*सोहबत की फौरी असरात की मिसाले*
بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ
हर सोहबत अपना असर ज़रूर रखती है, मसलन अगर आप की मुलाकात किसी ऐसे इस्लामी भाई से हो, जिस की आंखों में अपने किसी अज़ीज़ की मौत की वज्ह से नमी हो, चेहरे पर आसारे गम खूब नुमायां हो और लहजे से उदासी झलक रही हो तो उस की येह हालत देख कर कुछ देर के लिये आप भी गमगिन हो जाएंगे। और अगर आप को किसी ऐसे इस्लामी भाई के पास बैठने का इत्तेफाक हो जिस का चेहरा किसी कामयाबी की वज्ह से खुशी से दमक रहा हो, लबों पर मुस्कुराहट खेल रही हो और उस की बातों से मसर्रत का इज़हार हो रहा हो तो ख्वाही न ख्वाही आप भी कुछ देर के लिये उस की खुशी में शरीक हो जाएंगे ।
इसी तरह अगर कोई शख्स ऐसे लोगो की सोहबत इख्तियार करेगा जो फिक्रे आख़िरत से यकसर गाफिल हो और गुनाहों के इर्तिकाब में किसी किस्म की झिजक महसूस न करते हो तो गालिब गुमान है कि वोह भी बहुत जल्द उन्ही की मानिन्द हो जाएगा और अगर कोई आदमी आशिकाने रसूल की सोहबत इख्तियार करे जिन के दिल फिक्रे मदीना से मा'मुर हो, वोह दिन रात आख़िरत की फ़लाह (या'नि कामयाबी) के लिये अपनी इस्लाह की कोशिश में मसरूफ रहते हो, उन की आंखे अल्लाह तआला के ख़ौफ़ से रोती हो, तो बहुत उम्मीद है कि यही कैफीय्यात उस सख्श के दिल में भी सरायत (या'नि असर) कर जाए । إن شاء الله
*बुरी सोहबत से बचा या इलाही*
*बना मुझ को अच्छा बना या इलाही*
*✍अच्छे माहोल की बरकतें* 11
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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मिट जाए गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, गर होजाये यक़ीन के.. अल्लाह सबसे बड़ा है..अल्लाह देख रहा है..
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Thursday, 8 March 2018
*वाकिआए में'राज* #14
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*अर्शे उला से भी ऊपर*
फिर मुस्तवा से आगे बढ़े तो अर्श आया, आप ﷺ उससे भी ऊपर तशरीफ़ लाए और फिर वहां पहुचे जहाँ खुद "कहाँ" और "कब" भी खत्म हो चुके थे क्योंकि ये अलफ़ाज़ जगह और ज़माने के लिये बोले जाते है और जहाँ हमारे आक़ा ﷺ रौनक अफ़रोज़ हुवे वहां न जगह थी न ज़माना। इसी वजह से इसे ला मकां कहा जाता है।
यहाँ अल्लाह ने औने प्यारे महबूब ﷺ को वो क़ुर्बे ख़ास अता फ़रमाया कि न किसी को मिला न मिले। हदीस में इस बयान के लिये क़ा-ब क़ौसेन के अल्फ़ाज़ इस्तिमाल किये गए है। जिन्हें उस वक़्त इस्तिमाल किया जाता है जब इन्तिहाई कुर्ब और नज़दीकी बताना मक़सूद होता है।
*दीदार इलाही और हम कलामी का शरफ*
हुज़ूर ﷺ ने बेदारी की हालत में सर की आँखों से अपने प्यारे रब का दीदार किया कि न पर्दा था न कोई हिजाब, न ज़माना था न कोई मकान, न फ़रिश्ता था न कोई इंसान, और बे वासिता कलाम का शरफ भी हासिल किया।
*✍🏼फ़ैज़ाने मेराज* 35
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
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*नमाज़ का तरीक़ा* #63
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*नमाज़ के मकरुहाते तहरीमि* #03
*_तबई हाजत की शिद्दत_*
