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Friday, 20 October 2017

*क़ज़ा नमाज़ का तरीका* 13
بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ

*_ज़ोहर की 4 सुन्नते रह जाए तो क्या करे?_*
     अगर ज़ोहर के फ़र्ज़ पहले पढ़ लिये तो दो रकाअत सुन्नत अदा करने के बाद चार रकाअत सुनत अदा कीजिये उसके बाद दो नफ्ल अदा किजोये।

*_फज्र की सुन्नते रह जाए तो क्या करे ?_*
     सुन्नते पढ़ने से अगर फज्र की जमाअत छूट जाने का अंदेशा हो तो बगैर पढ़े शामिल हो जाए। मग़र सलाम फेरने के बाद पढ़ना जाइज़ नही।
     तुलुए आफताब के कम अज़ कम 20 मिनट बाद से ले कर ज़हवए कुब्रा तक पढ़ले कि मुस्तहब है। ईसके बाद मुस्तहब भी नही।
*✍🏽नमाज़ के हकाम 254*

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Thursday, 19 October 2017

*गुनाहे कबीरा नंबर 24* #01
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_झूट बोलना_* #01
     अल्लाह इर्शाद फ़रमाता है :
_बेशक अल्लाह राह नहीं देता उसे जो हद से बढ़ने वाला झुटा हो।_
*✍🏼المؤمن ٢٨*
_फिर मुबाहला करें तो झूटों पर अल्लाह की लानत डालें।_
*✍🏼ال عمران ٦١*

*_झूट की मज़म्मत में फरमाने मुस्तफा_*
     बेशक झूट फिसको फुजुर की तरफ ले जाता है और बेशक फिसको फुजुर जहन्नम तक ले जाता है और एक शख्स झूट बोलता रहता है हत्ता कि वो अल्लाह क्र नज़दीक कज़्ज़ाब (बहुत बड़ा झुटा) लिख दिया जाता है।
*✍🏼مسلم*

*_मुनाफ़िक़ की निशानियां_*
     मुनाफ़िक़ की तीन निशानियां है (1) जब बात करे तो झूट बोले (2) जब वादा करे तो पूरा न करे (3) जब उस के पास अमानत रखवाई जाए तो खियानत करे।
*✍🏼مسلم*
     जिस में चार खसलते हो वो पक्का मुनाफ़िक़ है और जिस में इन में से एक खसलत हो उस में निफ़ाक़ की एक खसलत है हत्ता कि वो इसे छोड़ दे : (1) जब उस के पास अमानत रखवाई जाए तो खयानत करे (2) जब बात करे तो झूट बोले (3) जब वादा करे तो पूरा न करे (4) जब झगडे तो गाली दे।
*✍🏼بخارى*

बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله
*✍🏼76 कबीरा गुनाह* 100

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*क़ज़ा नमाज़ का तरीका* #13
بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ

*_फ़ज्र व असर के बाद नवाफ़िल नही पढ़ सकते_*
     नमाज़े फ़ज्र और असर के बाद वो तमाम नवाफ़िल अदा करना मकरुहे तहरिमि है, अगर्चे फ़ज्र व असर की सुन्नते ही क्यू न हो।
*✍🏽दुर्रेमुखतार 2/44*

     क़ज़ा के लिये कोई वक़्त मुअय्यन नही उम्र में जब भी पढ़ेगा बरियूज़्ज़िम्मा हो जाएगा। मगर तुलुअ व गुरुब और ज़वाल के वक़्त नमाज़ नहीं पढ़ सकता कि इन वक़्तों में नमाज़ जाइज़ नही।
*✍🏽बहारे शरीअत 1/702*
*✍🏽आलमगिरी 1/52*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम 254*

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Wednesday, 18 October 2017

*क़ज़ा नमाज़ का तरीका* #11
بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ

*_क़ज़ा का लफ्ज़ कहना भूल गया तो?_*
     आला हज़रत फरमाते है : हमारे उलमा तसरिह फरमाते है : क़ज़ा ब निययते अदा और अदा ब निययते क़ज़ा दोनों सहीह है।
*✍🏽फतावा रज़विय्या 8/161*

