Pages

Friday, 18 January 2019

सूरतुल बक़रह, रुकुअ-27, आयत, ②①⑨*

*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

तुमसे शराब  और जुए का हुक्म पूछते हैं, तुम फ़रमादो कि उन दोनों में बड़ा गुनाह है  और लोगों के कुछ दुनियावी नफ़े भी  और उनका गुनाह उनके नफ़े से बड़ा है(9) और  तुमसे पूछते हैं क्या ख़र्च करें (10) तुम फ़रमाओ जो फ़ाज़िल (अतिरक्त) बचे (11) इसी तरह अल्लाह तुमसे आयतें बयान फ़रमाता है कि कहीं सोचकर करो तुम.


*तफ़सीर*

(9) हज़रत अली मुरतज़ा रदियल्लाहो अन्हु ने फ़रमाया, अगर शराब की एक बूंद कुंवें में गिर जाए फिर उस जगह एक मीनार बनाया जाए तो मैं उसपर अज़ान न कहूँ. और अगर नदी में शराब की बूंद पडे़, फिर नदी ख़ुश्क हो और वहाँ घास पैदा हो तो उसमें मैं अपने जानवरों को न चराऊं. सुब्हानअल्लाह ! गुनाह से किस क़द्र नफ़रत है. अल्लाह तआला हमें इन बुज़ुर्गों के रास्ते पर चलने की तौफ़ीक अता करे. शराब सन तीन हिजरी में ग़जवए अहज़ाब से कुछ दिन बाद हराम की गई. इससे पहले यह बताया गया था कि जुए और शराब का गुनाह उनके नफे़ से ज़्यादा है. नफ़ा तो यही है कि शराब से कुछ सुरूर पैदा होता है या इसकी क्रय विक्रय से तिजारती फ़ायदा होता है. और जुए में कभी मु्फ़्त का माल हाथ आता है और गुनाहों और बुराइयों की क्या गिनती, अक़्ल का पतन, ग़ैरत, शर्म, हया और ख़ुददारी का पतन, इबादतों से मेहरूमी, लोगो से दुश्मनी, सबकी नज़र में ख़्वार होना, दौलत और माल की बर्बादी. एक रिवायत में है कि जिब्रील अमीन ने हुज़ूर पुरनूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की ख़िदमत में अर्ज़ किया कि अल्लाह तआला को जअफ़रे तैयार की चार  विशेषताएं पसन्द हैं. हुज़ूर ने हज़रत जअफ़र तैयार से पूछा, उन्होंने अर्ज़ किया कि एक तो यह है कि मैंने शराब कभी नहीं पी यानी हराम हो जाने के हुक्म से पहले भी और इसकी वजह यह थी कि मैं जानता था कि इससे अक़्ल भ्रष्ट होती है और मैं चाहता था कि अक़्ल और भी तेज़ हो. दूसरी आदत यह है कि जाहिलियत के ज़माने में भी मैंने मूर्ति पूजा नहीं की क्योंकि मैं जानता था कि यह पत्थर है, न नफ़ा दे, न नुक़सान पहुंचा सके, तीसरी ख़सलत यह है कि मैं कभी ज़िना में मुब्तिला नहीं हुआ कि उसको मैं बेग़ैरती और निर्लज्जता समझता था, चौथी ख़सलत यह कि मैंने कभी झूट नहीं बोला क्योंकि मैं इसको कमीना-पन ख़याल करता था. शतरंज, ताश वग़ैरह हार जीत के खेल और जिन 

पर बाज़ी लगाई जाए, सब जुए में दाख़िल हैं, और हराम हैं. (रूहुल बयान)

(10) सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने मुसलमानों को सदक़ा देने की रग़बत दिलाई तो आपसे दर्याफ़त किया गया  कि मिक़दार इरशाद फ़रमाएं  कि कितना माल ख़ुदा की राह में दिया जाय. इस पर 

यह आयत उतरी (ख़ाज़िन)

(11) यानी जितना तुम्हारी ज़रूरत से ज़्यादा हो. इस्लाम की शुरूआत में ज़रूरत से ज़्यादा माल का ख़र्च करना फ़र्ज़ था. सहाबएं किराम अपने माल में से अपनी ज़रूरत भर का लेकर बाक़ी सब ख़ुदा की राह में दे डालते थे. यह हुक्म ज़कात की आयत के बाद स्थगित हो गया.

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनों के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

*क़यामत और उसकी निशानियां* #08


بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

     *सुुवाल* - आफताब के मगरिब से तुलुअ करने और दरवाजए तौबा के बन्द होने की कैफिय्यत बयान फ़रमाइये ? 

