजरत नहीं मांगता मेरा अज्र तो उस पर है जो सारे जहानों का रब है।
*✍🏼तज़किरतुल अम्बिया* 65
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*तमाम गुनाह मुआफ़*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
     फरमाने मुस्तफा ﷺ: जो शख्स ये दुरुदे पाक पढ़े, अगर खड़ा था तो बैठने से पहले और बैठा था तो खड़े होने से पहले उसके गुनाह मुआफ़ कर दिये जाएंगे।
اٙللّٰهُمّٙ صٙلِّ عٙلٰى سٙيِّدِنٙا وٙمٙوْلٙانٙا مُحٙمّٙدٍ وّٙعٙلٰى اٰلِهِ وٙسٙلِّمْ
*✍🏽اٙيضاًص ٦٥*

*हर रात इबादत में गुज़ारने का आसान नुस्खा*
     गराइबुल क़ुरआन पर एक तिवायत नक़्ल की गई है कि जो शख्स रात में इसे 3 मर्तबा पढ़ लेगा तो गोया उसने शबे क़द्र पा लिया।
لٙآاِلٰهٙ اِلّٙااللّٰهُ الْحٙلِيْمُ الْكٙرِيْمٙ، سُبٙحٰنٙ اللّٰهِ رٙبِّ السّٙمٰوٰتِ السّٙبْعِ وٙرٙبِّ الْعٙرْشِ الْعٙظِيْم
*तर्जमा* : खुदाए हलीम व करीम के सिवा कोई इबादत के लाइक नहीं। अल्लाह पाक है जो सातों आसमानों और अर्शे अज़ीम का परवर दगार है।
*✍🏽फ़ैज़ाने सुन्नत*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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दिल की दुन्या बदल गई​ #03
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
     उसने अपनी कनीज़ से कहा: जा मेने तुझे अल्लाह की खातिर आज़ाद किया। फिर उसने अपने सामने रखे हुए शराब के सारे बर्तन समन्दर में उंडेल दिये। सारंगी वगैरा सब तोड़ डाले, वो बड़े मोअद्दबाना अंदाज़ में मेरे क़रीब आया और मुझे सीने से लगा कर हिचकियाँ ले ले कर रोने लगा और पूछने लगा: ऐ मेरे भाई! में बहुत गुनाहगार हूँ, में ने सारी ज़िन्दगी गुनाहों में गुज़ार दी अगर में अब तौबा करूँ तो क्या अल्लाह मेरी तौबा क़बूल फरमा लेगा?
     मेने उसे बड़ी महब्बत दी और कहा: बेशक अल्लाह तौबा करने वालो को और पाकीज़गी हासिल करने वालो को बहुत पसन्द फ़रमाता है, वो तो तौबा करने वालों से बहुत खुश होता है, अल्लाह की बारगाह से कोई मायूस नहीं लौटता, तुम उससे तौबा करो वो ज़रूर क़बूल फ़रमाएगा।
