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Saturday, 23 July 2016

मदनी पंजसुरह

*सूरए यासीन शरीफ के फ़ज़ाइल*
हिस्सा-08
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     शैखुल हदिष मौलाना अब्दुल मुस्तफा आज़मी अलैरहमा ने जन्नती ज़ेवर में सूरए यासीन पढ़ने की बहुत सी बरकतें शुमार की है :
(1) भूका आदमी इसे पढ़े तो आसुदा किया जाए।
(2) प्यासा पढ़े तो सैराब किया जाए।
(3) नंगा पढ़े तो लिबास मिले।
(4) मर्द बे औरत वाला पढ़े तो जल्द उसकी शादी हो जाए।
(5) औरत बे शोहर वाली पढ़े तो जल्द शादी हो जाए।
(6) बीमार पढ़े तो शिफ़ा पाए।
(7) क़ैदी पढ़े तो रिह हो जाए।
(8) मुसाफिर पढ़े तो सफर में अल्लाह की तरफ से मदद हो।
(9) गमगीन पढ़े तो उसका रंजो गम दूर हो जाए।
(10) जिस की कोई चीज़ गम हो गई हो वो पढ़े तो जो खोया है वो मिल जाए।
(11) सूरए यासीन की एक आयत, आयत 58
*سَلٰمٌ قَوْلًامِّنْ رَّبٍّ رَّحِيْمٍ o*

को 1469 बार पढ़ो, इन्शा अल्लाह जिस मक़सद से पढोगे मुराद पूरी होगी, ख्वाजा दैरबी लिखते है : ये मुजर्र्ब है।
     और इस आयत को 5 जगह एक कागज़ पर लिख कर तावीज़ बांधो तो हवादिसात और चोर वगैरा से हिफाज़त रहेगी,
     जो शख्स सुबह को सुरए यासीन पढ़ेगा उस का पूरा दिन अच्छा गुज़रेगा और रात में इस को पढ़ेगा उसकी पूरी रात अच्छी गुज़रेगी।
     हदिष शरीफ में है कि यासीन क़ुरआन का दिल है।
*✍🏽जन्नती ज़ेवर 594*
*✍🏽मदनी पंजसुरह 25*
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Friday, 22 July 2016

मुर्दे की बेबसी

*दुन्या में आमद का मक़सद*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     हक़ीक़त ये है कि इस दुन्या में आ कर हम सख्त आज़माइश में मुब्तला हो गए है, हमारी आमद का मक़सद कुछ और था और शायद समझ कुछ और बेठे है !
     हमारा अंदाज़े ज़िन्दगी ये बता रहा है कि मआज़ल्लाह गोया हमे कभी मारना ही नही, याद रखिये ! हमे यहाँ हमेशा नही रहना, इस दुन्या में आने का मक़सद सिर्फ मॉल कमाना या फ़क़त दुन्या के उलूमो फुनुन की डिग्रिया पाना और सिर्फ दुनयावी तरक्किया हासिल किये जाना नहीं है।
     पारह 18 सूरतुल मुअमिनिन की आयत 115 में इरशाद होता है :
तो क्या ये समझते हो कि हमने तुम्हे बेकार बनाया और तुम्हे हमारी तरफ फिरना नहीं।
*✍🏽मुर्दे की बेबसी 7*
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सिरते मुस्तफाﷺ