★ पेशाब, पाखाना या रीह की शिद्दत होना।
★ अगर नमाज़ शुरू करने से पहले ही शिद्दत हो तो वक़्त में वुसअत होने की सूरत में नमाज़ शुरू करना ही गुनाह है।
★ हा अगर ऐसा है कि फरागत और वुज़ू के बाद नमाज़ का वक़्त खत्म हो जाएगा तो नमाज़ पढ़ लीजिये।
★ और अगर दौराने नमाज़ ये हालत पैदा हुई तो अगर वक़्त में गुंजाइश हो तो नमाज़ तोड़ देना वाजिब है अगर इसी तरह पढ़ ली तो गुनाहगार होंगे।
*✍🏼रद्दल मोहतार, जी.2 स.492*
बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.190*
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Wednesday, 7 March 2018
*आज का चाँद* - 18
*माह 6* - जमादीउल आखिर
*हिजरी* - 1439
*विसाल*
हज़रत इमाम अली (सियालकोट)
*उर्स*
हज़रत वडपीर (गोंडल)
*सन्दल*
हज़रत पीर बापूमियां चिश्ती (कड़ी)
*नॉट :*
3 बार कुल्हुवल्लाह, एक बार सूरए फातिहा आगे पीछे दुरुद शरीफ पढ़ के हुज़ूर ﷺ की व इन बुज़ुर्गाने दिन की बारगाह में और हज़रत आदम ता क़यामत तक के तमाम मोमिनो की रूह को नज़र करदीजिये।
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*तज़किरतुल अम्बिया* #73
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*नूह عليه السلام पर क़ौम की सख्तिया*
हज़रत इब्ने अब्बास رضي الله عنه से रिवायत है कि हज़रत नूह عليه السلام की क़ौम ने आप को मार मार कर शदीद ज़ख़्मी कर दिया आपको ऊनी कपड़े में लपेट कर आपके घर फेंक दिया और यह ख्याल किया की आप फौत हो चुके है लेकिन आप उसी हालत में निकल कर फिर उन्हें दावते हक़ देने लगे।
एक दफा एक बूढ़ा शख्स जो लाठी के सहारे चल रहा था उसने अपने बच्चे को उठाया हुआ था नूह عليه السلام को देखकर अपने बेटे को कहने लगा कि बेटे देखना इस बूढ़े शख्स के जाल में न फसना यह तुम्हे कहीं धोके में न डाले। बाप की बात सुनकर बेटे ने कहा अब्बा मुझे उतार दो और अपना डंडा मुझे दो बाप ने उसे उतारा और डंडा उसमे हाथ में थमा दिया उस छोटे लड़के ने नूह عليه السلام के क़रीब आकर डंडा दे मारा जो आपके सर पर लगा आप ज़ख़्मी हो गये खून जारी हो गया।
यह माजरा देख कर आप ने रब के हुजूर इल्तेजा की ऐ अल्लाह तेरे बन्दे जो मेरे साथ सलूक कर रहे है इसे तू देख रहा है, अगर तू अपने बन्दों को ज़िन्दा रखना ही चाहता है तो उन्हें हिदायत दे या कोई फैसला करने तक मुझे सब्र दे तू बेहतर फैसला फरमाने वाला है।
अल्लाह ने फ़रमाया: और नूह को वही हुई कि तुम्हारी क़ौम से मुसलमान न होंगे मगर जितने ईमान ला चुके, तू गम न खा उस पर जो वह करते है।
*✍🏼तज़किरतुल अम्बिया* 71
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Tuesday, 6 March 2018
*दुरुदे शफ़ाअत*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
फरमाने मुस्तफा ﷺ: जो शख्स यूँ दुरुदे पाक पढ़े उसके लिये मेरी शफ़ाअत वाजिब हो जाती है।
اٙللّٰهُمّٙ صٙلِّ عٙلٰى مُحٙمّٙدٍ وّٙاٙنْزِلْهُ الْمُقْعٙدٙ الْمُقّٙرّٙبٙ عِنْدٙكٙ يٙوْمٙ الْقِيٙامٙةِ
*✍🏽الترغيب والترهيب*
*हर रात इबादत में गुज़ारने का आसान नुस्खा*
गराइबुल क़ुरआन पर एक तिवायत नक़्ल की गई है कि जो शख्स रात में इसे 3 मर्तबा पढ़ लेगा तो गोया उसने शबे क़द्र पा लिया।
