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Tuesday, 19 July 2016

नमाज़ के अहकाम

*नमाज़े जनाज़ा का तरीक़ा*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_जनाज़े को कन्धा देने का तरीक़ा_*
     जनाज़े को कन्धा देना इबादत है। सुन्नत ये है कि एक के बाद दूसरा ऐसे चारो पायो को कन्धा दे और हर बार *10-10 क़दम* चले। पूरी सुन्नत ये है कि पहले सीधे सिरहाने कन्धा दे फिर सीधे पाउ की तरफ, फिर उलटे सिरहाने फिर उलटे पाउ और *10-10 क़दम* चले तो कुल 40 क़दम हुए।
*✍🏽आलमगिरी 1/162*
*✍🏽बहारे शरीअत 1/822*
     बाज़ लोग जनाज़े के जुलुस में ऐलान करते रहते है, *~दो दो क़दम चलो !~* उनको चाहिये की इस तरह ऐलान करे *10-10 क़दम चलो*

*_बच्चे का जनाज़ा उठाने का तरीक़ा_*
     छोटे बच्चे के जनाज़े को अगर एक शख्स हाथ पर उठा कर ले चले तो हरज नही और एक बे बाद दूसरा हाथ पर लेते रहे।
*✍🏽आलमगिरी 1/162*
     औरतो को जनाज़े के साथ जाना ना जाइज़ व ममनुअ है।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम 278*

*अलहम्दु लिल्लाह, मुकम्मल*
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तफ़सीरे अशरफी


हिस्सा-42
*सूरए बक़रह, पारह-01*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*आयत ④ⓞ_तर्जुमह*
अय औलादे यअक़ूब ! याद करो मेरी नेअमत को, जो इनआम फ़रमाया था मेने तुम पर, और पूरा करो मेरा अहद, के में पूरा कर दू तुम्हारा अहद, और बस मुझ ही से डरा करो।

*तफ़सीर*
     अय औलादे यअक़ूब ! (यहूदियो !) मेरा एहसान मानो और याद करो मेरी दी हुई नेअमत को, जो सिर्फ अपने करम से इनआम फ़रमाया था मेने तुम यहूदियो पर। अब भी अगर तुम अपना गद्दारिका रवैय्या बदल दो और पूरा मेरा अहद, जो मेने मज़बूती के साथ तुमसे लिया था, तो याद रखो के में भी पूरा कर दू तुम्हारा अहद, जो मेने तुमसे वादा फ़रमाया था।
     और तुम्हारी सारी बेवफाई की बुन्याद इस पर है के मुझसे निडर हो चुके हो। अगर वफादार बनना मन्ज़ूर हो, तो बस मुज ही से डरा करो। फिर तुम्हे किसी का डर न रह जाएगा।
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फुतूह अल ग़ैब

औलियाअ अल्लाह कौन हैं?  cont…
 (फुतूहल गैब)

*بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ*

      याद रख्खो के खैर-व-शर अल्लाह ही के कबज़ए कुदरतमें हैं और इस पर यकीने कामिल तुम्हें कज़ा-व-कद्रके खोफसे बेनियाज़ कर देगा। बरकाते खैर तुम्हारे लिये बहोत ज़ियादा हो जाएंगी। फिर तुम हर खैरका सरचश्मा हर इबतिहाज व मुसर्रतका मुन्बाअ (पानीके निकलनेकी जगा-चश्मा), तमाम अमूरका मरकज़-व-मेहवर और अमन-व-आरामकी हर कैफियतके हामिल बन जाओगे।
   हक्के तमाम तालिब इसी फना के ख्वाहिशमन्द होते हैं और यही वो मकान है जहां औलिया-अल्लाह को मंज़िल मिलती है। अपने इरादोंकी शिकस्त-व-रिख्त (बिखरा हुआ) के बाद खुदा के इरादेमें महवं (मिटा हुआ) हो जाना तो दमे मर्ग तमाम औलियाए अल्लाह-व-अब्दाल का मत्मह (नज़र पडनेकी जगा) रहा है। इसी लिये इन्हें अब्दाल कहा जाता है। वो हक के इरादे में अपने इरादे को शरीक करना गुनाहे अज़ीम समज़ते हैं। अलबत्ता हालते जज़ब में या गल्बए हालमें या भूलकर उनसे कोइ ऐसा फैल सरज़द हो जाए तो खुदवन्दे तआला उन्हें खबरदार कर देता है और वो तौब-इस्तिगफारमें मश्गुल हो जाते है।
      औलिया अल्लाह अज़म और इरादे के एतेबार से मासूम तो नहीं होते,  ख्वाहिशे नफससे आज़ाद और मेहफूज़ तो महेज़ अंबियाए किराम और मलाएका (अलयहिस्सलाम) होते है। दिगर जिन्न-व-इन्स पर शरीयतकी पाबन्दी ज़ूरूरी है और इनमें से कोइ मासूम नहीं। औलियाए किराम और अब्दाले उज़्ज़ाम इरादा और ख्वाहिशे नफ्स से मेहफूज़ तो यकीनन होते है। मगर किसी वक़्त इस पर माइल हो जाना भी इनके लिये ऐन मुमकिन है। ये है के खुदावन्दे करीम अपनी रेहमत के बाइस बेदारी के आलममें उनकी लगज़िश पर मतलअ (आगाह) कर देता है और वो बरवक़्त इसकी तलाफी कर लेते हैं।

