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Sunday, 14 May 2017

*15 लाइन अरबी क़ुरआन* इस लिन्क पे जाके लोड कीजिये।

https://drive.google.com/file/d/0BxNzOp0x1IN_eHFvcmFXT29yc1U/view?usp=drivesdk

दुआए खैर तालिब
جزاك الله خيرا

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
*___________________________________*
मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
*___________________________________*
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*गुस्ल का तरीका*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     बिगैर ज़बान हिलाए दिल में इस तरह निय्यत कीजिये की में पाकी हासिल करने के लिये गुस्ल करता हु।
◆ पहले दोनों हाथ पहुचो तक 3-3 बार धोइए
◆ फिर इस्तिन्जे की जगह धोइए ख़्वाह नजासत हो या न हो
◆ फिर जिस्म पर अगर कही नजासत हो तो उसको दूर कीजिये
◆ फिर नमाज़ का सा वुज़ू कीजिये मगर पाउ न धोइये, हा अगर चौकी वग़ैरा पर गुस्ल कर रहे है तो पाउ धो लीजिये
◆ फिर बदन पर तेल की तरह पानी चुपड़ लीजिये, खुसुसन सर्दियो में (इस दौरान साबू भी लगा सकते है)
◆ फिर 3 बार सीधे कंधे पर पानी बहाइये, फिर 3 बार उलटे कंधे पर
फिर सर पर और तमाम बदन पर 3 बार
◆ फिर गुस्ल की जगह से अलग हो जाइये
◆ अगर वुज़ू करने में पाउ नहीं धोए थे तो अब धो लीजिये
● नहाने में क़िबला रुख न हो, तमाम बदन पर हाथ फेर कर मल कर नहाइए।

◆ दौराने गुस्ल किसी किस्म की गुफ्तगू मत कीजिये, कोई दुआ भी न पढ़िये, नहाने के बाद तोलिये वग़ैरा से बदन पोछने में हरज नहीं। नहाने के बाद फौरन कपड़े पहन लीजिये।
अगर मकरूह वक़्त न हो तो दो रकअत नफ़्ल अदा करना मुस्तहब है।
*✍🏽बहारे शरीअत, जी.1, स.310*
*✍🏽आलमगिरी, जी.1, स. 14*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा  84*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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*गुजरती क़ुरआन*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

जो हज़रात अरबी पढ़ना नहीं जानते और वो *गुजरती क़ुरआन शरीफ* हासिल करना चाहते है वो हज़रात निचे दी हुई लिन्क पे जाके लोड करले।

https://www.dropbox.com/sh/ynscyzzeh9l5anq/AACt3sJJWj2_sFiwtwv36o4ya?dl=0

दुआए खैर का तालिब
جزاك الله خيرا

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #09
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*माहे रमज़ान में मदनी फूल* #04
क़ुरआन में सिर्फ रमज़ान ही का नाम लिया गया और इसी के फ़ज़ाइल बयान हुए। किसी दूसरे महीने का न सराहतन नाम है न ऐसे फ़ज़ाइल। औरतो में सिर्फ बीबी मरयम رضي الله عنها का नाम क़ुरआन में आया। सहाबा में सिर्फ हज़रते ज़ैद इब्ने हारिसा رضي الله عنه का नाम क़ुरआन में लिया गया जिस से इन तीनो की अज़मत मालुम हुई।

     रमज़ान में इफ्तार और सहरी के वक़्त दुआ क़बूल होती है। यानि इफ्तार करते वक़्त और सहरी खा कर। ये मर्तबा किसी और महीने को हासिल नहीं।

     रमज़ान में 5 हरुफ़ है رمضان.  इन में ر से मुराद "रहमते इलाही" م से मुराद "महब्बते इलाही" ض से मुराद "ज़माने इलाही" ا से मुराद "अमाने इलाही" ن से मुराद "नुरे इलाही"।
     और रमज़ान में 5 इबादत खुसूसी होती है। रोज़ा, तरावीह, तिलावते क़ुरआन, एतिकाफ, शबे क़द्र में इबादत। तो जो कोई सिद्के दिल से ये 5 इबादत करे वो उन 5 इनामो का मुस्तहक़ है।
*✍🏽तफ़सीरे नईमी, 2/208*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 19*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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*Aurat ke Masaail* #04
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

  *Haiz Ki Hikmat*

♻ Allah Ta'ala Ne Haiz Me Kiya Hikmat Poshidah Rakhi Hai?