     *जवाब* - रोज़ाना आफ्ताब बारगाहे इलाही में सजदा कर के इज्न चाहता है, इज़्न होता है तब तुलूअ करता है। करीबे कियामत जब दाब्बतुल अर्ज निकलेगा, हस्बे मामूल आफ्ताब सजदा कर के तुलू होने की इजाज़त चाहेगा। इजाज़त न मिलेगी और हुक्म होगा कि वापस जा। तब आफ्ताब मगरिब से तुलू होगा और निस्फ आसमान तक आ कर लौट जाएगा और जानिबे मगरिब गुरूब करेगा। इस के बाद फिर पहले की तरह मशरिक से तुलअ किया करेगा, आफ्ताब के मगरिब से तुलुअ करते ही तौबा का दरवाजा बन्द कर दिया जाएगा फिर किसी का ईमान लाना मक्बूल न होगा। 

*✍️बुन्यादी अक़ाइद और मामुलाते अहले सुन्नत* 39

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनों के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

ख़ुत्बा सुनने व बैठने के एहकाम*

*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     जो काम नमाज़ की हालत में करना हराम और मना है, ख़ुत्बा होने की हालत में भी हराम और मना है।

*(हुल्या, जामऊर्-रमुज़, आलमगीरी, फतावा रज़विय्या)*

     ख़ुत्बा सुनना फ़र्ज़ है और ख़ुत्बा इस तरह सुनना फ़र्ज़ है कि हमा-तन (समग्र एकाग्रता) उसी तरफ तवज्जोह दे और किसी काम में मश्गुल न हो। सरापा तमाम आज़ा ए बदन उसी की तरफ मुतवज्जेह होना वाजिब है। अगर किसी ख़ुत्बा सुनने वाले तक खतीब की आवाज़ न पहुचती हो, जब भी उसे चुप रहना और ख़ुत्बा की तरफ तवज्जोह रखना वाजिब है। उसे भी किसी काम में मश्गुल होना हराम है।

*(फत्हुल क़दीर, रद्दुल मोहतार, फतावा रज़विय्या)*

     ख़ुत्बा के वक़्त ख़ुत्बा सुननेवाला "दो जानू" यानी नमाज़ के क़ायदे में जिस तरह बैठते है उस तरह बैठे।

*(आलमगीरी, रद्दुल मोहतार, गुन्या, बहारे शरीअत)*

     ख़ुत्बा हो रहा हो तब सुनने वाले को एक घूंट पानी पीना हराम है और किसी की तरफ गर्दन फेर कर देखना भी हराम है।

     ख़ुत्बा के वक़्त सलाम का जवाब देना भी हराम है।

     जुमुआ के दिन ख़ुत्बा के वक़्त खतीब के सामने जो अज़ान होती है, उस अज़ान का जवाब या दुआ सिर्फ दिल में करें। ज़बान से अस्लन तलफ़्फ़ुज़ (उच्चार) न हो।

     जुमुआ की अज़ाने सानी (ख़ुत्बे से पहले की अज़ान) में हुज़ूर صلى الله عليه وسلم का नाम सुनकर अंगूठा न चूमें और सिर्फ दिल में दुरुद शरीफ पढ़े।

*✍🏼फतावा रज़विय्या*

     ख़ुत्बा में हुज़ूर صلى الله عليه وسلم का नाम सुन कर दिल में दुरुद शरीफ पढ़े, ज़बान से खामोश रहना फ़र्ज़ है।

*(दुर्रे मुख्तार, फतावा रज़विय्या)*

     जब इमाम ख़ुत्बा पढ़ रहा हो, उस वक़्त वज़ीफ़ा पढ़ना मुतलक़न ना जाइज़ है और नफ्ल नमाज़ पढ़ना भी गुनाह है।

     ख़ुत्बा के वक़्त भलाई का हुक्म करना भी हराम है, बल्कि ख़ुत्बा हो रहा हो तब दो हर्फ़ बोलना भी मना है। किसी को सिर्फ "चुप" कहना तक मना और लग्व (व्यर्थ) है।

     सहाह सित्ता (हदिष की 6 सहीह किताबों) में हज़रते अबू हुरैरा رضي الله عنه से रिवायत है कि हुज़ूर صلى الله عليه وسلم फ़रमाते है कि बरोज़े जुमुआ ख़ुत्ब ऐ इमाम के वक़्त तूँ दूसरे से कहे "चुप" तो तूने लग्व (व्यर्थ काम) किया।

     इसी तरह मुसन्दे अहमद, सुनने अबू दाऊद में हज़रत अली كرم الله وجهه الكريم से है कि हुज़ूर ﷺ फ़रमाते है कि जो जुमुआ के दिन (ख़ुत्बा के वक़्त) अपने साथी से "चुप" कहे उसने लग्व किया और जिसने लग्व किया उसके लिये जुमुआ में कुछ "अज्र" (षवाब) नही।

     ख़ुत्बा सुनने की हालत में हरकत (हिलना-डुलना) मना है। और बिला ज़रूरत खड़े हो कर ख़ुत्बा सुनना खिलाफे सुन्नत है। अवाम में ये मामूल है कि जब खतीब ख़ुत्बा के आखिर में इन लफ़्ज़ों पर पहुचता है "व-ल-ज़ीक़रुल्लाहे तआला आला" तो उसको सुनते ही लोग नमाज़ के लिये खड़े हो जाते है। ये हराम है, कि अभी ख़ुत्बा नही हुआ, चंद अलफ़ाज़ बाक़ी है और ख़ुत्बा की हालत में कोई भी अमल करना हराम है।