*✍🏽फुतूहल ग़ैब*  पेज 12,13
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मदनी पंजसुरह

*सूरए यासीन शरीफ के फ़ज़ाइल*
हिस्सा-05
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

हज़रते अबू क़लाबाرضي الله تعالي عنه से रिवायत है, जिसने सूरए यासीन की तिलावत की उस की मग्फिरत हो जाएगी,
और जिस ने खाने के वक़्त उसके कम होने की हालत में तिलावत की तो वो उसे किफायत करेगा,
और जिसने किसी मरने वाले के पास इसकी तिलावत की अल्लाह उस पर मौत के वक़्त नरमी फ़रमाएगा,
और जिसने किसी औरत के पास उसके बच्चे की विलादत की तंगी पर सूरए यासीन की तिलावत की उस पर आसानी होगी,
और जिसने इसकी तिलावत की गोया की उसने 11 मर्तबा क़ुरआने पाक की तिलावत की,
और हर चीज़ के लिये दिल है, और क़ुरआन का दिल सूरए यासीन है।
*✍🏽दुर्रेमन्सूर 39*
*✍🏽मदनी पंजसुरह 23*
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Monday, 18 July 2016

बुग्ज़ व किना

*खुलासए किताब*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

✳किना मोहलिक बातिन मर्ज़ है और इस के बारे में जानना फ़र्ज़ है।
✳किना ये है की इन्सान अपने दिल में किसी को बोझ जाने, उससे दुश्मनी व बुग्ज़ रखे, नफरत करे और केफिय्यत हमेशा रहे।
✳किसी मुसलमान से बिला वजहे शरई किना रखना हराम है।
✳किसी ज़ालिम से किना रखना जाइज़ जब की बद मजहब व काफ़िर से किना रखना वाजिब है।

*किना रखने वाले को इन नुक्सानात का सामना होगा*
     दोज़ख में दाखिला, बख्शीश से महरूमी, शबे क़द्र में भी महरूम रहता है, जन्नत की खुशबु भी न पाएगा, ईमान बर्बाद होने का खतरा है, दुआ क़बूल नही होती, दीगर गुनाहो का दरवाज़ा खुल जाता है, उसे सुकून नसीब नही होता, सहाबए किराम, सादाते उज़्ज़ाम, उल्माए किराम से बुग्ज़ व किना रखना ज़्यादा बुरा है।

*किने का इलाज*
✅ईमान वालो के किने से बचने की दुआ कीजिये।
✅किने के अस्बाब (गुस्सा, बाद गुमानी, शराब नोशी, जुआ वगैरा) दूर कीजिये।
✅सलाम व मूसाफहा की आदत बना लीजिये।
✅बे जा सोचना छोड़ दीजिये।
✅मुसलमानो से अल्लाह की रिज़ा के लिये महब्बत कीजिये।
✅दुनयावी चीज़ों की सजह से बुग्ज़ व किना रखने के नुक्सानात पर गौर कीजिये।
*✍🏽बुग्ज़ व किना 78*
*📝मुकम्मल*
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सिरते मुस्तफाﷺ