     चुनान्चे उस शख्स ने मेरे सामने अपने तमाम साबिक़ा गुनाहों से तौबा की और खूब रो रो कर मुआफ़ी मांगता रहा। फिर हम बसरा पहुंचे और दोनों ने अल्लाह की रिज़ा की खातिर दोस्ती करली। 40 साल तक हम भाइयों की तरह रहे, 40 साल बाद उस मर्दे सालेह का इन्तक़ाल हो गया।
     मुझे बहुत गम हुआ, फिर मेने एक रात उसे ख्वाब में देखा तो पूछा: ऐ मेरे भाई दुन्या से जाने के बाद तुम्हारा क्या हुआ? उसने कहा: मुझे मेरे रब ने जन्नत में भेज दिया। मेने पूछा: जन्नत किस अमल की वजह से मिली? जवाब दिया: जब तुमने मुझे ये आयत सुनाई "और जब नामए आमाल खोले जाएं" तो इस आयत की वजह से मेरी ज़िन्दगी में इन्क़लाब आया था। इसी वजह से मेरी मगफिरत हो गई और मुझे जन्नत अता करदी गई।
     मीठे और प्यारे इस्लामी भाइयो! देखा अपने कि किस तरह एक नेक शख्स की तफ़ाक़त गुनाहों के दिलदादह शख्स को बुराइयों के गढ़े से बाहर निकाल लाइ और यूँ वो अपनी गुनाहों से तौबा कर के नेकी के रास्ते पर चलने लगा, वो समझ गया था की अब मेरी नजात इसी नेक शख्स की सोहबत और हम नशिनी में है। चुनान्चे उस ने उसी शख्स से अल्लाह की रिज़ा के लिये दोस्ती कर ली ताकि इस की बरकत से बाक़ी ज़िन्दगी गुनाहों की नुहुसत से महफूज़ रहे। बिल आखिर ये शख्स औने मक़सद में कामयाब हुवा और गुनाहों से बचते हुवे सलामतीये ईमान के साथ आलमे जावेदानी की तरफ कूच कर गया।
*​✍🏻अच्छे माहोल की बरकतें​* 5
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*वाकिआए में'राज* #09
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*अम्बियाए किराम عليه السلام के ख़ुत्बे* #03
     फिर हज़रत सुलेमान عليه السلام कहने लगे: तमाम तारीफ़ अल्लाह के लिये जिसने मेरे लिये हवाओं, जिन्नों और इंसानों को मुसख्खर फरमा दिया, शयातीन को भी मुसख्खर फरमा दिया और अब ये वो काम करते है जो में इन से चाहता हूँ मसलन बुलंदो बाला मकानात तामीर करना और तस्वीरें बनाना, मुझे परिन्दों की बोली और हर चीज़ सिखाई, मेरे लिये पिघले हुए तांबे का चश्मा बहाया और मुझे ऐसी बादशाहत अता फ़रमाई जो मेरे बाद किसी के लिये नहीं।