*✍🏼फतावा रज़विय्या*

*✍🏼मोमिन की नमाज़* 220

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

📧Deen-e-nabi.blogspot.in

📧https://www.youtube.com/channel/UCuJJA1HaLBLMHS6Ia7GayiA

*_दुआए नबिय्ये रहमत और मसाकीन से महब्बत_* #2


بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     गुरबत व मिस्कीनी अपने जिलौ ( या'नी मइय्यत ) में कितनी बरकतें लिये हुए है कि शहन्शाहे खुश खिसाल,पैकरे हुस्नो जमाल, रसूले बे मिसाल ﷺ भी । गुरौहे मसाकीन में शामिल होने और इसी गुरौह को अपनी रफाकत की। बरकतों से नवाज़ने की ख्वाहिश और इन से महब्बत की तल्कीन फ़रमा रहे हैं। 

*सलाम उसपर कि जिस के घर में चांदी थी न सोना था सलाम उस पर कि टूटा बोरिया जिस का बिछोना था* 


 *_फुक़रा से महब्बत कुर्बते इलाही का सबब_*

      हज़रते सय्यदुना अनस बिन मालिक  رضی اﷲ تعالٰی عنه रिवायत करते हैं कि महबूबे रब्बुल इज्ज़त ﷺ ने हज़रते सय्यिदतुना आइशा सिद्दीका   رضی اﷲ تعالٰی عنها, को मुखातब कर के इर्शाद फ़रमाया :  ऐ आइशा (رضی اﷲ تعالٰی عنها) ! मिस्कीनों से महब्बत करो, उन्हें अपने करीब रखो ताकि बरोजे कियामत अल्लाह तआला तुम्हें अपने कुर्ब से नवाजे।

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله

*✍🏼 ग़रीब फाएदे में है   पेज 16*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

📱+91 9033503799

📧facebook.com/deenenabi

📧Deen-e-nabi.blogspot.in

Thursday, 17 January 2019

तज़किरतुल अम्बिया* #367

*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

*मुख्तलिफ किस्म के अज़ाब* #03

     इसके बाद उन पर कुमल का अज़ाब आया कुमल से मुराद घुन या जूं या कोई और छोटा कीड़ा है उस कीड़े ने जो खेतियां और फल बाकी बचे थे यह खा लिये, कपड़ों में घुस जाता था और जिल्द को काटता था, खाने में भर जाता था। अगर कोई दस बोरी गेहूं चक्की पर ले जात तो तीन सैर वापस लाता बाकी सब कीडे खा जाते। यह कीड़े फिरौनियो के बाल भवें पलकें चाट गये जिस्म पर चेचक की तरह भर जाते। सोना दुश्वार कर दिया था इस मुसीबत से फ़िरऔनी चीख पड़े और उन्होंने हजरत मूसा अलैहिस्सलाम से अर्ज किया हम तौबा करते हैं आप इस बला के दफा होने की दुआ फ़रमइये आपकी दुआ से अल्लाह ने उनकी इस मुसीबत को भी सात रोज़ बाद दूर फ़रमाया। लेकिन फिरौनियो ने फिर वादा तोड़ दिया और ईमान न लाये बल्कि पहले से ज्यादा बुरे आमाल शुरू कर दिये एक माह उनका फिर आराम से गुजर गया।


बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله

*✍️तज़किरतुल अम्बिया* 307

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनों के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

_नमाज़ की फ़ज़ीलत अहादिष की रौशनी में_* #01

*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     हुज़ूरे अक़दस ﷺ ने सहाबा से दरयाफ़्त फ़रमाया : तुम ऐसे आदमी के बारे में क्या कहते हो जिसके घर के दरवाज़े पर एक नहर हो और वो हर दिन उस नहर में पांच मर्तबा गुस्ल करता हो क्या उस आदमी के बदन में किसी तरह की गन्दगी बाक़ी रहेगी ? सहाबा ने अर्ज़ किया : या रसूलल्लाह ﷺ ! ऐसे आदमी के जिस्म पर किसी तरह की गन्दगी बाक़ी नहीं रहेगी। इस और आप ने फ़रमाया यही मिसाल मंजवक्ता नमाज़ों की है, अल्लाह इसके ज़रिये बन्दों के गुनाहो को माफ़ फरमा देता है।

*✍🏼सहीह मुस्लिम*

     हुज़ूर ﷺ एक मर्तबा मौसम सर्मा (सर्दी के मौसम) में मदीने से बाहर तशरीफ़ ले गए, पतझड़ का मौसम था, दरख्तों के पत्ते झड़ रहे थे, आपने एक दरख्त की दो टहनियों को पकड़ा, (उन्हें हिलाया) पत्ते झड़ने लगे। आप ने फ़रमाया : ऐ अबू ज़र ! देखो ! जब कोई मुसलमान नमाज़ पढ़ता है और उसके ज़रिये अल्लाह की ख़ुशनूदी चाहता है तो उसके गुनाह उसी तरह झड़ जाते है जिस तरह इस दरख्त के पत्ते झड़ रहे है।

*✍🏼मुसन्दे अहमद बिन हम्बल*

*✍🏼नमाज़ की अहमियत* 15

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनो के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91  9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

ot.in

सूरतुल बक़रह, रुकुअ-27, आयत, ②①⑧*

*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

वो जो ईमान लाए  और वो जिन्होंने अल्लाह के लिये अपने घरबार छोड़े  और अल्लाह की राह में लड़े वो अल्लाह की रहमत के उम्मीदवार हैं  और अल्लाह बख़्शने वाला मेहरबान है (8)


