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Thursday, 13 July 2017

*मेहमान नवाज़ी की सुन्नते और आदाब* #01
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     मेहमान नवाज़ी करना सुन्नते मुबारका है, अहादिश में इस के बहुत से फ़ज़ाइल बयान किये गए है बल्कि यहाँ तक फ़रमाया की मेहमान बाइसे खैरो बरकत है। एक दफा हुज़ूर صلى الله عليه وسلم के यहाँ मेहमान हाज़िर हुवा तो आप ने क़र्ज़ ले कर उस की मेहमान नवाज़ी फ़रमाई।
     चुनान्चे अबू राफेअ رضي الله عنه कहते है, हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने मुझ से फ़रमाया, फुला यहूदी से कहो की मुझे आटा क़र्ज़ दे। में रजब शरीफ के महीने में अदा कर दूंगा (क्यू की एक मेहमान मेरे पास आया हुवा है) यहूदी ने कहा, जब तक कुछ गिरवी नही रखोगे, न दूंगा। हज़रते अबू राफेअ رضي الله عنه कहते है की में वापस आया और हुज़ूर صلى الله عليه وسلم की खिदमत में उस का जवाब अर्ज़ किया। आप ने फ़रमाया, वल्लाह ! में आसमान में भी अमीन हु और ज़मीन में भी अमीन हु। अगर वो दे देता तो में अदा कर देता। (अब मेरी वो ज़िरह ले जा और गिरवी रख कर आ। में ले गया और ज़िरह गिरवी रख कर लाया)

*_मेहमान बाइसे खैरो बरकत है_*
     हज़रते अनस رضي الله عنه का बयान है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने इर्शाद फ़रमाया, जिस घर में मेहमान हो उस घर में खैरो बरकत उसी तरह दौड़ती है जैसे ऊंट की कौहान से छड़ी (तेज़ी से गिरती है), बल्कि इस से भी तेज़।

बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله
*✍🏼सुन्नते और आदाब, 108*

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Wednesday, 12 July 2017

*नमाज़ की सुन्नते* #06
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_जल्से की सुन्नते_*
★ दोनों सजदों के बिच में बैठना इसे जल्सा कहते है।

*मर्द*
◆ जल्से में सीधा क़दम खड़ा कर के उल्टा क़दम बिछा कर उस पर बैठना
◆ सीधे पाउ की उंगलिया किब्ला रुख करना
◆ दोनों हाथ रानो पर रखना

*औरत*
◆ दोनों पाउ सीधी जानिब निकाल देना और उलटी सुरीन पर बैठना
◆ दोनों हाथ रानो पर रखना

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, सफा 176*

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*सोने जागने की सुन्नते और आदाब* #02
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

★ *दाई करवट लेटना सुन्नत है।* हुज़ूर صلى الله عليه وسلم जब अपनी ख्वाब गाह पर तशरीफ़ ले जाते तो अपना सीधा हाथ मुबारक सीधे रुख़्सार शरीफ के निचे रख कर लेटते।

★ *क़ुरआन* के आदाब में से ये भी है की इस की तरफ पीठ न की जाए न पाउ फेलाए जाए, न पाउ को इस से उचा करे, न ये की खुद उची जगह पर हो और क़ुरआन निचे हो। हा क़ुरआन और मुक़द्दस तुगरे वगैरा उची जगह हो तो उस सम्त पाउ करने में मुज़ायक़ा नही।

★ कभी चटाई पर सोए तो कभी बिस्तर पर कभी फर्शे ज़मीन पर ही सो जाए।

★ *जागने के बाद ये दुआ पढ़े* الْحٙمْدُلِلّٰهِ الِّذِىْ اٙحْيٙانٙا بٙعْدٙمٙا اٙمٙاتٙنٙا وٙاِلٙيْهِ النُّشُوْرُ
तर्जमा : तमाम तारीफ अल्लाह के लिये है जिस ने हमे मारने के बाद ज़िन्दा किया और उसी की तरफ लौट कर जाना है।

     ऐ हमारे प्यारे अल्लाह ! हमे कम सोने और सुन्नत के मुताबिक़ सोने की तौफ़ीक़ मर्हमत फरमा।
اٰمِيْن بِـجٙـاهِ النّٙـبِـىِّ الْاٙ مِيْن