     इनके बाद हज़रत ईसा عليه السلام ने कहा: तमाम तारीफ़ अल्लाह के लिये जिसने मुझे तौरात और इंजील सिखाई, मुझे पेशाइशि अंधे और कोढ़ के मरज़ वाले को तंदुरस्त करने वाला और अपने इज़्न से मुर्दो को ज़िन्दा करने वाला बनाया, मुझे आसमान पर उठाया, मुझे काफिरों से पाक किया, मुझे और मेरी माँ को शैतान मर्दुद से पनाह अता फ़रमाई जिस की वजह से उसे मेरी माँ पर कोई राह नहीं।

बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله
*✍🏼फ़ैज़ाने मेराज* 24
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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Friday, 2 March 2018

ख़ुत्बा सुनने व बैठने के एहकाम*

*ख़ुत्बा सुनने व बैठने के एहकाम*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
     जो काम नमाज़ की हालत में करना हराम और मना है, ख़ुत्बा होने की हालत में भी हराम और मना है।
*(हुल्या, जामऊर्-रमुज़, आलमगीरी, फतावा रज़विय्या)*
     ख़ुत्बा सुनना फ़र्ज़ है और ख़ुत्बा इस तरह सुनना फ़र्ज़ है कि हमा-तन (समग्र एकाग्रता) उसी तरफ तवज्जोह दे और किसी काम में मश्गुल न हो। सरापा तमाम आज़ा ए बदन उसी की तरफ मुतवज्जेह होना वाजिब है। अगर किसी ख़ुत्बा सुनने वाले तक खतीब की आवाज़ न पहुचती हो, जब भी उसे चुप रहना और ख़ुत्बा की तरफ तवज्जोह रखना वाजिब है। उसे भी किसी काम में मश्गुल होना हराम है।
*(फत्हुल क़दीर, रद्दुल मोहतार, फतावा रज़विय्या)*
     ख़ुत्बा के वक़्त ख़ुत्बा सुननेवाला "दो जानू" यानी नमाज़ के क़ायदे में जिस तरह बैठते है उस तरह बैठे।
*(आलमगीरी, रद्दुल मोहतार, गुन्या, बहारे शरीअत)*
     ख़ुत्बा हो रहा हो तब सुनने वाले को एक घूंट पानी पीना हराम है और किसी की तरफ गर्दन फेर कर देखना भी हराम है।
     ख़ुत्बा के वक़्त सलाम का जवाब देना भी हराम है।
     जुमुआ के दिन ख़ुत्बा के वक़्त खतीब के सामने जो अज़ान होती है, उस अज़ान का जवाब या दुआ सिर्फ दिल में करें। ज़बान से अस्लन तलफ़्फ़ुज़ (उच्चार) न हो।
     जुमुआ की अज़ाने सानी (ख़ुत्बे से पहले की अज़ान) में हुज़ूर صلى الله عليه وسلم का नाम सुनकर अंगूठा न चूमें और सिर्फ दिल में दुरुद शरीफ पढ़े।
*✍🏼फतावा रज़विय्या*
     ख़ुत्बा में हुज़ूर صلى الله عليه وسلم का नाम सुन कर दिल में दुरुद शरीफ पढ़े, ज़बान से खामोश रहना फ़र्ज़ है।
*(दुर्रे मुख्तार, फतावा रज़विय्या)*
     जब इमाम ख़ुत्बा पढ़ रहा हो, उस वक़्त वज़ीफ़ा पढ़ना मुतलक़न ना जाइज़ है और नफ्ल नमाज़ पढ़ना भी गुनाह है।
     ख़ुत्बा के वक़्त भलाई का हुक्म करना भी हराम है, बल्कि ख़ुत्बा हो रहा हो तब दो हर्फ़ बोलना भी मना है। किसी को सिर्फ "चुप" कहना तक मना और लग्व (व्यर्थ) है।
     सहाह सित्ता (हदिष की 6 सहीह किताबों) में हज़रते अबू हुरैरा رضي الله عنه से रिवायत है कि हुज़ूर صلى الله عليه وسلم फ़रमाते है कि बरोज़े जुमुआ ख़ुत्ब ऐ इमाम के वक़्त तूँ दूसरे से कहे "चुप" तो तूने लग्व (व्यर्थ काम) किया।
     इसी तरह मुसन्दे अहमद, सुनने अबू दाऊद में हज़रत अली كرم الله وجهه الكريم से है कि हुज़ूर ﷺ फ़रमाते है कि जो जुमुआ के दिन (ख़ुत्बा के वक़्त) अपने साथी से "चुप" कहे उसने लग्व किया और जिसने लग्व किया उसके लिये जुमुआ में कुछ "अज्र" (षवाब) नही।
     ख़ुत्बा सुनने की हालत में हरकत (हिलना-डुलना) मना है। और बिला ज़रूरत खड़े हो कर ख़ुत्बा सुनना खिलाफे सुन्नत है। अवाम में ये मामूल है कि जब खतीब ख़ुत्बा के आखिर में इन लफ़्ज़ों पर पहुचता है "व-ल-ज़ीक़रुल्लाहे तआला आला" तो उसको सुनते ही लोग नमाज़ के लिये खड़े हो जाते है। ये हराम है, कि अभी ख़ुत्बा नही हुआ, चंद अलफ़ाज़ बाक़ी है और ख़ुत्बा की हालत में कोई भी अमल करना हराम है।
*✍🏼फतावा रज़विय्या*
*✍🏼मोमिन की नमाज़* 220
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ताज़िमे इरशादे रसूलﷺ