*तफ़सीर*

(8) अब्दुल्लाह बिन जहश की सरदारी में जो मुजाहिद भेजे गए थे उनके बारे में कुछ लोगों ने कहा कि चूंकि उन्हें ख़बर न थी कि यह दिन रजब का है इसलिये इस दिन जंग करना गुनाह तो न हुआ लेकिन उसका कुछ सवाब भी न मिलेगा. इस पर यह आयत उतरी. और बताया गया कि उनका यह काम जिहादे मक़बूल है. और इस पर उन्हें अल्लाह की रहमत का उम्मीदवार रहना चाहिये और यह उम्मीद ज़रूर पूरी होगी. (ख़ाज़िन). “यरजूना” (उम्मीदवार हैं) से ज़ाहिर हुआ कि अमल यानी कर्म से पुण्य या इनाम वाजिब या अनिवार्य नहीं होता, बल्कि सवाब देना केवल अल्लाह की मर्ज़ी और उसके फ़ज़्ल पर है.

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनों के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

क़यामत और उसकी निशानियां* #07

*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

     *सुवाल* - हज़रते ईसा मसीह عليه السلام के नुजूल का मुख़्तसर हाल बयान कीजिये ? 

     *जवाब* - जब दज्जाल का फितना इन्तिहा को पहुंच चुकेगा और वोह मलऊन तमाम दुन्या में फिर कर मुल्के शाम में जाएगा उस वक्त हज़रते ईसा عليه السلام दिमश्क की जामे मस्जिद के शर्की मनारे पर नुजूल फ़रमाएंगे । आप की नज़र जहां तक जाएगी वहां तक खुश्बू पहुंचेगी और आप की खुश्बू से दज्जाल पिघलने लगेगा और भागेग। आप दज्जाल को बैतुल मुक़द्दस के करीब मकामे लुद में कत्ल करेंगे। इन का ज़माना बड़ी खैरो बरकत का होगा, माल की कसरत होगी। जमीन अपने खज़ाने निकाल कर बाहर करेगी। लोगों को माल से रगबत न रहेगी। यहूदिय्यत, नसरानिय्यत और तमाम बातिल दीनों को आप मिटा डालेंगे। आप के अहदे मुबारक में एक दीन होगा, इस्लाम। तमाम कफिर ईमान ले आएंगे और सारी दुन्या अहले सुन्नत होगी। अम्नो अमान का येह आलम होगा कि शेर बकरी एक साथ चरेंगे। बच्चे सांपों से खेलेंगे। बुगज़ों हसद का नामो निशान न रहेगा। जिस वक्त आप का नुजूल होगा फज्र की जमाअत खड़ी होती होगी। हज़रते इमाम मेहदी आप को देख कर आप से इमामत की दरख्वास्त करेंगे। आप उन्हीं को आगे बढ़ाएंगे और हज़रते इमाम मेहदी के पीछे नमाज़ अदा फ़रमाएंगे। 

     एक रिवायत में है कि हजरते ईसा ने हुजूर ﷺ की शान व सिफ़ात और आप ﷺ की उम्मत की इज्जत व करामत देख कर उम्मते मुहम्मदी ﷺ में दाखिल होने की दुआ की। अल्लाह तआला ने आप  की दुआ कबूल फ़रमाई और आप  को वोह बका अता फरगाई कि आखिर ज़माने में उम्मते मुहम्मदया ﷺ के इमाम हो कर नुजूल फरमाएंगे आप नुज़ूल के बाद बरसों दन्या में रहेंगे, निकाह करेंगे फिर वफ़ात पा कर हुजूर सय्यदे अम्बिया ﷺ के पहलू में मदफ़्न होंगे।

*✍️बुन्यादी अक़ाइद और मामुलाते अहले सुन्नत* 39

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनों के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

दुआ मांगने के मदनी फूल* #02

*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

     ★ कतए रेहम (मसलन फुलां रिश्तेदारों में लड़ाई हो जाए) की दुआ न करे।

     ★ अल्लाह से सिर्फ हकीर चीज़ न मांगे कि परवर्द गार गनी है बल्कि अपनी तमाम तवज्जोह उसी की तरफ़ रखे और हर चीज़ का उसी से सुवाल करे।

     ★ रन्जो मुसीबत से घबरा कर अपने मरने की दुआ न करे। खयाल रहे कि दुन्यवी नुक्सान से बचने के लिये मौत की तमन्ना ना जाइज़ हैं और दीनी मुजुर्रत (यानी दीनी नुक्सान) के खौफ़ से जाइज़। 

     ★ बिला ज़रूरते शरई किसी के मरने और खराबी (बरबादी) की दुआ न करे, अलबत्ता अगर किसी काफ़िर के ईमान न लाने पर यकीन या जन्ने गालिब हो और (उस के) जीने से दीन का नुक्सान हो या किसी जालिम से तौबा और जुल्म छोड़ने की उम्मीद न हो और उस का मरना, तबाह होना मख्लुक के हक में मुफीद हो तो ऐसे शख्स पर बद दुआ करना दुरुस्त है।

*✍️मदनी पंजसुरह* 190

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनों के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