📝 Aurat Baligha Ke Badan Se Fitratan Jarurat Se Kuch Ziyada Khoon Paidah Ho Jata Hai Ki Hamal (Pregnent) Ki Halat Me Wo Khoon Bachche Ki Giza Ke Kaam Aaye Aur Bachche Ke Dudh Pine Ke Zamane Men Wohi Khoon Dudh Ho Jaye Aur Aysa Na Hoto Hamal Aur Dudh Pilane Ke Zamane Me Uski Jaan Par Ban Jaye Yahi Wajah Hai Ki Hamal Aur Ibtidaae Shirkhawargi (Bachche Ko Dudh Pilane Ke Shuruwati Waqt) Men Khoon Nahi Aata Aur Jis Zamane Me Na Hamal Na Dudh Pilana Woh Khoon Aa kar Badan Se Na Nikle To Qism Qism Ki Bimariyan Ho Jayen.
*✍🏽Bahar-E-Shariat Hissa-2, Safa No.-42*

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Saturday, 13 May 2017

*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #08
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*माहे रमज़ान में मदनी फूल* #03
     रमज़ान में इब्लीस क़ैद कर लिया जाता है और दोज़ख के दरवाज़े बन्द हो जाते है जन्नत आरास्ता की जाती है इस के दरवाज़े खोल दिये जाते है। इस लिये इन दिनों में नेकियों की ज़ियादती और गुनाहो की कमी होती है, जो लोग गुनाह करते भी है वो नफ्से अम्मारा या अपने साथी शैतान (क़रीन) के बहकावे से करते है।

     रमज़ान के खाने पिने का हिसाब नही।

     क़यामत में रमज़ान व क़ुरआन रोज़ादार की शफ़ाअत करेंगे की रमज़ान तो कहेगा, मौला ! में ने इसे दिन में खाने पीने से रोका था और क़ुरआन अर्ज़ करेगा की या रब ! में ने इसे रात में तिलावत व तरावीह के ज़रिए सोने से रोका।

    हुज़ूर صلى الله عليه وسلم रमज़ानुल मुबारक में हर कैदी को छोड़ देते थे और हर साइल को अता फ़रमाते थे। रब भी रमज़ान में जहन्नमियो को छोड़ता है। लिहाज़ा चाहिये की रमज़ान में नेक काम किया जाए और गुनाहो से बचा जाए।
*✍🏽तफ़सीरे नईमी, 2/208*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 18*

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*मौजिज़ए शककुल कमर*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     बुखारी शरीफ में है : क़ुफ़्फ़ारे मक्का ने सरकारे मदीना ﷺ की खिदमते बा बरकत में मोजिज़ा दिखने का मुतालबा किया तो आप ने उन्हें चाँद के दो टुकड़े कर के दिखा दिये।
*✍🏽बुखारी, जी.2, स.579, हदिष:3868*

    अल्लाह तआला पारह 27 सूरतुल कमर की पहली दो आयत में इर्शाद फ़रमाता है :
पास आई क़ियामत और शक हो गया चाँद और अगर देखे कोई निशानी तो मुह फ़ेरते और कहते है ये तो जादू है चला आता।

     हज़रते मुफ़्ती अहमद यार खा अलैरहमा इस हिस्सए आयत "और शक हो गया चाँद" के तहत फ़रमाते है : इस आयत में हुज़ूर ﷺ के एक बड़े मौजिज़ए शक्कूल कमर यानि चाँद के दो टुकड़े हो जाने का ज़िक्र है।
हवाला
*✍🏽नूरुल इरफ़ान, सफा 843*
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 77*