*जंगे उहुद*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_कुबुरे शुहदा की ज़ियारत_*
     हुज़ूरﷺ शोहदाए उहुद की क़ब्रो की ज़ियारतके लिये तशरीफ़ ले जाते थे और आल के बाद हज़रते अबू बक्र व हज़रते उमरرضي الله تعالي عنهم का भीये अमल रहा।
     एक मर्तबा हुज़ूरﷺ शोहदाए उहुद की क़ब्रो पर तशरीफ़ ले गए तो इरशाद फ़रमाया कि या अल्लाह ! तेरा रसूल गवाह है कि इस जमाअत ने तेरी रिज़ा की तलब में जान दी है, फिर ये भी इरशाद फ़रमाया कि क़यामत तक जो मुसलमान भी इन शहीदों की क़ब्रो पर ज़ियारत के लिये आएगा और इनको सलाम करेगा तो ये शुहदाए किराम उसके सलाम का जवाब देंगे।
     चुनांचे हज़रते फातिमाرضي الله تعالي عنها का बयान है कि में एक दिन उहुद के मैदान से गुज़र रही थी। हज़रते हम्ज़ाرضي الله تعالي عنه की क़ब्र के पास पहुच कर में ने अर्ज़ किया कि ऐ रसूलल्लाहﷺ के चचा ! आप पर सलाम हो, तो मेरे कान में ये आवाज़ आई कि वालेकुम सलाम व-रहमतुल्लाहि व-बरकातुहु।

*_हयाते शुहदा_*
     46 बरस के बाद शुहदाए उहुद की बाज़ क़ब्रे खुल गई तो उनके कफ़न सलामत और बदन तरो ताज़ा थे और तमाम अहले मदीना और दूसरे लोगो ने देखा कि शुहदाए किरामرضي الله تعالي عنهم अपने ज़ख्मो पर हाथ रखे हुए है और जब ज़ख्म से हाथ उठाया तो ताजा खून निकल कर बहने लगा।
*✍🏽सिरते मुस्तफा 237*
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नमाज़ के अहकाम

*नमाज़े जनाज़ा का तरीका*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_जनाज़े की पूरी जमाअत न मिले तो ?_*
     मस्बुक़ (यानी जिसकी बाज़ तकबीर फौत हो गई वो) अपनि बाक़ी तकबिरे इमाम के सलाम फेरने के बाद कहे और अगर ये अंदेशा हो कि दुआ वगैरा पढ़ेगा तो पूरी करने से क़ब्ल लोग जनाज़े को कंधे तक उठा लेंगे तो सिर्फ तकबिरे कहले दुआ वगैरा छोड़ दे।
     चौथी तकबीर के बाद जो शख्स आया तो जब तक इमाम ने सलाम नही फेरा, शामिल हो जाए क्र इमाम के सलाम के बाद 3 बार "अल्लाहु अकबर" कहे। फिर सलाम फेर दे।
*✍🏽दुर्रेमुखतार 3/136*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम 276*
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तफ़सीरे अशरफी


हिस्सा-41
*सूरए बक़रह_पारह 01*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*आयत ③⑨_तर्जुमह*
और जिन्होंने इन्कार कर दिया और झुटलाया हमारी आयते, वो जहन्नमवाले है, वही उसमे हमेशा रहनेवाले है।

*तफ़सीर*
और जिन्होंने इन्कार कर दिया और झुटलाया हमारी आयते, अहकाम व क़ुतुब, सहिफो, अम्बिया और रसूलो, उनके मोअज़ीज़ो को न माना, तो वो काफिर है, और जितने काफ़िर है, वो जहन्नम वाले है और सिर्फ चन्द रोज़ नही बल्कि उसमे हमेशा रहने वाले है। उनकी नजात ही न हो सकेगी।
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मदनी पंजसुरह

*सूरए यासीन शरीफ के फ़ज़ाइल*
हिस्सा-04
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

हज़रते इब्ने अब्बासرضي الله تعالي عنه फरमाते है : जो शख्स ब वक़्ते सुब्ह सूरए यासीन की तिलावत करे उस दिन की आसानी उसे शाम तक अता की गई, और जिस ने रात की इब्तिदा में इस की तिलावत की उसे सुब्ह तक उस रात की आसानी दी गई।

हज़रते माकिल बिन यसारرضي الله تعالي عنه से रिवायत ही कि बेशक हुज़ूरﷺ ने फ़रमाया : सूरए यासीन क़ुरआन का दिल है, जो शख्स इस सूरए मुबारक की अल्लाह और आख़िरत के लिये तिलावत करेगा, उसके पहले के गुनाह बख्श दिये जाएंगे, तो तुम इसकी तिलावत अपने मरने वालो के पास करो।