_दुआए नबिय्ये रहमत और मसाकीन से महब्बत_* #1

*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

      गुरबत व मिस्कीनी तो वोह आज़माइश है जिस में मुब्तला मुसल्मान अगर सब्र का दामन थामे हुए गौरो फ़िक्र करे तो उसे पता चलेगा कि अहादीसे मुबारका में गुरबा व मसाकीन के कितने फ़ज़ाइल बयान किये गए हैं , इस्लाम में ऐसे लोग हकीर नहीं बल्कि लाइके महब्बत हैं, जैसा कि हज़रते सय्यदुना अबू सईद खुदरी رضی اﷲ تعالٰی عنه फ़रमाते हैं: मसाकीन से महब्बत करो, क्यूं कि मैं ने रसूले खुदा, महबूबे अम्बिया ﷺ को दुआ में येह अल्फ़ाज़ शामिल फ़रमाते सुना : "ऐ अल्लाह! मुझे मिस्कीनी की हालत में हयात और मिस्कीनी की हालत में ही विसाल अता फरमा और गुरौहे मसाकीन में मेरा हश्र फ़रमा।" 

     *शर-ई मस्अला* : याद रखिये कि हुजूर ﷺ बारगाहे इलाही में इज्ज़ के तौर पर अपने आप को जुम्रए मसाकीन में शामिल फ़रमाएं तो येह आप ﷺ को रवा (यानी जाइज़) है लेकिन हमारे लिये आप ﷺ को "फकीर व मिस्कीन" कहना ना-रवा (यानी जाइज़ नहीं) बल्कि हराम है। (फतावा अहले सुन्नत, हिस्सा : 8, स.118) 

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله

*✍🏼 ग़रीब फाएदे में है   पेज 15*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

📱+91 9033503799

📧facebook.com/deenenabi

📧Deen-e-nabi.blogspot.in

Wednesday, 16 January 2019

*दीन व दुन्या की भलाइयां*


بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

*रोज़ी में बरकत*

     दुकान/ऑफिस जाने से पहले 2 रकअत नफ़्ल अदा करे। मर्द के साथ घर की औरतें भी इसे अदा करे

*निय्यत* - या अल्लाह! मेरे लिये हलाल रोज़ी आसानी से अता कर, दिन 11वी रात 12वी तरक्की अता कर, चारो तरफ से आसानी के साथ हलाल रोज़ी के दरवाजे खोल दे और उसमें ऐसी बरकतें अता फरमा की में तेरी रिज़ा के लिए तेरी दी हुई रोज़ी में से तेरी राह में खर्च कर सकू, ओर अपने अहलो अयाल की अच्छे से परवरिश कर सकू।


*बीमारी से शिफा*

     ज़ोहर बाद 2 रकअत नफ़्ल अदा करे।

*निय्यत* - या अल्लाह! मेरे वालिदैन ओर हम मियां-बीवी व बच्चों में जो भी बीमारी हो उसे से आसानी के साथ शिफाए कामिला अता फरमा ओर हमे ऐसी तंदुरस्ती अता फरमा के तेरी रिज़ा के लिये अच्छी तरह तेरी इबादत कर सके।


*ज़िंदगी मे आसानी*

     मगरिब बाद 2 रकअत नफ़्ल अदा करे।

*निय्यत* - या अल्लाह! अबतक की ज़िंदगी तूने अच्छी तरह गुज़ार दी आइंदा की ज़िंदगी इससे बेहतर ओर तेरे व तेरे महबूब ﷺ की इताअत के साथ गज़ार।


*गुनाहों से तौबा*

     ईशा बाद 2 रकअत नफ़्ल अदा करे।

*निय्यत* - या अल्लाह! अब तक मुझसे जाने-अन्जाने में जो भी छोटे बड़े गुनाह हुए है तू उसे मुआफ़ फरमा, ओर गुनाहों से मेरे दिल मे नफरत पैदा कर ओर नेकियों से महब्बत पैदा कर।


*अच्छे रिश्ते के लिये*

     दिन में कभी भी 2 रकअत नफ़्ल अदा करे। हो सकते तो सुबह मकरूह वक़्त खत्म होने के बाद पढले।

*निय्यत* - या अल्लाह! मुझे आसानी के साथ नेक, स्वालेह मियां/बीवी अता फरमा ओर आपस मे मुहब्बते पैदा फरमा।


*दुरूद शरीफ*

     दिन में कभी भी कम अज़ कम 313 मर्तबा दुरूद शरीफ पढ़े।


*नॉट*

     ये सब नवाफिल 5 वक़्त की नमाज़ के साथ साथ अदा करनी है। फ़र्ज़ छोड़ के नवाफिल अदा करने से इसका फायदा हासिल नही होगा।


     जो बन्दा/बन्दी फ़राइज़ के साथ इन नफ्लो की पाबंदी कर ले ان شاء الله अल्लाह उसे कामयाबी अता करेगा।

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनों के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

_नमाज़ की अहमिय्यत अहादिष की रौशनी में_* #05

*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर رضى الله عنه से मरवी, वो कहते है कि हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : उस आदमी का कोई ईमान नहीं जो अमानतदार न हो और उस आदमी की नमाज़ नहीं जिसकी तहारत दुरुस्त न हो और उस आदमी का कोई दीन नहीं जिसकी ज़िन्दगी में नमाज़ न हो। बेशक नमाज़ को दीन में वही मक़ाम हासिल है जो इंसानी जिस्म में सर को हासिल है।