*गज़्वए गतफन*
हीस्सा-02
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     दाशुर ने हुज़ूरﷺ के सरे मुबारक पर तलवार बुलंद करके बोला बताइये अब कौन है जो आप को मुझ से बचा ले ?
     आप ने जवाब दिया कि मेरा अल्लाह मुझ को बचा लेगा। चुनांचे जिब्राईल अलैहिस्सलाम दम ज़दन में ज़मीन पर उतर पड़े और दाशुर के सीने में एक घुसा मारा कि तलवार उस के हाथ से गिर पड़ी लर दाशुर ऐन गेन हो कर रह गया।
     हुज़ूरﷺ ने फौरन तलवार उठा ली और फ़रमाया कि बोल अब तुझ को मेरी तलवार से कौन बचाएगा ? दाशुर ने कांपते हुए भराई हुई आवाज़ में कहा कि कोई नही। हुज़ूरﷺ को उसकी बे कसी पर रहम आ गया और आपﷺ ने उस का कुसूर मुआफ़ फरमा दिया।
     दाशुर इस अखलाके नुबुव्वत से बेहद मूतअश्शीर हुवा और कलिमा पढ़ कर मुसलमान हो गया और अपनी क़ौम में आ कर इस्लाम की तबलीग करने लगा।
     जस गज़वे में कोई लड़ाई नही हुई और हुज़ूरﷺ 11 या 15 दिन मदीने से बाहर रह कर फिर मदीने आ गए।
*✍🏽सिरते मुस्तफा 286*
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अब्लाक़ घोडा

*क्या क़र्ज़ ले कर भी क़ुरबानी करनी होगी ?*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     जो लोग क़ुरबानी की इस्तिताअत रखते है उस के बा वुजूद अपनी वाजिब क़ुरबानी अदा नही करते, उनके लिये लम्हाए फ़िक्रिया है,
     अव्वल ये नुक़सान क्या कम था कि क़ुरबानी न करने से इतने बड़े षवाब से महरूम हो गए, मज़ीद ये कि वो गुनाहगार और जहन्नम के हक़दार भी है।
     फतावा रज़विय्या जिल्द 3 सफा 315 पर है : अगर किसी पर क़ुर्बानी वाजिब है और उस वक़्त उसके पास रुपए नही है तो क़र्ज़ ले कर या किसी चीज़ फरोख्त कर के क़ुरबानी करे।

*✍🏽अब्लाक़ घोडा 3*
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फुतूह अल ग़ैब

*एअतेराफे तकसीर और इस्तिगफार*
(हिस्सा-3)

*بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ*

      अल्लाह की ज़ात बन्दे और इसके कल्बके माबीन (दरमियान- बीच) है। इसलिये ये करीने क्यास है के अपने जिस हालकी तुम दुसरों को खबर दो वो तुम से सलब (छीन) कर लिया जाए और तुम जिसे  पाएदार और बाकी समज़ते हो उसे खत्म कर दिया जाए और तुम्हे उस आदमीसे नादिम होना पडे जिससे तुमने बातकी थी। इस लिये ज़ुरूरी है के अपने मकाम को अपने दिलहीमें रख्खो। किसी दूसरे को न बताओ और अगर खुदा तुम्हें तुम्हारे हाल व मकाम पर कायम रख्खे तो उसे खुदा का इनाम समज़कर उसका शुक्र अदा करो और उसमें इज़ाफे की दरखास्त करो और मौजूदा हालके बजाए ऐसा हाल नसीब हो जिसमें इल्म व मआरिफत और नूर व अदब ज़यादा हो, तो तुम्हारे लिये तरक्की का बाइस है।
      खुदावन्द तआला इर्शाद फरमाते है के, *जब हम किसी आयत को मन्सूख (रद्) करते है, उस जैसी या उससे बेहतर आयात लाते है।*

बाक़ी कल की पोस्ट में... इंसा अल्लाह

*✍🏽फुतूहल ग़ैब*  पेज 14,15
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मदनी पंजसुरह

*सूरए यासीन शरीफ के फ़ज़ाइल*
हिस्सा-07
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     हज़रते सफ्वान बिन अम्रرضي الله تعالي عنه फरमाते है : मशाईखे किराम फरमाते है कि जब आप क़रीबुल मर्ग शख्स के पास सूरए यासीन की तिलावत करेंगे तो उस से मौत की सख्ती को हल्का किया जाएगा।
*दुर्रेमन्सूर 39*

     हज़रते अबू हुरैराرضي الله تعالي عنه से रिवायत है कि हुज़ूरﷺ ने फ़रमाया : जिस ने शबे जुमुआ (यानी जुमेरात की रात) सूरए यासीन की तिलावत की उस की मग्फिरत कर दी जाएगी।