ताज़िमे इरशादे रसूलﷺ
29
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْم
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
      2) हज़रते अम्र बिन शोऐब कहते हैं कि एक मरतबा सफ़र में हम लोग हुज़ूर ﷺ के साथ थे। मैं हुजूर ﷺ की खिदमत में हाज़िर हुवा। मेरे ऊपर एक चादर थी जो कुसुम के रंग में हल्की सी रंगी हुई थी। हुज़ूर ﷺ ने देख कर फ़रमाया: यह क्या ओढ़ रखा है?
     मुझे इस सुवाल से हुज़ूर ﷺ की ना गवरी के आशार मालूम हुवे। घर वालों के पास वापस हुवा तो उन्हों ने चूल्हा जला रखा था, मैं ने वोह चादर उसमें डाल दी। दूसरे रोज़ जब हाज़िर हुवा तो हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया की वोह चादर का क्या हुआ। मैं ने किस्सा सुना दिया, आप ﷺ ने इर्शाद फ़रमाया: औरतों में से किसी को क्यूं न पहना दी, औरतों के पहनने में तो कोई मुज़ायका न था।
बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼सहाबएकिराम का इश्के रसूलﷺ* पेज 60
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आज का चाँद* -​ 13

*आज का चाँद* -​ 13
*​माह 6* -​ जमादीउल आखिर
*​हिजरी* -​ 1439

*सन्दल*
सैयद हसनशाह ग़ज़ाली (कोकण)

*उर्स*
हज़रत मौलाना ताजुद्दीन याक़ूब (मेहसाना)
हज़रत खामाशाह शहीद (खमशा, अहमदाबाद)
हज़रत बिस्मिल्लाह शाह बाबा (बम्बई)
हज़रत फरीदुल्लाह शाह व हज़रत अर्शदुल्लाह शाह (क़ाज़ीवाडा, खेड़ा)

*नॉट :*
3 बार कुल्हुवल्लाह, एक बार सूरए फातिहा आगे पीछे दुरुद शरीफ पढ़ के हुज़ूर ﷺ की व इन बुज़ुर्गाने दिन की बारगाह में और हज़रत आदम ता क़यामत तक के तमाम मोमिनो की रूह को नज़र करदीजिये।
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आज का चाँद* -​ 13

*आज का चाँद* -​ 13
*​माह 6* -​ जमादीउल आखिर
*​हिजरी* -​ 1439

*सन्दल*
सैयद हसनशाह ग़ज़ाली (कोकण)

*उर्स*
हज़रत मौलाना ताजुद्दीन याक़ूब (मेहसाना)
हज़रत खामाशाह शहीद (खमशा, अहमदाबाद)
हज़रत बिस्मिल्लाह शाह बाबा (बम्बई)
हज़रत फरीदुल्लाह शाह व हज़रत अर्शदुल्लाह शाह (क़ाज़ीवाडा, खेड़ा)

*नॉट :*
3 बार कुल्हुवल्लाह, एक बार सूरए फातिहा आगे पीछे दुरुद शरीफ पढ़ के हुज़ूर ﷺ की व इन बुज़ुर्गाने दिन की बारगाह में और हज़रत आदम ता क़यामत तक के तमाम मोमिनो की रूह को नज़र करदीजिये।
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Thursday, 1 March 2018

तज़किरतुल अम्बिया* #68

*तज़किरतुल अम्बिया* #68
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*हज़रत नूह عليه السلام*
     हज़रत नूह عليه السلام के वालिद का नाम लकम बिन मतू शल्ख बिन अख्नुख् (इदरीस عليه السلام)
     आप को 40 साल के बाद ऐलाने नबुव्वत का हुक्म दिया गया और 950 साल आप अपनी क़ौम में ठहरे और अपनी क़ौम को तबलीग फ़रमाई।
     अल्लाह ने फ़रमाया: तो वह उनमें पचास साल कम हज़ार बरस रहे।
     तूफ़ान के बाद 250 साल ज़िन्दा रहे आपकी कुल उम्र 1240 साल है अगर्चे इसमें और क़ौल भी है लेकिन ज़्यादा तौर पर इसी क़ौल को सही कहा गया है।
*✍🏼तज़किरतुल अम्बिया* 65
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शबे जुमुआ का दुरुद शरीफ*