*_क़ज़ा नमाज़े नवाफ़िल की अदाएगी से बेहतर_*
     क़ज़ा नमाज़े नवाफ़िल की अदाएगी से बेहतर और अहम है मगर सुन्नते मुअक्क्दा, नमाज़े चाश्त, स्लातुत्तस्बीह और वो नमाज़े जिन के बारे में अहादीस मरवी है यानी जेसे तहिय्यतुल मस्जिद असर से पहले की चार रकअत (सुन्नते गैर मुअक्कदा) और मगरिब के बाद 6 रकअत पढ़ी जाएगी।
*✍🏼रद्दुलमोहतार 2/646*
     याद रहे क़ज़ा नमाज़ के बिना पर सुन्नते मुअक्कदा छोड़ना जाइज़ नहीं, अलबत्ता सुन्नते गैर मुअक्कदा और अहादिसो में वारिद शुदा मखसुस नवाफ़िल पढ़े तो षवाब का हक़दार है मगर इन्हें न पड़ने पर कोई गुनाह नही।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम 253*

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Tuesday, 17 October 2017

*गुनाहे कबीरा नंबर 23*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_झूटी क़सम खाना_*

*_नाजाइज़ क़समों की मज़म्मत में फरमाने मुस्तफा_*
     एक शख्स ने कहा : खुदा की क़सम ! अल्लाह फूलां शख्स की मगफिरत नहीं फ़रमाएगा तो अल्लाह ने इर्शाद फ़रमाया ये कौन है जो मुझ पर क़सम खा रहा है कि में फुला की मगफिरत नहीं करूँगा। बेशक में ने उस की मगफिरत कर दी और इस के अमल को अकारत कर दिया है।
*✍🏼مسلم*
     3 लोगों से अल्लाह क़यामत के दिन कलाम फ़रमाएगा न उन्हें पाक करेगा और उन के लिये दर्दनाक अज़ाब है : (1) तकब्बुर से अपना तहबन्द लटकाने वाला (2) एहसान जताने वाला (3) झूटी क़सम खा कर सौदा बेचने वाला।
*✍🏼مسلم*

*_गैरुल्लाह की क़सम_*
     जिसने अल्लाह के इलावा किसी की क़सम खाई बिलाशुबा उस ने कुफ़्र किया।
*✍🏼ترمذى*
     जिसने इस लिये क़सम खाई कि इस के ज़रीए किसी मुसलमान का माल हासिल कर ले वो अल्लाह से इस हाल में मिलेगा कि अल्लाह उस पर गज़बनाक होगा। अर्ज़ की गई : अगर्चे वो मामूली चीज़ हो ? फ़रमाया : अगर्चे वो पीलू की मिस्वाक हो।
*✍🏼مسلم*
     असर के बाद झूटी क़सम खाने और रसूलल्लाह صلى الله عليه وسلم के मिम्बर शरीफ के पास झूटी क़सम खाने का गुनाह ज़्यादा सख्त है। ये बात ब तरीके सहीह मन्क़ुल है।
*✍🏼مسلم*
*✍🏼76 कबीरा गुनाह* 97

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*क़ज़ा नमाज़ का तरीका* #10
بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ

*_जमानए इर्तिदाद की नमाज़े_*
     जो शख्स मआजअल्लाह मुर्तद हो गया फिर इस्लाम लाया तो जमानए इर्तिदाद की नमाज़ की क़ज़ा नही और मुर्तद होने से पहले जमानए इस्लाम में जो नमाज़े जाती रही थी उनकी क़ज़ा वाजिब है।
*✍🏽रद्दुलमोहतार 2/647*

*_मरीज़ को नमाज़ कब मुआफ़ है?_*
     ऐसा मरीज़ कि इशारे से भी नमाज़ नही पढ़ सकता अगर ये हालत पुरे 6 वक़्त तक रही तो इस हालत में जो नमाज़े हुई उनकी क़ज़ा वाजिब नही।
*✍🏽आलमगिरी 1/121*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम 252*