     हज़रते आइशा सिद्दीक़ाرضي الله تعالي عنها से रिवायत है कि हुज़ूरﷺ ने फ़रमाया : क़ुरआने हकीम में एक सूरत है जिसे अल्लाह तआला के हा अज़ीम कहा जाता है, उसके पढ़ने वाले को अल्लाह तआला के हा शरीफ कहा जाता है, उस को पढ़ने वाला क़यामत के रोज़ रबिआ और मुज़िर क़बाइल से ज़ाइद अफ़राद की शफ़ाअत करेगा, वो सूरए यासीन है।
*✍🏽दुर्रेमन्सूर 7/40*
*✍🏽मदनी पंजसुरह 24*
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Thursday, 21 July 2016

मुर्दे की बेबसी

*क़ब्र की दिल हिला देने वाली कहानी*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     हज़रते उमर बिन अब्दुल अज़ीज़رضي الله تعالي عنه एक जनाज़े के साथ कब्रस्तान तशरीफ़ ले गए, वहा एक क़ब्र के पास बैठ कर गौरो फ़िक्र में दुब गए, किसी ने अर्ज़ की : या अमीरुल मुअमिनिन ! आप यहाँ तन्हा कैसे तशरीफ़ फरमा है ? फ़रमाया : अभी अभी एक क़ब्र ने मुझे पुकार कर बुलाया और बोली : ऐ उमरرضي الله تعالي عنه ! मुझ से क्यू नही पूछते कि में अपने अंदर आने वालो के साथ क्या बर्ताव करती हु ? मेने कहा मुझे ज़रूर बता। वो कहने लगी...
     जब कोइ मेरे अन्दर आता है तो में उसका कफ़न फाड़ कर जिस्म के टुकड़े टुकड़े कर डालती और उसका गोश्त खा जाती हु।
     फिर उसने कहा, क्या आप मुझसे ये नही पूछेंगे में उस के जोड़ो के साथ क्या करती हु ? मेने कहा ये भी बता। तो कहने लगी...
     हथेलियो को कलाइयों से, घुटनो को पिंडलियों से और पिंडलियों को क़दमो से जुदा कर देती हु।
     इतना कहने के बाद हज़रत उमरرضي الله تعالي عنه हिचकियां ले कर रोने लगे, जब कुछ इफ़ाक़ा हुवा तो कुछ इस तरह फ़रमाया :
ऐ इस्लामी भाइयो ! इस दुन्या में हमे बहुत थोडा अर्सा रहना है, जो इस दुन्या में साहिबे इकतिदार है वो आख़िरत में इन्तिहाई ज़लिलो ख्वार होगा, जो मालदार है वो आख़िरत में फ़क़ीर होगा। दुन्या का तुम्हारी तरफ आना तुम्हे धोके में न दाल दे, क्यू की तुम जानते हो ये बहुत जल्द रुखसत हो जाती है।
*✍🏽मुर्दे की बेबसी 4*
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शबे जुमुआ का दुरुद


*بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ*

बुज़ुर्गो ने फ़रमाया की जो शख्स हर शबे जुमुआ (जुमुआ और जुमेरात की दरमियानी रात, जो आज है) इस दुरुद शरीफ को पाबंदी से कम अज़ कम एक मर्तबा पढेगा तो मौत के वक़्त सरकारे मदीना ﷺ की ज़ियारत करेगा और कब्र में दाखिल होते वक़्त भी, यहाँ तक की वो देखेगा की सरकारे मदीना ﷺ उसे कब्र में अपने रहमत भरे हाथो से उतार रहे है.
*بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*

*اللّٰھُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ وبَارِکْ عَلٰی سَیِّدِ نَا مُحَمَّدِنِ النَّبِیِّ الْاُمِّیِّ الْحَبِیْبِ الْعَالِی الْقَدْرِ الْعَظِیْمِ الْجَاھِ  وَعَلٰی  اٰلِہٖ  وَصَحْبِہٖ  وَسَلِّمْ*