*✍🏼अत्तरगिब् वत्तरहिब*


     खलीफए दोम हज़रत उमर फ़ारूक़ رضي الله عنه ने अपने सूबों (राज़्यों) के गवर्नरों के पास पैगाम भेजा कि तुम्हारे सब कामों में मेरे नज़्दीक अहम काम नमाज़ है जिसने उसकी हिफाज़त की और उसको अदा करता रहा उसने अपना दीन महफूज़ रखा और जिसने नमाज़ ज़ाए की वो और कामों को और भी ज़ाए करेगा।

*✍🏼सहीह बुखारी*

     यानी नमाज़ जिसे दीन के सुतून (खम्भे) का दर्जा दिया गया है और जिसे ईमान की निशानी व पहचान बताया गया है ये जानने के बावुजूद अगर कोई नमाज़ छोड़ दे तो ऐसे आदमी का क्या ऐतिबार कि वो और कौन कौन सी चीज़ों में गफलत और सुस्ती इख़्तियार करेगा ?

*✍🏼नमाज़ की अहमियत* 14

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनो के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91  9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

ot.in

सूरतुल बक़रह, रुकुअ-27, आयत, ②①⑦*

*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

तुमसे पूछते हैं माहे हराम में लड़ने का हुक्म  (1) तुम फ़रमाओ इसमें लड़ना बड़ा गुनाह है  (2) और अल्लाह की राह से रोकना  और उसपर ईमान न लाना  और मस्जिदे हराम से रोकना  और इसके बसने वालों को निकाल देना (3) अल्लाह के नज़्दीक ये गुनाह उससे भी बड़े हैं और उनका फ़साद (4) क़त्ल से सख़्ततर है (5) और हमेशा तुमसे लड़ते रहेंगे यहां तक कि तुम्हें तुम्हारे दीन से फेर दें अगर बन पड़े (6) और तुममें जो कोई अपने दीन से फिरे, फिर काफ़िर होकर मरे तो उन लोगों का किया अकारत गया दुनिया में और आख़िरत में (7)

और वो दोज़ख़ वाले हैं उन्हें उसमें हमेशा रहना.


*तफ़सीर*

(1) सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने अब्दुल्लाह बिन जहश के नेतृत्व में मुजाहिदों की एक जमाअत रवाना फ़रमाई थी. उसने मुश्रिकों से जंग की. उनका ख़याल था कि वह दिन जमादियुल आख़िर का अन्तिम दिन है. मगर दर हक़ीक़त चाँद 29 को हो गया था, और वह रजब की पहली तारीख़ थी. इस पर काफ़िरों ने मुसलमानों को शर्म दिलाई कि तुमने पाबन्दी वाले महीने में जंग की और हुज़ूर से इसके बारे में सवाल होने लगे. इस पर यह आयत उतरी.

(2) मगर सहाबा से यह गुनाह वाक़े नही हुआ, क्योंकि उन्हें चाँद होने की ख़बर ही न थी. उनके ख़याल में वह दिन माहे हराम, यानी पाबन्दी वाले महीने रजब का न था. पाबन्दी वाले महीनों में जंग न करने का हुक्म “उक़्तुलुल मुश्रिकीना हैसो वजद तुमूहुम” यानी मुश्रिकों को मारो जहां पाओ (9 : 5) की आयत द्वारा स्थगित हो गया.

(3) जो मुश्रिकों से वाक़े हुआ कि उन्होंने हुज़ूर सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम और आपके सहाबा को, हुदैबिया वाले साल, काबए मुअज़्ज़मा से रोका और मक्के में आपके क़याम के ज़माने में आपको और आपके साथियों को इतनी तकलीफ़ें दीं कि वहाँ से हिजरत करना पडी.

(4) यानी मुश्रिकों का, कि वह शिर्क करते हैं और सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम और मूमिनों को मस्जिदें हराम से रोकते हैं और तरह तरह के कष्ट देते हैं.

(5) क्योंकि क़त्ल तो कुछ हालतों में जायज़ होता है, और कुफ़्र किसी हाल में जायज़ नहीं. और यहाँ तारीख़ का मशकूक यानी संदेह में होना मुनासिब वजह है. और काफ़िरों के कुफ़्र के लिये तो कोई वजह ही नहीं है.

(6) इसमें ख़बर दी गई कि काफ़िर मुसलमानों से हमेशा दुश्मनी रखेंगे. कभी इसके ख़िलाफ़ न होगा. और जहाँ तक उनसे संभव होगा वो मुसलमानों को दीन से फेरने की कोशिश करते रहेंगे, “इनिस्तताऊ” (अगर बन पड़े) से ज़ाहिर होता है कि अल्लाह तआला के करम से वो अपनी इस मुराद में नाकाम रहेंगे.

(7) इस आयत से मालूम हुआ कि दीन से फिर जाने से सारे कर्म बातिल यानी बेकार हो जाते हैं. आख़िरत में तो इस तरह कि उनपर कोई पुण्य, इनाम या सवाब नहीं. और दुनिया में इस तरह कि शरीअत मुर्तद यानी दीन से फिर जाने वाले के क़त्ल का हुक्म देती है. उसकी औरत उसपर हलाल नहीं रहती, वो अपने रिश्तेदारों की विरासत पाने का अधिकारी नहीं रहता, उसका माल छीना या लूटा या चुराया जा सकता है. उसकी तारीफ़ और मदद जायज़ नहीं. (रूहुल बयान वग़ैरह).