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Monday, 16 October 2017

*गुनाहे कबीरा नंबर 22*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_डाका डालना_*
     अल्लाह इर्शाद फ़रमाता है :
_वो की अल्लाह और उस के रसूल से लड़ते और मुल्क में फसाद करते फिरते है उन का बदला येही है कि गिन गिन कर क़त्ल किये जाएं या सूली दिये जाएं या उन के एक तरफ के हाथ और दूसरी तरफ के पाऊं काटे जाएं या ज़मीन से दूर कर दिये जाएं ये दुन्या में उन की रुसवाई है और आख़िरत में उन के लिये बड़ा अज़ाब।_
*✍🏼الماىٔدة ٣٣*
     जब मुसाफिरों को फ़क़त ख़ौफ़ज़दा करने वाला भी शरीअत की नज़र में कबीरा गुनाह का मूर्तक़िब है तो जब वो लोगों का माल भी छीन ले तो कैसा सख्त मुआमला होगा ! और अगर वो लोगों को ज़ख़्मी कर दे या क़त्ल कर दे तो कैसा संगीन मुआमला होगा ! और वो मुतअद्दिद गुनाहों का मूर्तक़िब क़रार पाएगा। इस फेल के करने के साथ साथ उन लोगों का नमाज़ों को छोड़ देने और डाके के माल को शराब नोशी और ज़िनाकारी में खर्च करने वगैरा का आदी होने का गुनाह मज़ीद बरआं है।
*✍🏼76 कबीरा गुनाह* 95

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*क़ज़ा नमाज़ का तरीका* #09
بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ

*_क़ज़ाए उम्री का तरीका_*
     क़ज़ा हर रोज़ की 20 रकअत होती है।
2 फ़र्ज़ फ़ज्र की, 4 ज़ोहर की, 4 असर की, 3 मगरिब की, 4 ईशा की और 3 वित्र।
निय्यत इस तरह कीजिये
*सबसे पहली फ़ज्र जो मुझ से क़ज़ा हुई उसको अदा करता हु* हर नमाज़ में इसी तरह नियत कीजिये।

*_नमाज़े क़सर की क़ज़ा_*
     अगर हालते सफर की क़ज़ा नमाज़ हालते इक़ामत में पढ़ेंगे तो क़सर ही पढ़ेंगे और हालते इक़ामत की क़ज़ा हालते सफर में पढ़ेंगे तो पूरी पढ़ेंगे।
*✍🏽आलमगिरी 1/121*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम 251*

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
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*83 आसान नेकियां* #55
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*तंगदस्त क़र्ज़दार को मोहलत देना या उस के क़र्ज़ में कुछ कमी करना* #01
     हुज़ूर صلى الله عليه وسلم मस्जिद में तशरीफ़ लाए तो ज़मीन की तरफ इशारा करते हुवे फरमा रहे थे, जिस ने तंग दस्त को मोहलत दी या उस के क़र्ज़ में कमी की अल्लाह उसे जहन्नम की गर्मी से बचाएगा।
*✍🏼مجمع الزوائد*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जिसने तंगदस्त को मोहलत दी या उसका क़र्ज़ में कमी की अल्लाह उसे क़यामत के दिन अपने अर्श के साए में जगह देगा जिस दिन उस साए के इलावा कोई साया न होगा।
*✍🏼ترمذى*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जिसे ये पसन्द हो कि अल्लाह उसे क़यामत की बे चेनियों से नजात दिलाए तो उसे चाहिये कि वो किसी तंग दस्त की मुश्किल आसान कर दे या उस के क़र्ज़े में रिआयात कर दे।
*✍🏼صحيح مسلم*
बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله
*✍🏼आसान नेकियां* 142

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Sunday, 15 October 2017

*गुनाहे कबीरा नंबर 21*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_चोरी करना_*
     अल्लाह इर्शाद फ़रमाता है :
_और जो मर्द या औरत चोर हो तो उन का हाथ काटो उन के किये का बदला अल्लाह की तरफ से सज़ा और अल्लाह ग़ालिब हिक़मत वाला है।_
*✍🏼الماىٔدة ٣٨*

*_चोरी की मज़म्मत में फरमाने मुस्तफा_*
     अल्लाह चोर पर लानत फरमाए जो रस्सी चुराता है तो उस का हाथ काट दिया जाता है।
*✍🏼مسلم*
     अगर मुहम्मद صلى الله عليه وسلم की बेटी फातिमा चोरी करती तो में ज़रूर उस का भी हाथ काट देता।
*✍🏼مسلم*
     ज़ानी ज़िना करते वक़्त मोमिन नहीं होता और चोर चोरी करते वक़्त मोमिन नहीं होता लेकिन इन अफआल के बा वुजूद तौबा की गुन्जाइश बाक़ी रहती है।
*✍🏼مسلم*
*✍🏼76 कबीरा गुनाह* 94