*अल्लाहुम्म-सल्ले-वसल्लिम-व-बारीक-अ'ला-सय्यिदिना-मुहम्मदीन-नबिय्यिल-उम्मिय्यिल-ह्-बिबिल-आ'लिल-क़द्रील-अ'ज़िमील-जाहि-व-अ'ला आलिही व-स्ह्-बिहि व-सल्लिम*
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सिरते मुस्तफाﷺ


*_गज़्वए गतफान_*
हिस्सा-01
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     रबीउल अव्वल सि. 3 हि. में हुज़ूरﷺ को ये इत्तिला मिली की नज्द के एक मशहूर बहादुर दाशुर बिन अल हारिष मुहारीबि ने एक मशकर तैयार कर लिया है ताकि मदीने पर हमला करे।
     इस खबर के बाद आप 400 सहाबा की फ़ौज़ ले कर मुक़ाबले के लिये रवाना हो गए। जब दाशुर को खबर मिली की रसूलल्लाह हमारे दीयार में आ गए तो वो भाग निकला और अपने लश्कर को ले कर पहाड़ो पर चढ़ गया मगर उसकी फ़ौज का एक आदमी जिसका नाम हब्बान था गिरफ्तार हो गया और फौरन ही कलिमा पढ़ कर उसने इस्लाम क़बूल कर लिया।
     इत्तिफ़ाक़ से उस रोज़ ज़ोरदार बारिश हो गई। हुज़ूरﷺ एक दरख्त के निचे लेट कर आपने कपड़े सुखाने लगे। पहाड़ की बुलंदी से काफिरो ने देख लिया की आप बिलकुल अकेले और अपने असहाब से दूर बजी है।
     एक दम दाशुर बिजली की तरह पहाड़ से उतर कर नंगी शमशीर हाथ में लिये हुए आया और हुज़ूरﷺ के सरे मुबारक पर तलवार बुलंद करके बोला की बताइये अब कौन है जो आपको मुझ से बचा ले ?

बाक़ी अगली पोस्ट में..इन्शा अल्लाह
*✍🏽सिरते मुस्तफा 285*
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अब्लाक़ घोडा

*क़ुरबानी के 4 फरामिने मुस्तफा*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

क़ुरबानी करने वाले को क़ुरबानी के जानवर के हर बाल के बदले में एक नेकी मिलती है।
*✍🏽तिर्मिज़ी 3/162*

जिसने खुश दिली से तालिबे षवाब हो कर क़ुरबानी की, तो वो आतशे जहन्नम से हिजाब (यानी रोक) हो जाएगी।
*✍🏽अल-मोजमुल कबीर 3/84*

ऐ फातिमा ! अपनी क़ुरबानी के पास मौजूद रहो क्यू कि इसके खून का पहला क़तरा गिरेगा तुम्हारे सारे गुनाह मुआफ़ कर दिये जाएंगे।
*✍🏽बहकी 9/476*

जिस शख्स में क़ुरबानी करने की वुसअत हो फिर भी वो क़ुरबानी न करे तो वो हमारी ईबादत के क़रीब न आए।
*✍🏽इब्ने माजह 3/529*
*✍🏽अब्लाक़ घोडा 2*
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तफ़सीरे अशरफी


हिस्सा-43
*सूरए बक़रह, पारह-01*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*आयत ④①_तफ़सीर*
हिस्सा-02
     और ये तुम्हारा रवैय्या कितना बुरा है के चार चार सेर जव और चार चार चादरों के लिये तौरेत में फेरफार करो। नाअते रसूले पाक निकाल दो और मेरे रसूल को दज्जाल बता कर तौरेत में जो ज़िक्र दज्जाल है उसके अनुरूप ठहराओ।
     अमीरो के खातिर कानून शरीअत बदल कर उनसे आसानी बरतो। और गरीबो पर सख्ती करो। और सिर्फ चन्दा वसूल करके पेट भरने की लालच में पैग़म्बरे इस्लाम का कहना न मनो।
     और डर जाओ के इस तरह तुम्हारी चंदाखोरी जाति रहेगी। इस कमीनापन और मुजरिमो जैसी ज़िन्दगी को छोड़ दो, और सबसे न लो मेरी आयातों के बदले दुनयावी थोड़ी कीमत, के सारी दुन्या भी आखेरत के मुक़ाबले में एक बेमिक़दार व बे हक़ीक़त चीज़ है।
     और अय क़अब इब्ने अशरफ ! और अय सारे यहूदियो ! तुम न एक दूसरे से डरो और न भूख और मन्सब से डरो। तुम अपना भला चाहो, तो बस मुज ही से हमेशा डरते रहो के फिर हर खौफ से महफूज़ हो जाओगे और मेरा खौफ तुमको मेरे रसूल का नियाज़मन्द बना देगा।
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फुतूह अल ग़ैब

