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Tuesday, 22 January 2019

दिन व दुन्या की भलाइयों वाली दुआ* #02

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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

*_बैतूल खला में दाखिल होने से पहले की दुआ_*

اَللّٰهُمَّ اِنِّىْ اَعُوْذُ بِكَ مِنَ الْخُبُثِ وَالْخَبَآئِثِ

*तर्जमा* - ऐ अल्लाह ! में नापाक जिन्न और जिन्नीयो से तेरी पनाह मांगता हु।

*✍🏼सहीह बुखारी, 4/195*

     चुकी पखाने में गंदे जिन्नात रहते है। इस लिये ये दुआ पढ़नी चाहिए।


*_बैतूल खला से बाहर आने के बाद की दुआ_*

اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذِىْ اَذْهَبَ  عَنِّى الْاَذٰى وَعَافَانِىْ

*तर्जमा* - अल्लाह का शुक्र है जिसने मुझ से अज़िय्यत दूर की और मुझे आफिय्यत दी।

*✍🏽मदनी पंजसुरह, 204*


*नॉट :* जिन हजरात तो अरबी नही आती वो तर्जमा याद करले और उसे पढ़े। और जो अरबी जानते है वो तर्जमे को जहन में रखे ताकि पता चले की हम क्या पढ़ रहे है, ये दुआ में क्या है। अपनी मादरी ज़बान में दुआ पढ़ना बेहतर है।

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

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Monday, 21 January 2019

तज़किरतुल अम्बिया* #371

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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

*सुबह होने पर फ़िरऔन और उसकी क़ौम की हलाकत की तरफ रवानगी*

     फिरऔन ने जब देखा कि बनी इस्राईल मौजूद नहीं हैं तो बहुत गुस्से में हुआ उसने हर तरफ अपने कारिंदे दौड़ाकर अपनी फौजों, लश्करों और अपने तमाम हामियों को जमा कर लिया और कहने लगा कि बनी इस्राईल हमारे मुकाबले में एक छोटी सी जमाअत है वह हमेशा गैज़ व गजब को भड़काते रहते हैं मैं चाहता हूं कि इनको मुकम्मल तौर पर तबाह व बर्बाद कर दिया जाये। 

     अल्लाह ने फ़िरऔन को बर्बाद करने के लिए उनके दिलों में यह बार साबित कर दी की जब लोग बनी इस्राईल का पीछा करके उनका मुक़म्मल सफाया कर दो इस तरह अल्लाह तआला ने अपनी हिकमते कामिला से उन तमाम फिरौनियों को बर्बाद करके अपना वादा पूरा फरमा दीया। फ़िरऔन को मानने वाले तमाम उसके कहने पर अपनी नेमतों अपने आला किस्म के मकानात और फलदार दरख्तों के बागात और अपने समाने तअय्युश ऐश व इशरत के सामान को छोड़ कर बज़ाहिर बनी इस्राइल को तबाह करने के लिए चले जो दरहक़ीक़त अपनी ही बर्बादी की तरफ चल रहे थे। 

     फ़िरऔन के कहने पर सब लोग जमा होकर बनी इस्राइल के तआक़कुब में चल पड़े, दरियाए कुलज़म के किनारे पर उनके सामने पहुंच गये बनी इस्राईल ने जब देखा तो कहने लगे कि अब तो हम पकड़ लिये जायेंगे उनके दिलों में पहले ही फरऔन का रोब छाया हुआ था और वह तादाद में भी फिरौनियो से बहुत कम थे और किसी किस्म का उनके पास कोई असलहा भी नहीं था इसलिए उन पर बहुत ज्यादा खौफ तारी हुआ तो मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा कि मेरा रब तआला मेरे साथ हैं वह अभी मेरी रहनुमाई फ़रमायेगा। 


*मूसा अलैहिस्सलाम के दरिया में असा मारने का हुक्म* ये वाकिया अगली पोस्ट में ان شاء الله.

*✍️तज़किरतुल अम्बिया* 310

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

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_नमाज़ छोड़ने का वबाल अहादिष की रौशनी में_* #05

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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     हुज़ूर ﷺ ने इर्शाद फ़रमाया : बन्दा जब सज्दे की आयत पढ़कर सज्दा करता है तो शैतान अलाहिदा (अलग) होकर रोता है और कहता है : हाय मुसीबत ! इसे सज्दे का हुक्म हुआ, इसने सज्दा किया तो इसे जन्नत नसीब हुई और मुझे सज्दे का हुक्म हुआ और मेने नहीं किया तो मुझे दोज़ख मिली।