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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #07
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
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*माहे रमज़ान में मदनी फूल* #02
रमज़ान में नफ्ल का षवाब फ़र्ज़ के बराबर और फ़र्ज़ का षवाब 70 गुना मिलता है।

     बाज़ उलमा फ़रमाते है की जो रमज़ान में मर जाए उस से सुवालाते क़ब्र भी नही होते।

     इस महीने में शबे क़द्र है। गुज़श्ता आयत से मालुम हुवा की क़ुरआन रमज़ान में आया और दूसरी जगह फ़रमाया : बेशक़ हम ने शबे क़द्र में उतारा। (पारह 30, अल क़द्र:1)
     दोनों आयतो के मिलाने से मालुम हुवा की शबे क़द्र रमज़ान में ही है और वो गालिबन 27वी शब् है। क्यू की लैलतुल क़द्र में 9 हरुफ़ है और ये लफ्ज़ सूरए क़द्र में 3 बार आया। जिस से 27 हासिल हुए मालुम हुवा की वो 27वी शब् है।
*✍🏽तफ़सीरे नईमी, 2/208*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 17*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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Friday, 12 May 2017

*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #06
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*माहे रमज़ान में मदनी फूल* #01
     काबाए मुअज़्ज़मा मुसलमानो को बुलाकर देता है और रमज़ान आ कर रहमते बाटता है। गोया काबा कुवा है और रमज़ान दरया, या काबा दरया है और रमज़ान बारिश।

     हर महीने में ख़ास तारीखे और तारीखों में भी ख़ास वक़्त में इबादत होती है। मसलन बकरी ईद की चन्द मख़्सूस तारीखे में हज, मुहर्रम की 10वी तारीख अफज़ल, मगर माहे रमज़ान में हर दिन और हर वक़्त इबादत होती है।
     रोज़ा इबादत, इफ्तार इबादत, इफ्तार के बाद तरावीह का इन्तिज़ार करना इबादत, तरावीह पढ़ कर सहरी के इंतज़ार में सोना इबादत, फिर सहरी खाना भी इबादत अल गरज हर आन में खुदा की शान नज़र आती है।

    रमज़ान एक भट्टी है जेसे की भट्टी गन्दे लोहे को साफ़ और साफ़ लोहे को मशीन का पुर्ज़ा बना कर क़ीमती कर देती है और सोने को ज़ेवर बना कर इस्तेमाल के लायक कर देती है। ऐसे ही माहे रमज़ान गुनाहगारो को पाक करता और नेक लोगो के दर्जे बढ़ाता है।
*✍🏽तफ़सीरे नईमी, 2/208*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 17*

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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #06
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*माहे रमज़ान में मदनी फूल* #01
     काबाए मुअज़्ज़मा मुसलमानो को बुलाकर देता है और रमज़ान आ कर रहमते बाटता है। गोया काबा कुवा है और रमज़ान दरया, या काबा दरया है और रमज़ान बारिश।

     हर महीने में ख़ास तारीखे और तारीखों में भी ख़ास वक़्त में इबादत होती है। मसलन बकरी ईद की चन्द मख़्सूस तारीखे में हज, मुहर्रम की 10वी तारीख अफज़ल, मगर माहे रमज़ान में हर दिन और हर वक़्त इबादत होती है।
     रोज़ा इबादत, इफ्तार इबादत, इफ्तार के बाद तरावीह का इन्तिज़ार करना इबादत, तरावीह पढ़ कर सहरी के इंतज़ार में सोना इबादत, फिर सहरी खाना भी इबादत अल गरज हर आन में खुदा की शान नज़र आती है।