*एअतेराफे तकसीर और इस्तिगफार*
हिस्सा-2
*بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ*

       हंमेशा एहकामे इलाहीकी पाबन्दी करो और जिन बातोंसे मना किया गया है, उनसे इजतेनाब (बचों) करो। मकदराते खुदावन्दी को इसीके इख्तियार व रज़ा पर रेहने दो और मख्लूकात में से किसीको इसका शरीक न बनाओ।
     याद रख्खो के तुम्हारे इरादे और आरज़ूअए खुदा तआला के पैदा करदा हैं। इसलिये अपना इरादा और अपनी ख्वाहिशें खालिक के साथ शिर्क करना हैं और ऐसा करने पर तुम मुशरेकीनमें से हो जाओगे। चुनान्चे खुदा तआला फरमाता है:
*अगर अल्लाह के दिदारकी तमन्ना हो तो नेक काम करने चाहीयें और ज़ुरूरी है के उसकी इबादत में किसीको शरीक ना करे*।
   शिर्क सिर्फ बुतपरस्ती ही नहीं है, ख्वाहिशाते नफ्सकी पैरवी और दुनियाकी किसी भी चीज़ के साथ इश्क की कैफियत से मुन्सलिक हो जाना सरहन शिर्क है। खुदा के सिवा हर शय गैर खुदा है और हर गैर खुदा की ख्वाहिश शिर्क कहेलाएगी। लेहाज़ा इससे परहेज़ करो। अपने नफ्सकी बुराइयोंसे डरते रहो, तलाशे हक़में साइ (कोशिश करनेवाला) रहो।
   गफलत को शआर (तरीका) न करो। जो हाल व मुकाम तुम्हें मिलें उन्हें अपने नफस से मन्सूब न करो। इसलिये के तगीरे हाल (हालत बदलने)के लिये हर रोज़ खुदा तआलाकी नइ शान है।

बाक़ी कल की पोस्ट में... इंसा अल्लाह
*✍🏽फुतूहल ग़ैब*  पेज 13,14
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मदनी पंजसुरह

*सूरए यासीन शरीफ के फ़ज़ाइल*
हिस्सा-07
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     हज़रते सफ्वान बिन अम्रرضي الله تعالي عنه फरमाते है : मशाईखे किराम फरमाते है कि जब आप क़रीबुल मर्ग शख्स के पास सूरए यासीन की तिलावत करेंगे तो उस से मौत की सख्ती को हल्का किया जाएगा।
*✍🏽दुर्रेमन्सूर 39*

     हज़रते अबू हुरैराرضي الله تعالي عنه से रिवायत है कि हुज़ूरﷺ ने फ़रमाया : जिस ने शबे जुमुआ (यानी जुमेरात की रात) सूरए यासीन की तिलावत की उस की मग्फिरत कर दी जाएगी।

     हज़रते आइशा सिद्दीक़ाرضي الله تعالي عنها से रिवायत है कि हुज़ूरﷺ ने फ़रमाया : क़ुरआने हकीम में एक सूरत है जिसे अल्लाह तआला के हा अज़ीम कहा जाता है, उसके पढ़ने वाले को अल्लाह तआला के हा शरीफ कहा जाता है, उस को पढ़ने वाला क़यामत के रोज़ रबिआ और मुज़िर क़बाइल से ज़ाइद अफ़राद की शफ़ाअत करेगा, वो सूरए यासीन है।
*✍🏽दुर्रेमन्सूर 7/40*
*✍🏽मदनी पंजसुरह 24*
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Wednesday, 20 July 2016