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*क़ज़ा नमाज़ का तरीका* #08
بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ

*_जल्द से जल्द क़ज़ा पढ़ लीजिये_*
     जिसके ज़िम्मे क़ज़ा नमाज़े हो उन का जल्द से जल्द पढ़ना वाजिब है मगर बाल बच्चों की परवरिश और अपनी जरूरियात की फराहमी के सबब ताखीर जाइज़ है। लिहाज़ा कारोबार भी करता रहे और फुर्सत का जो वक़्त मिले उसमे क़ज़ा पढता रहे यहाँ तक कि पूरी हो जाए।
*✍🏽दुर्रेमुखतार 2/646*

*_छुप कर क़ज़ा पढ़िये_*
     क़ज़ा नमाज़े छुप कर पढ़िये लोगो पर इस का इज़हार न कीजिये की गुनाह का इज़हार भी मकरुहे तहरिमि व गुनाह है।
*✍🏽रद्दुल मोहतार 2/650*
     लिहाज़ा अगर लोगो की मौजूदगी में वित्र क़ज़ा पढ़े तो तकबिरे क़ुनूत के लिये हाथ न उठाए।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम 250*

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*83 आसान नेकियां* #54
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*_ताज़िय्यत करना_*
     जब किसी का बच्चा बीमार हो जाए, कोई बे रोज़गार या क़र्ज़दार हो जाए, हादषे का शिकार हो जाए, चोर या डाकू माल ले कर फरार हो जाए, कारोबार में नुक़्सान से हमकिनार हो जाए कोई चीज़ गम हो जाने के सबब बे क़रार हो जाए, अल गर्ज़ किसी तरह की भी परेशानी से दो चार हो जाए उस की दिलजुइ करना, उसे तसल्ली देना बहुत बड़े षवाब का काम है।

     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जो किसी ग़मज़दा शख्स से ताज़िय्यत करेगा अल्लाह उसे तक़्वा का लिबास पहनाएगा और रूहों के दरमियान उस की रूह पर रहमत फ़रमाएगा और जो किसी मुसीबत ज़दा से ताज़िय्यत करेगा अल्लाह उसे जन्नत के जोड़ो में से दो जोड़े पहनाएगा जिन की क़ीमत (सारी) दुन्या भी नहीं हो सकती।
*✍🏼المعجم الاوسط*
*✍🏼आसान नेकियां* 138

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Saturday, 14 October 2017

*गुनाहे कबीरा नंबर 20* #02
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*_नाजाइज़ व बातिल तरीके से लोगों का माल ले कर ज़ुल्म करना_* #02

*_सब से बड़ा ज़ुल्म_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जिस शख्स ने क़सम की वजह से किसी मुसलमान शख्स का हक़ मार लिया तो बिलाशुबा अल्लाह के उस के लिये जहन्नम को वाजिब कर दिया। अर्ज़ की गई : या रसूलुल्लाह صلى الله عليه وسلم ! अगर्चे वो मामूली चीज़ हो ? इर्शाद फ़रमाया : अगर्चे वो पीलू की मिस्वाक ही हो।
*✍🏼مسلم*
     जिसे हमने किसी काम पर मुक़र्रर किया फिर उस ने हम से सुई या उस से बढ़ कर कोई चीज़ छुपाई तो ये खयानत है, वो उस चीज़ को बरोज़े क़यामत ले कर आएगा।
*✍🏼مسلم*

*_क़र्ज़ मुआफ़ न होगा_*
     एक शख्स ने बारगाहे रिसालत में अर्ज़ की : या रसूलुल्लाह صلى الله عليه وسلم ! अगर में सब्र करते हुवे षवाब की उम्मीद से पीछे हटते नहीं बल्कि आगे बढ़ते हुवे मारा जाऊं तो क्या ये अमल मेरी खताओं को मिटा देगा ? इर्शाद फ़रमाया : हा क़र्ज़ के सिवा।
*✍🏼مسلم*

*_हराम से पलने वाला जिस्म जहन्नमी है_*
     हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया : जो गोश्त हराम से नशवो नुमा पाएगा वो जन्नत में दाखिल नहीं होगा, आग उस की ज़्यादा हक़दार है।
*✍🏼مستدرك حاكم*
*✍🏼76 कबीरा गुनाह* 92

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*क़ज़ा नमाज़ का तरीका* #07
بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ

*_अदा, क़ज़ा और वाजीबुल इआदा की तारीफ़_*
     जिस चीज़ का बन्दों को हुक्म है उसे वक़्त में बजा लाने को अदा कहते है और वक़्त खत्म होने के बाद अमल में लाना क़ज़ा है और अगर उस हुक्म के बाज लाने में कोई खराबी पैदा हो जाए तो उस खराबी को दूर करने के लिये वो अमल दोबारा बजा लाना इआदा कहलाता है।
     वक़्त के अंदर अंदर अगर तहरिमा बांध ली तो नमाज़ क़ज़ा न हुई बल्कि अदा है।
*✍🏼दुर्रे मुख़्तार 2/627*

    नमाज़े फ़ज्र, जुमुआ और इदैन में वक़्त के अंदर सलाम फिरना लाज़िम है वरना नमाज़ न होगी
*✍🏽बहारे शरीअत 1/701*

     बिला उज़्रे शरई नमाज़ क़ज़ा कर देना सख्त गुनाह है, इस पर फ़र्ज़ है कि उसकी क़ज़ा पढ़े और सच्चे दिल से तौबा भी करे, तौबा या हज्जे मक़बूल से इन्शा अल्लाह ताखीर का गुनाह मुआफ़ हो जाएगा
*✍🏽दुर्रे मुख्तार 2/626*
     तौबा उसी वक़्त सहीह है जब कि क़ज़ा पढ़ ले उसको अदा किये बगैर तौबा किये जाना तौबा नही कि जो नमाज़ इस के ज़िम्मे थी उसको पढ़ना तो अब भी बाक़ी है और जब गुनाह से बाज़ न आया तो तौबा कहा हुई ?
*✍🏽रद्दल मोहतार 2/627*

     हज़रते इब्ने अब्बास رضي الله تعالي عنه से मरवी है, हुज़ूर ﷺ ने इरशाद फ़रमाया : गुनाह पर क़ाइम रह कर तौबा करने वाला उस की मिस्ल है जो अपने रब से ठठा यानी मज़ाक करता है।
*✍🏽शोएबुल ईमान 5/436*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम 246*

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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Friday, 13 October 2017

*गुनाहे कबीरा नंबर 20* #01

*_नाजाइज़ व बातिल तरीके से लोगों का माल ले कर ज़ुल्म करना_* #01
     अल्लाह इर्शाद फ़रमाता है :
_और आपस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खाओ और न हाकिमों के पास उन का मुक़दमा इस लिये पहुँचाओ कि लोगों का कुछ माल नाजाइज़ तौर पर खा लो जान बुझ कर।_
*✍🏼البقرة ١٨٨*
_मुवखज़ा तो उन्हीं पर है जो लोगों पर ज़ुल्म करते है और ज़मीन में नाहक सरकशी फैलाते है उन के लिये दर्दनाक अज़ाब है।_
*✍🏼الشورى ٤٢*
_और ज़ालिमों का न कोई दोस्त न मददगार।_
*✍🏼الشورى ٨*

*_ज़ुल्मन लोगों के माल लेने के मुतअल्लिक़ फरमाने मुस्तफा_*
     ज़ुल्म क़यामत के दिन अंधेरियों की सूरत में होगा।
*✍🏼مسلم*
     जो ज़ुल्मन किसी की एक बालिश्त भर ज़मीन ले लेगा उसे बरोज़े क़यामत सात ज़मीनों का तौक़ पहनाया जाएगा।
*✍🏼مسلم*
     एक दफ्तर ऐसा है अल्लाह उस में से कुछ भी मुआफ़ नहीं फ़रमाएगा और वो दफ्तर लोगों पर ज़ुल्म करने के मुआमलात पर मुश्तमिल है।
*✍🏼مسند احمد*
     मालदार शख्स का (हुक़ूक़ की अदाएगी में) टाल मटोल से काम लेना ज़ुल्म है।
*✍🏼مسلم*

बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله
*✍🏼76 कबीरा गुनाह* 90

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
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*क़ज़ा नमाज़ का तरीका* #07
بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ

*_रात के आखरी हिस्से में सोना केसा ?_*
     नमाज़ का वक़्त दाखिल हो जाने के बाद सो गया फिर वक़्त निकल गया और नमाज़ क़ज़ा हो गई तो गुनाहगार हुवा जब की जागने पर सहीह ऐतिमाद या जगाने वाला मौजूद न हो, बल्कि फ़ज्र में दुखुले वक़्त से पहले भी सोने की इजाज़त नही हो सकती जब की अक्सर हिस्सा रात का जागने में गुज़रा और ज़न्ने ग़ालिब है कि अब सो गया तो वक़्त में आँख न खुलेगी।
*✍🏽बहारे शरीअत 1/701*

*_रात देर तक जागना_*
     नात ख्वानी, ज़िक्रो फ़िक्र की महफ़िलो नीज़ सुन्नतो भव इज्तेमाअ वगैरा में रात देर तक जागने के बाद सोने के सबब अगर नमाज़े फ़ज्र क़ज़ा होने का अंदेशा हो तो ब निययते एतिकाफ मस्जिद में क़याम करे या वहा सीए जहा कोई क़ाबिले एतिमाद इस्लामी भाई जगाने वाला मौजूद हो। या अलार्म लगाले इससे आँख खुल जाती हो।
     फ़ुक़हाए किराम फरमाते है : जब ये अंदेशा हो की नमाज़ जाती रहेगी तो बिला ज़रूरते शरईय्या उसे रात देर तक जागना ममनुअ है।
*✍🏽रद्दलमुहतार 2/33*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम 245*

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
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*83 आसान नेकियां* #53
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_एतिकाफ करना_*
     फरमाने मुस्तफा صلى الله عليه وسلم : जिस शख्स ने ईमान के साथ षवाब हासिल करने की निय्यत से एतिकाफ किया उस के तमाम पिछले गुनाह बख्श दिये जाएंगे।
*✍🏼جامع صغير*
     मस्जिद में अल्लाह की रिज़ा के लिये ब निय्यते एतिकाफ ठहरने को एतिकाफ कहते है। इस की 3 किस्मे है :
     (1) *ऐतिकाफे वाजिब* : एतिकाफ की मन्नत मानी यानी ज़बान से कहा : में अल्लाह के लिये फुला दिन या इतने दिन का एतिकाफ करूँगा तो अब जितने भी दिन का कहा है उतने दिन एतिकाफ करना वाजिब हो गया।
     (2) *ऐतिकाफे सुन्नत* : रमज़ान के आखरी अशरे का एतिकाफ सुन्नते मुअक्कदा अलल किफ़ाया है।
     (3) *ऐतिकाफे नफ्ल* : नज़्र और सुन्नते मुअक्कदा के इलावा जो एतिकाफ किया जाए वो मुस्तहब व सुन्नते गैर मुअक्कदा है।

     नफ्लि एतिकाफ करना निस्बतन आसान है क्यू की इस के लिये न रोज़ा शर्त है न कोई वक़्त की क़ैद, ये चन्द लम्हात के लिये भी किया जा सकता है, लिहाज़ा जब भी मस्जिद में दाखिल हो एतिकाफ की निय्यत कर लीजिये। *मेने सुन्नत एतिकाफ की निय्यत की।* जब तक मस्जिद में रहेंगे कुछ पढ़ें या न पढ़ें एतिकाफ का षवाब मिलता रहेगा। जब मस्जिद से बाहर निकलेगा एतिकाफ खत्म हो जाएगा।
*✍🏼आसान नेकियां* 137

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Thursday, 12 October 2017

*गुनाहे कबीरा नंबर 19*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_माले गनीमत बैतूल माल और ज़कात के माल में खियानत करना_*
     अल्लाह इर्शाद फ़रमाता है :
_और किसी नबी पर ये गुमान नहीं हो सकता कि वो कुछ छुपा रखे और जो छुपा रखे वो क़यामत के दिन अपनी छुपाई चीज़ ले कर आएगा।_
*✍🏼ال عمران ١٦١*