*शबे जुमुआ का दुरुद शरीफ*
بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ
     बुज़ुर्गो ने फ़रमाया की जो शख्स हर शबे जुमुआ (जुमुआ और जुमेरात की दरमियानी रात, जो आज है) इस दुरुद शरीफ को पाबंदी से कम अज़ कम एक मर्तबा पढेगा तो मौत के वक़्त सरकारे मदीना ﷺ की ज़ियारत करेगा और कब्र में दाखिल होते वक़्त भी, यहाँ तक की वो देखेगा की सरकारे मदीना ﷺ उसे कब्र में अपने रहमत भरे हाथो से उतार रहे है.
بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اللّٰھُمَّ صَلِّ وَسَلّـِمْ وبَارِکْ عَلٰی سَیّـِدِ نَا مُحَمَّدِنِ النَّبِیِّ الْاُمّـِىِّ الْحَبِیْبِ الْعَالِی الْقَدْرِ الْعَظِیْمِ الْجَاھِ  وَعَلٰی  اٰلِهٖ وَصَحْبِهٰ وَسَلّـِم
अल्लाहुम्म-सल्ली-वसल्लिम-व-बारीक-अ'ला-सय्यिदिना-मुहम्मदीन-नबिय्यिल-उम्मिय्यिल-ह्-बिबिल-आ'लिल-क़द्रील-अ'ज़िमील-जाहि-व-अ'ला आलिही व-स्ह्-बिहि व-सल्लिम

*सारे गुनाह मुआफ़*
     हज़रते अनस رضي الله عنه से मरवी है, हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया : जो शख्स जुमुआ के दिन नमाज़े फज्र से पहले 3 बार
اٙسْتٙغْفِرُ اللّٰهٙ الّٙذِىْ لٙآ اِلٰهٙ اِلّٙا هُوٙوٙاٙتُوْبُ اِلٙيْهِ
पढ़े उस के गुनाह बख्श दिये जाएंगे अगर्चे समुन्दर की झाग से ज़्यादा हो।
*✍🏽अलमुजमुल अवसत लीत्तिब्रनि, 5/392, हदिष:7717*

*हर रात इबादत में गुज़ारने का आसान नुस्खा*
     गराइबुल क़ुरआन पर एक तिवायत नक़्ल की गई है कि जो शख्स रात में इसे 3 मर्तबा पढ़ लेगा तो गोया उसने शबे क़द्र पा लिया।
لٙآاِلٰهٙ اِلّٙااللّٰهُ الْحٙلِيْمُ الْكٙرِيْمٙ، سُبٙحٰنٙ اللّٰهِ رٙبِّ السّٙمٰوٰتِ السّٙبْعِ وٙرٙبِّ الْعٙرْشِ الْعٙظِيْم
*तर्जमा* : खुदाए हलीम व करीम के सिवा कोई इबादत के लाइक नहीं। अल्लाह पाक है जो सातों आसमानों और अर्शे अज़ीम का परवर दगार है।
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दिल की दुन्या बदल गई* #02

*दिल की दुन्या बदल गई* #02
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
     खाने के बाद उस शख्स शराब के नशे में मस्त हो गया और उसकी कनीज़ ने हुक्म के मुताबिक़ गाना शुरू किया।
     ये सिलसिला काफी देर तक चलता रहा वो दोनों अपनी इन रंगीनियों में बदमस्त थे और में अपने रब के ज़िक्र में मश्गुल था। जब काफी देर हो गई और उसका नाश कुछ कम हुआ तो वो मेरी तरफ मुतवज्जेह हुवा और कहने लगा: क्या तूने वहले कभी इससे अच्छा गाना सुना है? मेने कहा में एक ऐसा कलाम सूना सकता हूँ जिसके मुक़ाबले में ये गाना कुछ हैसिय्यत नहीं रखता। उसने हैरान हो कर कहा क्या गानों से बेहतर भी कोई कलाम है? मेने कहा: हाँ! इससे बहुत बेहतर कलाम भी है। उसने कहा: अगर तुम्हारा दावा दुरुस्त है तो सुनाओ ज़रा हम भी तो सुने कि गानों से बेहतर क्या चीज़ है? मेने सुरतुत्तकासुर की तिलावत शुरू कर दी :
     जब धुप लपेटी जाए और जब तारे झड़ पड़ें और जब पहाड़ चलाए जाएं।
     में तिलावत करता जा रहा था और उसकी हालत तब्दील होती जा रही थी। उस की आँखोसे सेले अश्क रवां हो गया। बड़ी तवज्जोह व आजिज़ी के साथ वो कलाम इलाही को सुनता रहा। ऐसा लगता था की कलाम इलाही की तजल्लियाँ उस के सियाह दिल को मुनव्वर कर चुकी है, अब उसे इश्क हक़ीक़ी की लज़्ज़त से आशनाई होती जा रही थी। तिलावत करते हुए में जब इस आयत पर पहुंचा:
     और जब नामए आमाल खोले जाएं।
     तो उसने अपनी कनीज़ से कहा: जा मेने तुझे अल्लाह की खातिर आज़ाद किया।