*✍🏼सहीह मुस्लिम*

     शैतान को जन्नत से इसलिये निकलना पड़ा क्योंकि अल्लाह के हुक्म के बावुजूद उसने सज्दा करने से इनकार कर दिया था। हमें भी अल्लाह ने नमाज़ पढ़ने यानी सजदारेज़ होने का हुक्म फ़रमाया है। कहीं ऐसा तो नहीं कि हम भी इसी सज्दे से गाफिल होने की वजह से जन्नत से महरूम कर दिये जाए।


     हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : अपने अहले खाना (घर वालो) को नमाज़ पढ़ने का हुक्म दो बेशक अल्लाह तुम्हें ऐसी जगह से रोज़ी देगा जिसके मुतअल्लिक़ तुम गुमान भी नहीं कर सकते।

*✍🏼इहयाउल उलूम*

     मालुम हुआ कि नमाज़ पढ़ने वालों को अल्लाह बेरोज़गार नहीं रहने देता, उन्हें ऐसी जगह से रोज़ी देता है जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता।

*✍🏼नमाज़ की अहमियत* 18

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

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*सूरतुल बक़रह, रुकुअ-28, आयत, ②②②*


بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

और तुमसे पूछते हैं हैज़ का हुक्म (1) तुम फ़रमाओ वह नापाकी है तो औरतों से अलग रहो हैज़ के दिनों और उनके क़रीब न जाओ जब तक पाक न हो लें फिर जब पाक हो जाएं तो जहां से तुम्हें अल्लाह ने हुक्म दिया बेशक अल्लाह पसन्द करता है बहुत तौबह करने वालों को और पसन्द रखता है सुथरों को.


*तफ़सीर*

(1) अरब के लोग यहूदियों और मजूसीयों यानी आग के पुजारियों की तरह माहवारी वाली औरतों से सख़्त नफ़रत करते थे. अरब खाना पीना, एक मकान में रहना गवारा न था, बल्कि सख़्ती यहाँ तक पहुँच गई थी कि उनकी तरफ़ देखना और उनसे बात चीत करना भी हराम समझते थे, और ईसाई इसके विपरीत माहवारी के दिनों में औरतों के साथ बड़ी महब्बत से मशग़ूल होते थे, और सहवास में बहुत आगे बढ़ जाते थे. मुसलमानों ने हुज़ूर से माहवारी का हुक्म पूछा. इस पर यह आयत उतरी और बहुत कम तथा बहुत ज़्यादा की राह छोड़ कर बीच की राह  अपनाने की  तालीम दी गई  और बता दिया गया कि  माहवारी के दिनों में  औरतों से  हमबिस्तरी 

करना मना है.

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

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क़यामत और उसकी निशानियां* #11

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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

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     *सुवाल* - इस मुश्किल घड़ी में हुजूर ﷺ अपने चाहने वालों की कैसे मदद फ़रमाएंगे ? 

     *जवाब* - इस बे कसी के वक्त में बे कसों के मददगार , हुजूर ﷺ काम आएंगे और अपने नियाज़ मन्दों और उम्मीदवारों की शफाअत फरमाएंगे। हुजूर ﷺ की शफ़ाअतें कई तरह की होंगी बहुत लोग तो आप की शफाअत से बे हिसाब दाखिले जन्नत होंगे और बहुत लोग जो दोज़ख के मुस्तहिक होंगे हुजूर ﷺ की शफाअत से दुखूले दोज़ख़ से बचेंगे और जो गुनाहगार मोमिन दोजख में पहुंच चुके होंगे वोह हुजूर ﷺ की शफाअत से दोज़ख से निकाले जाएंगे। अहले जन्नत भी आप ﷺ की शफाअत से फैज़ पाएंगे, इन के दरजात बुलन्द किये जाएंगे। बाकी और अम्बिया व मुर्सलीन व सहाबए किराम व शुहदा व उलमा व औलिया अपने मुतवस्सिलीन यानी वसीला ढूंडने वालों की शफाअत करेंगे। लोग उलमा को अपने तअल्लुकात याद दिलाएंगे, अगर किसी ने आलिम को दुन्या में वुजू के लिये पानी ला कर दिया होगा तो वोह भी याद दिला कर शफ़अत की दरख्वास्त करेगा और वोह उस की शफ़ाअत करेंगे। 

*✍️बुन्यादी अक़ाइद और मामुलाते अहले सुन्नत* 42

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*दिन व दुन्या की भलाइयों वाली दुआए* #01


بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

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*_दुआए मुस्तफा_*

     अल्लाह के प्यारे हबीबﷺ अक्सर ये दुआ भी माँगा करते थे :