मुर्दे की बेबसी

*_उम्र भर की भागदौड़_*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     उस वक़्त केसी बेबसी होगी जब रूह जिस्म से जुदा हो चुकी होगी, वो आलम किस क़दर बेबसी का आलम होगा जिस वक़्त बेश क़ीमती पकड़े उतारे जा रहे होंगे, गस्साल नहला रहा होगा, लठ्ठे का कफ़न पहनाया जा रहा होगा, केसी हसरत की घड़ी होगी जब जनाज़ा उठाया जा रहा होगा, हाए ! हाए ! वो दुन्या जिसे सवारने के लिये उम्र भर भागदौड़ की थी, जिसकी खातिर रातो की नींदे उड़ाई थी, तरह तरह के खतरे मोल लिये थे, हासिदिन के रुकावटे खड़ी करने के बा वुजूद भी जान लड़ा कर दुन्या का मॉल कमाते रहे थे, खूब खूब दौलत बढ़ाते रहे थे, जिस मकान को मज़बूत तामीर किया था फिर उसको तरह तरह के फर्नीचर से आरास्ता किया था, वो सभी कुछ छोड़ कर रुखसत होना पड़ रहा होगा।
     आह ! क़ीमती लिबास खुटी पर टंगा रह जाएगा, कार हुइ तो गेरेज में खड़ी रह जाएगी, ऐसो तरब के अस्बाब और हर तरह का माल सामान धरा का धरा रह जाएगा।
     उस वक़्त *मुर्दे की बेबसी* इन्तिहा को पहुचेगी जब उसको रोशनियों से जग मगाती आरिजि खुशियो से मुस्कुराती दुन्याए ना पाएदार के फानी घर से निकाल कर अँधेरी क़ब्र में मुन्तकिल करने के लिये उस के नाज़ उठाने वाले उसको कन्धों पर लाद कर सूए क़ब्रिस्तान चल पड़ेंगे।
*मुर्दे की बेबसी 2*
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अब्लाक़ घोडा

*अब्लक़ घोड़े सुवार*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     हज़रते अहमद बीन इस्हाक़ अलैरहमा फरमाते है : मेरा भाई बा वुजुदे गुरबत रिज़ाए इलाही की निय्यत से हर साल बकरह इद में क़ुरबानी किया करता था। उस के इंतिक़ाल के बाद में ने एक ख्वाब देखा कि क़यामत बरपा हो गई है और लोग अपनी अपनी क़ब्रो से निकल आए है, यकायक मेरा मर्हुम भाई एक अब्लक़ (यानी दो रंगे चितकुब्रे) घोड़े पर सुवार नज़र आया, उसके साथ और भी बहुत सारे घोड़े थे।
     मेने पूछा : ऐ मेरे भाई ! अल्लाह ने आल के साथ क्या मुआमला फ़रमाया ? कहने लगा : अल्लाह ने मुझे बख्श दिया। पूछा : किस अमल के सबब ? कहा : एक दिन किसी गरीब बुढ़िया को ब निय्यते षवाब में ने एक दिरहम दिया था वही काम आ गया। पूछा : ये घोड़े कैसे है ? बोला : ये सब मेरी *बक़रह ईद की कुर्बानिया है* और जिस पर में सुवार हु ये मेरी सबसे पहली क़ुरबानी है। मेने पूछा : अब कहा का अज़्म है ? कहा : जन्नत का।
     ये कह कर मेरी नज़र से ओझल हो गया। अल्लाह की उन पर रहमत हो ओर उनके सदके हमरी बे हिसाब मगफिरत हो।
*✍🏽अब्लक़ घोडा 1*
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तफ़सीरे अशरफी


हिस्सा-50
*सूरए बक़रह, पारह 01*

*आयत ④⑧, तर्जुमह*
और डरो उस दिनको, के न बदला हो कोई किसी ना-कस का कुछ, और न क़बूल की जाए किसी ना-कस की सिफारिश, और न ली जाए उस ना-कस से रिश्वत, और न वो मदद दिये जाए।