    रमज़ान एक भट्टी है जेसे की भट्टी गन्दे लोहे को साफ़ और साफ़ लोहे को मशीन का पुर्ज़ा बना कर क़ीमती कर देती है और सोने को ज़ेवर बना कर इस्तेमाल के लायक कर देती है। ऐसे ही माहे रमज़ान गुनाहगारो को पाक करता और नेक लोगो के दर्जे बढ़ाता है।
*✍🏽तफ़सीरे नईमी, 2/208*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 17*

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*नूर का खिलौना*
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     जिस चाँद पर साइन्स दान अब पहोचने का दावा कर रहा है वो चाँद तो मेरे प्यारे आक़ा ﷺ के ताबे फरमान है।
     चुनान्चे "दलाइलुननुबूव्व्ह" में है : सुल्ताने दो जहां صلى الله عليه وسلم के चचाजान हज़रते अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब رضي الله تعالي عنه फ़रमाते है : मेने बारगाहे रिसालत में अर्ज़ की : या रसूलुल्लाह ﷺ ! मेने आप के बचपन में ऐसी बात देखि जो आप की नबुव्वत पर दलालत करती थी और मेरे ईमान लाने के अस्बाब में से ये भी एक सबब था। चुनान्चे मेने देखा की आप गहवारे (यानि पिंघोड़े) में लेटे हुए चाँद से बाते कर रहे थे और जिस तरफ आप ऊँगली से इशारा फ़रमाते चाँद उसी तरफ हो जाता था।
     सरकारे नामदार ﷺ ने फ़रमाया : में उस से बाते करता था और वो मुझसे बाते करता था और मुझे रोने से बहलाता था और में उस के गिरने की आवाज़ सुनता था जब की वो अर्शे इलाही के निचे सज्दे में गिरता था।
*✍🏽दलाइलुननुबूव्वत जी.2, स. 41*

आला हज़रत रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते है :
     चाँद झुक जाता जिधर ऊँगली उढ़ाते महद में
          क्या ही चलता था इशारो पर खिलौना नूर का

एक महब्बत वाले ने कहा है :
     खेलते थे चाँद से बचपन में आक़ा इस लिये
          ये सरापा नूर थे वो था खिलौना नूर का....
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 66-67*

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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #05
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*आक़ा का बयाने जन्नत निशान*
     हज़रते सलमान फ़ारसी رضي الله عنه फ़रमाते है की हुज़ूर صلى الله عليه وسلم ने माहे शाबान के आखरी दिन बयान फ़रमाया : ऐ लोगो ! तुम्हारे पास अज़मत वाला बरकत वाला महीना आया, वो महीना जिस में एक रात ऐसी भी है जो हज़ार महीनो से बेहतर है, इस के रोज़े अल्लाह ने फ़र्ज़ किये और इसकी रात में क़याम सुन्नत है, जो इसमें नेकी का काम करे तो ऐसा है जेसे और किसी महीने में फ़र्ज़ अदा किया और इसमें और इसमें जिसने फ़र्ज़ अदा किया तो ऐसा है जेसे और दिनों में 70 फ़र्ज़ अदा किये।
     ये महीना सब्र का है और *सब्र का षवाब जन्नत है* और ये महीना गम ख्वारी और भलाई का है और इस महीने में मोमिन का रिज़्क़ बढ़ाया जाता है। जो इसमें रोज़ादार को *इफ्तार कराए* उसके गुनाहो के लये मगफिरत है और उसकी गर्दन *आग से आज़ाद* कर दी जाएगी। और इस इफ्तार करने वाले को ऐसा ही षवाब मिलेगा जैसा रोज़ा रखने वाले को मिलेगा। बगैर उसके अज्र में कुछ कमी हो।
     हमने अर्ज़ की या रसूलल्लाह صلى الله عليه وسلم ! हम में से हर शख्स वो चीज़ नही पाता जिस से रोज़ा इफ्तार करवाए। आप ने इर्शाद फ़रमाया : अल्लाह ये षवाब उस शख्स को देगा जो एक घूंट दूध या एक खजूर या एक घूंट पानी से रोज़ा इफ्तार करवाए और जिस ने रोज़ादार को पेट भर कर खिलाया, उस को अल्लाह मेरे हौज़ से पिलाएगा की कभी प्यासा न होगा। यहां तक की *जन्नत में दाखिल हो जाए।*
     ये वो महीना है की इसका *अव्वल आसरा रहमत* है, इसका *दूसरा असरा मगफिरत* है और *तीसरा असरा जहन्नम से आज़ादी* है।
     इस महीने में 4 बातो की कसरत करो। इनमे से 2 बाते ऐसी है जिन के ज़रिए तुम अपने रब को राज़ी करोगे (1) لا اله الا الله की गवाही देना (2) इस्तिग़फ़ार करना। और दूसरी 2 बातो जिन से अपने रब से बे नियाज़ी नही (1) अल्लाह से जन्नत तलब करना (2) जहन्नम से अल्लाह की पनाह तलब करना।
*✍🏽सहीह इब्ने खुज़ैम, 3/1887*
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 14*