يَا مُقَلِّبَ الْقُلُوْبِ ثَبِّتْ قَلْبِىْ عَلٰى دِيْنِكَ

*तर्जमा* - ऐ दिलो के फेरने वाले ! मेरे दिल को अपने दिन पर क़ाइम रख।

*✍🏼मिरआत, 1/109*


*_सोते वक़्त की दुआ_*

اَللّٰهُمَّ بِاسْمِكَ اَمُوْتُ وَاَحْيَا

*तर्जमा*  - ऐ अल्लाह ! में तेरे नाम के साथ ही मरता और जीत हु (यानी सोता और जागता हु)


*_नींद से बेदार होने के बाद की दुआ_*

اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذِىْ  اَحْيَانَا بَعٍدَمَآ اَمَاتَنَا وَاِلَيْهِ النُّشُوْرُ

*तर्जमा* - तमाम तारीफे अल्लाह के लिये जिस ने हमें मौत (नींद) के बाद हयात (बेदारी) अता फ़रमाई और हमे उसी की तरह लौटना है।

*✍🏽सहीह बुखारी, 4/193*

*✍🏽मदनी पंजसुरह, 203*

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Sunday, 20 January 2019

तज़किरतुल अम्बिया* #370

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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

*बनी इस्राईल को मिस्र से ले जाने का हुक्म*

     मूसा अलैहिस्सलाम को रब तआला ने हुक्म दिया कि बनी इसाइल को रात में मिस्र से निकाल कर ले जाओ यानी अब बनी इस्राईल की नजात और फिरऔन और उसकी कौम की तबाही का वक़्त आ चुका है। 

     रात को निकालने का हुक्म दिया ताकि बनी इस्राईल का इज्तेमा दुश्मन के सामने न हो और वह उनकी मुराद की तकमील में रोडा न बने रात को निकालने की दूसरी वजह यह भी थी कि फ़िरऔन और उसका एक लश्कर उनका पीछा करके उनको रोक न सके और फ़िरऔन के अजीम लश्कर को देखकर बनी इस्राईल खौफ न करें। चांदनी रात में मूसा अलैहिस्सलाम अपनी कौम को साथ लेकर चले बनी इस्राइल के पास काफी मिकदार में सोने और चांदी के जेवरात भी थे जो उन्होंने कुब्तियों से मांग कर लीये हुए थे कि हम इन्हें अपनी ईद में इस्तेमाल करेंगे वह पहले भी उनसे जेवरात लेते रहते थे।  

     यूसुफ अलैहिस्सलाम ने वसीयत फ़रमाई थी कि जब तुम मिस्र से निकलो तो मेरा ताबूत भी साथ लेकर जाना तो मूसा अलैहिस्सलाम ने आपकी वसीयत के मुताबिक एक बुढ़ी औरत की निशानदेही पर वह ताबूत निकाल कर खुद बनफ़्से नफिस उठाया। 

     

*सुबह होने पर फ़िरऔन और उसकी क़ौम की हलाकत की तरफ रवानगी* ये वाकिया अगली पोस्ट में ان شاء الله.

*✍️तज़किरतुल अम्बिया* 309

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

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_नमाज़ छोड़ने का वबाल अहादिष की रौशनी में_* #04

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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     हज़रत उबादा बिन सामित से मरवी है कि हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : पांच वक़्त की नमाज़ अल्लाह ने फ़र्ज़ फ़रमाई है, जिसने अच्छे ढंग से वुज़ू किया और नमाज़ों को उनके वक़्तों पर अदा किया और उनका हक़ हल्का समझकर बर्बाद नहीं किया तो अल्लाह फ़रमाता है "उनका मेरे जिम्मे ये वादा है कि ऐसे आदमी को बख्श दूंगा।

*✍🏼मुस्नदे अहमद*


     हुज़ूर ﷺ ने इर्शाद फ़रमाया : नमाज़ दरमियानी औक़ात (वक़्तों) के गुनाहों का कफ़्फ़ारा है जबकि कबीरा (बड़े) गुनाहों से ओरहेज़ किया जाए।

*✍🏼कन्जुल उम्माल*

*✍🏼नमाज़ की अहमियत* 17

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

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सूरतुल बक़रह, रुकुअ-27, आयत, ②②①


بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

और  शिर्क वाली  औरतों से निकाह न करो जब तक मुसलमान न हो जाएं (14) और बेशक मुसलमान लौंडी मुश्रिका औरत से अच्छी है (15) अगरचे वह तुम्हें भाती हो  और मुश्रिको के निकाह में न दो जब तक वो ईमान न लाएं (16) और बेशक मुसलमान ग़ुलाम मुश्रिकों से अच्छा है अगरचे वो तुम्हें भाता हो, वो दोज़ख़ की तरफ़ बुलाते हैं (17) और अल्लाह जन्नत और बख़्शिश की तरफ़ बुलाता है अपने हुक्म से और अपनी आयतें लोगों के लिये बयान करत है कि कहीं वो नसीहत मानें.