لٙآاِلٰهٙ اِلّٙااللّٰهُ الْحٙلِيْمُ الْكٙرِيْمٙ، سُبٙحٰنٙ اللّٰهِ رٙبِّ السّٙمٰوٰتِ السّٙبْعِ وٙرٙبِّ الْعٙرْشِ الْعٙظِيْم
*तर्जमा* : खुदाए हलीम व करीम के सिवा कोई इबादत के लाइक नहीं। अल्लाह पाक है जो सातों आसमानों और अर्शे अज़ीम का परवर दगार है।
*✍🏽फ़ैज़ाने सुन्नत*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*बुरे लोगो की हम नाशिनी*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
मीठे मीठे इस्लामी भाइयो ! होना तो येह चाहिये की हम अपनी दुन्या व आख़िरत की भलाई के लिये अच्छे माहोल से वाबस्ता हो और नेक लोगो की सोहबत में रहे, उन्ही को अपना दोस्त बनाए मगर अफ़्सोस ! गुनाहों की महब्बत ने हमारे बातिन को सियाह कर दिया है। आज हमारा हाल येह है कि अच्छे लोगो से दूर भागते और उन से बुग्ज़ रखते है और उन को छोड़ कर ऐसे लोगो की हम नाशिनी इख्तियार करते है जो हमें न सिर्फ नेकियों से दूर रखते बल्कि बा'ज़ अवकात गुनाहों की दलदल में धकेल देते है। ऐसे अफ़राद की सोहबत और इन की दोस्ती से बचना बेहद ज़रूरी है ।
अल्लाह तआला के मुख्लिस बन्दों और आशिकाने रसूल की सोहबत अगर नसीब हो जाए तो ऐन सआदत है, उन के कुर्ब और उन की तरफ से वक्तन फ़ वक्तन मिलने वाली नेकी की दा'वत की बरकत से दीगर फवाइद के साथ साथ ان شاء الله गुनाहों का इलाज भी होता रहेगा। येह याद रहे कि सिर्फ व सिर्फ अच्छी सोहबत इख्तियार करनी चाहिये जब कि बुरे लोगो के साए से भी भागना चाहिये। मक्की मदनी सुल्तान, रहमते आलमियान ﷺ का फरमाने आलीशान है : अच्छे और बुरे मुसाहिब की मिसाल, मुश्क (या'नि कशतुरी) उठाने वाले और भट्टी धौकने वाले कि तरह है, कस्तूरी उठाने वाला तुम्हे तोहफा देगा या तुम उस से खरीदोगे या तुम्हें उस से उम्दा खुशबू आएगी, जब कि भट्टी धौकने वाला या तो तुम्हारे कपड़े जलाएगा या तुम्हे उस से ना गवार बु आएगी ।
*✍(صحيح مسلم ص ١٤١٤ حديث ٢٦٢٨)*
(या'नि अच्छे शख्स की सोहबत अत्तार (या'नि इत्र फरोश) की दुकान की तरह है कि जहां से आदमी कुछ न भी खरीदे मगर उसे खुशबू तो आहि जाती है और बुरे सख्स की सोहबत लोहार की दुकान की मिस्ल है, जहां अपने कपड़ों को जितना भी समेट कर रखें, चिंगारिया उस तक पहुच ही जाती है)
*✍अच्छे माहोल की बरकतें* 10-11
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*वाकिआए में'राज* #13
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*सिद्रतुल मुन्तहा*
सातवे आस्मान पर हज़रते इब्राहिम عليه السلام से मुलाक़ात के बाद आप ﷺ सिद्रतुल मुन्तहा के पास तशरीफ़ लाए। ये एक नूरानी बैरी का दरख्त है, जिस की जड़ छटे आस्मान पर और शाखे सातवे आस्मान के ऊपर है, इसके फल मक़ामे हजर के मटकों की तरह बड़े बड़े और पत्ते हाथी के कानों की तरह है। आप ﷺ न्र यहाँ चार नहरें मुलाहज़ा फ़रमाई जो सिद्रतुल मुन्तहा की जड़ से निकलती थी, इनमे से दो तो ज़ाहिर थी और दो खुफ्या। आप ने जिब्राइल से दरयाफ़्त फ़रमाया ये नहरें केसी है? अर्ज़ किया खुफ्या नहरें तो जन्नत की है और ज़ाहिरी नहरे निल और फुरात है।
*मक़ामे मुस्तवा*