*_ज़ुल्म की अक़्साम_*
     ज़ुल्म की तीन किस्मे है : (1) बातिल तरीके से लोगों का माल खा लेना। (2) लोगों को क़त्ल, मार पिट, हड्डियां तोड़ कर और ज़ख़्मी कर के उन पर ज़ुल्म करना। (3) लोगों को गालियां दे कर, लान तान, बुरा भला कह कर और ज़िना की तोहमत लगा कर उन पर ज़ुल्म ढाना।
     रसूले पाक صلى الله عليه وسلم ने मिना में ख़ुत्बा देते हुवे इर्शाद फ़रमाया : बिलाशुबा तुम्हारे खून, तुम्हारे अमवाल और तुम्हारी इज़्ज़ते तुम (में एक दूसरे) पर ऐसे हराम है जेसे आज के दिन की तुम्हारे इस महीने और तुम्हारे इस शहर की हुरमत है।
*✍🏼بجارى*
     अल्लाह बगैर तहारत के नमाज़ क़बूल नहीं फ़रमाता और खियानत के माल से सदक़ा क़बूल नहीं करता।
*✍🏼مسلم*
     हज़रते ज़ैद बिन खालिद जुहनी رضي الله عنه बयान करते है : एक शख्स ने ग्ज़वऐ खैबर में खियानत की थी, हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने उस की नमाज़े जनाज़ा नहीं पढ़ी और फ़रमाया : तुम्हारे साथी ने राहे खुदा में खियानत की है। ये खबर सुन कर हम ने उस के सामान की तलाशी ली तो उस में एक मोती पाया जिस की क़ीमत दो दिरहम के बराबर थी।
*✍🏼أبو داود*
     इमाम अहमद बिन हम्बल عليه رحما फ़रमाते है : हम नहीं जानते कि खाइन और ख़ुदकुशी करने वाले के इलावा आप صلى الله عليه وسلم ने किसी शख्स की नमाज़े जनाज़ा पढ़ना तर्क की हो।
*✍🏼76 कबीरा गुनाह* 88

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Wednesday, 11 October 2017

*गुनाहे कबीरा नंबर 18*
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

*_पाक दामन औरतों पर ज़िना की तोहमत लगाना_*
     अल्लाह इर्शाद फ़रमाता है :
_बेशक वो जो ऐब लगाते है अन्जाम पारसा ईमान वालियों को उन पर लानत है दुन्या और आख़िरत में और उन के लिये बड़ा अज़ाब है।_
*✍🏼النور ٢٣*
_और जो पारसा औरतों को ऐब लगाएं फिर चार गवाह मुआईने के न लाएं तो उन्हें 80 कोड़े लगाओ।_
*✍🏼النور ٤*

*_तोहमते ज़िना की मज़म्मत में फरमाने मुस्तफा_*
     सात हलाक करने वाले गुनाहों से बचो। ये कह कर आप صلى الله عليه وسلم ने इन में भोली भाली पाक दामन मुसलमान औरतों पर ज़िना की तोहमत लगाने का भी ज़िक्र फ़रमाया।
*✍🏼مسلم*
     मुसलमान वो है जिस की ज़बान और हाथ से दूसरे मुसलमान महफूज़ रहें।
*✍🏼مسلم*
     जिस ने अपनी गुलाम या लौंडी पर ज़िना की तोहमत लगाई अगर वो हक़ीक़त में ऐसा न हो जैसा उस ने कहा तो बरोज़े क़यामत उसे हद्दे क़ज़फ् लगाई जाएगी।
*✍🏼مسلم*
     जो बदबख्त हज़रते आइशा सिद्दिक़ा رضي الله عنه की आसमान से बराअत नाज़िल हो जाने के बाद भी आप पर (معاذ الله) तोहमते ज़िना लगाए वो पक्का काफ़िर और क़ुरआन को झुटलाने वाला है। ऐसे शख्स को क़त्ल किया जाएगा।
*✍🏼76 कबीरा गुनाह* 83

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*क़ज़ा नमाज़ का तरीका* #05
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*_अगर नमाज़ पढ़ना भूल जाए तो..?_*
     हुज़ूर ﷺ ने इरशाद फ़रमाया : जो नमाज़ से सो जाए या भूल जाए तो जब याद आए पढ़ ले कि वोही उसका वक़्त है।
*✍🏼मुस्लिम 346*

     हुक़हाए किराम फरमाते है : सोते में या भूले से नमाज़ क़ज़ा हो गई तो उसकी क़ज़ा पढ़नी फ़र्ज़ है अलबत्ता क़ज़ा का गुनाह उस पर नही मगर बेदार होने और याद आने पर अगर वक़्ते मकरूह न हो तो उसी वक़्त पढ़ ले ताखीर मकरूह है।
*✍🏼बहारे शरीअत 1/701*
*✍🏼नमाज़ के अहकाम 243*

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