हज़रते अबू दरदाرضي الله تعالي عنه से रिवायत है कि हुज़ूरﷺ ने फ़रमाया : जिस मरने वाले के पास सूरए यासीन तिलावत की जाती है, अल्लाह उस पर (उसकी रूह क़ब्ज़ करने में) नरमी फ़रमाता है।
*✍🏽दुर्रेमन्सूर 38*
*✍🏽मदनी पंजसुरह 23*
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फुतूह अल ग़ैब

*औलियाअ अल्लाह कौन हैं?*  cont…
 (फुतूहल गैब)

*بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ*

     कल्बकी इन्कसारी के इन मराहिलका इख्तेताम (खातमा) ये होगा के तौहीद दिल व दिमागमें रासिख (मजबूत) हो जाएगी और तुम्हें दीदारे खुदावन्दी नसीब होगा। ‌‌‌अना इनहल मनकसर तुल कुलूबहुम. ( यानी मैं शिकस्ता दिलोंके बहोत करीब हूं) का यही मतलब है और हमारे कौल इन्द वजूदक फीहाका मतलब इरदाए नौ में तुम्हारा इत्मिनाने कल्ब है।
     हदीसे कुदसीमें है के मेरा मोमिन बन्दा इबादत व ज़िक्र के बाइस मेरे कुर्बका तमन्नाइ होता है। हत्ताके मैं उसे मेहबूब बना लेता हूं और जब ये कैफियत हो जाए तो मैं उसके कान बन जाता हूं जिससे वो सुनता है, उसकी आंखे हो जाता हूं जिससे वो देखता है, उसकी ज़बान और हाथ और पांव बन जाता हूं जिससे वो बोलता, पकडता और चलता है।
    पस फनाकी हालत ये है के मख्लूक अच्छी हो या बूरी,  तुम खुद नेक हो या बद – अपने आपसे और मखलूकसे लाताल्लुक हो जाओ फिर जब तुम न किसीसे तवक्कोआत (तवक्कोकी जमा) वाबस्ता करो, न किसीसे डरो और न अपनी फितरी सफात की हिफाज़तमें कोइ खिलाफे शरअ बात कुबूल न करो। तो तुम्हारे नफ्स में अल्लाह ही अल्लाह बाकी होगा। जिस तरह तुम्हारी पैदाइशसे कब्ल (पेहले) था।

बाक़ी कल की पोस्ट में... इंसा अल्लाह

*✍🏽फुतूहल ग़ैब*  पेज 12
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Sunday, 17 July 2016

बुग्ज़ व किना

*क्या मेरे महबुबो से महब्बत और मेरे दुश्मनो से अदावत भी रखी?*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     हुज़ूरﷺ ने फ़रमाया : क़यामत के दिन एक ऐसे शख्स को लाया जाएगा जो खुद को नेक समझता होगा और उसे ये गुमान होगा कि मेरे नामए आमाल में कोई गुनाह नही है।
     उससे पूछा जाएगा : क्या तूने मेरे दोस्तों से दोस्ती रखता था ? वो अर्ज़ करेगा : ऐ मेरे परवर दगार तू तो लोगो से सालिम व महफूज़ (यानी बे नियाज़) है।
     फिर रब्बे अज़ीम फ़रमाएगा : क्या तू मेरे दुश्मनो से अदावत रखता था ? तो वो अर्ज़ करेगा : ऐ मेरे मालिको मुख्तार में ये पसन्द नही करता था की मेरे और किसी के दरमियान कुछ हो,
     तो अल्लाह फ़रमाएगा : वो मेरी रहमत को नही पा सकेगा जिसने मेरे दोस्तों के साथ दोस्ती और मेरे दुश्मनो के साथ अदावत न रखी।
*✍🏽अल-मअजुम अल-कबीर 22/95*
*✍🏽बुग्ज़ व किना 73*
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नमाज़ के अहकाम