*तफ़सीर*

(14) हज़रत मरसद ग़नवी एक बहादुर सहाबी थे. हुज़ूर सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने उन्हें मक्कए मुकर्रमा रवाना किया ताकि वहाँ से तदबीर के साथ मुसलमानों को निकाल लाएं. वहाँ उनाक़ नामक एक मुश्रिक औरत थी जो जाहिलियत के ज़माने में इनसे महब्बत रखती थी. ख़ूबसूरत और मालदार थी. जब उसको इनके आने की ख़बर हुई तो वह आपके पास आई और मिलने की चाह ज़ाहिर की. आपने अल्लाह के डर से उससे नज़र फेर ली और फ़रमाया कि इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता. तब उसने निकाह की दरख़ास्त की. आपने फ़रमाया कि यह भी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की इजाज़त पर निर्भर है. अपने काम से छुट्टी पाकर जब आप सरकार की ख़िदमत में हाज़िर हुए तो हाल अर्ज़ करके निकाह के बारे में दर्याफ़्त किया. इस पर यह आयत उतरी. (तफ़सीरे अहमदी). कुछ उलमा ने फ़रमाया जो कोई नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के साथ कुफ़्र करे वह मुश्रिक है, चाहे अल्लाह को एक ही कहता हो और तौहीद का दावा रखता हो. (ख़ाज़िन)

(15) एक रोज़ हज़रत अब्दुल्लाह बिन रवाहा ने किसी ग़लती पर अपनी दासी के थप्पड़ मारा फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की ख़िदमत में हाज़िर होकर उसका ज़िक्र किया. सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने उसका हाल दर्याफ़्त किया. अर्ज़ किया कि वह अल्लाह तआला के एक होने और हुज़ूर के रसूल होने की गवाही देती है, रमज़ान के रोज़े रखती है, ख़ूब वुज़ू करती है और नमाज़ पढ़ती है. हुज़ूर ने फ़रमाया वह ईमान वाली है. आप ने अर्ज़ किया, तो उसकी क़सम जिसने आपको सच्चा नबी बनाकर भेजा, मैं उसको आज़ाद करके उसके साथ निकाह करूंगा और आपने ऐसा  ही किया. इस पर लोगों ने ताना किया कि तुमने एक काली दासी से निकाह किया इसके बावुजूद कि अमुक मुश्रिक आज़ाद औरत तुम्हारे लिये हाज़िर है. वह सुंदर भी है. मालदार भी है. इस पर नाज़िल हुआ “वला अमतुम मूमिनतुन”यानी मुसलमान दासी मुश्रिका औरत से अच्छी है. चाहे आज़ाद हो और हुस्न और माल की वजह से अच्छी मालूम होती हो.

(16) यह औरत के सरपस्तों को सम्बोधन है. मुसलमान औरत का निकाह मुश्रिक व काफ़िर के साथ अवैध व हराम है.

(17) तो उनसे परहेज़ ज़रूरी है और उनके साथ दोस्ती और रिश्तेदारी ना पसन्दीदा.

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*क़यामत और उसकी निशानियां* #10


بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

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     *सुवाल* - इस मुसीबत से लोगों को कैसे नजात मिलेगी ? 

     *जवाब* - इस हालत में तवील अर्सा गुज़रेगा। पचास हजार साल का तो वोह दिन होगा और इस हालत में आधा गुजर जाएगा। लोग सिफ़ारिशी तलाश करेंगे जो इस मुसीबत से नजात दिलाए और जल्द हिसाब शुरू हो। अम्बिया عليه السلام की बारगाह में हाज़िरी होगी लेकिन मक्सद पूरा न होगा। आखिर में हुजूरे पुरनूर, सय्यदे अम्बिया, रहमते आलम ﷺ के हुजूर में फरयाद लाएंगे और सिफारिश की दरख्वास्त करेंगे। हुजूर ﷺ फरमाएंगे मैं इस के लिये मौजूद हूं। येह फ़रमा कर हुजूर ﷺ बारगाहे इलाही  में सजदा करेंगे। अल्लाह तआला की तरफ से इरशाद होगा ऐ मुहम्मद सजदे से सर उठाइये बात कहिये सुनी जाएगी, शफाअत कीजिये कबूल की जाएगी। ' हुजूर ﷺ की येह शफाअत तो तमाम अहले महशर के लिये है जो शदीद डर और खौफ की वज्ह से फरयाद कर रहे होंगे और येह चाहते होंगे कि हिसाब फरमा कर इन के लिये हुक्म दे दिया जाए। अब हिसाब शुरू होगा। मीज़ाने अमल में आमाल तोले जाएंगे, आमाल नामे हाथों में होंगे। अपने ही हाथ, पाउं, बदन के आजा अपने खिलाफ गवाहियां देंगे। जमीन के जिस हिस्से पर कोई अम्ल किया था वोह भी गवाही देने को तय्यार होगा। अजीब परेशानी का वक्त होगा कोई यार न गमगुसार। न बेटा बाप के काम आ सकेगा न बाप बेटे के। आमाल की पुरसिश यानी पुछगछ है। जिंदगी भर का किया हुवा सामने है। न गुनाह से मुकर सकता है, न कहीं से नेकियाँ मिल सकती है।