*✍🏼सुन्नते और आदाब, 107*

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Tuesday, 11 July 2017

*अज़ाब से छुटकारे के असबाब* #03
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
★ एक शख्स को अज़ाब के मख़्सूस फरिश्तों ने चारो तरफ से घेर लिया लेकिन उस का नेकी का हुक्म करने और बुराई से मना करने की नेकी आई और इस ने उसे बचा लिया और रहमत के फरिश्तों के हवाले कर दिया।

★ एक शख्स को देखा जो घुटनो के बल बैठा है लेकिन उस के और अल्लाह के दरमियान पर्दा है मगर उस का *हुस्ने अख़लाक़* आया, इस नेकी ने उस को बचा लिया और अल्लाह से मिला दिया।

★ एक शख्स को उसका आमाल नामा उलटे हाथ में दिया जाने लगा तो उस का *खौफे खुदा* आ गया और इस अज़ीम नेकी की बरकत से उस का नामए आमाल सीधे हाथ में दे दिया गया।

★ एक शख्स की नेकियों का वज़न हल्का रहा मगर उस की *सखावत* आ गई और नेकियों का वज़न बढ़ गया।

★ एक शख्स जहन्नम के किनारे पर खड़ा था मगर उस का *खौफे खुदा* आ गया और वो बच गया।

★ एक शख्स जहन्नम में गिर गया लेकिन उस के *खौफे खुदका में बहाए हुवे आंसू* आ गए और इन आसुओ की बरकत से वो बच गया।

बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله
*✍🏼आसान नेकियां, 7*

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*नमाज़ की सुन्नते* #05
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_सज्दे की सुन्नते_*
★ सज्दे में जाने के लिये और सज्दे से उठने के लिये अल्लाहु अक्बर कहना

★ सज्दे में कम अज़ कम 3 बार "सुब्हान रब्बियल आला" कहना

★ सज्दे में हथेलिया ज़मीन पर रखना, हाथो की उंगलिया मिली हुई किब्ला रुख रखना।

★ सज्दे में जाए तो ज़मीन पर पहले घुटने फिर हाथ फिर नाक फिर पेशानी रखना।

★ जब सज्दे से उठे तो इस का उल्टा करना यानी पहले पेशानी फिर नाक फिर हाथ फिर घुटने उठाना।

*मर्द :*
◆ सज्दे में सुन्नत ये है कि बाज़ू करवटों से और राने पेट से जुदा हो
◆ कलाइयां ज़मीन पर न बिछाइये हा जब सफ में हो तो बाज़ू करवटों से जुदा न रखिये।
◆ सज्दे में दोनों पाउ की उंगलियो पेट इस तरह ज़मीन पर लगाइये के दसो उनगलिया किब्ला रुख रहे।

*औरत :*
◆ सिमट कर सज्दा करे यानि बाज़ू करवटों से पेट रानो राने पिंडलियों से और पिंडलियां ज़मीन से मिला देना।

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, सफा 176-177*

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*सोने जागने की सुन्नते और आदाब* #01
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     नींद भी एक तरह की मौत है। जब भी हम सो इ लगे तो हमे डर जाना चाहिये की कहि ऐसा न हो की आँख ही न खुले और हमेशा हमेशा के लिये ही सोते रह जाए। लिहाज़ा रोज़ाना सोने से पहले भी अपने गुनाहो से तौबा कर लेनी चाहिये।
     अगर हम सुन्नत के मुताबिक़ दुआए वगैरा पढ़ कर सोए तो أن شاء الله हमे सोने का भी कुछ न कुछ फायदा हासिल हो ही जाएगा।

★ *सोने से पहले बिस्मिल्लाह शरीफ पढ़ कर बिस्तर को तिन बार झाड़ ले* ताकि कोई मुजी शै या कीड़ा वगैरा हो तो निकल जाए।

★ *सोने से पहले ये दुआ पढ़ लेना सुन्नत है।* اللّٰهُمّٙ بِاِسْمِكٙ اٙمُوْتُ وٙاٙحْىٰ
तर्जमा : ऐ अल्लाह ! में तेरे नाम के साथ ही मरता हु और जीता हु। (यानी सोता और जागता हु)