फिर आप ﷺ आगे बढ़े तो जिब्राइल वही ठहर गए और आगे जाने से माज़िरत ख्वाह हुवे। फिर आप ﷺ आगे बढ़े और बुलन्दी की तरफ सफर फ़रमाते हुवे एक मक़ाम पर तशरीफ़ लाए जिसे मुस्तवा कहा जाता है, यहाँ आप ने क़लमों की चर चराहट समाअत फ़रमाई। ये वो क़लम थे जिन से फ़रिश्ते रोज़ाना के अहकामे इलाहिय्या लिखते है और लोहे महफूज़ से एक साल के वाकिआत अलग अलग सहिफ़ो में नक़्ल करते है और फिर ये सहिफे शाबान की 15वी शब् मुताल्लुक़ हुक्काम फरिश्तों के हवाले कर दिये जाते है।
*✍🏼फ़ैज़ाने मेराज* 35
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*नमाज़ का तरीक़ा* #62
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*नमाज़ के मकरुहाते तहरिमा* #02
*_कंधो पर चादर लटकाना_*
★ कपड़ा लटकाना मसलन सर या कंधे पर इस तरह से चादर या रुमाल वग़ैरा डालना कि दोनों कनारे लटकते हो,
★ हा अगर एक कनारा दूसरे कंधे पर डाल दिया और दूसरा लटक रहा है तो हरज नहीं।
*✍🏼दुर्रे मुख्तार, जी.2 स.488*
★ आज कल बाज़ लोग एक कंधे पर इस तरह रुमाल रखते है की इस का एक सिरा पेट पर लटक रहा होता है और दूसरा पीठ पर। इस तरह नमाज़ पढ़ना मकरुहे तहरीमि है।
*✍🏼बहारे शरीअत, जी.3 स.165*
★ दोनों आस्तीनों में से अगर एक आस्तीन भी आधी कलाई से ज़्यादा चढ़ी हुई हो तो नमाज़ मकरुहे तहरीमि होगी।
*✍🏼दुर्रे मुख्तार, जी.2 स.490*
बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.190*
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ताज़िमे इरशादे रसूलﷺ
32
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5) वाइल बिन हजर कहते है कि मैं एक मरतबा हाज़िरे खिदमत हुवा, मेरे सर के बाल बहुत बढ़े हुवे थे, मैं सामने आया तो हुज़ूर ﷺ ने इर्शाद फ़रमाया: "ज़बाब, ज़बाब"।
मैं ये समज़ा कि मेरे बालों को इर्शाद फ़रमाया, वापस गया और उनको कटवा दिया। जब दूसरे दिन खिदमत में हाज़िर हुवा तो इर्शाद फ़रमाया: मैं ने तुझे नहीं कहा था, लेकिन येह अच्छा किया।
बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼सहाबएकिराम का इश्के रसूलﷺ* पेज 62
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*आज का चाँद* - 17
*माह 6* - जमादीउल आखिर
*हिजरी* - 1439
*उर्स*
हज़रत पीर बदरुद्दीन चिश्ती फरीदी (अहमदाबाद)
सैयदा सज्जादाबेगम रिफाइ (बड़ौदा)
हज़रत रौशन शाह बावा (हलोल)
हज़रत ताबेईन शाह (सूरत)
*संदल*
हज़रत लालशाह बावा (महुधा)
*नॉट :*
3 बार कुल्हुवल्लाह, एक बार सूरए फातिहा आगे पीछे दुरुद शरीफ पढ़ के हुज़ूर ﷺ की व इन बुज़ुर्गाने दिन की बारगाह में और हज़रत आदम ता क़यामत तक के तमाम मोमिनो की रूह को नज़र करदीजिये।
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*तज़किरतुल अम्बिया* #72
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*हज़रत नूह عليه السلام*
*अल्लाह के नबी की सफक़्त*
नूह عليه السلام ने क़ौम को मुश्किलात से निकलने का जो तरीक़ा बताया उसका ज़िक्र अल्लाह के हुजूर करते है: तो में ने कहा अपने रब से माफ़ी मानगो वह बड़ा माफ़ करने वाला है तुम पर सराटे का मिना भेजेगा और माल और बेटों से तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हारे लिये बाग़ बना देगा और तुम्हारे लिए नहरे बनाएगा तुम्हे क्या हुआ अल्लाह से इज़्ज़त हासिल करने की उम्मीद नहीं करते?