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🔮 *Haizo Nifaas Ki Halat Men Ruza Wa Namaz Ka Hukm.*

♻ Sawal:-Hazrat Mera Naam Usman Hai Ek Suwal Meri Phupi Haizo Nifaas Ke Dinon Me Farz Namazo Aur Farz Rozo Ke Bare Men Puchhti Hain Ki Kya Unki Qaza Hai ?

📝  *Jawab:- Haizo Nifaas Ki Halat Main Roza Rakhna Haram Hai Balki Namazen Muaf Hain Unki Qaza Bhi Nahi Han Rozo Ki Qaza Aur Dino Men Rakhna Farz Hai.*
*✍🏽 Durre Mukhtar ' Alamgiri*

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Thursday, 11 May 2017

*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #04
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*सगीरा गुनाहो का कफ़्फ़ारा*
     हज़रते अबू हुरैरा رضي الله عنه से मरवी है, हुज़ूर صلى الله عليه وسلم का फरमाने पुर सुरूर है : पंचो नमाज़े, जुमुआ अगले जुमुआ तक और रमज़ान अगले रमज़ान तक गुनाहो का कफ़्फ़ारा है जब तक की कबीरा गुनाहो से बचा जाए।
*✍🏽सहीह मुस्लिम, 144, हदिष:233*

*तौबा का तरीक़ा*
     रमज़ानुल मुबारक में रहमतो की छमाछम बारिशें और गुनाहे सगीरा के कफ्फारे का सामान हो जाता है। गुनाहे कबीरा तौबा से मुआफ़ होते है।
     तौबा का तरीक़ा ये है की जो गुनाह हुवा ख़ास उस गुनाह का ज़िक्र कर के दिल की बेज़ारी और आइन्दा उस से बचने का अहद कर के तौबा करे। मसलन झूट बोला, तो बारगाहे खुदावन्दी में अर्ज़ करे, या अल्लाह ! मेने जो ये झूट बोला इससे तौबा करता हु और आइन्दा नही बोलूंगा।
     तौबा के दौरान दिल में झूट से नफरत हो और "आइन्दा नही बोलूंगा" कहते वक़्त दिल में ये इरादा भी हो की जो कुछ कह रहा हु ऐसा ही करूँगा जभी तौबा है। अगर बन्दे की हक़ तलफी की है तो तौबा के साथ साथ उस बन्दे से मुआफ़ करवाना भी ज़रूरी है।
*✍🏽फ़ज़ाइले रमज़ान, 12*

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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मिट जाये गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से,
गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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🔮 *Hamal Shaqit Hone Ke Baad Khoon Mustaqil Jari Rahna* #01
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

♻ Sawal:- Raziya Ko Hamal Saqit Huwa Aur Use Ye Maloom Nahi Ki Koi Uzu Bana Tha Ya Ya Nahi Na Ye Yad Hai Ke Hamal Kitne Din Ka Tha Ki Usi Se Uzu Ka Banna Ya Na Banna Maloom Ho Jata Aur Hamal Saqit Hone Ke Bad Khoon Hamesha Jari Rahe Ho Us Khoon Ka Kiya Hukm Hai ?