*नमाज़े जनाज़ा का तरीका*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_जूते पर खड़े हो कर जनाज़ा पढ़ना_*
     जूता पहन कर अगर नमाज़े जनाज़ा पढ़े तो जूते और ज़मीन दोनों का पाक होना ज़रूरी है और जूता उतार कर उस पर खड़े हो कर पढ़े तो जूते के तले और जमीन का पाक होना ज़रूरी है।
     आला हज़रत अलैरहमा एक सुवाल के जवाब में इरशाद फ़रमाता है : अगर वो जगह पेशाब वगैर से नापाक थी या जिन के जूतो के तले नापाक थे और इस हालत में जूता पहने हुए नमाज़ पढ़ी उन की नमाज़ न हुई, एहतियात यही है कि जूता उतार कर उस पर पाउ रख कर नमाज़ पढ़ी जाए कि ज़मीन या तला अगर नापाक हो तो नमाज़ में खलल न आए।
*✍🏽फतावा रज़विय्या 9/188*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम 275*
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सिरते मुस्तफाﷺ


*जंगे उहुद*
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*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_शुहदए किराम_*
     इस जंग में 70 सहाबए किरामرضي الله تعالي عنهم ने जामे शहादत नोश फ़रमाया जिन में 4 मुहाजिर और 66 अंसार थे। 30 की तादाद में कुफ्फार भी निहायत ज़िल्लत के साथ क़त्ल हुए।
     मगर मुसलमानो की मुफलिसी का ये आलम था की इस शुहदाए किराम के कफ़न के लिये कपड़ा बजी नही था। हज़रते मूसअब बिन उमैर का ये हाल था कि ब वक़्ते शहादत उनके बदन पर सिर्फ एक इतनी बड़ी कमली थी की उन की लाश को क़ब्र में लिटाने के बाद अगर उनका सर ढ़ापा जाता था तो पाउ खुल जाते थे और अगर पाउ को छुपाया जाता था तो सर खुल जाता था बिल आखिर सर छुपा दिया गया और पाउ पर घास डाल दी गई।
     शुहदाए किराम खून में लिथड़े हुए दो दो शहीद एक एक क़ब्र में दफ़्न किये गए। जिस को क़ुरआन ज़्यादा याद होता उसको आगे रखते।
*✍🏽सिरते मुस्तफा 282*
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तफ़सीरे अशरफी


हिस्सा-40
*सूरए बक़रह_पारह 01*
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*आयत ③⑧_तर्जुमह*
हमने हुक्म दिया के निचे उतर जाओ इस जन्नत से सबके सब। फिर अगर आए तुम्हे मेरी तरफसे कोई हिदायत, तो जिसने पैरवी की मेरी हिदायत की, तो न कोई खौफ है उस पर, और न वो रंजीदा हो।

*तफ़सीर*
उतारने के मौके पर हमने यु हुक्म दिया था के निचे ज़मीन पर उतर जाओ इस जन्नत की बुलंदी से। सिर्फ हज़रते आदम व बीबी हव्वा ही नही, बल्कि उनके दुश्मन भी सबके सब। फिर याद रखो ! हम कानूने हिदायत बराबर भेजते रहेंगे। लेहाज़ा अगर आये तुम्हे मेरी तरफसे कोई हिदायत, जो मेरे अम्बिया लाते रहेंगे। तो याद रखो ! के जिसने पैरवी की गुलाम बन कर नबी के पीछे रहा, और अमल करता रहा, तो न कोई आइन्दा के लिये खौफ हे, उस को किसी खतरे का अंदेशा ही नही। और न वो किसी गुज़िश्ता बात पर रंजीदा हो। उनकी दुन्या भी भली और आख़ेरत बजी भली है।
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फुतूह अल ग़ैब

औलियाअ अल्लाह कौन हैं?  cont…
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*بِسْــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ*