यानी आपने बताया कि तुम्हारी मुश्किलात का हल सिर्फ अल्लाह पर ईमान लाने उसको याद करने उससे डरने और उससे माफ़ी तलब करने में है। लेकिन क़ौम अपनी हठधर्मी पर उसी तरह क़ायम थी तकब्बुर इतना हद से बढ़ चूका था कि वह एक दूसरे को यही कह रहे थे: हरगिज़ न छोड़ना अपने खुदाओं को और हरगिज़ न छोड़ना सुवाअ और वगुस और युउक़् और नसर को (यह सब उनके बुतो के नाम है) और बेशक उन्होंने बहुतों को बहकाया।
*फायदा* : हज़रत अबीअ बिन सबिह से मरवी है कि एक शख्स हज़रत हसन के पास आये उन्होंने क़हत साली की शिकायत की, आपने फ़रमाया अल्लाह से अस्तग़फ़ार करो। एक और शख्स ने अपनी गुरबत का ज़िक्र किया आपने उसे भी अस्तगफर करने को कहा। एक और शख्स ने कहा कि आप मेरे लिए दुआ करे की अल्लाह मुझे बेटा दे आप ने उसे भी अस्तग़फ़ार करने को कहा।
हाज़रिन ने अर्ज़ किया कि शिकायत लोगों की मुख़्तलिफ़ थी लेकिन आपने सबको अमल एक ही बताया, आपने जवाब दिया कि हज़रत नूह عليه السلام ने अपनी क़ौम को सब मुश्किलात के हल के लिये अस्तग़फ़ार का ही हुक्म दिया था यानी यह अमल क़ुरआन से साबित है।
*✍🏼तज़किरतुल अम्बिया* 69
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*क़ुर्बे मुस्तफा ﷺ*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
एक दिन एक शख्स आया तो हुज़ूर ﷺ ने उसे अपने और सिद्दिके अकबर رضي الله عنه के दर्मियान बिठा लिया। इससे सहाबा को तअज्जुब हुवा कि ये कौन ज़ी मर्तबा है!!! जब वो चला गया तो हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया: ये जब मुझ पर दुरुदे पाक पढ़ता है तो यूँ पढ़ता है...
اٙللّٰهُمّٙ صٙلِّ عٙلٰى مُحٙمّٙدٍ كٙمٙا تُحِبُّ وٙتٙرْضٰى لٙهُ
*✍🏽اٙلْقٙوْلُ الْبٙدِيْع ١٢٥*
*हर रात इबादत में गुज़ारने का आसान नुस्खा*
गराइबुल क़ुरआन पर एक तिवायत नक़्ल की गई है कि जो शख्स रात में इसे 3 मर्तबा पढ़ लेगा तो गोया उसने शबे क़द्र पा लिया।
لٙآاِلٰهٙ اِلّٙااللّٰهُ الْحٙلِيْمُ الْكٙرِيْمٙ، سُبٙحٰنٙ اللّٰهِ رٙبِّ السّٙمٰوٰتِ السّٙبْعِ وٙرٙبِّ الْعٙرْشِ الْعٙظِيْم
*तर्जमा* : खुदाए हलीम व करीम के सिवा कोई इबादत के लाइक नहीं। अल्लाह पाक है जो सातों आसमानों और अर्शे अज़ीम का परवर दगार है।
*✍🏽फ़ैज़ाने सुन्नत*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*मजलिसे ज़िक्र में शिरकत की फ़ज़ीलत*
بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ
फरमाने मुस्तफा ﷺ: फ़रिश्ते (बारगाहे रब्बुल इज़्ज़त में) अर्ज़ करते है: ऐ रब इन में फुला बन्दा बड़ा गुनाहगार था, वो उन (ज़िक्र करने वालों) के क़रीब से गुज़रा तो उन के साथ बैठ गया। आप ﷺ ने फरमाया कि अल्लाह फ़रमाता है: में ने उसे भी बख्श दिया। वो (ज़िक्र करने वाली) ऐसी क़ौम है कि उनके साथ बैठने वाला भी बद नसीब नहीं होता।
*✍مسلم*
मीठे और प्यारे इस्लामी भइयों! देखा आपने कि नेकों की सोहबत कितनी फायदा मन्द है कि अगर कोई गुनाहगार भी उनके पास आ कर बैठे जाए तो वो भी रहमते इलाही से महरूम नहीं रहता। जब लम्हा भर के लिये अच्छी सोहबत इख़्तियार करने वाला भी महरूम नहीं रहता तो भला वो खुश नसीब जो सुन्नतों भरे माहोल से हमेशा के लिये वाबस्ता हो जाए, रहमते इलाह से किस तरह महरूम रह सकता है!