*✍️बुन्यादी अक़ाइद और मामुलाते अहले सुन्नत* 41

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दुआ मांगने के मदनी फूल* #04

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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

     ★ येह दुआ करना, "खुदाया ! सब मुसलमानों के सब गुनाह बख्श दे।" जाइज़ नहीं कि इस में उन अहादीसे मुबारका की तक्ज़ीब (झुटलाना) होती है जिन में बाज़ मुसल्मान का दोजख में जाना वारीद हुवा। अलबत्ता यूं दुआ करना “सारी उम्मते मुहम्मद ﷺ की मग्फिरत (बख्रिाश) हो या सारे मुसलमानों की मग्फ़िरत हो जाइज़ है।

     ★ अपने लिये और अपने दोस्त अहबाब, अहलो माल और औलाद के लिये बद दुआ न करे, क्या मालूम कि कबूलिय्यत का वक्त हो और बद दुआ का असर ज़ाहिर होने पर नदामत हो।

     ★ जो चीज हासिल हो (यानी अपने पास मौजूद हो) उस की दुआ न करे मसलन मर्द यूं न कहे, "या अल्लाह मुझे मर्द कर दे कि इस्तिहजा (मजाक बनाना) है। अलबत्ता ऐसी दुआ जिस में शरीअत के हुक्म की तामील या आजिजी व बन्दगी का इज़हार या परवर्द गार और मदीने के ताजदार ﷺ से महब्बत या दीन या अहले दीन की तरफ रग्बत या कुफ़्रो काफिरीन से नफरत वगैरा के फवाइद निकलते हों वोह जाइज़ है अगर्चे इस अम्र का हुसूल यकीनी हो। जैसे दुरूद शरीफ़ पढ़ना, वसीले की, सिराते मुस्तक़ीम की अल्लाह व रसूल ﷺ के दुश्मनों पर गजब व लानत की दुआ करना।  

     ★ दुआ में तंगी न करे मसलन यूं न मांगे या अल्लाह तन्हा मुझ पर रहम फरमा या सिर्फ मुझे और मेरे फुल फुलां दोस्त को नेमत बख्श। बेहतर येह है कि सब मुसल्मानों को दुआ में शामिल करले इस्केक फायदा यह भी होगा कि अगर खुद उस नेक बात के हक़दार न भी हुवा तो अच्छे मुसलमानों के तुफैल पा लेगा।

     ★ हज़रते इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली رحمة الله عليه फरमाते है : मज़बूत अक़ीदे के साथ दुआ मांगे और क़बूलिय्यत का यक़ीन रखे।

*✍️मदनी पंजसुरह* 190

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

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*_हकीकी मुफ्लिस कौन_* #2



بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

    डर जाओ! लरज़ उठो! हकीकत में मुफ्लिस वोह है जो नमाज़, रोज़ा, हज, ज़कात व सदकात, सखावतों, फलाही कामों और बड़ी बड़ी नेकियों के बा वुजूद बरोजे कियामत खाली का खाली रह जाए ! 

    कभी गाली दे कर , कभी तोहमत लगा कर , बिला इजाज़ते शरई डांट डपट कर, बे इज्ज़ती कर के , ज़लील कर के, मारपीट कर , आरियतन ( या'नी आरिज़ी तौर पर ) ली हुई चीजें कस्दन न लौटा कर , कर्ज दबा कर और दिल दुखा कर जिन को दुन्या में नाराज कर दिया होगा वोह उस की सारी नेकियां ले जाएंगे और नेकियां खत्म हो जाने की सूरत में उन के गुनाहों का बोझ उस पर डाल कर वासिले जहन्नम कर दिया जाएगा । 