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनों के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

*क़यामत और उसकी निशानियां* #06


بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

     *सुवाल* - हज़रते इमाम मेहदी رضي الله عنه का कुछ हाल बयान फ़रमाइये ? 

     *जवाब* - हज़रते इमाम मेहदी رضي الله عنه ख़लीफ़तुल्लाह हैं। आप हुजूर नबिय्ये करीम - 54 / 54 . 35 की आल में से हसनी सय्यद होंगे, जब दुन्या में कुफ्र फैल जाएगा और इस्लाम हरमैने शरीफैन यानी मक्कए मुकर्रमा और मदीनए मुनव्वरा की तरफ़ सिमट जाएगा, औलिया व अब्दाल वहां को हिजरत कर जाएंगे, माहे रमजान में अब्दाल काब शरीफ के तवाफ में मश्गूल होंगे वहां औलिया हज़रते मेहदी رضي الله عنه को पहचान कर उन से बैअत की दरख्वास्त करेंगे। आप इन्कार फरमाएंगे, गैब से निदा आएगी "येह अल्लाह तआल के खलीफ़ा मेहदी हैं इन का हुक्म सुनो और इताअत करो.” लोग आप के दस्ते मुबारक पर बैअत करेंगे वहां से मुसलमानों को साथ ले कर शाम तशरीफ़ ले जाएंगे। आप का जमाना बड़ी खैरो बरकत का होगा , जमीन अदलो इन्साफ से भर जाएगी। 

*✍️बुन्यादी अक़ाइद और मामुलाते अहले सुन्नत* 37

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनों के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

*दुआ मांगने के मदनी फूल* #01


بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

     ★ हर रोज कम अज कम बीस बार दुआ करना वाजिब है। الحمد لله नमाजियों का येह वाजिब, नमाज़ में सूरतुल फ़ातिहा से अदा हो जाता है कि "हम को सीधा रास्ता चला" भी दुआ और "सब खूबियां अल्लाह को जो मालिक सारे जहान वाला का" कहना भी दुआ है। 

     ★ दुआ में हद से न बढ़े। मसलन अम्बियाए किराम का मर्तबा मांगना या आस्मान पर चढ़ने की तमन्ना करना। नीज़ दोनों जहां की सारी भलाइयां और सब की सब खूबियां मांगना भी मन्अ है कि इन खूबियों में मरातिबे अम्बिया भी हैं जो नहीं मिल सकते।

     ★ जो मुहाल (यानी ना मुम्किन) या करीब ब मुहाल हो उस की दुआ न मांगे। लिहाजा हमेशा के लिये तन्दुरुस्ती आफ़िय्यत मांगना कि आदमी उम्र भर कभी किसी तरह की तक्लीफ में न पडे येह मुहाले आदी की दुआ मांगना है। यूंही लम्बे कद के आदमी का छोटा कद होने या छोटी आंख वाले का बड़ी आंख की दुआ करना ममनुअ है कि यह ऐसे अम्र की दुआ है जिस पर कुलम जारी हो चुका है।

     ★ गुनाह की दुआ न करे कि मुझे पराया माल मिल जाए कि गुनाह की तलब करना भी गुनाह है।

*✍️मदनी पंजसुरह* 190

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनों के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

*_अक्सर जन्नती गरीब होंगे_*


 بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

        ज़िक्र कर्दा रिवायते जीशान गरीबों। और मोहताजों के लिये किस कदर ढारस निशान है कि अल्लाह  गु-रबा व मसाकीन पर रहम फ़रमाते हुए उन्हें जन्नत अता फ़रमाएगा और जन्नत पाने वाले अक्सर वोह खुश नसीब मुसल्मान होंगे जो दुन्या में फ़क्रो फाका और गुरबत की ज़िन्दगी बसर करते रहे होंगे जैसा कि हुज़रते सय्यिदुना अब्दुल्लाह बिन अम्र رضی اﷲ تعالٰی عنه से रिवायत है कि सरदारे मक्कए मुकर्रमा, सुल्ताने मदीनए मुनव्वरह ﷺ का फरमाने जन्नत निशान है :  

       मैं ने जब जन्नत को मुलाहज़ा किया तो देखा कि जन्नतियों में अक्सर तादाद फु करा ( या ' नी गरीब लोगों ) की है।

बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله

*✍🏼 ग़रीब फाएदे में है   पेज 14,15*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

📱+91 9033503799

📧facebook.com/deenenabi

📧Deen-e-nabi.blogspot.in

Tuesday, 15 January 2019

*तज़किरतुल अम्बिया* #366


بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

*मुख्तलिफ किस्म के अज़ाब* #02

     इसके बाद अल्लाह तआला ने टिड्डी भेजी वह खेतियां और फल, दरख्तों के पत्ते मकानों के दरवाजे, छतें, तख्ते, सामान यहां तक कि लोहे की कीले तक रखा गई। और कुबतियों के घरों में भर गई और बनी इसाईल के घरों में न गई। अब कुब्तियोने परेशान होकर फिर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम से दुआ की दरख्वास्त की, ईमान लाने का वादा किया उस पर अहद व पैमान कीया सात रोज़ तक टिड्डी की मुसीबत में गिरफ्तार रहे। फिर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की दुआ से नजात पाई खेतियां और फल जो कुछ बाकी रह गये थे उन्हें देखकर कहने लगे यह हमें काफी हैं हम अपना दीन नहीं छोड़ते। चुनांचे ईमान लाने का वादा उन्होंने पूरा न किया और अपने बुरे आमाल में मुब्तला रहे एक माह फिर उनका इस तरह आफियत में गुज़र गया। 