    दस्ते कुदरत तुम्हरा मुआविन होगा। ज़ुबाने अज़ल तुम्हें निदा देगी। तुम्हरा परवरदिगार तुम्हें इल्म सिखाएगा। तुम्हे अश्याकी माहियतसे रूशनास कराके लिबासे माअरिफतसे नवाज़ा जाएगा। और यूं तुम्हें सलफे सालेहीन और आरेफीने कामीलके मुकाम तक रसाइ होगी। फिर तुम्हारे दिलमें ख्वाहिशें और इरादे न ठहरेंगे। जिस तरह शिकस्ता बरतनमें पानी वगैरह नहिं ठहेरता। फिर तुम बशरियतकी कशाफतसे पाक हो जाओगे और दिलमें खुदाके इरादे के बगैर कोइ शैअ नहिं आएगी। ये वो मुकाम है जिसमें करामत व तसरफातकी नेअमतसे नवाज़ा जाता है। बजाहिर लोग ये खर्क आदात तुममें पाएंगे मगर हकीकतन ये खुदा तआलाके एहकाम व अफआल होंगे। यूं तुम उन
औलिया-अल्लाह की सफमें शामिल हो जाओगे। जिनमें ख्वाहिशाते नफ्शानी और इरादा ए बसरी अन्का हो जाते है। (नायाब चीज) और अज़सरे नौव उनमें इरादाए खुदावन्दी पैदा किया जाता है।
   जैसा के सरकारे दो आलम ﷺ ने फरमाया, तीन चीज़ें मेरे लिये पसंद की गई है। खूश्बू, औरत और नमाज़में आंखोंकी ठंडक। ख्वाहिशातसे मावरा (इसके अलावा) होनेके बाद ये चीज़ें हुज़ूरसे मनसूब की गई।
*अल्लाह करीमने फरमाया: मैं उनके पास हुं जिनके दिल मेरी वजहसे ख्वाहिशातके गुलाम नहीं है।* चुनान्चे तुम्हारी ख्वाहिशात और इरादे रज़ाए इलाहीके हुसूलकी तमन्नामें दम तोड दें तो तुम्हें खुदाका कुर्ब नसीब न होगा। लेकिन अपने इरदोंको उसके इरादोंमें फना कर देने के बाद वो तुम्हें नइ बातिनी खुसूसियात के साथ अज़ सरे नौव तखलीक करेगा और तुज़में नये इरादे पैदा करेग। अगर इन नये इरादोंमें भी नफ्सका थोडा बहोत दखल पाया गया तो फिर उसे तोडकर नये इरादे पैदा किये जाएंगे।

बाक़ी कल की पोस्ट में... इंसा अल्लाह
                                                                                                                                                                  ✍🏽फुतूहल ग़ैब  पेज 11,12
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मदनी पंजसुरह

*सूरए यासीन शरीफ के फ़ज़ाइल*
हिस्सा-03
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

हज़रते इब्ने अब्बासرضي الله تعالي عنه से रिवायत है कि नबीﷺ ने फ़रमाया : मेरी ख्वाहिश है कि सूरए यासीन मेरी उम्मत के हर इन्सान के दिल में हो।

हज़रते अनसرضي الله تعالي عنه से रिवायत है कि हुज़ूरﷺ ने फ़रमाया : जो शख्स हमेशा हर रात यासीन की तिलावत करता रहा फिर मर गया तो वो शहीद मरेगा।

हज़रते अता बिन अबू रबाह ताबेइرضي الله تعالي عنه से रिवायत है की नबीﷺ ने इरशाद फ़रमाया : जो शख्स दिन की इब्तिदा में सूरए यासीन की तिलावत करेगा, उसकी तमाम हाजत पूरी कर दी जाएगी।
*✍🏽दुर्रेमन्सूर 38*
*✍🏽मदनी पंजुसरह 22*
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Saturday, 16 July 2016

सिरते मुस्तफाﷺ


*जंगे उहुद*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*_एक अन्सारी औरत का सब्र_*
     एक अंसारी औरत जिस का शोहर, बाप, भाई सभी इस जंग में शहीद हो चुके थे तीनो की शहादत की खबर बारी बारी से लोगो ने उसे दी मगर वो हर बार यही पूछती रही "ये बताओ रसूलल्लाहﷺ कैसे है ?"
     जब लोगो ने उस को बताया कि अलहम्दु लिल्लाह वो ज़िन्दा है और सलामत है तो बे इख़्तियार उस की ज़बान से इस शेर का मज़मून निकल पड़ा कि...
*_तसल्ली है पनाहे बे कसा ज़िन्दा सलामत है_*
*_कोई परवा नही सारा जहां ज़िन्दा सलामत है_*

     अल्लाहु अकबर ! इस शेर दिल औरत का सब्र व इषार का क्या कहना ? शोहर, बाप, भाई तीनो के क़त्ल से दिल पर सदमात के तिन तिन पहाड़ गिर पड़े है मगर फिर भी ज़बाने हाल से उस का एहि नारा है...
*_में भी और बाप भी, शोहर भी, बरादर भी फ़िदा_*
*_ऐ शहे दीं ! तेरे होते हुए क्या चीज़ है हम_*
*✍🏽सिरते मुस्तफा 282*
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नमाज़ के अहकाम