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*✍अच्छे माहोल की बरकतें* 4
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*​अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...​*
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वाकिआए में'राज* #08

*वाकिआए में'राज* #08
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*अम्बियाए किराम عليه السلام के ख़ुत्बे* #02
     फिर हज़रते मूसा عليه السلام कहने लगे : तमाम तारीफे अल्लाह के लिये जिसने मुझ से कलाम फ़रमाया, मुझे अपनी रिसालत और कलीमात के लिये मुन्तख़ब फ़रमाया, मुझे राज़ कहने को क़रीब किया, मुझ पर तौरात नाज़िल फ़रमाई, मेरे हाथ पर फ़िरऔन को हलाक फ़रमाया और मेरे ही हाथ पर बनी इसराइल को नजात अता फ़रमाई।

     इसके बाद हज़रते दावूद عليه السلام ने कहा: तमाम तारीफ़ अल्लाह के लिये जिसने मुझे बादशाहत अता फ़रमाई, मुझ और ज़बूर नाज़िल फ़रमाई, लोहे को मेरे लिये नर्म फरमा दिया, मेरे लिये परिन्दों और पहाड़ों को मुस्खखर फरमा दिया, मुझे हक़ व बातिल में फ़र्क़ करके फैसला करने का इल्म अता फ़रमाया।

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*✍🏼फ़ैज़ाने मेराज* 23
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
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नमाज़ का तरीक़ा* #58

*नमाज़ का तरीक़ा* #58
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*नमाज़ तोड़ने वाली बाते* #09

*_नमाज़ में सांप मारना_*
     ★ सांप बिच्छु को मारने से नमाज़ नहीं टूटती जब कि न तिन क़दम चलना पड़े न तीन ज़र्ब की हाजत हो वरना फासिद् हो जाएगी।
     ★ सांप बिच्छु को मारना उस वक़्त मुबाह है जब कि सामने से गुज़रे और इज़ा देने का खौफ हो, अगर तक़लीफ़ पहुचाने का अंदेशा न हो तो मारना मकरूह है।
*✍🏼आलमगिरी, 1/103*

     ★ पै दर पै तीन बाल उखेडे या तीन जुए मारी या एक ही जू को तीन बार मारा नमाज़ जाती रही और अगर पै दर पै न हो तो नमाज़ फासिद् न हुई मगर मकरूह है।

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*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.188*
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आज का चाँद* -​ 12

*आज का चाँद* -​ 12
*​माह 6* -​ जमादीउल आखिर
*​हिजरी* -​ 1439

*उर्स*
हाजी इमददुल्लाह मुहाजिर मक्की
हज़रत जोरावर पीर बाबा (वांकानेर)
मौलाना मेहबूब बाबा (कुमारी नदी, पाटण)
हज़रत फख्रे गुजरात (मूसा सुहाग क़ब्रस्तान, अहमदाबाद)

*नॉट :*
3 बार कुल्हुवल्लाह, एक बार सूरए फातिहा आगे पीछे दुरुद शरीफ पढ़ के हुज़ूर ﷺ की व इन बुज़ुर्गाने दिन की बारगाह में और हज़रत आदम ता क़यामत तक के तमाम मोमिनो की रूह को नज़र करदीजिये।
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