   

बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله

*✍️तज़किरतुल अम्बिया* 307

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनों के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

_नमाज़ की अहमिय्यत अहादिष की रौशनी में_* #04

*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

     हज़रत अबू हुरैरा رضي الله غنه फ़रमाते है : आदमी अल्लाह के सबसे ज़्यादा क़रीब उस वक़्त होता है जब वो सज्दे में होता है।

*✍🏼सहीह मुस्लिम*

     ज़ाहिर है कि सज्दा नमाज़ का हिस्सा है तो जो शख्स जितनी नमाज़े पढ़ेगा उसके सज्दे उतने ज़्यादा होंगे और जब सज्दे ज़्यादा होंगे तो अल्लाह की बारगाह में उसकी क़दर भी ज़्यादा होगी।


     फरमाने मुस्तफा ﷺ : जब तुम्हारे बच्चे सात बरस के हो तो उन्हें नमाज़ का हुक्म दो और जब वो दस बरस के हो जाए और नमाज़ न पढ़े तो उन्हें मार कर नमाज़ पढाओ।

*✍🏼अबू दाऊद*

     हुज़ूर ﷺ के इर्शाद में हिकमत ये है कि सात बरस की उम्र होने पर बच्चों में शुउर बेदार होने लगता है यानी शुउर बेदार होते ही बच्चों को इबादत की जानिब तवज्जो दिलाई जाए फिर भी दस बरस की उम्र तक अगर नमाज़ के आदी न बन सके तो तो उन्हें मारने का हुक्म इसलिये दिया गया क्योंकि इस उम्र में जो चीज़ अपनाई जाती है वो फितरत में बैठ जाती है यानी नमाज़ को बच्चों की फितरत में शामिल कर दिया जाए।

*✍🏼नमाज़ की अहमिय्यत* 13

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनो के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91  9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

ot.in

सूरतुल बक़रह, रुकुअ-26, आयत, ②①⑥*

*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

तुमपर फ़र्ज़ हुआ अल्लाह की राह में लड़ना और वह तुम्हें नागवार है (18) और क़रीब है कि कोई बात तुम्हें बुरी लगे और वह तुम्हारे हक़ में बेहतर हो और क़रीब है कि कोई बात तुम्हें पसन्द आए  और वह तुम्हारे हक़ में बुरी हो.  और अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते (19)


*तफ़सीर*

(18) जिहाद फ़र्ज़ है, जब इसकी शर्ते पाई जाएं. अगर काफ़िर मुसलमानों के मुल्क पर चढ़ाई करें तो जिहाद अत्यन्त अनिवार्य हो जाता है. वरना फ़र्जे़ किफ़ाया यानी एक के करने से सब का फ़र्ज़ अदा हो गया.

(19) कि तुम्हारे हक़ में क्या बेहतर है. तो तुम पर लाज़िम है, अल्लाह के हुक्म का पालन करो और उसी को बेहतर समझो, चाहे वह तुम्हारी अन्तरआत्मा पर भारी हो.

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनों के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi

*क़यामत और उसकी निशानियां* #05


بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ

اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ  عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ

     *सुवाल* - याजूज माजूज कौन हैं ? 

     *जवाब* - येह याफ़िस बिन नूह عليه السلام की औलाद में से फ़सादी गुरौह हैं, उन की तादाद बहुत ज़ियादा है। वोह ज़मीन में फ़साद करते थे, अय्यामे रबीअ यानी फ़स्ल पकने के जमाने में निकलते, सब्ज़ा ज़ार न छोड़ते, आदमियों को खा लेते और जंगल के दरिन्दों, वहशी जानवरों, सांपों, बिच्छूओं को खा जाते थे, हज़रते सिकन्दर जुलकरनैन ने लोहे की दीवार खींच कर उन की आमद बन्द कर दी। हज़रते ईसा عليه السلام के नुज़ूल के बाद आप दज्जाल को कत्ल कर के ब हुक्मे इलाही मुसलमानों को कोहे तूर ले जाएंगे उस वक्त वोह दीवार तोड़ कर निकलेंगे और जमीन में फ़साद करेंगे, कत्लो गारत करेंगे। अल्लाह तआला उन्हें हज़रते ईसा عليه السلام की दुआ से हलाक करेगा। 

*✍️बुन्यादी अक़ाइद और मामुलाते अहले सुन्नत* 37

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, 

गर होजाए यक़ीन के.....

*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*

●•●┄─┅━━━━━★✰★━━━━━┅─●•●

*​DEEN-E-NABI ﷺ*

📲JOIN WHATSAPP

*(बहनों के लिये अलग ग्रुप)*

📱+91 9033 833 975

📧facebook.com/deenenabi