*तफ़सीर*
     और डरो और सोच कर थर्राओ इस क़यामत के दिन को जिस दिन मुसलमानो को क्या पड़ी है के तुम्हारी कोई बिगड़ी बनाए, तुम्हारे बदले कुछ भुगते। तुम खुद अपनी अंखसे देख लोगे के क़यामत के दिन न बदला हो कोई मुसलमान किसी ना-कस काफ़िर का कुछ, और अगर तुम मेसे एकने दूसरे की सिफारिस की, तो तुम सब लोग ना-कस के ना-कस हो और काफ़िर की कोई सिफारिश, के हर काफ़िर शफ़ाअत करने और शफ़ाअत किये जानेसे महरूम है,
     और अगर तुम अपनी कचेरियो का अंदाज़ देख कर ख्याल करो के रिश्वत से काम चल जाएगा, तो याद रखो, क़यामत के दिन खुद देखोगे के न ली उस किसी ना-कस काफ़िर से कोई रिस्वत। भले अपने बराबर का हिरा या क़ीमती से क़ीमती चीज़ देना चाहे।
     और इसका भी मौका न होगा के तुम्हे मददगारों की कुमक पोहचे। क्यू के काफिरो के लिये ये तय है के न किसीकी मदद कर सके और न वो मदद दिये जाए।

फुतूह अल ग़ैब

*एअतेराफे तकसीर और इस्तिगफार*
हिस्सा-1
بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ

   हज़रत मोहियुद्दीन जीलानी رضي الله تعالي عنه ने फरमाया : नफ्सकी ख्वाहिशों से आज़ाद हो जाओ और इसकी इत्तेबा (पैरवी करनेसे) किनाराकश हो जाओ। आपनी हर चीज अल्लाहके सुपुर्द कर दो और अपने दिल पर इस तरह पेहरा दो के इसमें सिर्फ वही शै दाखिल हो जिसकी इजाजत मौलाकरीम दे। शयतानी वसवसोंको दिलमें जगा न दो। ख्वाहिशाते नफ्सानी को दाखले की इजाज़त नहीं होनी चाहीये। हर हालमें उनकी मुखालेफत हो क्यों के किसी ख्वाहीशका दिलमें दाखिल होना दर असल इसका इत्तेबा है।
  इरादाए हक़ के सिवा किसी और इरादेकी ख्वाहीश दुरूस्त नहीं। इरादाए हक़ के अलावा किसी और इरदेको दिलमें जगा देना तबाही और हिलाकत, निगाहे रेहमतसे गिरने और हिजाब पर मुन्तज होता है।

बाक़ी कल की पोस्ट में... इंसा अल्लाह
*✍🏽फुतूहल ग़ैब, 13,14*
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मदनी पंजसुरह

*सूरए यासीन शरीफ के फ़ज़ाइल*
हिस्सा-06
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     हज़रते अबू जाफर मुहम्मद बिन अलीرضي الله تعالي عنه से रिवायत है फरमाते है : जो शख्स अपने दिल में सख्ती पाए तो ववेक प्याले में ज़ाफ़रान से
*يٰسٓ وَالْقُرْاٰنِ الْحَكِيْمِ*
लिखे फिर उसे पी जाए। (इन्शा अल्लाह उसका दिल नर्म होगा)
*दुर्रेमन्सूर 7/39*

     अमीरुल मुअमिनिन हज़रते अबू बक्र सिद्दीक़رضي الله تعالي عنه से रिवायत है कि हुज़ूरﷺ ने फ़रमाया : जिसने हर जुमुआ को अपने वालिदैन दोनों या एक की क़ब्र की ज़ियारत की और उनके पास यासीन की तिलावत की तो अल्लाह हर हर्फ़ के बदले उस की बख्शीश व मग्फिरत फरमा देता है।
*✍🏽दुर्रेमन्सूर 7/40*
*✍🏽मदनी पंजसुरह 24*
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Tuesday, 19 July 2016