*इलाही ! वासिता देता हूं मैं मीठे मदीने का*

*बचा दुन्या की आफत से,बचा उक्बा की आफत से*

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله

*✍🏼 ग़रीब फाएदे में है   पेज 17*

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

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Saturday, 19 January 2019

तज़किरतुल अम्बिया* #369

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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

*मुख्तलिफ किस्म के अज़ाब* #05

     फिर अल्लाह तआला ने उन पर खून का अज़ाब नाजिल किया उनके तमाम कुंओं का पानी नहरों और चश्मों के पानी दरिगाए नील का पानी गर्ज कि हर पानी उनके लिये ताजा खुन बन गया, उन्होंने फिरऔन से इसकी शिकायत की तो कहने लगा कि मूसा अलैहिस्सलाम ने अपने जादू से तुम्हारी नजर बंदी की है उन्होंने कहा नजर बंदी कैसे हमारे बर्तनों में खून ही है पानी का नमो निशान ही नहीं तो उसने हुक्म दिया कि कुबती और बनी इस्राईल एक बर्तन से पानी लिया करें। लेकिन इसका भी उन्हें कोई फायदा न हुआ। बनी इस्रईल जब निकालते तो पानी ही निकलता लेकिन जब उसी बर्तन से कुब्ति निकालते तो खुन निकलता। यहां तक कि फ़िरऔनी औरतें प्यास से आजिज़ होकर बनी इस्राईल की औरतों के पास आई और उनसे पानी मांगा तो वह पानी उनके बर्तन में आते ही खून हो गया तो फिरऔनी औरतें कहने लगी कि तू पानी अपने मुंह में लेकर मेरे मुंह में डाल दे जब तक वह पानी बनी इस्राईली औरत के मुंह में रहा पानी था जब फ़िरऔनी औरत के मुंह में आया तो खून बन गया। 

     फिरऔन का शिद्दते प्यास की वजह से बुरा हाल था दरख्तों का रस चूस रहा था वह भी मुह में पहुंचते ही खून बन जाता। फिर इसी मुसीबत से तंग आकर मूसा अलैहिस्सलाम से दुआ की दरख्वास्त की और ईमान लाने का वादा किया।

     उन तमाम पर अज़ाब एक एक हफ्ता रहे जब भी कोई अज़ाब आता मुसा अलैहिस्सलाम से ईमान लाने का वादा करते की तुम दुआ करो कि अगर यह अज़ाब हम से उठा लिया जये तो हम ईमान ले आयेंगे अज़ाब जब उठा लिया जाता फिर वादा तोड़ देते एक महीना उनका आराम से गुज़र जता फिर दूसरे अज़ाब में मुब्तला हो जाते हर बार उन्होंने ईमान लाने का वादा किया लेकिन तोड़ दिया।


*बनी इस्राईल को मिस्र से ले जाने का हुक्म* अगली पोस्ट में ان شاء الله.

*✍️तज़किरतुल अम्बिया* 308

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

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_नमाज़ छोड़ने का वबाल अहादिष की रौशनी में_* #03

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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     हज़रत मुआज़ कहते है कि मेने रसुलल्लाह ﷺ से सवाल किया : या रसूलल्लाह ﷺ ! वो बात बताइये जो मुझे जन्नत में ले जाए और जहन्नम से बचाए ? फ़रमाया : अल्लाह की इबादत करो, उसके साथ किसी को शरीक न ठहराओ, नमाज़ क़ायम करो, ज़कात दो,रमज़ान के रोज़े रखो और बैतुल्लाह का हज करो।

*✍🏼सहीह मुस्लिम*

     मालुम हुआ कि जन्नत में दाखिल और जहन्नम से नजात के लिये नमाज़ की अदायगी ज़रूरी है।


     हज़रत अबू हुरैरा رضي الله عنه से मरवी है कि हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : जो शख्स अपने घर में तहारत (वुज़ू) करके फ़र्ज़ नमाज़ अदा करने के लिये मस्जिद जाता है तो एक क़दम पर एक गुनाह मिटता है और दूसरे पर एक दर्जा बुलन्द होता है।

*✍🏼मुस्लिम शरीफ*

*✍🏼नमाज़ की अहमियत* 16

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

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ot.in

सूरतुल बक़रह, रुकुअ-27, आयत, ②②ⓞ*

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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

दुनिया  और आख़िरत के काम (12) और तुमसे यतीमों के बारे में पूछते हैं(13) तुम फ़रमाओ उनका भला करना बेहतर है  और अगर अपना उनका ख़र्च मिला लो तो वो तुम्हारे भाई हैं  और ख़ुदा ख़ूब जानता है बिगड़ने वाले को संवारने वाले से  और अल्लाह चाहता तो तुम्हें मशक्कत (परिश्रम) में डालता बेशक अल्लाह ज़बरदस्त हिकमत वाला है.