★ *उल्टा यानी पेट के बल न सोए* हज़रते अबू हुरैरा رضي الله عنه से मरवी है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने एक शख्स को पेट के बल लेटे हुए देखा तो फ़रमाया : इस तरह लेटने को अल्लाह पसन्द नही फ़रमाता।

बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله
*✍🏼सुन्नते और आदाब, 106*

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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Monday, 10 July 2017

*अज़ाब से छुटकारे के असबाब* #02
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

★ एक शख्स को देखा की प्यास की शिद्दत से ज़बान निकाले हुवे था और एक हौज़ पर पानी पिने जाता था मगर लौटा दिया जाता था की इतने में उस के *रोज़े* आ गए और नेकी ने उसे सैराब कर दिया।

★ एक शख्स को देखा की जहां अम्बियाए किराम हल्के बनाए हुवे तशरीफ़ फरमा थे, वहा उन के पास जाना चाहता था लेकिन धुत्कार दिया जाता था की इतने में उस का *ग़ुस्ले जनाबत* आया और इस नेकी ने उस को मेरे पास बिठा दिया।

★ एक शख्स को देखा की उस के आगे पीछे, दाए बाए, ऊपर निचे अँधेरा ही अँधेरा है और वो उस अँधेरे में हैरानो परेशान है तो उस के *हज व उमरा* आ गए और इन नेकियों ने उस को अँधेरे से निकाल कर रौशनी में पंहुचा दिया।

★ एक शख्स को देखा की वो मुसलमानो से गुफ्तगू करना चाहता है लेकिन कोई उस को मुह नही लगाता तो *सीलए रहमी* (यानी रिश्तेदारो से हुस्ने सुलूक करने की नेकी) ने मोअमिनिन से कहा की तुम इस से बात चित करो। तो मुसलमानो ने उस से बात करना शुरू की।

★ एक शख्स के जिस्म और चेहरे की तरफ आग बढ़ रही है और वो अपने हाथ से बचा रहा है तो उस का *सदक़ा* आ गया और उस के आगे ढाल बन गया और उस के सर पर साया फिगन हो गया।

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*✍🏽आसान नेकियां, 6*

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*नमाज़ की सुन्नते* #04
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*_क़ौमा की सुन्नते_*
★ रूकू से जब उठे तो हाथ लटका दीजिये

★ रूकू से उठने में इमाम के लिये समी-अल्लाहु-लीमन-हामिदह कहना

★ मुक्तदि के लिये रब्बना-लकल-हम्द या अल्लाहुम्म- रब्बना-व-लकल-हम्द कहना

★ तन्हा नमाज़ पढ़ने वाले के लिये दोनों कहना सुन्नत है

★ तनहा नमाज़ पढ़ने वाला समी-अल्लाहु-लीमन-हामिदह कहता हुवा रूकू से उठे जब सीधा खड़ा हो चुके तो अब अल्लाहुम्म- रब्बना-व-लकल-हम्द कहे।

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*✍🏼नमाज़ के अहकाम, सफा 176*

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*जूता पहनने की सुन्नते और आदाब*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     नालैन पहनना सरकार صلى الله عليه وسلم की सुन्नत है।

★ *किसी भी रंग का जूता पहनना अगर्चे जाइज़ है लेकिन पिले रंग के जूते पहनना बेहतर है* की मौला अलिय्युल मुर्तज़ा كرم الله وجهه الكريم फ़रमाते है जो पिले जूते पहनेगा उस की फिक्रो में कमी होगी।

★ *पहले सीधा जूता पहने फिर उल्टा और उतारते वक़्त पहले उल्टा जूता उतारे फिर सीधा।* हज़रते अबू हुरैरा رضي الله عنه से मरवी है की अल्लाह के हबीब صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया : कोई शख्स जब जूता पहने तो पहले दाहिने पाउ में पहने और जब उतारे तो पहले बाए पाउ का उतारे।

★ जब बैठे तो जूता उतार लेना सुन्नत है। हज़रते इब्ने अब्बास رضي الله عنه फ़रमाते है की जब बन्दा बैठे तो सुन्नत है की अपने जूते उतार ले।

★ *जूता पहनने से पहले झाड़ ले* ताकि कीड़ा या कंकर वगैरा हो तो निकल जाए।

★ *इस्तिमाली जूता उल्टा पड़ा हो तो सीधा कर दीजिये* वरना फ़क़रो तंग दस्ती का अन्देशा है।
*✍🏼सुन्नते और आदाब, 104*