इसी तरह हज़रते अबू रज़ीन رضي الله عنه से रिवायत है कि हुज़ूर ﷺ ने उनसे फ़रमाया: क्या में तुम्हारी उस चीज़ की अस्ल पर रहनुमाई न करूँ जिस से तुम दुन्या व आख़िरत की भलाई पा लो, तुम ज़िक्र वालों की मजलिस इख़्तियार करो और जब तुम तन्हाई में हो तो जहाँ तक कर सको अपनी ज़बान अल्लाह के ज़िक्र में हिलाते रहो और अल्लाह की राह में महब्बत करो और अल्लाह की राह में अदावत करो।
*✍شعب الايمان*
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार खान رحمة الله عليه इस हदीस के तहत फ़रमाते है: इससे मुराद उलमाए दीन, औलियाए कामिलिन, सालिहीन व वासिलिन की मजलिसें है क्योंकि ये मजलिसें मदरसे हों या दरसे क़ुरआनो हदीस, या हज़राते सुफियाए किराम की ज़िक्र की महफिलें, ये फरमान बहुत जामेअ है, जिस मिजलिस में अल्लाह खौफ, हुज़ूर ﷺ का इश्क़ और इताअते रसूल का शौक़ पैदा हो वो मजलिस अकसीर है।
*✍मीरआतुल मनाजिह्* 6/603
*✍अच्छे माहोल की बरकतें* 9
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Monday, 5 March 2018
वाकिआए में'राज* #12
*वाकिआए में'राज* #12
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*आसमान की तरफ उरूज* #02
*दुसरा आस्मान*
इसके बाद आप ﷺ ने दूसरे आस्मान की तरफ सफर शुरू फ़रमाया, आन की आन में दूसरा आस्मान भी आ गया। जिब्राइल ने दरवाज़ा खुलवाया, जब आप ﷺ दरवाज़े से गुज़र कर आस्मान के ऊपर तशरीफ़ लाए तो हज़रते यहया और हज़रते ईसा عليه السلام को मुलाहज़ा फ़रमाया, ये दोनों खलाज़ाद भाई है। आप ﷺ ने सलाम कहा। उन्हों ने सलाम का जवाब दिया फिर आप ﷺ को खुश आमदीद करते हुए कहने लगे: सालेह भाई और सालेह नबी को खुश आमदीद।
*तीसरा आस्मान*
फिर तीसरे आस्मान की तरफ सफर शुरू हवा, जब आप ﷺ चोथे आस्मान पर पहुचे तो हज़रते युसूफ عليه السلام को मुलाहज़ा फ़रमाया।
*चौथा आस्मान*
जब आप ﷺ चौथे आस्मान पर पहुचे तो आप की मुलाक़ात हज़रत इदरीस عليه السلام से हुई।
*पांचवा आस्मान*
जब आप ﷺ पाचवे आस्मान पर पहुचे तो आप की मुलाक़ात हज़रत हारून عليه السلام से हुई।
*छटा आस्मान*
जब आप ﷺ छटे आस्मान पर पहुचे तो आप की मुलाक़ात हज़रत मूसा عليه السلام से हुई। जब आप आगे बढ़े तो हज़रते मूसा عليه السلام गिर्या फरमाने लगे। दरयाफ़्त किया गया आप عليه السلام को किस चीज़ ने रुलाया? फ़रमाया मुझे इस बात ने रुलाया है कि एक नौजवान जो मेरे बाद मबऊस हुवे उन की उम्मत में से दाखिले जन्नत होने वाले लोगों की तादाद मेरी उम्मत में से ज़्यादा होगी।
*सातवा आस्मान*
जब आप ﷺ सातवे आस्मान पर पहुचे तो आप की मुलाक़ात हज़रत इब्राहिम عليه السلام से हुई। आप عليه السلام बैतूल मामूर से टेक लगाए तशरीफ़ फरमा थे।
*✍🏼फ़ैज़ाने मेराज*
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नमाज़ का तरीक़ा* #61
*नमाज़ का तरीक़ा* #61
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*नमाज़ के मकरुहाते तहरिमा* #01
★ दाढ़ी, बदन या लिबास के साथ खेलना।
★ कपडा समेटना।
जैसा कि आज कल बाज़ लोग सज्दे में जाते वक़्त पाजामा वग़ैरा आगे या पीछे से उठा लेते है।
★ अगर कपडा बदन से चिपक जाए तो एक हाथ से छुड़ाने में हरज नहीं।
बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, स.189*
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