*तफ़सीर*

(12) कि जितना तुम्हारी सांसरिक आवश्यकता के लिये काफ़ी हो, वह लेकर बाक़ी सब अपनी आख़िरत के नफ़े के लिये दान कर दो. (ख़ाज़िन)

(13) कि उनके माल को अपने माल से मिलाने का क्या हुक्म है. आयत “इन्नल लज़ीना याकुलूना अमवालल यतामा ज़ुलमन” यानी वो जो यतीमों का माल नाहक़ खाते हैं वो तो अपने पेट में निरी आग भरते हैं. (सूरए निसा, आयत दस) उतरने के बाद लोगों ने यतीमों के माल अलग कर दिये और उनका खाना पीना अलग कर दिया. इसमें ये सूरतें भी पेश आई कि जो खाना यतीम के लिये पकाया गया और उसमें से कुछ बच रहा वह ख़राब हो गया और किसी के काम न आया. इस में यतीमों का नुक़सान हुआ. ये सूरतें देखकर हज़रत अब्दुल्लाह बिन रवाहा ने हुज़ूर सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से अर्ज़ किया कि अगर यतीम के माल की हिफ़ाज़त की नज़र से उसका खाना उसके सरपरस्त अपने खाने के साथ मिलातें तो उसका क्या हुक्म है. इस पर आयत उतरी और यतीमों के फ़ायदे के लिये मिलाने की इजाज़त दी गई.

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

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*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

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क़यामत और उसकी निशानियां* #09

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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

     *सुवाल* - कियामत कब काइम होगी ? 

     *जवाब* - इस का इल्म तो खुदा को है और उस के बताने से हुजूर ﷺ को है। हमें इस कदर मालूम है कि जब येह सब अलामतें ज़ाहिर हो चुकेगी और रूए जमीन पर कोई खुदा का नाम लेने वाला बाकी न रहेगा तब हज़रते इसराफील  ब हुक्मे इलाही सूर फुकेंगे। उस की आवाज़ शुरू शुरू में तो बहुत नर्म होगी और आहिस्ता आहिस्ता बुलन्द होती चली जाएगी। लोग उस को सुनेंगे और बेहोश हो कर गिर पड़ेंगे और मर जाएंगे, ज़मीनो आस्मान और तमाम जहान फना हो जाएगा। फिर जब अल्लाह तआला चाहेगा हज़रते इसराफ़ील को ज़िन्दा करेगा और दोबरा सूर फुकने का हुक्म देगा। सूर फुकते ही फिर सब कुछ मौजूद हो जाएगा। मुर्दे कब्रों से उठेंगे। नमए आमाल उन के हाथों में दे कर महशर में लाए जाएंगे। वहां जज़ा और हिसाब के लिये मुन्तज़िर खड़े होंगे। आफ्ताब निहायत तेजी पर और सरों से बहुत करीब ब कदरे एक मील होगा। शिद्दते गर्मी से दिमाग खोलते होंगे, इस कसरत से पसीना निकलेगा कि सत्तर गज़ ज़मीन में जज़्ब हो जाएगा फिर जो पसीना जमीन न पी सकेगी वोह ऊपर चढ़ेग, किसी के टलों तक होगा, किसी के घुटनों तक, किसी के कमर, किसी के सीने, किसी के गले तक और काफिर के तो मुंह तक चढ़ कर मिस्ले लगाम के जकड़ जाएगा। हर शख्स हस्बे हाल व आमाल होगा, फिर पसीना भी निहायत बदबूदार होगा। 

*बुन्यादी अक़ाइद और मामुलाते अहले सुन्नत* 40

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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

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दुआ मांगने के मदनी फूल* #03

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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

     ★ किसी मुसल्मान को येह बद दुआ न दे कि "तू काफ़िर हो जाए कि बाज़ उलमा के नज़दीक (ऐसी दुआ गांगना) कुफ्र है और तहकीक येह है कि अगर कुफ्र को अच्छा या इस्लाम को बुरा जान कर कहे तो बेशक कुफ्र है वरना बड़ा गुनाह है कि मुसल्मान की बद ख़्वाहि (यानी बुरा चाहना) हराम है, खुसूसन येह बद ख़्वाही (कि फुलां का ईमान बरबाद हो जाए) तो सब बद ख्वाहियों से बदतर है।

     ★ किसी मुसल्मान पर लानत न करे और उसे मरदूद व मलऊन न कहे और जिस काफ़िर का कुफ्र पर मरना यकीनी नहीं उस पर भी नाम ले कर लानत न करे। 