मुर्दे की बेबसी


*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_मुर्दा और गस्साल_*
ज़बर दस्त आलिम व मुहद्दिस और मशहूर ताबेइ बुज़ुर्ग सुफ़यान सौरी अलैरहमा से मारवी है कि मरने वाला हर चीज़ को जानता है, हत्ता कि गस्साल से कहता है : तुझे खुदा की क़सम तू गुस्ल में मेरे साथ नरमी कर, और जब वो अपने जनाज़े की चारपाई पर होता है, उससे कहा जाता है : अपने बारे में लोगो की बाते सुन।
*✍🏽शरहु स्सुदुर 95*

*_मुर्दा क्या कहता है_*
अमीरुल मुअमिनिन हज़रते उमर फरुके आज़मرضي الله تعالي عنه रिवायत करते है, नबीﷺ का फरमान है : मुर्दा जब तख्त पर रखा जाता है और उसे ले कर अभी 3 क़दम ही चले होते है कि वो बोलता है और उसके कलाम को इन्सान और जिन्नों के इलावा अल्लाह जिसे चाहे सुनवाता है।
मुर्दा कहता है : ऐ मेरे भाइयो ! और ऐ मेरा जनाज़ा उठाने वालो ! तुम्हे दुन्या धोके में न डालदे जैसा की मुझे डाले रखा और ज़माना तुम्हारे साथ न खेले जैसा की मेरे साथ खेल, मेने जो कुछ कमाया वो अपने वुरसा के लिये छोड़ा, अल्लाह क़यामत के दिन मुझसे हसाब लेगा और मेरी गिरफ्त फ़रमाएगा, हाला कि तुम लोग मुझे रुखसत करते और मुझे पुकारते (यानी मेरे लिये रोते) हो।
*✍🏽शरहु स्सुदुर 96*
*✍🏽मुर्दे की बे बसी 1*
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सिरते मुस्तफाﷺ


*जंगे उहुद*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_काब बिन अशरफ का क़त्ल_*
हिस्सा-01
     यहूदियो में काब बिन अशरफ बहुत ही दौलत मन्द था। यहूदी उलमा और यहूद के मज़हबी पेशवाओ को अपने खज़ाने से तन-ख्वाह देता था। दौलत के साथ शाइरी में भी बहुत बा कमाल था जिस की वजह से न सिर्फ यहूदियो बल्कि तमाम क़बाइले अरब पर इसका एक ख़ास अशर था।
     इसको हुज़ूरﷺ से सख्त अदावत थी। जंगे बद्र में मुसलमानो की फ़त्ह और सरदारो ने कुरैश के क़त्ल हो जाने से इसको इन्तिहाई रन्ज व सदमा हुवा। चुनांचे ये कुरैश की ताज़िय्यत के लिये मक्का गया और कुफ़्फ़ारे कुरैश का जो बद्र में मक़्तूल हुए थे ऐसा पुरदर्द परशिया लिखा कि जिसको सुन कर सामीइन के मजमा में मातम बरपा हो हो जाता था। इस मरशिया को ये शख्स कुरैश को सूना सूना कर खुद भी जारो ज़ार रोटा था और सामेइन को भी रुलाता था।
     मक्का में अबू सुफ़यान से मिला और उस को मुसलमानो से जंगे बद्र का बदला लेने पर उभारा बल्कि अबू सुफ़यान को ले कर हरम में आया और कुफ़्फ़ारे मक्का के साथ खुद भी काबे का गिलाफ पकड़ कर अहद किया कि मुसलमानो से बद्र का ज़रूर इन्तिक़ाम लेंगे।
    फिर मक्का से मदीना लौट कर आया तो हुज़ूरﷺ की हिजू लिख कर शाने अक़दस में तरह तरह की गुस्ताखियां और बे अदबिया करने लगा, इसी पर बस नही किया बल्कि आप को चुपके से क़त्ल करा देने का क़स्द किया।

बाक़ी अगली पोस्ट में..इन्शा अल्लाह
*✍🏽सिरते मुस्तफा 283*
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