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Sunday, 9 July 2017

*नमाज़ की सुन्नते* #03
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

_*रूकू की सुन्नते*_
"◆ रूकू के लिये "अल्लाहु अक्बर" कहना।
◆ रूकू में 3 बार "सुब्हान रब्बियल अज़ीम" कहना

*मर्द :*
◆ घुटनो को हाथ से पकड़ना और उंगलिया खूब खुली रखना
◆ रूकू में टांगे सीधी रखना (बज़ लोग कमान की तरह टेढ़ी कर लेते है ये मकरूह है)
◆ रूकू में पीठ अच्छी तरह बिछी हो हत्ता की अगर पानी का प्याला पीठ पर रख दिया जाए तो ठहर जाए
◆ सर उचा निचा न हो पीठ की सीध में हो। सरकारे मदीना صلى الله عليه وسلم  फरमाते है " उसकी नमाज़ नाकाफी है जो रूकू व सुजूद में पीठ सीधी नही करता।
     एक और हदिष में फरमाते है की रूकू व सुजूद को पूरा करो खुदा की क़सम में तुम्हे अपने पीछे से देखता हु।

*औरत :*
◆ घुटनो पर हाथ रखना और उंगलिया कुशादा न करना
रूकू में थोडा झुके यानि सिर्फ इतना की हाथ घुटनो तक पहुच जाए
◆ पीठ सीधी न करे और घुटनो पर ज़ोर न दे फक्त हाथ रख दे और हाथो की उनगलिया मिली हुई रखे और पाउ झुके हुए रखे इस्लामी भाइयो की तरह सीधे न कर दे।

◆ बेहतर ये है की "अल्लाहु अक्बर" कहता हुआ रूकू को जाए यानि जब रूकू के लिए झुकना शुरू करे और खत्मे रूकू पर तकबीर खत्म करे।
◆ इस मसाफत को पूरा करने के लिये अल्लाह عزوجل की लाम को बढ़ाए अक्बर की बा वग़ैरा किसी हर्फ़ को न बढ़ाए।

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, सफा 175*

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*लिबास पहनने की सुन्नते और आदाब* #02
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★ *पहनते वक़्त सीधी तरफ से शुरू करे* मसलन जब कुर्ता पहने तो पहले सीधी आस्तीन में सीधा हाथ दाखिल करे फिर उलटी में, इसी तरह पाजामा में पहले सीधे पाइचे में सीधा पाउ दाखिल करे और जब उतारने लगे तो इस के बर अक्स करे यानी उल्टी तरफ से शुरू करे। हज़रते अबू हुरैरा رضي الله عنه से मरवी है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم जब कुर्ता पहनते तो दाहिनी तरफ से शुरू फ़रमाते।

★ पहले कुर्ता पहने फिर पजामा।

★ *इमामा बांधने की आदत डालिये* की हज़रते उबादा رضي الله عنه से मरवी है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया : इमामा ज़रूर बांधा करो की ये फरिश्तों का निशान है और इस के शिम्ले को पीठ के पीछे लटका लो।
इमामे के साथ 2 रकअत बगैर इमामा की 70 रकअतो से अफ़्ज़ल है।
*كنزالعمال*

ऐ हमारे प्यारे अल्लाह ! हमे फैशन वाले लिबास से बचा और महबूब صلى الله عليه وسلم की सुन्नत के मुताबिक़ लिबास पहनने की तौफ़ीक़ मर्हमत फरमा।
اٰمِيْن بِـجٙـاهِ النّٙـبِـىِّ الْاٙ مِيْن
*✍🏼सुन्नते और आदाब, 103*

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Saturday, 8 July 2017

*नेकी की किसी बात को हक़ीर न जानो*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : नेकी की किसी बात को हक़ीर न समझो चाहे वो तुम्हारा अपने भाई से खन्दा पेशानी से मुलाक़ात करना हो।
*मुस्लिम*
     जिज वक़्त किसी नेकी की तौफ़ीक़ मिले मौक़ाए गनीमत जान कर षवाब कमाना चाहिये, क्या बईद वही नेकी हमारे लिये ज़रीआए नजात बन जाए। चुनान्चे...