📝 *Jawab:- Hamal Saqit Huwa Aur Ye Maloom Nahi Ki Koi Uzu Bana Tha Ya Nahi Na Ye Yad Ki Hamal Kitne Din Ka Tha (Ke Usi Se Uzu Ka Banna Na Banna Maloom Ho Jata Yani 120 Din Ho Gaye Hain To Uzu Banna Qarar De Diya Jayega ) Aur Bad Isqaat Ke Khoon Hamesha Ko Jari Ho Gaya To Use Haiz Ke Hukm Me Samjhe Ke Haiz Ki Jo Adat Thi Uske Gujarne Ke Bad Naha Kar Namaz Shuru Kar De Aur Aadat Na Thi To 10 Din Ke Baad.*
{📚 Rad Al Mukhtar}


♻ Sawal:- Fatima Ko 40 Din Se Ziyada Khoon Aaya Aur Use  Ye Yad Nahi Ke Is Se Pahle Bache Ke Paidah Hone Me Din Khoon Aaya Tha Is Bare Main Bataiye Ki Ye Khoon Nifas Ka Has Ya Istihaza Ka ?

📝 *Jawab:- Kisi Ko 40 Din Se Jiyada Khoon Aaya To Agar Uske Pahli Bar Bacha Paida Huwa Hai Ya Ye Yad Nahi Ke Is Se Pahle Bachcha Paidah Hone Men Kitne Din Tak Nifaas Hai Aur Jitna Jyada Hai Woh Istihaza Hai Jaise Adat 30 Din Ki Thi Aur Is Bar 45 Din Aaya To 30 Din Nifaas Ke Hai Aur 15 Din Istihaza Ke.*
{📚Durre Mukhtar' Rad Al Mukhtar}

*📮षवाब की निय्यत से शेर करे*
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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #03
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*पांच खुसूसी करम*
     हज़रत ज़ाबिर बिन अब्दुल्लाह رضي الله عنه से रिवायत है कि हुज़ूर صلى الله عليه وسلم फरमाते है : मेरी उम्मत को माहे रमज़ान में 5 चीज़े ऐसी अता की गई जो मुझ से पहले किसी नबी को न मिली :
1. जब रमज़ान की पहली रात होती है तो अल्लाह उनकी तरफ रहमत की नज़र फ़रमाता है और जिस की तरफ अल्लाह नज़रे रहमत फरमाए उसे कभी भी अज़ाब न देगा।
2. शाम के वक़्त ऊन में मुह की बू (जो भूक की वजह से होती है) अल्लाह के नज़दीक मुश्क की खुशबु से भी बेहतर है।
3. फ़रिश्ते हर रात और दिन उन के लिये मगफिरत की दुआए करते रहते है।
4. अल्लाह जन्नत को हुक्म फ़रमाता है, मेरे नेक बन्दों के लिये आरास्ता हो जा अन क़रीब वो दुन्या की मशक़्क़त से मेरे घर और करम में राहत पाएंगे।
5. जब माहे रमज़ान की आखरी रात आती है तो अल्लाह सब की मगफिरत फरमा देता है।
     क़ौम में से एक शख्स ने खड़े हो कर अर्ज़ की, या रसुल्लाह صلى الله عليه وسلم क्या ये लैलतुल क़दर है ? इर्शाद फ़रमाया नही, क्या तुम नही देखते की मज़दूर जब अपने कामो से फारिग हो जाते है तो उन्हें उजरत दी जाती है।
*✍🏽अत्तरगिब् वत्तरहिब, 2/56, हदिष:7*
*✍🏽फैजाने रमज़ान शरीफ, 11*