*नमाज़े जनाज़ा का तरीका*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     मुक्तदि इस तरह निय्यत करे : में निय्यत करता हु इस जनाज़े की नमाज़ की वासिते अल्लाह के, दुआ इस मय्यित के लिये, पीछे इस इमाम के,
     अब इमाम व मुक़्तदि पहले कानो तक हाथ उठाए और "अल्लाहु अकबर" कहते हुए फौरन हस्बे मामूल नाफ के निचे बांध ले और सना पढ़े। इसमें وَتَعَالٰى جَدُّكَ के बाद
 وَجَلَّ ثَنَآءُكَ وَلَااِلٰهَ غَيْرُك पढ़े,
     फिर बगैर हाथ उठाए " अल्लाहु अकबर" कहे और "दुरुद इब्राहिम" पढ़े,
     फिर बगैर हाथ उठाए " अल्लाहु अकबर" कहे दुआ पढ़े
     दुआ के बाद फिर "अल्लाहु अकबर" कहे और हाथ लटका दे फिर दोनों तरफ सलाम फेर दे।
     सलाम में मय्यित और फरिश्तों और हाज़िरीने नमाज़ की निय्यत करे, उसी तरह जेसे और नमाज़ों के सलाम में निय्यत की जाती है,
     यानी इतनी बाद ज्यादा है कि मय्यित की भी निय्यत करे।
*✍🏽बहारे शरीअत 1/829*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम 273*
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तफ़सीरे अशरफी


हिस्सा-40
*सूरए बक़रह_पारह 01*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*आयत ③⑧_तर्जुमह*
हमने हुक्म दिया के निचे उतर जाओ इस जन्नत से सबके सब। फिर अगर आए तुम्हे मेरी तरफसे कोई हिदायत, तो जिसने पैरवी की मेरी हिदायत की, तो न कोई खौफ है उस पर, और न वो रंजीदा हो।

*तफ़सीर*
उतारने के मौके पर हमने यु हुक्म दिया था के निचे ज़मीन पर उतर जाओ इस जन्नत की बुलंदी से। सिर्फ हज़रते आदम व बीबी हव्वा ही नही, बल्कि उनके दुश्मन भी सबके सब। फिर याद रखो ! हम कानूने हिदायत बराबर भेजते रहेंगे। लेहाज़ा अगर आये तुम्हे मेरी तरफसे कोई हिदायत, जो मेरे अम्बिया लाते रहेंगे। तो याद रखो ! के जिसने पैरवी की गुलाम बन कर नबी के पीछे रहा, और अमल करता रहा, तो न कोई आइन्दा के लिये खौफ हे, उस को किसी खतरे का अंदेशा ही नही। और न वो किसी गुज़िश्ता बात पर रंजीदा हो। उनकी दुन्या भी भली और आख़ेरत बजी भली है।
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मदनी पंजसुरह

*सूरए यासीन शरीफ के फ़ज़ाइल*
हिस्सा-02
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

हज़रते हस्सान बिन अतिय्याرضي الله تعالي عنه से रिवायत है की, हुज़ूरﷺ ने फ़रमाया : तौरात में सूरए यासीन का नाम "मुहम्मद" है, क्यू की ये अपनी तिलावत करने वाले को दुन्या और आख़िरत की हर भलाई आता करती है,
और दुन्या व आख़िरत की बलाए इससे दूर करती है,
और दुन्या व आख़िरत की होलनाकियो से नजात बख्शती है।

और इसका नाम "मुदाफि-अतुल-क़ादियाह" भी है, क्यू कि ये अपनी तिलावत करने वाले से हर बुराई को दूर कर देती है और इस की हर हाजत पूरी करती है,

जिस शख्स ने इसकी तिलावत की ये उसके लिये 20 हज के बराबर है,

और जिसने इसको लिखा फिर इसे पिया तो उसके पेट में हज़ार दवाए, हज़ार नूर, हज़ार यक़ीन, हज़ार बरकतें और हज़ार रहमते दाखिल होगी और इस से हर धोका और हर बिमारी दूर हो जाएगी।
*✍🏽दुर्रेमन्सूर 7/37*
*✍🏽मदनी पंजसुरह 21*
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