*अज़ाब से छुटकारे के असबाब* #01
     एक तवील हदिष में मूतअद्दिद ऐसे लोगो का बयान है की किसी न किसी नेकी के सबब रहमते खुदावन्दी ने उन्हें अपनी आगोश में ले लिया, चुनान्चे हज़रते अब्दुर्रहमान बिन सुमरह رضي الله عنه से रिवायत है की एक बार हुज़ूर صلى الله عليه وسلم तशरीफ़ लाए और इर्शाद फ़रमाया : आज रात में ने एक अजीब ख्वाब देखा की...
◆ एक शख्स की रूह क़ब्ज़ करने के लिये मलकुल मौत तशरीफ़ लाए लेकिन उस का *माँ बाप की इताअत* करना सामने आ गया और वो बच गया।
◆ एक शख्स पर अज़ाबे क़ब्र छा गया लेकिन उस के वुज़ू (की नेकी) ने उसे बचा लिया।
◆ एक शख्स को शयातीन ने घेर लिया लेकिन ज़िकरुल्लाह कर ने की (करने की नेकी) ने उसे बचा लिया।
◆ एक शख्स को अज़ाब के फरिश्तों ने घेर लिया लेकिन उसे उसकी नमाज़ ने बचा लिया।

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*✍🏼आसान नेकियां, 5*

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*नमाज़ की सुन्नते* #02
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*_क़याम की सुन्नते_*
     मर्द नाफ़ के निचे सीधे हाथ की हथेली उलटे हाथ की कलाई के जोड़ पर, छुनगलिया और अंगूठा कलाई के अगल बगल और बाक़ी उंगलिया हाथ की कलाई की पुश्त पर रखे

*औरत :*
उलटी हथेली सीने पर छाती के निचे रख कर उस के ऊपर सीधी हथेली रखिये।

◆ फिर सना
◆ फिर तअव्वुज़ यानी आऊज़ो और तस्मिया यानि बिस्मिल्लाह पढ़ना।
◆ इन तीनो को एक दूसरे के फौरन बाद कहना।
◆ इन सब को आहिस्ता पढ़ना। आमीन कहना, इसे भी आहिस्ता कहना।
◆ तकबीरे ऊला के फौरन बाद सना पढ़ना (नमाज़ में तअव्वुज़ व तस्मिया किराअत के ताबे है और मुक्तदि पर किराअत नहीं लिहाज़ा तअव्वुज़ व तस्मिया भी मुक्तदि के लिये सुन्नत नहीं। हा जिस मुक्तदि की रकअत फौत हो गई हो वो अपनी बाक़ी रकअत अदा करते वक़्त दोनों को पढ़े।
◆ तअव्वुज़ सिर्फ पहली रकअत में है और तस्मिया हर रकअत के शुरू में सुन्नत है।
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, सफा 174*

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     अल्लाह का ये एहसाने अज़ीम है की उस ने हमे लिबास की दौलत अता की। लिबास से हम सर्दी गर्मी के असरात से अपनी हिफाज़त कर सकते है, ये लिबास हमारी ज़ीनत का सबब भी है और सबबे वक़ार भी है। हर क़ौम का जुदा जुदा लिबास होता है, मगर मुसलमान का लिबास सब से मुमताज़ है।

★ *सफेद लिबास हर लिबास से बेहतर है और सरकारे मदीना صلى الله عليه وسلم ने इस को पसन्द फ़रमाया है।* हज़रते समुरह رضي الله عنه से मरवी है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया : सफेद लिबास पहनो क्यू की ये ज़यदा साफ़ और पाकीज़ा है और अपने मुर्दो को भी इसी में कफनाओ।

★ *जब कपड़ा पहनने लगे तो ये दुआ पढ़े, अगले पिछले गुनाह मुआफ़ हो जाएंगे*
اٙلْحٙمْدُلِلّٰهِ الّٙذِىْ كٙسٙانِىْ هٰذٙا وٙرٙزٙقٙنِـيْـهِ مِنْ غٙيْرِ حٙوْلٍ مِّنِّىْ وٙلٙا قُوّٙةٙ
तर्जमा : अल्लाह का शुक्र है जिस ने मुझे ये पहनाया और बगैर मेरी क़ुव्वत व ताक़त के मुझे ये अता किया।

बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله
*✍🏼सुन्नते और आदाब, 102*

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मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Friday, 7 July 2017

*बरोज़े क़यामत नेकी खुशखबरिया सुनाएगी*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     क़यामत के दिन नेकियां करने वाले शादा व फरहा जब की बुराइयों के आदी हैरान व परेशान होंगे, रसूले अकरम صلى الله عليه وسلم ने इर्शाद फ़रमाया : बरोज़े क़यामत नेकी और बदी को लोगो के सामने खड़ा किया जाएगा। नेकी अपने करने वालो को बिशारते देगी और उन से भलाई का वादा करेगी जब की बुराई कहेगी : मुझ से दूर हो जाओ, मगर वो इस की ताक़त नही रखेगे बल्कि बुराई के साथ चिमटेंगे।
     *गुनाहो ने मेरी करम तोड़ डाली*
          *मेरा हशर में होगा क्या या इलाही*
     *इबादत में गुज़रे मेरी ज़िंदगानी*
          *करम हो करम या खुदा या इलाही*

*_शेर दहाड़ते वक़्त क्या कहता है ?_*
     हज़रते अबू हुरैरा से रिवायत है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने इर्शाद फ़रमाया : तुम्हे मालुम है शेर दहाड़ते वक़्त क्या कहता है ? सहाबए किराम ने अर्ज़ की, अल्लाह और उस का रसूल बेहतर जानते है। इर्शाद फ़रमाया : शेर कहता है, ऐ अल्लाह मुझे किसी नेक शख्स पर मुसल्लत न फरमाना।
*✍🏼आसान नेकियां, 3*

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मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*नमाज़ की सुन्नते* #01
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_तकबीरे तहरिमा की सुन्नते_*

★ तकबीरे तहरिमा के लिये हाथ उठाना।
★ हाथो की उनगलिया अपने हाल पर (normal) छोड़ना, यानि बिलकुल मिलाइये न इन में तनाव पौदा कीजिये।
★ हथेलियो और उंगलियो का पेट किब्ला रु होना।

★ तकबीर के वक़्त सर न झुकाना।
★ तकबीर शुरू करने से पहले ही दोनों हाथ कानो तक उठा लेना।
★ तकबीरे क़ुनूत और तकबीरे इदैन में भी येही सुन्नते है।

★ इमाम का बुलंद आवाज़ से "अल्लाहु अक्बर" "समीअल्लाहु-लीमन-हामिदह" और सलाम कहना (हाजत से ज्यादा बुलंद आवाज़ करना मकरूह है)

★ तकबीर के फौरन बाद हाथ बांध लेना सुन्नत है (बाज़ लोग तकबीरे ऊला के बाद हाथ लटका देते है या खोनिया पीछे की तरफ झुलाने के बाद हाथ बांधते है उन का ये फ़ैल सुन्नत से हट कर है)
*✍🏼दुर्रे मुख्तार, जी.2 स.208, 229*
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, सफा 173-174*

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मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
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*बैठने की सुन्नते और आदाब* #02
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
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★ बुज़ुर्गो की निशस्त पर बैठना अदब के खिलाफ है। हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान عليه رحما लिखते है : पीर व उस्ताज़ की निशस्त पर उन की गैर मोजुदगी में भी न बेठे।

★ कोशिश करे की उठते बैठते वक़्त बुज़ुर्गाने दिन की तरफ पीठ न होने पाए और पाउ तो उन की तरफ न ही करे।

★ जब कभी इज्तिमाअ या मजलिस में आए तो लोगो को फलांग कर आगे न जाए जहां जगह मिले वही बैठ जाए।

★ मजलिस से फारिग हो कर ये दुआ 3 बार पढ़ ले तो गुनाह मुआफ़ हो जाएंगे। और इस्लामी भाई मजलिसे खैर व मजलिसे ज़िक्र में पढ़े तो उस के लिये उस खैर पर मोहर लगा दी जाएगी।
سُبْحٙانٙكٙ اللّٰهُمّٙ وٙبِحٙمْدِكٙ لٙا اِلٰه اِلّٙا اٙنْتٙ اٙسْتٙغْفِرُكٙ وٙاٙتُوْبُ اِلٙيْكٙ
तर्जमा : तेरी ज़ात पाक है और ऐ अल्लाह ! तेरे ही लिये तमाम खुबिया है, तेरे सुवा कोई माबूद नही, तुझ से बख्शीश चाहता हु और तेरी तरफ तौबा करता हु।