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Wednesday, 10 May 2017

*वुज़ू और साइन्स* #14
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*कोहनिया धोने की हिकम्ते*
     कोहनी पर 3 बड़ी रगे है जिस का तअल्लुक़ दिल, जिगर और दिमाग से है और जिस्म का ये हिस्सा उमुमन ढका रहता है, अगर इसको पानी और हवा न लगे तो मुतअद्दिद दिमाग और आसाबि अमराज़ पौदा हो सकते है।

     वुज़ू में कोहनियो समेत हाथ धोने से दिल, जिगर और दिमाग को तक्वीयत पहोचति है और इस तरह इन्शा अल्लाह वो इनके अमराज़ से पहफ़ुज़ रहेगे। मजीद ये की कोहनियो समेत हाथ धोने से सीने के अन्दर ज़खीरा शुदा रोशनियां से बराहे रास्त इंसान का तअलुक काइम हो जाता है और रोशनियो का हुजूम एक बहाव की शक्ल इख्तियार कर लेता है, इस अम्ल से हाथो के अज़लात यानि कलपुर्जे मजीद ताकत वर हो जाते है।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 71*

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*फ़ज़ाइले रमज़ान शरीफ* #01
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

     खुदा का करोड़ हा एहसान कि उसने हमे माहे रमज़ान जेसी अज़ीमुश्शान नेअमत से सरफ़राज़ फ़रमाया। माहे रमज़ान के फैजान के क्या कहने ! इस की हर घड़ी रहमत भरी है। इस महीने में अज़्रो षवाब बहुत ही बढ़ जाता है। नफ्ल का षवाब फ़र्ज़ के बराबर और फ़र्ज़ का षवाब 70 गुना कर दिया जाता है। बल्कि इस माह में तो रोज़ादार का सोना भी इबादत में शुमार किया जाता है। अर्श उठाने वाले फ़रिश्ते रोज़ादरो की दुआ पर आमीन कहते है और एक हदिष के मुताबिक़ "रमज़ान के रोज़ादार के लिये दरया की मछलिया इफ्तार तक दुआए मगफिरत करती रहती है।
*✍🏽अत्तरगिब् वत्तरहिब, 2/55, हदिष:6*

*इबादत का दरवाज़ा*
     रोज़ा बातिनी इबादत है, क्यू की हमारे बताए बगैर किसी को ये इल्म नही हो सकता है की हमारा रोज़ा है और अल्लाह बातिनी इबादत को ज़्यादा पसन्द फ़रमाता है। एक हदिष के मुताबिक़ "रोज़ा इबादत का दरवाज़ा है।"
*✍🏽अल जमीउस्सागिर, 146, हदिष:2415*

*नुज़ूले क़ुरआन*
     इस माह की एक खुसुसिय्यत ये भी है की अल्लाह ने इस में क़ुरआन नाज़िल फ़रमाया है। चुनान्चे मुक़द्दस क़ुरआन में अल्लाह का नुज़ूले क़ुरआन और माहे रमज़ान के बारे में फरमान है :
रमज़ान का महीना, जिस में क़ुरआन उतरा, लोगो के लिये हिदायत और रहनुमाई और फैसले की रोशन बाते, तो तुम में जो कोई ये महीना पाए ज़रूर इसके रोज़े रखे और जो बीमार या सफर में हो, तो उतने रोज़े और दिनों में। अल्लाह तुम पर आसानी चाहता है और तुम पर दुश्वारी नही चाहता और इसलिये की तुम गिनती पूरी करो और अल्लाह की बड़ाई बोलो इस पर की उस ने तुम्हे हिदायत की और कही तुम हक़ गुज़ार हो।
*परह 2, अल बक़रह:185*
*✍🏽फैजाने रमज़ान शरीफ, 3*