     ★ किसी मुसल्मान को येह बद दुआ न दे कि “तुझ पर खुदा का ग़ज़ब नाज़िल हो और तू (भाड़ और) आग या दोजख में दाखिल हो।" कि हदीस शरीफ़ में इसकी मुमानअत वारिद है।

     ★ जो काफ़िर मरा उस के लिये दुआए मगफिरत हराम व कुफ्र है।

*✍️मदनी पंजसुरह* 190

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*_हकीकी मुफ्लिस कौन_* #1



بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

      दुन्यवी मालो जर की मोहताजी उखवी नेमतें पाने का सबब है बशर्ते कि सब्र का दामन हाथ से न छूटे। लिहाजा इस हालत से परेशान हों न तश्वीश में मुब्तला हों। तश्वीश नाक गुरबत तो आखिरत की गुरबत है और येही गुरबत दर हकीकत मुसीबत है। 

      जैसा कि हज़रते सय्यदुना अबू हुरैरा رضی اﷲ تعالٰی عنه से मरवी है कि पैकरे अन्वार , तमाम नबियों के सरदार, मदीने के ताजदार ﷺ ने सहाबए किराम عليهِم الرّضْوَان से इस्तिफ्सार फ़रमाया : क्या तुम जानते हो मुफ्लिस कौन है ? सहाबए किराम عليهِم الرّضْوَان ने अर्ज की : हम में मुफ्लिस ( या ' नी गरीब , मिस्कीन ) वोह है जिस के पास न दिरहम हों और न ही कोई माल।

     तो इर्शाद फरमाया : "मेरी उम्मत में मुफ्लिस वोह है। जो कियामत के दिन नमाज, रोजा और जकात ले कर आएगा लेकिन उस ने फुलां को गाली दी होगी, फुलां पर तोहमत लगाई होगी, फुलां का माल खाया होगा, फुलां का खून बहाया होगा और फुलां को मारा होगा। पस उस की नेकियों में से उन सब को उन का हिस्सा दे दिया जाएगा। अगर उस के ज़िम्मे आने वाले हुकूक के पूरा होने से पहले उस की नेकियां खत्म हो गई तो लोगों के गुनाह उस पर डाल दिये जाएंगे , फिर उसे जहन्नम में फेंक दिया जाएगा।

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله

*✍🏼 ग़रीब फाएदे में है   पेज 17*

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Friday, 18 January 2019

तज़किरतुल अम्बिया* #368

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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

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*मुख्तलिफ किस्म के अज़ाब* #04

     फिर अल्लाह ने उन पर मेढक भेजे और यह हाल हुआ कि आदमी बैठता था तो उसकी मजलिस में मेढक भर जाते थे बात करने के लिये मुंह खोलता तो मेढक कूद कर मुंह में दाखिल हो जाता। हांडियों में मेढक खाने में मेढक और चुल्हों में मेढक भर जाते थे आग बुझ जाती थीं मेढक ऊपर सवार हो जाते थे। इस मुसीबत से फ़िरऔनी रो पड़े और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम से अर्ज किया इस दफा हम पक्का वादा करते हैं कि तौबा करेंगे ईमान लायेंगे आप दुआ करें यह मुसीबत इम से टल जाये। हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने उनसे अहद व पैमान लेकर फिर दुआ फरमाई सात रोज यह अज़ाब भी उन पर रहा आखिर मूसा अलैहिरसलाम की दुआ से यह भी दूर हुआ एक महीना उनका फिर अमन व आफ़ियत में गुज़र गया लेकिन उन्होंने फिर वादा तोड़ दिया और अपने कुफ़ पर बरकरार रहे।


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*✍️तज़किरतुल अम्बिया* 308

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*_नमाज़ की फ़ज़ीलत अहादिष की रौशनी में_* #02


بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र कहते है कि एक रोज़ नबीए करीम ﷺ ने नमाज़ का ज़िक्र किया और फ़रमाया : जिसने नमाज़ की पाबन्दी की तो नमाज़ उसके लिये क़यामत के दिन रौशनी, हुज्जत और नजात का सबब बनेगी।

*✍🏼मुसन्दे अहमद बिन हम्बल*

 

     हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद फ़रमाते है कि मेने महबूबे खुदा ﷺ से दरयाफ़्त किया या रसूलल्लाह ﷺ ! अल्लाह को बन्दों का कौन सा अमल सबसे ज़्यादा पसन्द है ? फ़रमाया वक़्त पर नमाज़ पढ़ना।

*✍🏼सहीह बुखारी*

*✍🏼नमाज़ की अहमियत* 16

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