★ जब कोई आलिमे बा अमल या मुत्तक़ी शख्स या सय्यिद सहाब या वालिदैन आए तो ताज़िमन खड़े हो जाना षवाब है। मुफ़्ती अहमद यार खान عليه رحما लिझते है : बुज़ुर्गो की आमद पर ये दोनों काम यानी ताज़िमी क़याम और इस्तिक़बाल जाइज़ बल्कि सुन्नते सहाबा है बल्कि हुज़ूर की सुन्नते कौली है।

ऐ हमारे प्यारे अल्लाह ! हमे उठने बैठने की सुन्नतो और आदाब पर अमल पैरा होने की तौफिके रफ़ीक़ मर्हमत फरमा।
اٰمِيْن بِـجٙـاهِ النّٙـبِـىِّ الْاٙ مِيْن
*✍🏼सुन्नते और आदाब, 101*

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*दुरुद शरीफ काम आ गया*
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     क़यामत के दिन किसी मुसलमान की नेकियां तराज़ू में हल्की हो जाएगी तो हुज़ूर صلى الله عليه وسلم एक पर्चा अपने पास से निकाल कर नेकियों के पलड़े में रख देंगे तो इस से नेकियो का पलड़ा बजनी हो जाएगा। वो अर्ज़ करेगा : मेरे माँ बाप आप पर क़ुर्बान, आप कौन है ? हुज़ूर صلى الله عليه وسلم फरमाएंगे : में तेरा नबी मुहम्मद हु और ये तेरा दुरुदे पाक है जो तू ने मुझ पर पढ़ा था।

*आसान नेकियां, 1*

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Thursday, 6 July 2017

*सिर्फ एक नेकी चाहिये*
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     हज़रते इकराम رضي الله عنه से मरवी है, क़यामत के दिन एक शख्स अपने बाप के पास आ कर कहेगा : अब्बू जान !
क्या में आप का फरमा बरदार न था ?
क्या में आप से महब्बत भरा सलूक न करता था ?
क्या में आप के साथ भलाई न करता था ?
आप देख रहे है की में किस मुसीबत में गिरफ्तार हु ! मुझे अपनी नेकियों में से सिर्फ एक नेकी अता कर दीजिये या मेरे गुनाह का बोझ उठा लीजिये।

     बाप कहेगा : मेरे बेटे ! तूने मुझ से जो चीज़ मांगी वो आसान तो है लेकिन में भी उसी चीज़ से डरता हु जिस से तुम डर रहे हो।
     इसके बाद बाप भी बेटे को अपने ऐहसानात याद दिला कर येही मुतालबा करेगा तो बेटा जवाब देगा : आप ने बहुत थोड़ी चीज़ का सुवाल किया है लेकिन मुझे भी उसी बात का खौफ है जिस का आप को डर है।
*✍🏼आसान नेकियां, 1*

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*नमाज़ के वाजिबात* #06
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اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

★ हर फ़र्ज़ व वाजिब का उस की जगह होना।

★ रूकू हर रकअत में एक ही बार करना।

★ सज्दा हर रकअत में दो बार करना।

★ दूसरी रकअत से पहले क़ादह न करना।

★ 4 रकअत वाली नमाज़ में तीसरी रकअत पर क़ादह न करना।

★ आयते सज्दा पढ़ी हो तो सज्दए तिलावत करना।

★ सज्दए सहव वाजिब हुवा हो तो सज्दए सहव करना।

★ दो फर्ज़ो  या दो वाजिब या फ़र्ज़ व वाजिब के दरमियान तिन तस्बीह की क़दर (यानि तिन बार सुब्हान अल्लाह कहने के मिक़दार) वक़्फ़ा न होना।

★ इमाम जब किराअत करे ख्वाह बुलंद आवाज़ से हो या आहिस्ता आवाज़ से, मुक्तदि का चुप रहना।

★ किराअत के सिवा तमाम वाजिबात में इमाम की पैरवी करना।
*✍🏼नमाज़ के अहकाम, सफा 173*

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