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Tuesday, 9 May 2017

*आक़ा का महीना* #17
*بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ*

*कब्रस्तान की हाजरी के मदनी फूल* #03
     जो कब्रस्तान में दाखिल हो कर ये कहे : अय अल्लाह ! अय गल जाने वाले जिस्मो और बोसीदा हड्डियों के रब ! जो दुन्या से ईमान की हालत में रुखसत हुए तू उन पर अपनी रहमत और मेरा सलाम पहोचा दे। तो हज़रत आदम अलैहिस्सलाम से ले कर इस वक़्त तक जितने मोमिन फौत हुए सब उस दुआ पढ़ने वाले के लिये दुआए मग्फिरत करेंगे।

     हुज़ूर ﷺ का फरमाने शफ़ाअत निशान है : जो शख्स कब्रस्तान में दाखिल हुवा फिर उस ने सूरतुल फातिहा, सूरतुल इखलास और सुरतुत्तकासुर पढ़ी फिर ये दुआ मांगी : या अल्लाह ! मेने जो कुछ कुरआन पढ़ा उसका षवाब इस कब्रस्तान के मोमिन मर्दों और मोमिन औरतो को पहोचा। तो वो तमाम मोमिन क़यामत के रोज़ उस इसाले षवाब करने वाले के सिफारिशी होंगे।
*✍🏽शरहु स्सुदुर् स.311*

     हदीशे पाक में है : जो 11 बार सूरतुल इखलास पढ़ कर इसका षवाब मुर्दो को पहोचाए, तो मुर्दो की गिनती के बराबर उस इसाले षवाब करने वाले को षवाब मिलेगा।
*✍🏽दुर्रे मुख्तार, जी.3 स.183*

     क़ब्र के ऊपर अगरबत्ती न जलाई जाए इस में बे अदबी और बद फाली है (और इस से मैयत को तकलीफ होती है), हा अगर हाज़रिन को खुशबु पोहचाने के लिये लगाना चाहे तो क़ब्र के पास खाली जगह हो वहा लगाए के खुशबु पहोचाना महबूब है।
*✍🏽मूलख्खसन फतावा रज़विय्या मुखर्रजा, जी.9 स.482,525*

     आला हज़रत अलैरहमा एक और जगह फरमाते है : सहीह मुस्लिम शरीफ में हज़रते अम्र बिन आस से मरवी, उन्हों ने दमे मर्ग (यानि वक़्ते वफ़ात) अपने फ़रज़न्द से फ़रमाया : जब में मर जाउ तो मेरे साथ न कोई नौहा करने वाली जाए न आग जाए।
*✍🏽सहीह मुस्लिम, स.70 हदिष:192*

     क़ब्र पर चराग या मोमबत्ती वग़ैरा न रखे के ये आग है, और क़ब्र पर आग रखने से मैय्यत को तकलीफ होती है,
*✍🏽आक़ा का महीना, स.29*

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*अन्धा पन से तहफ़्फ़ुज़*
     आँखों की एक बीमारी है जिसमे इस की रतूबते अस्लिय्या यानि असली तरी कम या ख़तम हो जाती और मरीज़ आहिस्ता आहिस्ता अन्धा हो जाता है।
     तिब्बी उसूल के मुताबिक़ अगर भवो को वक़्तन फ वक़्तन तर किया जाता रहे तो इस खौफ़नाक मरज़ से तहफ़्फ़ुज़ हासिल हो सकता है।

     अलहम्दु लिल्लाह ! वुज़ू करने वाला मुह धोता है और इस तरह उसकी भवे तर होती रहती है।
आशिकाने रसूल की दाढ़ी भी वुज़ू में धुलती है और इसमें भी खूब हिकम्ते है.
     डॉ प्रोफेसर ज्योर्ज एल कहता है : मुह धोने से दाढ़ी में उलझे हुए जरासिम बह जाते है, जड़ तक पानी पहोचने से बालो की जड़े मज़्बूत होती है, दाढ़ी के ख़िलाल से जुओं का खतरा दूर होता है, दाढ़ी में पानी की तरी के ठहराव से गर्दन के पठ्ठो, थाइराइड ग्लैंड और गले के अमराज़ से हिफाज़त होती है।
*✍🏽नमाज़ के अहकाम, सफा 70-71*

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